भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार का कार्यालय
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पीआईबी और सोशल मीडिया सामग्री का मसौदा

प्रविष्टि तिथि: 11 MAR 2026 8:48PM by PIB Delhi

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली में "नेशनल समावेश 2026" का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम को I-STEM, दिल्ली विज्ञान और प्रौद्योगिकी (S&T) क्लस्टर (DRIIV), और डीन (R&D), आईआईटी दिल्ली के सहयोग से आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में 14 मंत्रालयों और विभागों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ पूरे भारत के अनुसंधान और नवाचार इकोसिस्टम से शोधकर्ता, वैज्ञानिक, शिक्षाविद, उद्यमी और नीति-निर्माता एक मंच पर एकत्रित हुए। पीएसए कार्यालय के वैज्ञानिक सचिव डॉ. (श्रीमती) परविंदर मैनी ने मुख्य अतिथि के रूप में इस कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। अन्य गणमान्य व्यक्तियों में आईआईटी दिल्ली के निदेशक प्रो. रंगन बनर्जी; DRIIV के कार्यवाहक सीईओ प्रो. अंबुज सागर; आईआईटी दिल्ली के एसोसिएट डीन (R&D) प्रो. राजेंद्र सिंह; पीएसए कार्यालय में वैज्ञानिक-F डॉ. विशाल चौधरी; और I-STEM के COO/राष्ट्रीय समन्वयक डॉ. हरिलाल भास्कर शामिल थे।

 

भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (पीएसए) के कार्यालय द्वारा समर्थित, I-STEM राष्ट्रीय डिजिटल मंच के रूप में विकसित हुआ हैयह विभिन्न संस्थानों में उपलब्ध उन्नत वैज्ञानिक उपकरणों और सुविधाओं की खोज और उन तक साझा पहुंच को संभव बनाता है। इस कार्यक्रम में I-STEM इकोसिस्टम से उभरने वाले सफल मॉडलों की जानकारी दी गई और पूरे देश में साझा अनुसंधान बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने में व्यापक भागीदारी को प्रोत्साहित किया गया।

 

 

मुख्य अतिथि के रूप में संबोधन में, डॉ. परविंदर मैनी ने भारत के अनुसंधान इकोसिस्टम को मजबूत करने में DRIIV क्लस्टर और I-STEM के बीच तालमेल पर बल दिया। उन्होंने कहा कि उभरती हुई प्रौद्योगिकियों के विकास के लिए उन्नत परीक्षण और सत्यापन बुनियादी ढांचे तक पहुंच अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि यह पहल 'वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन' (ओएनओएस) पहल की पूरक है, क्योंकि यह वैश्विक विद्वतापूर्ण ज्ञान तक पहुंच को साझा वैज्ञानिक उपकरणों तक पहुंच के साथ जोड़ती है। यह पहल 'अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन' (एएनआरएफ) के उस दृष्टिकोण के भी अनुरूप है, जिसका उद्देश्य उच्च-स्तरीय अनुसंधान बुनियादी ढांचे के उपयोग में सुधार करना और विभिन्न संस्थानों (जिनमें टियर-2 और टियर-3 शहरों के संस्थान भी शामिल हैं) में अवसरों का विस्तार करना है। उन्होंने भावी क्षमता निर्माण में तथा उन्नत परीक्षण और विश्लेषणात्मक सुविधाओं तक पहुंच प्रदान करके स्टार्टअप और एमएसएमई को सहायता देने में I-STEM की भूमिका पर भी बल दिया।

 

प्रो. रंगन बनर्जी ने उद्घाटन भाषण में हाई-एंड वैज्ञानिक उपकरणों तक साझा पहुँच के लिए एकीकृत राष्ट्रीय इकोसिस्टम के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि संस्थानों में अनुसंधान और नवाचार को मज़बूत करने के लिए इस तरह का बुनियादी ढाँचा ज़रूरी है। इस अवसर पर प्रो. अंबुज सागर ने अनुसंधान परिणामों को लागू करने लायक समाधानों में बदलने में एसएंडटी क्लस्टरों की भूमिका पर बल दिया। उन्होंने कहा कि DRIIV जैसे क्लस्टर प्रौद्योगिकी के विकास और उसे लागू करने की गति तेज़ करने के लिए शिक्षा जगत, सरकार और उद्योग के बीच तालमेल बिठाकर काम करते हैं। इस पहल का संक्षिप्त विवरण देते हुए, डॉ. विशाल चौधरी ने 2020 में प्रधानमंत्री की विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सलाहकार परिषद (PM-STIAC) ​​के तहत I-STEM के लॉन्च के बाद से हुई इसकी प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह प्लेटफ़ॉर्म अब 3,400 से ज़्यादा संस्थानों और 14 मंत्रालयों में 30,000 से ज़्यादा वैज्ञानिक उपकरणों को एक साथ जोड़ता है, और इसके 55,000 से ज़्यादा पंजीकृत उपयोगकर्ता हैं। यह प्लेटफ़ॉर्म सुविधाओं की पारदर्शी खोज और साझा पहुँच को संभव बनाकर बुनियादी ढाँचे के बिखराव और उसके कम उपयोग की चुनौतियों का समाधान करता है।

 

 

उद्घाटन सत्र के दौरान, डॉ. परविंदर मैनी ने I-STEM कैटलॉग, PRISM+ पोर्टल उपयोगकर्ता पुस्तिका, और I-STEM सॉफ़्टवेयर पोर्टल जारी किए। सार्वजनिक अनुसंधान पहुँच पहल, OpenTheLab के संस्थापक संरक्षकों को भी साझा वैज्ञानिक बुनियादी ढाँचे को मज़बूत करने में योगदान के लिए सम्मानित किया गया। उद्घाटन सत्र का समापन प्रो. राजेंद्र सिंह द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ। इस कार्यक्रम में डॉ. हरिलाल भास्कर ने  I-STEM प्रयासों और उनके राष्ट्रीय प्रभाव पर विस्तृत प्रस्तुति भी दी। इसके बाद I-STEM पोर्टल का लाइव प्रदर्शन किया गया। इस कार्यक्रम में साझा बुनियादी ढाँचे के आंदोलन में योगदान के लिए I-STEM उत्कृष्टता पुरस्कारों के माध्यम से संस्थानों और व्यक्तियों को भी सम्मानित किया गया।

समावेश 2026 ने अनुसंधान समुदाय के बीच संवाद, सहयोग और ज्ञान के आदान-प्रदान के लिए महत्वपूर्ण मंच के रूप में काम किया। चर्चाओं में अनुसंधान बुनियादी ढाँचे को मज़बूत करने और वैज्ञानिक प्रगति को वास्तविक दुनिया के तकनीकी समाधानों में बदलने की प्रक्रिया को तेज़ करने के लिए समन्वित राष्ट्रीय प्रयासों के महत्व पर बल दिया गया।

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