स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

आईपीएचएस मानदंडों के अनुसार पीएचसी और सीएचसी के संचालन पर अद्यतन जानकारी


6 मार्च 2026 तक, सभी स्वास्थ्य सुविधाओं का आईपीएचएस के लिए मूल्यांकन किया जा चुका है, जिनमें से 63 प्रतिशत सुविधाओं ने 50 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए

कुल स्वास्थ्य व्यय में जेब से किए गए व्यय (ओओपीई) का हिस्सा 2014-15 में 62.6 प्रतिशत से घटकर 2021-22 में 39.4 प्रतिशत हुआ

प्रविष्टि तिथि: 17 MAR 2026 1:15PM by PIB Delhi

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (एमओएचडब्ल्यू) द्वारा प्राथमिक और माध्यमिक स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं के लिए भारतीय जन स्वास्थ्य मानक (आईपीएचएस) विकसित किए गए हैं, जो देश में स्वास्थ्य देखभाल वितरण की गुणवत्ता में सुधार लाने के उद्देश्य से एक समान मानक प्रदान करते हैं। आईपीएचएस को अंतिम बार 2022 में अद्यतन किया गया था और इसमें जनसंख्या कवरेज, बुनियादी ढांचे और स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं के प्रत्येक स्तर पर कर्मचारियों की उपलब्धता से संबंधित विवरण निम्नलिखित यूनिफॉर्म रिसोर्स लोकेटर (यूआरएल) पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं:

http://nrhm.gov.in/nhm/nrhm/guidelines/indian-public-health-standards.html

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय सभी राज्यों में एकसमान और उच्च गुणवत्ता युक्‍त स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए आईपीएचएस 2022 दिशानिर्देशों को सक्रिय रूप से लागू कर रहा है।

मंत्रालय ने भारतीय जन स्वास्थ्य मानकों के अंतर्गत एक ओपन-सोर्स टूलकिट और डैशबोर्ड शुरू  किया है। आईपीएचएस डैशबोर्ड एक अत्याधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जिसे आईपीएचएस 2022 मानकों के साथ जन स्वास्थ्य सुविधाओं के अनुपालन की निगरानी के लिए तैयार किया गया है। ये उपकरण राज्यों को कमियों की पहचान करने और आवश्यक मानकों को प्राप्त करने के लिए लक्षित सहायता प्राप्त करने में मदद करते हैं। आईपीएचएस 2022 का कार्यान्वयन व्यापक और तीव्र गति से हुआ है। 6 मार्च, 2026 तक, शत-प्रतिशत स्वास्थ्य सुविधाओं का आईपीएचएस के लिए मूल्यांकन किया जा चुका है। कुल मूल्यांकित सुविधाओं में से 63 प्रतिशत  सुविधाओं ने 50 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए हैं।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत कार्यक्रम कार्यान्वयन योजनाओं (पीआईपी) के रूप में प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर, सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा वितरण प्रणाली को सुदृढ़ करने हेतु राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को तकनीकी एवं वित्तीय सहायता प्रदान करता है, जिसमें आईपीएचएस अनुपालन हेतु सहायता भी शामिल है। भारत सरकार मानदंडों और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार कार्यवाही अभिलेख (आरओपी) के रूप में प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान करती है। आईपीएचएस अनुपालन सहित देश के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना को सुदृढ़ करने हेतु दी गई स्वीकृतियों का विवरण स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की वेबसाइट पर निम्नलिखित यूनिफॉर्म रिसोर्स लोकेटर (यूआरएल) पर उपलब्ध है:

https://nhm.gov.in/index1.php?lang=1&level=1&sublinkid=1377&lid=744

चौबीसों घंटे कार्यरत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) के साथ-साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में कार्यरत स्वास्थ्य देखभाल कर्मचारियों, जिनमें चिकित्‍सक भी शामिल हैं, का विवरण एचडीआई 2022-23 के निम्नलिखित लिंक पर देखा जा सकता है:

https://mohfw.gov.in/sites/default/files/Health%20Dynamics%20of%20India%20%28Infrastructure%20%26%20Human%20Re sources%29%202022-23_RE%20%281%29.pdf

राष्ट्रीय स्वास्थ्य लेखा के अनुमानों के अनुसार, कुल स्वास्थ्य व्यय में जेब से होने वाले व्यय  का हिस्सा 2014-15 में 62.6 प्रतिशत से घटकर 2021-22 में 39.4 प्रतिशत हो गया है। सरकार कुल स्वास्थ्य व्यय के प्रतिशत के रूप में ओओपीई को कम करने के प्रयास कर रही है। कुल स्वास्थ्य व्यय के प्रतिशत के रूप में सरकारी स्वास्थ्य व्यय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो 2014-15 में 29.0 प्रतिशत से बढ़कर 2021-22 में 48.0 प्रतिशत हो गया है। जीएचई में इस वृद्धि के साथ-साथ, इसी अवधि में कुल स्वास्थ्य व्यय में ओओपीई का हिस्सा 62.6 प्रतिशत से घटकर 39.4 प्रतिशत हो गया है। ओओपीई के इस घटते हिस्से से स्वास्थ्य सेवाओं तक बढ़ती पहुंच का संकेत मिलता है।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्री प्रतापराव जाधव ने आज राज्यसभा में लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

*******

पीके/केसी/एसएस/एसके
(रिलीज़ आईडी: 2241080)


(रिलीज़ आईडी: 2241111) आगंतुक पटल : 67
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें: Punjabi , English , Urdu