राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग
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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने लापता होने वाले लोगों की संख्या में बढ़ौतरी और उनका पता लगाने की धीमी दर पर स्वतः संज्ञान लिया है


मानव तस्करी के अधिकतम मामले ओडिशा, बिहार, तेलंगाना, राजस्थान और महाराष्ट्र में दर्ज किए गए हैं

आयोग ने बिहार, ओडिशा, तेलंगाना, महाराष्ट्र और राजस्थान के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशको को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर इस मामले पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है

आयोग ने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो से इन पांच राज्यों में लापता व्यक्तियों की स्थिति पर जानकारी मांगी है

प्रविष्टि तिथि: 13 MAR 2026 12:43PM by PIB Delhi

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने बिहार में वर्ष 2013 से हर वर्ष 12,000 से 14,000 व्यक्तियों के लापता होने से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लिया है। लापता व्यक्तियों में से केवल दो-तिहाई बच्चों का ही पता लगाया जा सका है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के अनुसार मानव तस्करी के अधिकतम मामले ओडिशा, बिहार, तेलंगाना और महाराष्ट्र में दर्ज किए गए हैं। नाबालिग लड़कों की तस्करी के मामलों में ओडिशा सबसे आगे है और बिहार दूसरे स्थान पर है। नाबालिग लड़कियों की तस्करी के सबसे अधिक मामले राजस्थान में दर्ज किए गए हैं। 9 मार्च 2026 को प्रकाशित मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इन लापता बच्चों को भीख मांगने, बाल श्रम, वेश्यावृत्ति और अन्य अवैध गतिविधियों में धकेले जाने की आशंका है।

आयोग ने कहा है कि यदि मीडिया रिपोर्ट में दी गई जानकारी सत्य है, तो यह मानवाधिकारों के उल्लंघन का गंभीर मामला है। आयोग ने लापता होने वाले लोगों की संख्या में बढ़ौतरी और उनका पता लगाने की धीमी दर पर स्वतः संज्ञान लिया है और बिहार, ओडिशा, तेलंगाना, महाराष्ट्र और राजस्थान के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर इस मामले पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

रिपोर्ट में लापता व्यक्तियों में बच्चों की बढ़ती संख्या के मामले में उठाए गए/प्रस्तावित कदमों का विवरण होने की उम्मीद है। आयोग ने एनसीआरबी से इन राज्यों में लापता व्यक्तियों की स्थिति पर नवीनतम आंकड़े दो सप्ताह के भीतर उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।

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पीके/केसी/जेके/एनजे


(रिलीज़ आईडी: 2239522) आगंतुक पटल : 84
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