स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय
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गैर-संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए किए गए उपाय


एनपी-एनसीडी ने अपने राष्ट्रव्यापी नेटवर्क का विस्तार किया, जिसमें 770 जिला एनसीडी क्लीनिक, 364 डे केयर कैंसर सेंटर और 6,410 सीएचसी-स्तरीय क्लीनिक शामिल

जिला स्तर पर कैंसर देखभाल की पहुंच बढ़ाने के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 297 अतिरिक्त जिला डे केयर कैंसर केंद्रों को मंजूरी

एनएचएम के सहयोग से जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में स्वास्थ्य संवर्धन के जरिए कैंसर की रोकथाम संबंधी देखभाल को मजबूत किया गया

प्रविष्टि तिथि: 13 MAR 2026 4:38PM by PIB Delhi

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, गैर-संचारी रोगों की रोकथाम एवं नियंत्रण के राष्ट्रीय कार्यक्रम (एनपी-एनसीडी) के अंतर्गत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को तकनीकी एवं वित्तीय सहायता प्रदान करता है। यह कार्यक्रम अवसंरचना को सुदृढ़ बनाने, मानव संसाधन विकास, स्क्रीनिंग, शीघ्र निदान, रेफरल, उपचार एवं गैर-संचारी रोगों के लिए स्वास्थ्य संवर्धन पर केंद्रित है।

राष्ट्रीय गैर-संचारी रोगों की रोकथाम एवं नियंत्रण कार्यक्रम (एनपी-एनसीडी) के अंतर्गत 770 जिला एनसीडी क्लीनिक, 364 जिला डे केयर कैंसर केंद्र (डीसीसीसी) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में 6,410 एनसीडी क्लीनिक स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा, जिला अस्पताल स्तर पर कैंसर देखभाल सुलभ बनाने करने के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 297 जिला डे केयर कैंसर केंद्रों (डीसीसीसी) को मंजूरी प्रदान की गई है।

गैर-संक्रामक रोगों (एनसीडी) की रोकथाम, नियंत्रण एवं स्क्रीनिंग के लिए एक जनसंख्या-आधारित पहल पूरे देश में शुरू की गई है, जिसमें तीन सामान्य कैंसर भी शामिल हैं। इस पहल के अंतर्गत, 30 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को कैंसर सहित आम एनसीडी की स्क्रीनिंग के लिए लक्षित किया गया है।

आयुष्मान आरोग्य मंदिरों (एएएम) के माध्यम से व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल के अंतर्गत कैंसर की रोकथाम को मजबूत किया जाता है और इसके लिए स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाता है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को उनकी कार्यक्रम कार्यान्वयन योजनाओं (पीआईपी) के अनुसार जागरूकता गतिविधियों के लिए धनराशि उपलब्ध कराई जाती है।

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की रिपोर्ट "भारत: देश के राज्यों का स्वास्थ्य" (2017) के अनुसार, कैंसर, मधुमेह और गुर्दे की पुरानी बीमारियों सहित गैर-संक्रामक रोगों (एनसीडी) के बढ़ते बोझ से जुड़े कारणों एवं जोखिमों की पहचान रोग भार अध्ययनों के माध्यम से की गई है। रिपोर्ट में वायु प्रदूषण, तंबाकू का सेवन, अस्वास्थ्यकर आहार, उच्च रक्तचाप और उच्च रक्त शर्करा जैसे प्रमुख व्यवहारिक, पर्यावरणीय और चयापचय संबंधी जोखिम कारकों पर प्रकाश डाला गया है जो इन बीमारियों में योगदान करते हैं।

यह जानकारी केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्री प्रतापराव जाधव ने आज लोकसभा में लिखित उत्तर में दी।

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