सूक्ष्‍म, लघु एवं मध्‍यम उद्यम मंत्रालय
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सरकार ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को मदद करने और वैश्विक मूल्य श्रृंखला में उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देने के लिए कई पहल की

प्रविष्टि तिथि: 16 MAR 2026 2:22PM by PIB Delhi

सरकार ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को मदद करने और वैश्विक मूल्य श्रृंखला में उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देने के लिए निम्नलिखित पहल की हैं:

  1. निर्यात संवर्द्धन मिशन (ईपीएम): - यह मिशन निर्यात संवर्द्धन के लिए एक व्यापक, सुदृढ़ और डिजिटल रूप से संचालित ढांचा प्रदान करेगा, जिसके लिए वित्त वर्ष 2025-26 से वित्त वर्ष 2030-31 तक कुल 25,060 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। ईपीएम कई खंडित योजनाओं से एक एकल, परिणाम-आधारित और अनुकूलनीय तंत्र की ओर एक रणनीतिक बदलाव का प्रतीक है, जो वैश्विक व्यापार चुनौतियों से निपट सकता है और निर्यातकों की बदलती जरूरतों को तेजी से पूरा कर सकता है।

यह मिशन दो एकीकृत उप-योजनाओं के माध्यम से संचालित होगा:

    • निर्यात प्रोत्साहन – यह ब्याज में छूट, निर्यात आढ़तिया (फैक्टरिंग), गिरवी गारंटी, ई-कॉमर्स निर्यातकों के लिए क्रेडिट कार्ड और नए बाजारों में विविधीकरण के लिए क्रेडिट संवर्धन सहायता जैसे विभिन्न साधनों के माध्यम से लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए किफायती व्यापार वित्त तक पहुंच में सुधार पर ध्यान केंद्रित करता है।
    • निर्यात दिशा – यह गैर-वित्तीय सहायक कारकों पर ध्यान केंद्रित करता है जो बाजार की तैयारी और प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाते हैं। इनमें निर्यात गुणवत्ता और अनुपालन सहायता, अंतर्राष्ट्रीय ब्रांडिंग, पैकेजिंग और व्यापार मेलों में भागीदारी, निर्यात भंडारण एवं लॉजिस्टिक्स, अंतर्देशीय परिवहन प्रतिपूर्ति एवं व्यापार खुफिया और क्षमता-निर्माण पहल शामिल हैं।
  1. इसके अतिरिक्त, निर्यातकों के लिए ऋण गारंटी योजना को भी मंजूरी दे दी गई है, जिसके तहत राष्ट्रीय ऋण गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (एनसीजीटीसी) द्वारा सदस्य ऋण संस्थानों (एमएलआई) को पात्र निर्यातकों, जिनमें सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) भी शामिल हैं, को 20,000 करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त बिना गारंटी वाली ऋण सुविधाएं प्रदान करने के लिए 100 प्रतिशत ऋण गारंटी कवरेज प्रदान की जाएगी। इस योजना से भारतीय निर्यातकों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ने और नए एवं उभरते बाजारों में विविधीकरण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। बिना गारंटी के ऋण की उपलब्धता से तरलता मजबूत होगी और सुचारू व्यावसायिक संचालन सुनिश्चित होगा।
  • iii. अंतर्राष्ट्रीय सहयोग योजना: इस योजना का उद्देश्य विदेशों में आयोजित होने वाली अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनियों/मेलों/सम्मेलनों/संगोष्ठियों/खरीदार-विक्रेता बैठकों में एमएसएमई की भागीदारी को सुविधाजनक बनाकर और निर्यात में शामिल विभिन्न लागतों की प्रतिपूर्ति करके एमएसएमई की क्षमता का निर्माण करना है।
  • iv. सरकार द्वारा हाल ही में किए गए व्यापक जीएसटी युक्तिकरण से लघु एवं मध्यम उद्यमों को मजबूती मिलेगी और ऑटोमोबाइल, वस्त्र, खाद्य प्रसंस्करण, लॉजिस्टिक्स और हस्तशिल्प जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में स्थानीय आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुदृढ़ किया जा सकेगा। जीएसटी की कम दरों ने कच्चे माल और सेवाओं को अधिक किफायती बना दिया है, जिससे लघु एवं मध्यम उद्यमों और स्टार्टअप्स को अपने परिचालन को बढ़ाने, नवाचार में निवेश करने और घरेलू एवं वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए प्रोत्साहन मिला है।

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम राज्य मंत्री सुश्री शोभा करंदलजे ने आज राज्यसभा में लिखित प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी।

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पीके/केसी/एके/केके


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