अंतरिक्ष विभाग
छात्र अनुसंधानकर्ताओं की भागीदारी
प्रविष्टि तिथि:
12 MAR 2026 3:37PM by PIB Delhi
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) छात्र शोधकर्ताओं को वास्तविक अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी परियोजनाओं में भाग लेने का अवसर प्रदान करने के लिए सुनियोजित कार्यक्रम चलाता है। ये कार्यक्रम इस प्रकार हैंः
1. छात्र उपग्रह परियोजनाएंः यूआर राव उपग्रह केंद्र के अंतर्गत इसरो की यह पहल शैक्षिक संस्थानों और छात्र समूहों को तकनीकी मार्गदर्शन, समेकन सहयोग और प्रक्षेपण के अवसरों सहित छात्र उपग्रहों और पेलोड को डिजाइन और विकसित करने में सक्षम बनाती है।
2. इंटर्नशिप और परियोजना प्रशिक्षु योजनाएंः ये योजनाएं मान्यताप्राप्त संस्थानों के स्नातक, स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट उपाधि वाले छात्रों के लिए हैं। इनके अंतर्गत इसरो केंद्रों में व्यावहारिक अनुसंधान संबंधी अनुभव प्रदान किया जाता है।
3. अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी विकास केंद्र (एसटीआईसी): इसरो ने स्वदेशी अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों के विकास के लिए अनुसंधान के उद्देश्य से देश के विभिन्न क्षेत्रों के सभी राज्यों को शामिल करते हुए 6 एसटीआईसी केंद्र स्थापित किए हैं। एसटीआईसी परियोजनाओं को प्रोफेसरों और इसरो के वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में छात्र संचालित करते हैं।
इसके अलावा, भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्द्धन और प्राधिकरण केंद्र (इन-स्पेस) ने 2 छात्र प्रतियोगिताएं आयोजित की हैं। इनका उद्देश्य प्रतिभागियों को कैन-आकार के (7यू) उपग्रहों और मॉडल रॉकेटों के डिजाइन, विकास और निर्माण से परिचित कराना है। इन प्रतियोगिताओं में लगभग 850 छात्रों ने 97 टीमों में भाग लिया है।
अब तक, इन-स्पेस ने 17 छात्र उपग्रहों/पेलोड को प्राधिकृत किया है जिनमें से 11 सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किए जा चुके हैं। इनके विवरण इस प्रकार हैंः
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क्रम संख्या
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उपग्रह/पेलोड
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शामिल संस्थान
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1
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आजादीसैट 1 उपग्रह
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स्पेसकिड्ज इंडिया, चेन्नई
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2
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आजादीसैट 2 उपग्रह
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स्पेसकिड्ज इंडिया, चेन्नई
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3
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पीएसएलवी—सी 55 के पीओईएम—2 पर स्टारबेरीसेंस
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भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान, बेंगलूरू
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4
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पीएसएलवी—सी 55 के पीओईएम—2 पर एआरआईएस
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भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान, तिरुवनंतपुरम
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5
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पीएसएलवी—सी 55 के पीओईएम—2 पर पीआईएलओटी
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भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान, तिरुवनंतपुरम
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6
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पीएसएलवी—सी 58 के पीओईएम—3 पर बिलीफसैट—0
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केजे सोमैया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मुंबई
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7
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पीएसएलवी—सी 58 के पीओईएम—3 पर वीसैट
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एलबीएस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी फॉर वूमन, त्रिवेंद्रम
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8
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एसआर—0 डेमोसैट उपग्रह
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स्पेसकिड्ज इंडिया, चेन्नई
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9
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पीएसएलवी—सी 60 के पीओईएम—4 पर अंतरिक्ष में एमिटी संयंत्र प्रायोगिक मॉड्यूल (एपीआईएमएस)
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एमिटी विश्वविद्यालय महाराष्ट्र, मुंबई
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10
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पीएसएलवी—सी 60 के पीओईएम—4 पर एसटीईआरजी—पी 1.0
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डॉ विश्वनाथ कराड एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी, पुणे
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11
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पीएसएलवी—सी 60 के पीओईएम—4 पर आरवीसैट-1
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आरवी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, बेंगलूरू
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12
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पीएसएलवी—सी 60 के पीओईएम—4 पर बीजीएस—अर्पित
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एसजेसी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, चिकबल्लारपुर, कर्नाटक
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13
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लचित—1
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असम डॉन बॉस्को यूनिवर्सिटी, सोनापुर, असम
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14
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डीसैट—1 अंतरिक्ष यान
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अटल इंक्यूबेशन सेंटर, दयानंद सागर यूनिवर्सिटी इनोवेशन फाउंडेशन, बेंगलूरू
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15
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एमओआई—1 अंतरिक्ष यान पर एसबीबी— 1 पेलोड
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ब्लूब्लाक्स मोंटेसरी एजुकेशनल सोसायटी, हैदराबाद
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16
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सीजीयूसैट— 1
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सीवी रमण ग्लोबल यूनिवर्सिटी, भुवनेश्वर
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17
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संस्कारसैट— 1
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लक्ष्मण ज्ञानपीठ, अहमदाबाद
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इसरो ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) और अन्य प्रमुख संस्थानों से परे अंतरिक्ष अनुसंधान को लोकतांत्रिक बनाने के लिए कदम उठाए हैं जिनमें से कुछ प्रमुख पहलकदमियां इस प्रकार हैंः
1. प्रायोजित अनुसंधान कार्यक्रमः देश भर के शैक्षिक संस्थान रेस्पॉन्ड परियोजनाओं के माध्यम से अंतरिक्ष संबंधी विभिन्न अनुसंधान गतिविधियों में भाग लेकर योगदान कर सकते हैं। इसरो ने रेस्पॉन्ड कार्यक्रम विकसित किया है जिसके अंतर्गत अंतरिक्ष विज्ञान, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष अनुप्रयोगों से संबंधित अनुसंधान और विकास गतिविधियों के संचालन के लिए शैक्षिक संस्थानों को आवश्यक वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान की जाती है।
2. क्षेत्रीय अंतरिक्ष शैक्षिक केंद्र (आरएसी-एस) यह भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की भविष्य की तकनीक और कार्यक्रम संबंधी आवश्यकताओं से संबंधित क्षेत्रों में उन्नत अनुसंधान कार्य करने और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए एक क्षेत्रीय स्तर की पहल है। आरएसी-एस इसरो कार्यक्रमों के लिए अभिगम बिंदु के रूप में कार्य करते हुए यह सुनिश्चित करता है कि छोटे शहरों और कॉलेजों के छात्र अंतरिक्ष विज्ञान, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष अनुप्रयोगों से अवगत हो पाएं।
3. अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी विकास केंद्र (एसटीआईसी) इसरो ने स्वदेशी अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों के विकास के लिए अनुसंधान करने के उद्देश्य से देश के विभिन्न क्षेत्रों के दूसरे और तीसरे दर्जे के शहरों में 6 एसटीआईसी स्थापित किए हैं।
इन-स्पेस ने अंतरिक्ष गतिविधियों में शैक्षिक संस्थानों और छात्रों की भागीदारी बढ़ाने के लिए निम्नलिखित कदम भी उठाए हैं-
- भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 के अनुरूप देश में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी शिक्षा को आगे बढ़ाने के महत्व को ध्यान में रखते हुए भारत में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी शिक्षा को अपनाने के लिए एक राष्ट्रीय समिति का 2023 में गठन किया गया है।
- अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) ने अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में लघु पाठ्यक्रम को मंजूरी दे दी है।
छात्रों के शैक्षिक प्रचार-प्रसार गतिविधियों के लिए आवंटित वार्षिक बजट लगभग 1000 लाख रुपए है।
मॉडल रॉकेट्री और कैनसैट इंडिया छात्र प्रतियोगिता का आयोजन इन-स्पेस, इसरो और एएसआई ने संयुक्त रूप से अक्टूबर 2025 में उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में किया। इस प्रतियोगिता में देश भर के विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों के 500 छात्रों ने 67 टीमों में हिस्सा लिया। छात्रों ने कैनसैट पेलोड को लगभग 1 किलोमीटर की ऊंचाई तक ले जाने वाले मॉडल रॉकेटों को डिजाइन, निर्मित और प्रक्षेपित किया।
इन-सपेस की निम्नलिखित पहल/योजनाएं युवा अंतरिक्ष उद्यमियों को सहायता प्रदान कर रही हैं-
1. इन-स्पेस अपने स्थानिक विशेषज्ञों के जरिए मार्गदर्शन प्रदान कर रहा है।
2. उद्यमिता विकास के लिए उद्भवन पूर्व उद्यमिता सहायता कार्यक्रम।
3. इन-स्पेस के तकनीकी केंद्रों में सह-कार्य स्थान उपलब्ध कराया जा रहा है।
यह जानकारी केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्यमंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने गुरूवार को राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
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पीके/केसी/एसके
(रिलीज़ आईडी: 2239158)
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