राज्यसभा सचिवालय
विभाग-संबंधित कार्मिक, लोक शिकायत, विधि और न्याय संबंधी संसदीय स्थायी समिति की 163वीं रिपोर्ट पर प्रेस विज्ञप्ति
प्रविष्टि तिथि:
16 MAR 2026 6:00PM by PIB Delhi
श्री ब्रिज लाल,सदस्य, राज्य सभा की अध्यक्षता वाली विभाग-संबंधित कार्मिक, लोक शिकायत, विधि और न्याय संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने दिनांक 16 मार्च 2026 को विधायी विभाग (विधि और न्याय मंत्रालय) की अनुदान मांगों (2026-2027) के संबंध में एक सौ तिरसठवां प्रतिवेदन संसद की दोनों सभाओं में प्रस्तुत किया।
अनुदान मांगों की जांच करते समय समिति ने 19 फरवरी, 2026 को आयोजित बैठक में चालू वित्तीय वर्ष के दौरान विधि कार्य विभाग के कार्य-निष्पादन, कार्यक्रम तथा नीतियों के साथ-साथ भारत की संचित निधि में से किए गए व्यय का मूल्यांकन किया है। समिति ने 12 मार्च, 2026 को हुई अपनी बैठक में प्रतिवेदन पर विचार किया और उसे स्वीकार किया। समिति द्वारा इस प्रतिवेदन में की गई सिफारिशें/समुक्तियां संलग्न हैं। संदर्भ के प्रयोजनार्थ प्रत्येक सिफ़ारिश/समुक्ति के अंत में प्रतिवेदन की पैरा संख्या का उल्लेख किया गया है। संपूर्ण प्रतिवेदन https://sansad.in/rs/hi पर उपलब्ध है।
विधायी विभाग से संबंधित अनुदान मांगों (2026-27) के संबंध में
समिति के एक सौ तिरसठवां प्रतिवेदन
की सिफारिशें/समुक्तियाँ
विधायी विभाग से संबंधित बजटीय आवंटन और नीतिगत मुद्दों का अवलोकन
अनुदान मांगों का समग्र मूल्यांकन
1. समिति को यह देखकर प्रसन्नता है कि वर्ष 2025-26 के दौरान व्यय की गति संतोषजनक रही है। हालांकि, समिति ने पाया कि वर्ष 2024-25 के दौरान ₹4229.014 करोड़ का वास्तविक व्यय कुल ₹3468.408 करोड़ के संशोधित अनुमान से अधिक था। ऐसी भिन्नता से यह पता चलता है कि बजट अनुमान और वित्तीय योजना में कमियां रही हैं। इसलिए, समिति का यह परामर्श है कि विभाग अपने बजट अनुमान और अनुमान प्रणाली को सुदृढ़ करे ताकि अनुमान अधिक वास्तविक हो और यह अनुमानित व्यय के अनुरूप हो।
(पैरा 2.11)
2. समिति सिफारिश करती है कि विभाग इस शीर्ष के अंतर्गत संशोधित अनुमान 2025-26 में व्यापक बढ़ोतरी उसके अनुरूप अत्यधिक कम व्यय के संबंध में विस्तृत स्पष्टीकरण प्रस्तुत करे। इसके अतिरिक्त, समिति यह भी अपेक्षा करती है कि विभाग आवश्यकताओं का वास्तविक मूल्यांकन करे और ईवीएम के लिए एक स्पष्ट अधिप्राप्ति और व्यय रुपरेखा तैयार करे ताकि भविष्य में बजट अनुमान, संशोधित अनुमान और वास्तविक व्यय के बीच अत्यधिक भिन्नता से बचा जा सके।
(पैरा 2.16)
3. समिति यह नोट करती है कि इस शीर्ष के अंतर्गत आवंटन और व्यय में वर्ष-दर-वर्ष उल्लेखनीय भिन्नता रही है। समिति यह सिफारिश करती है कि विभाग वर्ष 2024-25 में 1732.02 करोड़ रुपये के वास्तविक व्यय और वर्ष 2026-27 में बजट अनुमान 300.00 करोड़ रुपये की अत्यधिक कमी को दर्शाने वाला विस्तृत स्पष्टीकरण प्रस्तुत करे। इसके अतिरिक्त, समिति की यह भी अपेक्षा है आयोग इस शीर्ष के अंतर्गत व्यय का अनुमान लगाते समय वास्तविक और दूरगामी दृष्टिकोण अपनाएं ताकि भविष्य के बजटीय प्रावधानों में अत्यधिक अंतर को कम किया जा सके।
(पैरा 2.19)
4. समिति ने यह पाया कि इस शीर्ष के अंतर्गत वर्ष 2025-26 के दौरान आवंटन में अत्यधिक उतार-चढ़ाव रहा है और व्यय नहीं किया गया है। इसलिए, समिति यह सिफारिश करती है कि विभाग वर्ष 2025-26 के दौरान निधियों का उपयोग न किए जाने और बजट अनुमान 2026-27 में परवर्ती वृद्धि के लिए स्पष्टीकरण प्रस्तुत करे।
(पैरा 2.21)
विभाग संबंधी नीतिगत मुद्दे
विभाग में अधिकारियों/कर्मचारियों की संख्या
5. इसलिए, समिति यह सिफारिश करती है कि विभाग अपनी सभी यूनिटों में विशेष तौर पर महत्वपूर्ण तकनीकी और पेशेवर वर्गों में बड़ी संख्या में रिक्त पदों को भरने के लिए तत्काल कदम उठाए। इसके अतिरिक्त, समिति यह भी सिफारिश करती है कि भर्ती प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करते हुए इसकी गहन निगरानी की जाए ताकि पद लंबे समय तक रिक्त न रहें। समिति की यह भी अपेक्षा है कि इन पदों को भरने के लिए समयबद्ध कार्य योजना की जानकारी प्रदान की जाए ताकि विभाग के अधिदेशित कार्यों के प्रभावी निर्वहन के लिए पर्याप्त सांस्थानिक क्षमता सुनिश्चित की जा सके।
(पैरा 2.26)
अप्रचलित और अनावश्यक विधियों का निरसन
6. समिति इस संबंध में अब तक उठाए गए कदमों की सराहना करती है और चाहती है कि विभाग नियमित और समयबद्ध समीक्षा प्रणाली के माध्यम से अप्रचलित और अनावश्यक विधियों के निरसन के संबंध में और प्रयास करे और एक ऐसी सुव्यवस्थित प्रणाली विकसित करे कि हितधारकों के साथ परामर्श से अप्रचलित सांविधिक उपबंधों का आवधिक अभिनिर्धारण किया जा सके। इसके अतिरिक्त, समिति की यह भी अपेक्षा है कि मुख्य निरसन और संशोधन प्रक्रियाओं का निरसन उपरांत विधायी प्रभाव मूल्यांकन नियमित अंतराल पर किया जाए ताकि मुकदमेबाजी को कम करने, अनुपालन भार को कम करने और प्रशासनिक विलंबों में उनकी प्रभावशीलता का आंकलन किया जा सके।
(पैरा 2.31)
7. समिति का यह सुविचारित मत है कि विधायी कार्य की बढ़ती हुई मात्रा और जटिलता के दृष्टिगत सांस्थानिक क्षमता को अनवरत सुदृढ़ किया जाना आवश्यक है। समिति की यह अपेक्षा है कि विधायी विभाग अपने कार्यभार, स्टाफिंग पैटर्न और कौशल आवश्यकताओं, विशेष तौर पर व्यस्ततम विधायी अवधियों के दौरान, का समग्र मूल्यांकन करे और सुव्यवस्थित आंतरिक समीक्षा और गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली विकसित करे। इसके अतिरिक्त, समिति की यह भी अपेक्षा है कि प्रारुपण और संवीक्षा प्रक्रियाओं के सुदृढ़ीकरण हेतु एक स्पष्ट रुपरेखा तैयार की जाए ताकि प्रारुपण सटीकता का संवर्धन किया जा सके, मुख्य और अधीनस्थ विधान के बीच निरंतरता सुनिश्चित की जा सके और प्रारुपण अथवा व्याख्यात्मक अस्पष्टताओं के कारण होने वाली परिहार्य मुकदमेबाजी को कम किया जा सके।
(पैरा 2.34)
भारत निर्वाचन आयोग से संबंधित बजटीय आवंटन और नीतिगत मुद्दों का अवलोकन
अनुदान मांगों का समग्र मूल्यांकन
8. समिति सिफारिश करती है कि विभाग भविष्य की प्रशिक्षण गतिविधियों के बजट अनुमान को पिछले व्यय प्रवृत्तियों और वास्तविक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए यथार्थवादी और साक्ष्य-आधारित आधार पर तैयार करे। समिति नोट करती है कि इस शीर्षक के तहत वास्तविक व्यय 2023–24 में ₹21.38 करोड़ और 2024–25 में ₹15.64 करोड़ था, जबकि 2026–27 के लिए बजट अनुमान ₹40.00 करोड़ निर्धारित किया गया है। इसलिए, समिति चाहती है कि विभाग एक विस्तृत वार्षिक प्रशिक्षण योजना तैयार करे, साथ ही एक त्रैमासिक व्यय रूपरेखा भी तैयार करे ताकि बढ़े हुए आवंटन का इष्टतम उपयोग सुनिश्चित किया जा सके और वर्ष के बीच में बड़े संशोधनों की आवश्यकता को न्यूनतम किया जा सके, जैसे कि 2025–26 में संशोधित अनुमानों के चरण में ₹21.00 करोड़ की वृद्धि देखी गई थी।
(पैरा 3.6)
आयोग से संबंधित नीतिगत मुद्दे
संघटन और कर्मचारियों एवं अधिकारियों की संख्या
9. समिति का मानना है कि इस तरह लगातार रिक्त पदों के रहने से प्रशासनिक दक्षता और सेवा वितरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए, समिति सिफारिश करती है कि आयोग समयबद्ध तरीके से भर्ती प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करे ताकि रिक्त पदों को भरा जा सके और मानव संसाधनों का इष्टतम उपयोग सुनिश्चित किया जा सके, ताकि मानव शक्ति की कमी के कारण आयोग के कार्य में बाधा न आए।
(पैरा 3.9)
10. इसलिए, समिति सिफारिश करती है कि भारत निर्वाचन आयोग सभी स्तरों पर मजबूत निगरानी तंत्र स्थापित करे ताकि पुनरीक्षण प्रक्रिया का एकसमान कार्यान्वयन सुनिश्चित हो सके, साथ ही निर्वाचन आयोग इंटीग्रेटेड नेटवर्क (ईसीआईनेट) पर अपलोड किए गए दस्तावेजों के संदर्भ में डेटा गोपनीयता और सुरक्षा प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन भी सुनिश्चित हो। समिति के दृष्टिकोण में, ये उपाय पारदर्शिता बढ़ाने और मतदाता सूची की विश्वसनीयता में जनता के विश्वास को मजबूत करने में मदद करेंगे।
(पैरा 3.12)
11. समिति सिफारिश करती है कि भारत निर्वाचन आयोग सामान्य तौर पर निर्धारित मानदंडों का पालन करते हुए दूरदराज़, ग्रामीण, आदिवासी और पहाड़ी क्षेत्रों में मतदान केंद्रों के स्थान निर्धारण और तर्कसंगत निर्माण में लचीला और क्षेत्र-विशेष दृष्टिकोण अपना सकता है। आयोग को वास्तविक कठिन इलाकों में मानकों में छूट देने पर विचार करना चाहिए, जिसमें भौगोलिक बाधाओं, संपर्क सुविधाओं और मतदाता की सुविधा को ध्यान में रखा जाए। समिति आगे सिफारिश करती है कि आवधिक पहुँच परीक्षण किए जाएं ताकि कठिनाई वाले क्षेत्रों की पहचान की जा सके और किसी भी मतदाता को दूरी या भौगोलिक बाधाओं के कारण मतदान के अवसर का लाभ उठाने से वंचित ना होना पड़े।
(पैरा 3.14)
12. समिति सिफारिश करती है कि भारत निर्वाचन आयोग यह जाँच कर सकता है कि मतदाता के लिए सुविधा बढ़ाने के लिए उपयुक्त तकनीकी और प्रक्रियात्मक उपायों को लागू करना कितना व्यावहारिक है, जिसमें ईवीएम के लिए बेहतर लाइटिंग या बैकलिट डिस्प्ले, चुनाव प्रतीकों के बीच दृश्य समानता सुनिश्चित करना, मतदाता पर्ची वितरण तंत्र को सुदृढ़ करना और सत्यापित करना, और मतदान केंद्रों की स्थापना का तर्कसंगत निर्माण शामिल है ताकि कोई भी गाँव मतदान बूथ तक उचित पहुँच से वंचित न रहे। समिति आगे सिफारिश करती है कि आयोग मतदाता उपस्थिति डेटा के प्रसार के लिए एक पारदर्शी और रियल-टाईम प्रणाली स्थापित कर सकता है, ताकि विवादों को कम किया जा सके और निर्वाचन प्रक्रिया में सार्वजनिक विश्वास बढ़ाया जा सके।
(पैरा 3.16)
13. समिति सिफारिश करती है कि भारत निर्वाचन आयोग ‘‘एक व्यक्ति, एक मत’’ के सिद्धांत को मजबूत करने, ईवीएम और वीवीपैट के संचालन में पारदर्शिता बढ़ाने, प्रवासी मजदूरों की चुनावी प्रक्रिया में भागीदारी को सुगम बनाने और मतदान केंद्र के बुनियादी ढांचे में सुधार करने के लिए उपयुक्त तकनीकी उपाय अपनाने पर विचार कर सकता है, ताकि मतदाता का विश्वास और पहुंच बढ़ सके।
(पैरा 3.18)
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आरकेके
(रिलीज़ आईडी: 2240858)
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