संस्कृति मंत्रालय
पांडुलिपियों के लिए राष्ट्रीय मिशन
प्रविष्टि तिथि:
16 MAR 2026 12:54PM by PIB Delhi
सरकार ने संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत एक प्रमुख पहल के रूप में ज्ञान भारतम् मिशन शुरू किया है। इसका उद्देश्य भारत भर में शैक्षणिक संस्थानों, संग्रहालयों, पुस्तकालयों तथा निजी संग्रहों में उपलब्ध पांडुलिपियों का सर्वेक्षण, प्रलेखन, संरक्षण, डिजिटलीकरण और उन्हें सुलभ बनाना है।
इस पहल को समर्थन देने के लिए स्थायी वित्त समिति (एसएफसी) ने 2025–2031 की अवधि के लिए 491.66 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की है।
इस मिशन को देशभर में इन गतिविधियों को संचालित करने के लिए क्लस्टर केन्द्रों (सीसी) और स्वतंत्र केन्द्रों (आईसी) का एक राष्ट्रव्यापी नेटवर्क स्थापित करने का दायित्व दिया गया है। इस दिशा में अब तक 40 से अधिक सीसी और आईसी को जोड़ा जा चुका है। इसके अतिरिक्त, मिशन के क्रियान्वयन के लिए अब तक 28 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को भी संबंधित राज्य/केन्द्र शासित प्रदेश में नोडल समन्वय प्राधिकरण के रूप में शामिल किया गया है।
पांडुलिपियों से संबंधित गतिविधियों को राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक और गहन रूप से संचालित करने के उद्देश्य से एक करोड़ पांडुलिपियों का लक्ष्य अनुमानित किया गया है। ज्ञान भारतम् मिशन का उद्देश्य भारत भर में शैक्षणिक संस्थानों, संग्रहालयों, पुस्तकालयों और निजी संग्रहों में उपलब्ध पांडुलिपियों का सर्वेक्षण, प्रलेखन, संरक्षण, डिजिटलीकरण और उन्हें सुलभ बनाना है। यह पहल भारत की पांडुलिपि संपदा को क्षेत्र, भाषा और लिपि के किसी भी भेदभाव के बिना कवर करने पर केंद्रित है।
ज्ञान भारतम् मिशन भारत की पांडुलिपि विरासत की सुरक्षा के लिए एक व्यवस्थित और प्रौद्योगिकी-आधारित ढांचा अपनाता है। इस ढांचे में वैज्ञानिक संरक्षण और पुनर्स्थापन (निवारक और उपचारात्मक विधियों के माध्यम से), पांडुलिपियों का उच्च मानक डिजिटलीकरण, राष्ट्रीय डिजिटल रिपॉजिटरी (एनडीआर) के माध्यम से डिजिटाइज्ड डेटा तक केंद्रीकृत पहुंच, तथा एलटीओ-9 टेप और क्लाउड-आधारित बैकअप के साथ आपदा पुनर्प्राप्ति प्रणाली द्वारा डेटा सुरक्षा शामिल है।
इसके अतिरिक्त, भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार (एनएआई) ने भी ऐतिहासिक अभिलेखों की उच्च-रिज़ॉल्यूशन डिजिटल प्रतियां तैयार करने के लिए बड़े पैमाने पर डिजिटलीकरण पहल शुरू की है। प्रत्येक डिजिटल छवि के लिए चेकसम तैयार किया जाता है, जो डिजिटल अभिलेखों की अखंडता और प्रामाणिकता की पुष्टि करने में मदद करता है तथा यह सुनिश्चित करता है कि किसी भी प्रकार के परिवर्तन या छेड़छाड़ का पता लगाया जा सके।
ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत प्रत्येक डिजिटाइज्ड पांडुलिपि के साथ उचित मेटाडाटा, कैटलॉगिंग और प्रलेखन किया जाता है, जिससे मूल स्रोत की प्रामाणिकता और अनुरेखणीयता (ट्रेसबिलिटी) बनाए रखने में सहायता मिलती है।
डिजिटल प्रतियों को सुरक्षित डिजिटल रिपॉजिटरी, अर्थात् राष्ट्रीय डिजिटल रिपॉजिटरी (एनडीआर) में संग्रहित किया जाता है, जो अनुसंधान आदि के लिए त्वरित पहुंच उपलब्ध कराता है। इसके साथ ही एलटीओ-9 टेप और क्लाउड-आधारित बैकअप के साथ आपदा पुनर्प्राप्ति प्रणाली के माध्यम से डेटा सुरक्षा की भी व्यवस्था की गई है।
यह जानकारी केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने आज लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में दी।
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पीके/केसी/केपी/एसएस
(रिलीज़ आईडी: 2240700)
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