विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
भारत एक सशक्त फार्मा अर्थव्यवस्था के रूप में उभर रहा है, जो भविष्य में प्रगति को बढ़ाने और जीडीपी में योगदान को मजबूत करने के लिए तैयार है: डॉ. जितेंद्र सिंह
भारत में फार्मा और मेडटेक क्षेत्र में हुई प्रगति आयात पर निर्भरता से आत्मनिर्भर स्वास्थ्य सेवा विकास की ओर बदलाव का संकेत देती है: डॉ. जितेंद्र सिंह
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह का कहना है कि भारत किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के वैश्विक केंद्र के रूप में आगे बढ़ रहा है
परिवर्तन का दशक और सरकार के प्रयासों से भारत वैश्विक स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में अग्रणी देश के रूप में स्थापित हो रहा है: डॉ. जितेंद्र सिंह
प्रविष्टि तिथि:
21 MAR 2026 3:56PM by PIB Delhi
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि भारत लगातार एक मजबूत फार्मा अर्थव्यवस्था के रूप में विकसित हो रहा है जो न केवल भविष्य में प्रगति को बढ़ावा देगा बल्कि देश के समग्र सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में एक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता के रूप में भी उभरेगा।
डॉ. सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि भारत के फार्मास्युटिकल, मेडटेक और विनिर्माण क्षेत्र की बढ़ती ताकत देश को एक प्रमुख वैश्विक विनिर्माण केंद्र विशेष रूप से उच्च गुणवत्ता वाले, किफायती स्वास्थ्य देखभाल समाधानों के क्षेत्र के रूप में स्थापित कर रही है।
डॉ. सिंह ने एक प्रमुख अंग्रेजी मीडिया हाउस द्वारा आयोजित "हेल्थकेयर समिट" में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि चर्चा का केन्द्र दो मुख्य विषयों - "मेड इन इंडिया" और "गुणवत्ता" - के इर्द-गिर्द केंद्रित रहा। उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि भारत का स्वास्थ्य सेवा और चिकित्सा प्रौद्योगिकी तंत्र एक बड़े बदलाव से गुजर रहा है जिसमें वैश्विक गुणवत्ता मानकों, स्वदेशी नवाचार और अनुसंधान को उद्योग के साथ एकीकृत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में भारत ने स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन देखा है और जो पहले आयात पर निर्भर प्रणाली थी वह अब स्वदेशी क्षमताओं पर आधारित प्रणाली बन गई है। उन्होंने याद दिलाया कि पहले महत्वपूर्ण चिकित्सा उपकरण, प्रत्यारोपण और यहां तक कि उन्नत दवाएं भी ज्यादातर विदेशों से मंगाई जाती थीं, जिससे इलाज महंगा और कई लोगों के लिए बहुत ही कठिन हो जाता था। आज भारत अपने स्वयं के एंटीबायोटिक्स, टीके और उन्नत उपचार विकसित कर रहा है, जो आत्मनिर्भरता की दिशा में एक निर्णायक बदलाव का संकेत है।
डॉ. सिंह ने स्वदेशी एंटीबायोटिक दवाओं के विकास और कोविड-19 महामारी के दौरान हुई तीव्र प्रगति का उल्लेख किया, जब भारत ने न केवल अपने टीके विकसित किए बल्कि कई देशों को उनकी आपूर्ति भी की, जिससे वैश्विक स्वास्थ्य सेवा भागीदार के रूप में उसकी भूमिका और मजबूत हुई। उन्होंने कहा कि यह बदलाव चिकित्सीय और निवारक स्वास्थ्य सेवा दोनों क्षेत्रों में भारत की बढ़ती विश्वसनीयता को दर्शाता है।
उन्होंने भारत के स्वास्थ्य सेवा तंत्र में अत्याधुनिक तकनीकों के विकास का जिक्र भी किया जिनमें जीन थेरेपी की मदद से हीमोफीलिया जैसी बीमारियों में सफल परीक्षण हुए हैं। इसके साथ ही सिकल सेल एनीमिया जैसी बीमारियों के उपचार में नवाचार भी हुए हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्थान अब वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त शोध कार्यक्रम में योगदान दे रहे हैं और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा पत्रिकाओं में उनके शोध पत्र प्रकाशित हो रहे हैं।
उन्होंने सरकार द्वारा गुणवत्ता मानकों को बढ़ावा देने के प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत में स्वदेशी उत्पाद और नियामक प्रणालियां अब अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हैं। सुव्यवस्थित अनुमोदन प्रक्रियाओं और सुदृढ़ नियामक ढांचों के माध्यम से, स्टेंट, वेंटिलेटर और निदान उपकरण जैसे स्वदेशी चिकित्सा उपकरण सुरक्षा, प्रभावशीलता और सामर्थ्य सुनिश्चित कर रहे हैं।
केन्द्रीय मंत्री ने नीतिगत मोर्चे पर, फार्मा-मेडिकल टेक्नोलॉजी में शोध और नवाचार को बढ़ावा देने (पीआरआईपी) जैसी पहलों का उल्लेख किया, जिसके लिए 5,000 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। इसका उद्देश्य भारत को कम लागत वाले विनिर्माण से उच्च मूल्य वाले नवाचार की ओर ले जाना है। उन्होंने चिकित्सा उपकरण क्षेत्र के लिए लक्षित समर्थन का भी जिक्र किया, जिसमें साझा बुनियादी ढांचे, परीक्षण सुविधाओं और अनुसंधान एवं विकास समूहों के लिए वित्तपोषण शामिल है, जो लागत को कम करने और प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने में सहायक हैं।
डॉ. सिंह ने कहा कि अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन और महा मेडटेक मिशन जैसी पहलें प्रयोगशालाओं को नैदानिक अनुप्रयोगों से जोड़कर अनुसंधान क्षेत्र को मजबूत कर रही हैं। मेडटेक मित्रा प्लेटफॉर्म नवप्रवर्तकों को नियामक प्रक्रियाओं को समझने और नैदानिक परीक्षण नेटवर्क तक अधिक कुशलता से पहुंचने में सक्षम बना रहा है।
डॉ. सिंह ने कहा कि भारत वर्तमान में वैश्विक चिकित्सा उपकरण बाजार में लगभग 1.5 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है और राष्ट्रीय चिकित्सा उपकरण नीति 2023 के तहत अपनी हिस्सेदारी को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने आगे कहा कि भारत का लक्ष्य इस क्षेत्र में शीर्ष वैश्विक विनिर्माण केंद्रों में से एक बनना है, जिससे आयात पर निर्भरता कम हो और निर्यात को बढ़ावा मिले।
केन्द्रीय मंत्री ने सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के बीच बढ़ते तालमेल का उल्लेख करते हुए कहा कि जैव प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष और स्वास्थ्य सेवा जैसे क्षेत्रों में उद्योग, शिक्षा जगत और सरकारी संस्थानों के बीच सहयोग को संस्थागत रूप दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह एकीकृत दृष्टिकोण ऐसे युग में आवश्यक है जहां वैज्ञानिक प्रगति तेजी से अंतर्विषयक होती जा रही है।
डॉ. सिंह ने कहा कि मजबूत नीतिगत समर्थन, निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी और नवाचार-संचालित विनिर्माण पर ध्यान केंद्रित करने के साथ, भारत किफायती, उच्च गुणवत्ता वाले स्वास्थ्य देखभाल समाधानों के लिए एक पसंदीदा वैश्विक गंतव्य बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसके साथ ही वैश्विक जैव-अर्थव्यवस्था में अपनी स्थिति को मजबूत कर रहा है और राष्ट्रीय आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
G0D3.JPG)
KG7N.JPG)
YXRG.JPG)
C7DG.JPG)
***
पीके/केसी/जेके/एमबी
(रिलीज़ आईडी: 2243410)
आगंतुक पटल : 92