गृह मंत्रालय
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सीएफएसएल का विस्तार

प्रविष्टि तिथि: 17 MAR 2026 5:29PM by PIB Delhi

देश में पहले से स्थापित 07 (सात) केंद्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशालाओं (सीएफएसएल) के अतिरिक्त, जो चंडीगढ़, दिल्ली, कामरूप (असम), कोलकाता (पश्चिम बंगाल), भोपाल (मध्य प्रदेश), पुणे (महाराष्ट्र) और हैदराबाद (तेलंगाना) में स्थित हैं, देश में 08 नई सीएफएसएल स्थापित करने की मंजूरी प्रदान की गई है। ये जम्मू (जम्मू एवं कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश), राजस्थान, तमिलनाडु, बिहार, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और केरल में स्थापित की जाएंगी।

 विधि विज्ञानिक अवसंरचना का यह विस्तार सरकार के देश में विधि विज्ञानिक क्षमताओं को मजबूत करने के निरंतर प्रयासों का हिस्सा है।एक केंद्रीय एप्लीकेशन -फॉरेंसिक्स विकसित की गई है जो विधि विज्ञानिक डेटा का डिजिटल रिपॉजिटरी सुविधाजनक बनाती है, जिसमें डेटा की सुरक्षा और अखंडता सुनिश्चित की जाती हैचाहे डेटा स्थिर अवस्था में हो या संक्रमण के दौरान। इसके अलावा, सरकार ने "महिलाओं की सुरक्षा" की छत्र योजना के तहत राष्ट्रीय विधि विज्ञानिक डेटा केंद्र की स्थापना को मंजूरी दी है, जो सभी विधि विज्ञानिक प्रयोगशालाओं से प्राप्त विधि विज्ञानिक डेटा को व्यवस्थित रूप से संग्रहीत कर एक कुशल साक्ष्य प्रबंधन प्रणाली प्रदान करेगा।"पुलिस" और "सार्वजनिक व्यवस्था" भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार राज्य विषय हैं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने, नागरिकों के जीवन और संपत्ति की रक्षा करने, अपराधों और अपराधियों की जांच, अभियोजन तथा संबंधित विधि विज्ञानिक सुविधाओं की जिम्मेदारी संबंधित राज्य की है।

 हालांकि, भारत सरकार, गृह मंत्रालय ने विभिन्न योजनाओं के माध्यम से देश में विधि विज्ञानिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिनमें नर्भया कोष शामिल है, जिसकी वित्तीय स्वीकृति ₹4800 करोड़ से अधिक है। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं:चंडीगढ़ की केंद्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला में अत्याधुनिक डीएनए विश्लेषण तथा अनुसंधान एवं विकास सुविधा स्थापित की गई है।

हैदराबाद की केंद्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला में डिजिटल धोखाधड़ी/साइबर विधि विज्ञान के महत्वपूर्ण मामलों की जांच के लिए राष्ट्रीय साइबर विधि विज्ञान प्रयोगशाला स्थापित की गई है। इसके अलावा, "महिलाओं की सुरक्षा" की छत्र योजना के तहत 06 अतिरिक्त राष्ट्रीय साइबर विधि विज्ञान प्रयोगशालाओं की स्थापना को मंजूरी दी गई है।

निर्भया कोष द्वारा वित्त पोषित योजना के तहत 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशालाओं में डीएनए विश्लेषण तथा/या साइबर विधि विज्ञान क्षमताओं को मजबूत करने के लिए सहायता प्रदान की गई है।

सरकार राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के जांच अधिकारियों, अभियोजकों तथा चिकित्सा अधिकारियों को डीएनए साक्ष्य संग्रहण, भंडारण एवं प्रबंधन तथा यौन हमला साक्ष्य संग्रह किट के उपयोग में प्रशिक्षण दे रही है। पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (बीपीआरएंडडी) तथा एलएनजेएन राष्ट्रीय अपराध विज्ञान एवं विधि विज्ञान संस्थान (अब राष्ट्रीय विधि विज्ञान विश्वविद्यालय का दिल्ली परिसर) ने अब तक 36,915 जांच अधिकारियों, अभियोजकों तथा चिकित्सा अधिकारियों को प्रशिक्षित किया है।

विधि विज्ञानिक मानव संसाधन को देश के सभी भागों में उपलब्ध कराने के लिए संसद के अधिनियम द्वारा वर्ष 2020 में राष्ट्रीय विधि विज्ञान विश्वविद्यालय (एनएफएसयू) की स्थापना की गई है। एनएफएसयू के प्रारंभिक परिसरोंगांधीनगर (गुजरात) तथा दिल्ली के अलावागोवा, अगरतला (त्रिपुरा), भोपाल (मध्य प्रदेश), धारवाड़ (कर्नाटक), गुवाहाटी (असम), नागपुर (महाराष्ट्र), खोरधा (ओडिशा), रायपुर (छत्तीसगढ़), चेंगलपट्टू (तमिलनाडु), राजस्थान, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार तथा उत्तर प्रदेश में 14 अतिरिक्त परिसर स्थापित करने की मंजूरी दी गई है। एनएफएसयू ने मणिपुर के इम्फाल तथा महाराष्ट्र के पुणे में प्रशिक्षण अकादमियां भी स्थापित की हैं।

विधि विज्ञानिक क्षमताओं के आधुनिकीकरण योजना के तहत राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की विधि विज्ञान प्रयोगशालाओं के "आधुनिकीकरण/उन्नयन" के लिए 420 करोड़ तथा देश के सभी जिलों और राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशालाओं के लिए "मोबाइल विधि विज्ञान वैन" प्रदान करने के लिए 496.66 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं।

तर्क जानकारी गृह मंत्रालय के राज्य मंत्री श्री बंडी संजय कुमार ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी ।

 

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पीके /केसी/ एमएम

 


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