खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय
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प्रधानमंत्री सूक्ष्मि खाद्य प्रसंस्करण उद्यम (पीएमएफएमई) योजना की प्रगति और प्रभाव


पीएमएफएमई के अंतर्गत परिचालन स्थिति की समीक्षा

प्रविष्टि तिथि: 13 MAR 2026 5:07PM by PIB Delhi

प्रधानमंत्री सूक्ष्‍म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम (पीएमएफएमई) योजना के अंतर्गत योजना की शुरुआत से लेकर 31 दिसंबर, 2025 तक 59,202 सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को औपचारिक रूप प्रदान किया गया है। राज्य/केंद्र शासित प्रदेशवार विवरण अनुलग्नक में उपलब्ध है। इस योजना के तहत देश भर में कुल मिलाकर 17015.8 करोड़ रुपये का निवेश जुटाया गया है ।

मंत्रालय स्वीकृत इकाइयों के क्षेत्रवार वितरण को बनाए रखता है, जिसमें महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी), किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और आकांक्षी जिलों की भागीदारी शामिल है। मंत्रालय ऋण देने वाले बैंकों और राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकार के साथ बैठकों के माध्यम से इसकी नियमित रूप से निगरानी करता है।

मंत्रालय राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकार के माध्यम से पीएमएफएमई योजना के तहत स्वीकृत साझा अवसंरचना सुविधाओं और इन्क्यूबेशन केंद्रों की परिचालन और उपयोग स्थिति की नियमित रूप से समीक्षा करता है। 31 दिसंबर 2025 तक , साझा अवसंरचना सुविधाओं के लिए 108 ऋण स्वीकृत किए गए थे, जिनमें से 88 ऋण वितरित किए जा चुके हैं और 59 सुविधाएं कार्यरत हैं। इन्क्यूबेशन केंद्रों के लिए, 24 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से 76 प्रस्ताव स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 23 इन्क्यूबेशन केंद्र चालू हो चुके हैं। उपयोग स्तरों की समीक्षा राज्य नोडल एजेंसी (एसएनए), मार्गदर्शक संस्थान और मेजबान संस्थान द्वारा आयोजित संयुक्त निरीक्षण रिपोर्टों के माध्यम से की जाती है। ये निरीक्षण भौतिक प्रगति और उपयोग की शुरुआत को सत्यापित करते हैं।

मंत्रालय ने पीएमएफएमई योजना के लिए एक तृतीय-पक्ष मध्यावधि प्रभाव मूल्यांकन अध्ययन कराया है। 31 मार्च, 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, इस योजना से 2.8 लाख से अधिक रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं। पीएमएफएमई लाभार्थियों ने योजना के तहत सहायता प्राप्त करने के बाद अपने औसत कारोबार में लगभग 1.7 गुना वृद्धि दर्ज की है। अध्ययन के अनुसार, लाभार्थियों के एक बड़े हिस्से ने बेहतर बाजार पहुंच और वितरण नेटवर्क का संकेत दिया है, जिसमें क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी के 85 प्रतिशत से अधिक लाभार्थियों और स्वयं सहायता समूह के लगभग 80 प्रतिशत सदस्यों ने योजना के तहत लाभ प्राप्त करने के बाद बेहतर बाजार संपर्क की जानकारी दी है।

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने रोजगार सृजन, कारोबार में वृद्धि, बाजार संबंधों को मजबूत करने और निर्यात को बढ़ावा देने के संदर्भ में पीएमएफएमई योजना के प्रभाव और उपयोग को बढ़ाने के लिए कई पहलें की हैं। हितधारकों और आम जनता के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए, मंत्रालय योजना की शुरुआत से ही समाचार पत्रों के विज्ञापन, रेडियो जिंगल, प्रदर्शनियों और मेलों, और क्रेता-विक्रेता बैठकों जैसे विभिन्न मंचों के माध्यम से राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय जागरूकता अभियान चलाता आ रहा है।

इस योजना के तहत देश में ऋण प्रवाह बढ़ाने के लिए मंत्रालय नियमित रूप से ऋण देने वाले बैंकों और राज्य सरकारों के साथ बैठकें करता है। सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों द्वारा सामना की जा रही समस्याओं को वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) और राज्य स्तरीय बैंकर समिति (एसएलबीसी) की बैठकों में भी उठाया जाता है ताकि कार्यान्वयन संबंधी चुनौतियों पर चर्चा और उनका समाधान किया जा सके। इसके अलावा, राज्य सरकार द्वारा राज्य और जिला स्तर पर आवधिक समीक्षा बैठकें भी आयोजित की जाती हैं। मंत्रालय राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनियों, क्रेता-विक्रेता बैठकों में भागीदारी और देश भर में ई-कॉमर्स प्लेटफार्मों के साथ एकीकरण के माध्यम से बाजार पहुंच को सुगम बना रहा है।

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री श्री रवनीत सिंह ने आज राज्यसभा में एक प्रश्‍न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

सीएमसी – एमओएफपीआई

क्र.सं.

राज्य/केंद्र शासित प्रदेश

औपचारिक रूप प्रदान किए गए उद्यमों की संख्‍या

1

आंध्र प्रदेश

2215

2

अरुणाचल प्रदेश

51

3

असम

1986

4

बिहार

4938

5

छत्तीसगढ

445

6

दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव

4

7

दिल्ली

280

8

गोवा

103

9

गुजरात

5

10

हरियाणा

507

11

हिमाचल प्रदेश

325

12

जम्मू - कश्मीर

389

13

झारखंड

484

14

कर्नाटक

3507

15

केरल

5139

16

लद्दाख

25

17

मध्य प्रदेश

5721

18

महाराष्ट्र

13722

19

मणिपुर

54

20

मेघालय

147

21

मिजोरम

5

22

नगालैंड

73

23

ओडिशा

1126

24

पुदुचेरी

93

25

पंजाब

1888

26

राजस्थान

417

27

सिक्किम

3

28

तमिलनाडु

8350

29

तेलंगाना

2559

30

त्रिपुरा

132

31

उत्‍तर प्रदेश

3650

32

उत्तराखंड

790

33

पश्चिम बंगाल

69

 

कुल

59202

****

पीके/केसी/जेके/एमबी


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