विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
भारत के 23 शैक्षणिक संस्थानों में क्वांटम शिक्षण सुविधाएं/प्रयोगशालाएं स्थापित करने की मंजूरी, उभरती क्वांटम प्रौद्योगिकियों में उन्नत अनुसंधान एवं प्रशिक्षण को बढ़ावा देने के लिए 100 और संस्थानों पर विचार
डॉ. जितेंद्र सिंह ने विज्ञान मंत्रालयों के सचिवों की मासिक बैठक की अध्यक्षता की और अनुसंधान, नवाचार एवं प्रौद्योगिकी विकास में प्रमुख पहलों की समीक्षा की
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए विज्ञान मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय पर बल दिया
डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव की तैयारियों की समीक्षा की; राइज सम्मेलन अनुसंधान-उद्योग-स्टार्टअप सहयोग को बढ़ावा देगा
प्रविष्टि तिथि:
16 MAR 2026 6:20PM by PIB Delhi
राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के अंतर्गत, भारत के कई राज्यों में स्थित 23 शैक्षणिक संस्थानों में क्वांटम शिक्षण सुविधाएं/प्रयोगशालाएं स्थापित करने की मंजूरी प्राप्त हुई है, जबकि उभरती क्वांटम प्रौद्योगिकियों में उन्नत अनुसंधान एवं प्रशिक्षण का समर्थन करने के लिए 100 और संस्थानों पर विचार किया जा रहा है।
यह जानकारी आज यहां विज्ञान मंत्रालयों एवं विभागों के सचिवों की संयुक्त मासिक बैठक के दौरान सामने आई, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी; पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा पीएमओ, कार्मिक, लोक शिकायतें एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा विभाग तथा अंतरिक्ष विभाग राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने की। बैठक में प्रमुख वैज्ञानिक कार्यक्रमों, आगामी राष्ट्रीय आयोजनों एवं विभिन्न विज्ञान मंत्रालयों के बीच समन्वय को मजबूत करने के प्रयासों की समीक्षा की गई।

इस बैठक में भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद; विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रो. अभय करंदीकर; जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव डॉ. राजेश एस. गोखले; वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग की सचिव डॉ. एन. कलैसेल्वी; पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन, इसरो के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन, साथ ही वैज्ञानिक मंत्रालयों एवं विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
बैठक के दौरान, भारत अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव (आईआईएसएफ) 2026 की तैयारियों की समीक्षा की गई। इसके लिए पुणे का चयन प्रस्तावित स्थल के रूप में किया गया है और जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने कार्यक्रम रूपरेखा पर काम शुरू कर दिया है, जिसमें विषय, कार्यक्रम संरचना एवं रसद योजना शामिल है। महोत्सव की एक प्रारूप रूपरेखा तैयार की जा रही है और कार्यक्रम एवं समय सारिणी को अंतिम रूप देने के लिए आने वाले हफ्तों में हितधारक एजेंसियों के साथ चर्चा की जाएगी।

इस बैठक में हाल ही में चेन्नई में सीएसआईआर द्वारा आयोजित 5वीं राइज सम्मेलन (अनुसंधान, उद्योग, स्टार्टअप और उद्यमिता) की भी समीक्षा की गई। दो दिवसीय इस कार्यक्रम ने शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स, उद्योग नेताओं एवं शैक्षणिक संस्थानों को एक साथ लाया ताकि नवाचार एवं प्रौद्योगिकी व्यावसायीकरण को मजबूत किया जा सके। इस सम्मेलन में पैनल चर्चा, उद्योग जगत के साथ संवाद एवं एक स्टार्टअप एक्सपो आयोजित किया गया, जिसमें सीएसआईआर प्रयोगशालाओं और डीएसटी, डीबीटी, एमओईएस, बीआईआरएसी, इसरो और विश्वविद्यालयों से संबद्ध संस्थानों की प्रौद्योगिकियों को प्रदर्शित करने वाले 140 से अधिक स्टॉल शामिल थे।
बैठक में 11 मई 2026 को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस समारोह की योजनाओं पर भी चर्चा हुई। नई दिल्ली के भारत मंडपम में 11 से 13 मई तक एक विशाल प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी आयोजित करने का प्रस्ताव है, जहां राष्ट्रीय अनुसंधान संगठनों और वैज्ञानिक मंत्रालयों द्वारा समर्थित स्टार्टअप अपने नवाचारों का प्रदर्शन करेंगे। इस आयोजन में 3000 से अधिक हितधारकों के एक साथ आने और विभिन्न विषयगत क्षेत्रों में 500 से अधिक प्रौद्योगिकियों एवं नवाचारों को प्रदर्शित करने की उम्मीद है, जो उद्योग की भागीदारी एवं प्रौद्योगिकी के व्यावसायीकरण के लिए एक मंच प्रदान करेगा।

सहयोगात्मक अनुसंधान पहलों को बढ़ावा देने के लिए विज्ञान विभागों के बीच अंतर-मंत्रालयीय और अंतर्मंत्रालयीय समन्वय को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। विभिन्न वैज्ञानिक विभागों के संस्थानों को शामिल करते हुए संयुक्त परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने के प्रयास जारी हैं ताकि राष्ट्रीय अनुसंधान प्राथमिकताओं के लिए विभिन्न क्षेत्रों की विशेषज्ञता का लाभ प्राप्त किया जा सके।
प्रमुख वैज्ञानिक मिशनों एवं कार्यक्रमों की प्रगति पर भी जानकारी साझा की गई। राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के अंतर्गत, भारत के कई राज्यों में स्थित 23 संस्थानों में क्वांटम शिक्षण प्रयोगशालाओं की स्थापना को मंजूरी प्रदान की गई है, जबकि उभरती क्वांटम प्रौद्योगिकियों में उन्नत अनुसंधान एवं प्रशिक्षण को बढ़ावा देने के लिए 100 और संस्थानों पर विचार किया जा रहा है।
बैठक में अंतरिक्ष क्षेत्र से अपडेट की भी समीक्षा की गई, जिसमें इस वर्ष के अंत तक अपेक्षित अगले पीएसएलवी मिशन की तैयारियों के साथ-साथ आने वाले उपग्रह प्रक्षेपण शामिल हैं। भारतीय नौसेना के लिए अगले नेविगेशन सैटेलाइट को मई के आसपास लॉन्च करने की योजनाओं पर भी चर्चा की गई, जो अंतरिक्ष-आधारित नेविगेशन एवं रणनीतिक क्षमताओं को मजबूत करने के भारत के सतत प्रयासों का हिस्सा है।
बैठक में वैज्ञानिक अनुसंधान कार्यक्रमों में शामिल परियोजना कर्मचारियों के लिए मानव संसाधन दिशानिर्देशों की समीक्षा पर भी चर्चा की गई। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग 2020 में जारी मौजूदा दिशानिर्देशों में अपडेट की समीक्षा कर रहा है ताकि उन्हें अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) संरचना के अंतर्गत अधिसूचित मानदंडों के साथ संरेखित किया जा सके, जिससे विभागों में अधिक एकरूपता सुनिश्चित हो सके।

बैठक का समापन संचार एवं प्रचार-प्रसार को मजबूत करने पर चर्चा के साथ हुआ ताकि राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं से निकलने वाली वैज्ञानिक उपलब्धियों एवं नवाचारों को व्यापक सार्वजनिक दृश्यता तथा उद्योग, शिक्षा जगत एवं समाज के साथ ज्यादा जुड़ाव प्राप्त हो सके।
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पीके/केसी/एके/डीके
(रिलीज़ आईडी: 2240944)
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