पूर्वोत्‍तर क्षेत्र विकास मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

केंद्रीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने एमडीओएनईआर सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता की; पूर्वोत्तर में निवेश, एमएसएमई विकास और रोजगार में एनईडीएफआई के योगदान की समीक्षा की


एनईडीएफआई ने 26,835 इकाइयों को 9,114 करोड़ रुपये दिए, जिससे 23,670 करोड़ रुपये का निजी निवेश हुआ है और लगभग 15 लाख नौकरियों को सहयोग मिला

जे. सिंधिया ने एनईडीएफआई को निर्देश दिया है कि वह पूर्वोत्तर में लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के विकास को सुदृढ़ करने के लिए सूक्ष्म उद्यमों से परे वित्तपोषण का विस्तार करे

नॉर्थ ईस्ट इन्वेस्टर्स समिट के दौरान किए गए 4.48 लाख करोड़ रुपये के वादे में से लगभग 35,000 करोड़ रुपये का निवेश पहले ही हो चुका है

प्रविष्टि तिथि: 13 MAR 2026 5:02PM by PIB Delhi

केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री (डीओएनईआर) श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने 12 मार्च 2026 को नई दिल्ली स्थित संसद भवन एनेक्स में पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय की सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में समिति के सदस्य, एमडीओएनईआर के सचिव और विभिन्न मंत्रालयों, एनईसी और उत्तर पूर्वी विकास वित्त निगम लिमिटेड (एनईडीएफआई) के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक के दौरान, मंत्री जी ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहन देने, रोजगार निर्माण करने और उद्यमिता को मजबूत करने में एनईडीएफआई की ओर से निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा, “एनईडीएफआई पूर्वोत्तर में उद्यम के लिए एक संरचनात्मक प्रवर्तक के तौर पर तेजी से उभर रहा हैउद्यमिता को प्रोत्साहन दे रहा है, एमएसएमई क्रेडिट अंतराल को भर रहा है, निजी निवेश को गति दे रहा है और पूरे क्षेत्र में आजीविका का सहयोग कर रहा है।

मजबूत वित्तीय प्रभाव और रोजगार निर्माण

एनईडीएफआई के हस्तक्षेपों के वित्तीय प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए, श्री सिंधिया ने कहा कि मार्च 2025 तक, संस्था ने 26,835 इकाइयों को 9114 करोड़ रुपये दिए हैं, जिसने लगभग 23670 करोड़ रुपये के निजी निवेश को प्रोत्साहन दिया है और पूर्वोत्तर में लगभग 15 लाख लोगों के लिए रोजगार में सहयोग किया है।

मंत्री जी ने बताया कि एनईडीएफआई की ओर से निवेश किए गए प्रत्येक 1 रुपये पर निजी क्षेत्र से 2.6 रुपये का निवेश मिला है, जो निवेशकों के मजबूत विश्वास को दर्शाता है। उन्होंने पूंजी के बेहतर इस्तेमाल पर भी जोर देते हुए कहा कि निवेश किए गए प्रत्येक 1 करोड़ रुपये पर लगभग 165 रोजगार निर्मित होते हैं।

एमएसएमई क्रेडिट अंतर को भरना

श्री सिंधिया ने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र में एमएसएमई क्रेडिट अंतर को पाटने में एनईडीएफआई की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने संस्था को अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाने और सूक्ष्म उद्यमों के अलावा लघु उद्यमों को भी शामिल करने का निर्देश दिया, जिससे क्षेत्र में व्यवसायों की एक विस्तृत श्रृंखला को सहायता मिल सके।

संस्था के वित्तीय अनुशासन की सराहना करते हुए मंत्री जी ने उल्लेख किया कि एनईडीएफआई ने 289.11 करोड़ रुपये के ब्याज-मुक्त लोन बिना किसी चूक के चुका दिए हैं। उन्होंने इस बात पर भी संतोष जताया कि हाल ही में किए गए वितरण में से 468 करोड़ रुपये संस्था द्वारा आंतरिक रूप से जुटाए गए, जबकि 580 करोड़ रुपये एमडीओएनईआर की ओर से प्रदान किए गए, जो संस्था की बढ़ती आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।

निवेश की स्थापना और क्षेत्रीय विकास

मंत्री ने पूर्वोत्तर निवेशक शिखर सम्मेलन के बाद हुई प्रगति पर भी प्रकाश डाला और बताया कि विभिन्न राज्यों में लगभग 35,000 करोड़ रुपये का निवेश स्थापित किया जा चुका है, जबकि निवेश के लिए 4.48 लाख करोड़ रुपये की रुचि दिखाई गई है।

क्षेत्रीय विकास के चालक के रूप में पर्यटन के महत्व पर जोर देते हुए, श्री सिंधिया ने कहा कि मंत्रालय समग्र पर्यटक अनुभव पर केंद्रित सुनियोजित पर्यटन सर्किट तैयार कर रहा है, जिसके तहत मेघालय के सोहरा और त्रिपुरा के माताबारी में प्रायोगिक पहल चल रही हैं।

उन्होंने अरुणाचल प्रदेश के कीवी, त्रिपुरा के क्वीन पाइनएप्पल, सिक्किम के जैविक उत्पाद, नागालैंड की कॉफी, असम के मूगा रेशम, मणिपुर के पोलो, मिजोरम के मिजो अदरक और मेघालय की लकाडोंग हल्दी सहित राज्य-विशिष्ट गुणों को प्रोत्साहन देने पर मंत्रालय के फोकस को भी दोहराया।

व्यापक संपर्क और समन्वय

श्री सिंधिया ने पूर्वोत्तर राज्यों की अपनी यात्राओं के बारे में भी जानकारी दी, जहां वे प्रत्येक राज्य में 3-4 दिन बिताएंगे, जिसका उद्देश्य जून में मॉनसून शुरू होने से पहले सभी आठ राज्यों का दौरा करना है। विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों के छात्रों के साथ संवाद उनकी यात्राओं का अटूट अंग है।

नगालैंड और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में भूमि संपार्श्विक मानदंडों से संबंधित मुद्दों पर मंत्री जी ने स्पष्ट किया कि वित्तीय संस्थानों को आरबीआई के दिशानिर्देशों का पालन करना होगा और ऐसे मामले संबंधित राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि बराक घाटी में बाढ़ प्रबंधन संबंधी मुद्दों के समाधान के लिए जल शक्ति मंत्रालय और जर्मन एजेंसी केएफडब्ल्यू के साथ तकनीकी समन्वय चल रहा है।

मंत्री जी ने एक वर्ष में समिति की चार बैठकें आयोजित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

 

***

पीके/केसी/एमएम


(रिलीज़ आईडी: 2240059) आगंतुक पटल : 25
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें: English , Urdu , Assamese