पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय
संसदीय प्रश्न: गहरे समुद्र में खनन
प्रविष्टि तिथि:
19 MAR 2026 12:55PM by PIB Delhi
मत्स्य (एमएटीएसवाईए)-6000 को सफलतापूर्वक डिज़ाइन किया गया है और इसके ‘गीले/बंदरगाह परीक्षण’ पूरे हो चुके हैं। जनवरी-फरवरी 2025 में किए गए इन परीक्षणों में तैरन क्षमता, वाहन स्थिरता, संचालन क्षमता, ऊर्जा आपूर्ति, संचार एवं नियंत्रण उपकरणों सहित मानव सहायता तथा सुरक्षा प्रणालियों की कार्यक्षमता का प्रदर्शन किया गया। 500 मीटर के उथले जल में गोताखोरी के लिए कई घटकों के निर्माण एवं एकीकरण की आवश्यकता है, जिनमें एक महत्वपूर्ण घटक - विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया सिंटैक्टिक-फोम भी शामिल है। ये फोम भारत द्वारा डिज़ाइन किया जा रहा है तथा इसका निर्माण यूरोप की एक नामित कंपनी द्वारा किया जा रहा है। दुर्भाग्यवश, विनिर्माण दोष के कारण यह घटक अभी तक तैयार नहीं हो सकता है। इसके मई के अंत तक भारत पहुंचने की अपेक्षा है। इस सामग्री के एकीकरण और परीक्षण के पश्चात उथले जल में गोताखोरी इस वर्ष की अंतिम तिमाही में निर्धारित की गई है।
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने चेन्नई स्थित राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान के माध्यम से बहुधात्विक पिंडों को एकत्रित करने और कुचलने के लिए एक समुद्र तल खनन प्रणाली विकसित की है। इस प्रणाली की गतिशीलता तथा ऊर्जा-संचालन परीक्षण वर्ष 2021 में मध्य हिंद महासागर में 5,270 मीटर की गहराई पर किए गए थे। अत: वर्ष 2025 तक 5,270 मीटर की गहराई पर किसी भी गहरे समुद्री खनन प्रणाली का परीक्षण नहीं किया गया है। इसके अलावा, वाणिज्यिक खनन दोहन संहिता द्वारा विनियमित होता है, जिसे अभी तक अंतर्राष्ट्रीय समुद्रतल प्राधिकरण द्वारा विकसित नहीं किया गया है और इसे ही ये दायित्व सौंपा गया है।
मंत्रालय "नीली अर्थव्यवस्था" संसाधनों के सतत विकास में निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए मंत्रालय विभिन्न उपाय अपनाता है, जिनमें निविदा प्रक्रिया भी शामिल है।
केन्द्रीय पृथ्वी विज्ञान तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा 19 मार्च 2026 को यह जानकारी राज्यसभा में दी गई।
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पीके/केसी/आईएम/एमपी
(रिलीज़ आईडी: 2242462)
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