कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय
भारत को वैश्विक कौशल केंद्र बनाने की रूपरेखा
प्रविष्टि तिथि:
16 MAR 2026 3:26PM by PIB Delhi
भारत सरकार के स्किल इंडिया मिशन (सिम) के अंतर्गत, कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय (एमएसडीई) विभिन्न योजनाओं, जैसे प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई), जन शिक्षण संस्थान (जेएसएस), राष्ट्रीय शिक्षुता संवर्धन योजना (एनएपीएस) जैसी प्रमुख योजनाओं के तहत कौशल विकास केंद्रों के व्यापक नेटवर्क के माध्यम से और औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) द्वारा शिल्पकार प्रशिक्षण योजना (सीटीएस) के माध्यम से देश भर के समाज के सभी वर्गों को कौशल, पुनर्कौशल और कौशलोन्नयन प्रशिक्षण प्रदान करता है। सिम का उद्देश्य भारत के युवाओं को उद्योग से संबंधित कौशलों से सुसज्जित करके भविष्य के लिए तैयार करना है।
उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण के डिजाइन और प्रशिक्षण प्रदान करने को संरेखित करने के लिए, एमएसडीई ने अन्य बातों के साथ-साथ निम्नलिखित कदम उठाए हैं:
- राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीईटी) की स्थापना तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण (टीवीईटी) क्षेत्र में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विनियम और मानक स्थापित करने वाले एक व्यापक विनियामक निकाय के रूप में की गई है। एनसीवीईटी उद्योग निकायों को अवार्डिंग बॉडीज (एबी) और/या आकलन एजेंसी (एए) के रूप में मान्यता देता है।
- अवार्डिंग बॉडीज से अपेक्षा की जाती है कि वे उद्योग की मांग के अनुसार योग्यताएं तैयार करें और उन्हें राष्ट्रीय व्यवसाय वर्गीकरण, 2015 के अनुसार चिन्हित व्यवसायों के साथ मानचित्रित करें तथा उद्योग से मान्यता प्राप्त करें। एनसीवीईटी ने उद्योग की आवश्यकताओं के अनुसार 9026 योग्यताओं को अनुमोदित किया है, जिनमें से 2599 योग्यताएं वैध और सक्रिय हैं, तथा 6427 योग्यताएं संग्रहीत हैं।
- प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीटी) आईटीआई छात्रों को वास्तविक औद्योगिक वातावरण में प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए उद्योगों के सहयोग से फ्लेक्सी समझौता ज्ञापन योजना और दोहरी प्रशिक्षण प्रणाली (डीएसटी) लागू कर रहा है।
- राज्य और क्षेत्रीय स्तर पर संस्थानों के लिए उद्योग से जुड़ाव सुनिश्चित करने के लिए डीजीटी ने आईबीएम, सिस्को, माइक्रोसॉफ्ट, एडब्ल्यूएस, ऑटोडेस्क आदि जैसी आईटी टेक कंपनियों के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। ये साझेदारियां आधुनिक प्रौद्योगिकियों में तकनीकी और व्यावसायिक कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने में सहायक हैं।
- पीएमकेवीवाई के तहत, आगामी बाजार मांग और उद्योग की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए, एआई/एमएल, रोबोटिक्स, मेकाट्रॉनिक्स, ड्रोन प्रौद्योगिकी, ग्रीन टेक, उन्नत विनिर्माण आदि क्षेत्रों में उद्योग 4.0 की आवश्यकताओं के अनुरूप नए युग/भविष्य के कौशल वाले जॉब रोल्स विशेष रूप से तैयार किए गए हैं।
- डीजीटी ने सीटीएस के तहत नए युग/भविष्य के कौशल पाठ्यक्रम शुरू किए हैं, जिनके माध्यम से 5जी नेटवर्क तकनीशियन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रोग्रामिंग सहायक, साइबर सुरक्षा सहायक, ड्रोन तकनीशियन, सौर तकनीशियन आदि जैसे उभरते क्षेत्रों में प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।
- संबंधित क्षेत्रों के उद्योग जगत के नेताओं के नेतृत्व में 36 क्षेत्र कौशल परिषद (एसएससी) स्थापित की गई हैं, जिन्हें संबंधित क्षेत्रों की कौशल विकास आवश्यकताओं की पहचान करने और कौशल दक्षता मानकों को निर्धारित करने का अधिदेश प्रदान किया गया है।
- उद्योग के लिए तैयार कार्यबल को उभरते आर्थिक अवसरों से जोड़ने के उद्देश्य से सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत अहमदाबाद और मुंबई में दो (02) भारतीय कौशल संस्थान (आईआईएस) स्थापित किए गए हैं।
वर्ष 2023 में जी20 नई दिल्ली अग्रणियों की घोषणा के अनुसार, कौशल और योग्यताओं की अंतर-देशीय तुलनात्मकता और पारस्परिक मान्यता को सुगम बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय और अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन ने व्यवसायों को कौशल एवं योग्यता आवश्यकताओं से जोड़ने वाले एक अंतर्राष्ट्रीय संदर्भ ढाँचे के विकास से संबंधित व्यवहार्यता अध्ययन करने के लिए एक समझौता किया है।
इसके अतिरिक्त, एमएसडीई ने कौशल विकास और व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण के क्षेत्र में सहयोग के लिए साझेदार देशों के साथ सहयोग समझौते भी किए हैं। वर्तमान में, एमएसडीई के 8 देशों, अर्थात् ऑस्ट्रेलिया, डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, जापान, कतर, सिंगापुर और संयुक्त अरब अमीरात के साथ सक्रिय समझौते हैं। इन समझौतों में तकनीकी आदान-प्रदान, सहयोगात्मक प्रशिक्षण पहल, सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान और कौशल एवं योग्यताओं की मान्यता के प्रयास शामिल हैं, ताकि घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय श्रम बाजारों में भारतीय कार्यबल के लिए रोजगार के अवसरों को बढ़ाया जा सके। एमएसडीई विदेश मंत्रालय द्वारा हस्ताक्षरित प्रवासन एवं गतिशीलता साझेदारी समझौतों में एक महत्वपूर्ण हितधारक है। एमएसडीई समय-समय पर द्विपक्षीय समझौतों के तहत कुशल आवागमन पहलों को सुगम बनाने के लिए राज्य सरकारों के साथ भी सहयोग करता है।
एमएसडीई ने भारतीय युवाओं को विदेशों में रोजगार के अवसरों के लिए तैयार करने हेतु बेंगलुरु, भुवनेश्वर, गुवाहाटी, हैदराबाद, कानपुर, लुधियाना और वाराणसी में 7 स्किल इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (एसआईआईसी) स्थापित किए हैं। इन केंद्रों का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुकूलित क्षेत्र संबंधी कौशल प्रशिक्षण, भाषा प्रशिक्षण और प्रस्थान-पूर्व मार्गदर्शन प्रदान करना है ताकि कुशल श्रमिकों के सुरक्षित और सूचना संपन्न प्रवास में सहायता मिल सके।
इसके अतिरिक्त, इन केंद्रों पर विदेश मंत्रालय की प्रवासी कौशल विकास योजना (पीकेवीवाई) के तहत प्रि-डिपार्टचर ओरिएंटेशन ट्रेनिंग (पीडीओटी) दिया जाता है ताकि उम्मीदवारों को गंतव्य देशों की भाषा, सांस्कृतिक पहलुओं, श्रम कानूनों और सुरक्षित प्रवास प्रक्रियाओं से अवगत कराया जा सके।
यह जानकारी कौशल विकास और उद्यमशीलता (एमएसडीई) राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री जयन्त चौधरी द्वारा आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी गई।
*****
पीके/केसी/डीवी
(रिलीज़ आईडी: 2240714)
आगंतुक पटल : 75