स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय
पीएम-अभिम पर अपडेट
पीएम-अभिम योजना के अंतर्गत 64,180 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना को सुदृढ़ बनाया गया, जिसका उद्देश्य मजबूत स्वास्थ्य प्रणालियों का निर्माण करना है
पीएम-अभिम के अंतर्गत 9,519 आयुष्मान आरोग्य मंदिर, 5,456 शहरी स्वास्थ्य केंद्र, 2,151 ब्लॉक जन स्वास्थ्य इकाइयां एवं 744 एकीकृत जन स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं को मंजूरी प्रदान की गई
प्रविष्टि तिथि:
13 MAR 2026 4:32PM by PIB Delhi
प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (पीएम-अभिम) एक केंद्रीय प्रायोजित योजना (सीएसएस) है जिसमें कुछ केंद्रीय क्षेत्र घटक (सीएस) शामिल हैं और योजना अवधि (वित्त वर्ष 2021-22 से वित्त वर्ष 2025-26) के लिए इसका परिव्यय 64,180 करोड़ रुपये है।
इस योजना में स्वास्थ्य सेवा वितरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य गतिविधियों को एकीकृत एवं मजबूत करने के लिए नई पीढ़ी के सुधारों की परिकल्पना की गई है, जिसमें स्वास्थ्य अनुसंधान भी शामिल है, ताकि समुदाय ऐसी महामारियों या स्वास्थ्य संकटों का प्रबंधन करने में आत्मनिर्भर बन सकें। योजना के अंतर्गत आने वाले उपायों का उद्देश्य स्वास्थ्य प्रणालियों एवं संस्थानों को मजबूत करना है ताकि प्राथमिक, माध्यमिक एवं तृतीयक स्तरों पर निरंतर देखभाल प्रदान की जा सके, साथ ही स्वास्थ्य प्रणालियों को वर्तमान एवं भविष्य की महामारियों तथा आपदाओं से प्रभावी रूप से निपटने के लिए सक्षम बनाया जा सके।
पीएम-अभिम का उद्देश्य प्राथमिक एवं माध्यमिक स्तर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना को मजबूत करना; उभरती एवं पुन: उभरती बीमारियों की निगरानी, निदान एवं अनुसंधान क्षमता को बढ़ाना; और सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थितियों को प्रभावी रूप सें सक्षम बनाकर एक लचीली स्वास्थ्य प्रणाली विकसित करना है।
पीएम-अभिम के दायरे में प्रयोगशालाओं, गहन देखभाल अवसंरचना, रोग निगरानी प्रणालियों एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्रों में निवेश के माध्यम से ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों में सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करना शामिल है। इस योजना में केंद्रीय क्षेत्र (सीएस) और केंद्र प्रायोजित योजना (सीएसएस) घटक शामिल हैं, जिनके अंतर्गत राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को जिला और ब्लॉक स्तर पर स्वास्थ्य अवसंरचना को मजबूत करने के साथ-साथ राष्ट्रीय संस्थानों के विस्तार के लिए सहायता प्रदान की जाती है।
योजना के सीएसएस घटकों के अंतर्गत, योजना अवधि (2021-2026) के दौरान राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों को जिन पांच गतिविधियों में सहायता प्रदान की जाती है, वे निम्नलिखित हैं:
- आयुष्मान भारत स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों के रूप में 17,788 भवन रहित उप-केंद्रों का निर्माण, जिन्हें अब आयुष्मान आरोग्य मंदिर (एएएम) कहा जाता है।
- शहरी क्षेत्रों में, झुग्गी-झोपड़ी एवं झुग्गी-झोपड़ी जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान केंद्रीत करते हुए 11,024 स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र (अब एएएम) स्थापित करने की परिकल्पना।
- ब्लॉक स्तर पर 3,382 ब्लॉक जन स्वास्थ्य इकाइयों (बीपीएचयू) की स्थापना।
- देश में 730 जिला एकीकृत जन स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं की स्थापना, जिसमें प्रत्येक जिले में ऐसी एक प्रयोगशाला होगी।
- 5 लाख से अधिक जनसंख्या वाले सभी जिलों में 602 गहन चिकित्सा अस्पताल ब्लॉक की स्थापना।
योजना के सीएसएस घटक के तहत, पीएम-अभिम के अंतर्गत राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को 5 वर्ष के लिए यानी वित्त वर्ष 2021-22 से वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 32,928.82 करोड़ रुपये की राशि के लिए प्रशासनिक अनुमोदन प्रदान की गई हैं, जिसका उद्देश्य जिला अस्पतालों/सरकारी मेडिकल कॉलेज स्तर पर 9,519 भवन रहित एसएचसी-एएएम, 5,456 शहरी-एएएम, 2,151 बीपीएचयू, 744 आईपीएचएल और 621 सीसीबी का निर्माण/सुदृढ़ीकरण एवं स्थापना करना है।
पीएम-अभिम के अंतर्गत राज्य/केंद्र शासित प्रदेशवार प्रगति का विवरण अनुलग्नक में दिया गया है।
पीएम-अभिम के कार्यान्वयन के दौरान, राज्यों को कई अड़चनों का सामना करना पड़ा, जिनमें पर्याप्त भूमि की उपलब्धता में देरी, निविदा एवं खरीद प्रक्रिया का लंबा समय, परियोजना क्रियान्वयन एजेंसियों के साथ समन्वय की चुनौतियां, और पूर्व-कार्यान्वयन की तैयारियों में कमी जिनमें अधूरी डीपीआर एवं लंबित अनुमोदन शामिल हैं।
इन चुनौतियों से निपटने एवं योजना के अंतर्गत बनाए गए स्वास्थ्य संरचना को समय पर पूरा करने एवं प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने कई उपाय किए हैं। इनमें वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और कार्यान्वयन एजेंसियों के साथ नियमित बैठकों के माध्यम से परियोजना के प्रगति की निरंतर निगरानी एवं समीक्षा; राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को अनुमोदित परियोजनाओं के लिए भूमि और स्थल की तैयारी सुनिश्चित करने का निर्देश देना; और आवधिक समीक्षाओं के माध्यम से अंतर-विभागीय समन्वय बढ़ाना शामिल है। तकनीकी सहायता एवं कार्यान्वयन एजेंसियों के साथ समन्वय के माध्यम से राज्य स्तर पर परियोजना प्रबंधन और कार्यान्वयन क्षमता को मजबूत करने के प्रयास भी किए गए हैं ताकि डीपीआर की मंजूरी और आवश्यक खरीद संबंधी स्वीकृतियों में तेजी लाई जा सके। इसके अलावा, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को अवसंरचना घटकों के समय पर कार्यान्वयन के लिए तकनीकी मार्गदर्शन, मानक डिजाइन और परिचालन दिशानिर्देश प्रदान किए गए हैं, साथ ही अनुमोदित परियोजनाओं के समय पर निष्पादन को सुविधाजनक बनाने के लिए निधि जारी करने और उपयोग करने के तंत्र को सुव्यवस्थित किया गया है।
यह जानकारी केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्री प्रतापराव जाधव ने आज लोकसभा में लिखित उत्तर में दी।
पीके/केसी/एके /डीके
(रिलीज़ आईडी: 2239827)
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