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पर्यटन और विकास का शिल्प
बजट 2026-27 श्रृंखला
प्रविष्टि तिथि:
24 FEB 2026 11:44AM by PIB Delhi
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मुख्य बिंदु
- संघीय बजट 2026-27 में अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, असम, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में मंदिरों और मठों के संरक्षण, तीर्थ केंद्रों की निर्माण तथा आवागमन और अन्य सुविधाओं में सुधार का प्रस्ताव किया गया है।
- भारत पहले ‘ग्लोबल बिग कैट समिट’ की मेजबानी करेगा जिसमें 95 देशों के नेता और मंत्री हिस्सा लेंगे। इस सम्मेलन से पर्यावरण के अनुकूल पर्यटन में भारत के नेतृत्व को मजबूती मिलेगी।
- पूर्वोदय राज्यों में पांच बड़े पर्यटन केंद्रों का विकास किया जाएगा और आवागमन के लिए 4000 ई-बसें चलाई जाएंगी।
- भारत को चिकित्सा पर्यटन सेवाओं के केंद्र के रूप में बढ़ावा देने के उद्देश्य से पांच क्षेत्रीय चिकित्सा केंद्रों की स्थापना की जाएगी।
- लोथल, धोलावीरा, राखीगढ़ी, आदिचनल्लूर, सारनाथ, हस्तिनापुर और लेह पैलेस समेत 15 पुरातात्विक स्थलों को जीवंत और अनुभवजन्य सांस्कृतिक स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा।
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परिचय
पर्यटन भारतीय अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख क्षेत्र है। इसमें रोजगार सृजन, विदेशी मुद्रा अर्जन और संतुलित क्षेत्रीय विकास की अपार संभावनाएं हैं। पर्यटन क्षेत्र के मजबूत गुणक प्रभाव तथा आतिथ्य, परिवहन, हस्तशिल्प और इनसे संबंधित सेवाओं में आजीविका सृजन की क्षमता को देखते हुए 2026-27 के बजट में इसकी रणनीतिक विकास के उत्प्रेरक के रूप में पहचान की गई है। पर्यटन मंत्रालय के ‘इंडिया टूरिज्म डाटा कंपेंडियम 2025’ के अनुसार इस क्षेत्र का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में कुल प्रभाव 5.22 प्रतिशत और प्रत्यक्ष हिस्सा 2.72 प्रतिशत है। यह कुल रोजगार के 13.34 प्रतिशत हिस्से को समर्थन प्रदान करता है। कुल रोजगार में इसका प्रत्यक्ष हिस्सा 5.82 प्रतिशत है। इससे आजीविका सृजन और समावेशी विकास में इसकी मजबूत भूमिका का पता चलता है।
बजट में पर्यटन की आर्थिक प्राथमिकता को प्रतिबिंबित करते हुए सांस्थानिक क्षमता बढ़ाने, सेवा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने और स्थल प्रतिस्पर्धिता में सुधार लाने के लिए अनेक लक्षित हस्तक्षेपों का प्रस्ताव किया गया है। इनमें एक ‘राष्ट्रीय आतिथ्य संस्थान’ की स्थापना शामिल है जो कौशल की कमी को दूर कर शैक्षिक प्रशिक्षण को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप ढालेगा। प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ साझीदारी के जरिए प्रमुख पर्यटन स्थलों पर 10000 पर्यटक गाइडों के कौशल उन्नयन की एक प्रायोगिक परियोजना बनाई गई है। इन प्रयासों का मकसद महत्वपूर्ण पर्यटन क्षेत्रों में कार्यबल की उत्पादकता बढ़ाना और यात्रियों के अनुभवों को बेहतर बनाना है।

इस बजट में विरासत और अनुभवजन्य स्थलों के विकास, पर्यटन संपदाओं के लिए डिजिटल ज्ञान ग्रिड के सृजन तथा प्रकृति आधारित और वन्यजीव पर्यटन के संवर्द्धन के लिए प्रस्ताव रखे गए हैं। इन प्रस्तावों के जरिए गंतव्य विकास और क्षेत्र आधुनिकीकरण पर ध्यान केंद्रित किया गया है। अवसंरचना और आवागमन सुविधाओं में सुधार से दूरदराज के और उभरते हुए स्थल पर्यटन मूल्य श्रृंखला से बेहतर ढंग से जुड़ेंगे जिससे स्थानीय उद्यमिता और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं को मदद मिलेगी।
कुल मिला कर संघीय बजट 2026-27 में पर्यटन को भारतीय अर्थव्यवस्था के ढांचे के अंदर जीवंत और उच्च प्रभाव वाले क्षेत्र के तौर पर रखा गया है। इसमें पर्यटन के क्षेत्र में रोजगार सृजन, निवेश संवर्द्धन और संवहनीय विकास पर स्पष्ट रूप से ध्यान केंद्रित किया गया है।
संघीय बजट 2026-27 में घोषणाएं
विषयगत और गंतव्य आधारित पर्यटन विकास 1
पूर्वोत्तर क्षेत्र में आध्यात्मिक पर्यटन और समृद्ध बौद्ध विरासत का महत्व बढ़ रहा है। सरकार ने इसे ध्यान में रखते हुए इस क्षेत्र में बौद्ध सर्किटों के विकास की नई योजना की घोषणा की है। इस योजना का उद्देश्य प्रमुख बौद्ध स्थलों पर पर्यटन अवसंरचना को मजबूत करते हुए क्षेत्र को वैश्विक बौद्ध पर्यटन के मानचित्र पर महत्वपूर्ण स्थल के रूप में स्थापित करना है।

अरुणाचल प्रदेश, असम, सिक्किम, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा को इस योजना के दायरे में रखा गया है। इन राज्यों में ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व के अनेक बौद्ध स्थल हैं। इस योजना में मंदिरों और मठों का विकास और संरक्षण, तीर्थ व्याख्या केंद्रों की स्थापना, प्रमुख बौद्ध स्थलों तक आवागमन सुविधा में सुधार तथा तीर्थयात्री सुविधाओं और विरासत से संबंधित अवसंरचना का निर्माण शामिल है। इस योजना से आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। यह योजना स्वदेशी और अंतरराष्ट्रीय तीर्थयात्रियों को आकर्षित करने के साथ ही पूर्वोत्तरी राज्यों के संवहनीय ढंग से सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान करेगी।
इस नई योजना को पर्यटन मंत्रालय की पिछली विषयगत पर्यटन पहलकदमियों के अनुभव के आधार पर तैयार किया गया है। इन पहलकदमियों में 2014-15 में शुरू की गई ‘स्वदेश दर्शन’ योजना खास तौर से शामिल है। इस योजना को देश भर में विषय आधारित पर्यटन सर्किटों के विकास के लिए बनाया गया था। इसमें चिह्नित स्थलों पर आवागमन, यात्री सुविधाओं और समग्र पर्यटक अनुभव के विकास के लिए गुणवत्तापूर्ण पर्यटन अवसंरचना के निर्माण पर जोर दिया गया।
इस योजना में पर्यटन के उभरते रुझानों और संवहनीयता की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए सुधार कर स्वदेश दर्शन 2.0 शुरू की गई। इसमें जिम्मेदार पर्यटन, सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत के संरक्षण, सामुदायिक भागीदारी तथा स्थानीय आजीविकाओं में सुधार पर ध्यान केंद्रित किया गया।
- स्वदेश दर्शन योजना के तहत अब तक 5290.33 करोड़ रुपए की लागत से 76 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें से 75 परियोजनाएं पूरी की जा चुकी हैं जिससे देश भर में पर्यटन अवसंरचना को मजबूत करने में हुई महत्वपूर्ण प्रगति का पता चलता है।2
इको-मार्ग और कनेक्टिविटी
बजट में प्रकृति-आधारित और संवहनीय पर्यटन पर जोर दिया गया है। इसके तहत हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, ईस्टर्न घाट की अराकू घाटी और वेस्टर्न घाट की पोथिगई मलाई में पर्यावरण अनुकूल स्थाई पहाड़ी और प्राकृतिक मार्गों के विकास का प्रस्ताव रखा गया है। ओडिशा, कर्नाटक और केरल के तटीय क्षेत्रों में प्रमुख प्रजनन स्थलों के साथ कछुआ मार्ग और आंध्र प्रदेश में पुलिकट झील के किनारे पक्षी-दर्शन (बर्ड-वॉचिंग) मार्ग जैसी पहलकदमियों का उद्देश्य भारत की जैव-विविधता का लाभ उठाना और पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा देना है।
- इसके अतिरिक्त, रेल और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी का विस्तार, जिसमें हाई-स्पीड रेल और दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंच को आसान बनाना भी शामिल है। इन प्रयासों से पर्यटन के लिए आवागमन सुगम होने के साथ ही नए उभरते हुए और पहले से स्थापित पर्यटन स्थलों तक पर्यटकों की पहुंच बढ़ने की उम्मीद है। इन उपायों को मूलभूत सुविधाओं के विकास के साथ पर्यटन योजना शामिल करने के लिए तैयार किया गया है, जो पर्यटकों को निर्बाध पहुंच प्रदान करने के साथ-साथ स्थानीय आर्थिक विकास और संवहनीयता को बढ़ावा देते हैं।
वैश्विक स्थिति: बिग कैट शिखर सम्मेलन 2026

केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषणा की गई है कि भारत 2026 में प्रथम वैश्विक बिग कैट शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। इस सम्मेलन में 95 'बिग कैट रेंज' देशों (वे देश जहाँ ये प्रजातियाँ पाई जाती हैं) के शासनाध्यक्षों और मंत्रियों को संरक्षण, आवास सुरक्षा, वैज्ञानिक सहयोग और संवहनीय वन्यजीव पर्यटन के लिए सामूहिक रणनीतियों पर विचार-विमर्श करने के लिए आमंत्रित किया गया है। यह पहल पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन और अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव सहयोग में भारत की भूमिका को और अधिक सुदृढ़ करने के सरकार के इरादे को दर्शाती है।3
इस क्षेत्र में भारत के नेतृत्व का एक और उदाहरण 'इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस' (आईबीसीए) की स्थापना और इसके संचालन में इसकी भूमिका है। यह एक संधि-आधारित अंतर-सरकारी संगठन है, जो ‘बिग कैट’ (बाघ की प्रजातियों) के संरक्षण के लिए वैश्विक सहयोग की सुविधा प्रदान करने हेतु समर्पित है। आईबीसीए के लिए समझौते को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित और कई देशों द्वारा समर्थन किया गया है, जिससे औपचारिक रूप से यह निकाय अस्तित्व में आ गया है। इसका मुख्यालय और सचिवालय भारत में है और इसके मिशन को आगे बढ़ाने के लिए बजटीय सहायता प्रदान कर रहा है।4
भारत दुनिया की सात प्रमुख बिग कैट प्रजातियों में से पाँच—बाघ, शेर, तेंदुआ, हिम तेंदुआ और चीता का गढ़ है।5
प्रथम वैश्विक बिग कैट शिखर सम्मेलन की मेजबानी से बिग कैट प्रजातियों के अंतरराष्ट्रीय संरक्षण नेतृत्व में भारत की स्थिति और मजबूत होने, सर्वोत्तम पद्धतियों के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलने और बिग कैट की प्रजातियां पाए जाने वाले अन्य देशों के बीच सहयोग बढ़ने की उम्मीद है।
संस्थागत और मानव पूंजी सुधार
बजट में पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र में संस्थागत क्षमता और मानव पूंजी को मजबूत करने के उपायों का प्रस्ताव किया गया है। एक प्रमुख पहल के रूप में 'राष्ट्रीय होटल प्रबंधन एवं खानपान प्रौद्योगिकी परिषद' को अपग्रेड करके 'नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटैलिटी' (राष्ट्रीय आतिथ्य संस्थान) बनाने का प्रस्ताव है, जिसका उद्देश्य उच्च गुणवत्ता वाली पेशेवर शिक्षा, उद्योग के अनुकूल पाठ्यक्रम, अनुसंधान के अवसर और अंतरराष्ट्रीय सहयोग प्रदान करना है। यह संस्थान शिक्षा जगत, उद्योग और सरकार के बीच एक सेतु के रूप में कार्य करेगा।

इसके अतिरिक्त, 20 प्रतिष्ठित पर्यटक स्थलों में 10,000 पर्यटक गाइडों के कौशल विकास के लिए एक प्रमुख योजना की घोषणा की गई है। भारतीय प्रबंधन संस्थान के सहयोग से कार्यान्वित किए जाने वाले इस कार्यक्रम में 12-सप्ताह का हाइब्रिड प्रशिक्षण मॉडल अपनाया जाएगा, जिसमें कक्षा निर्देश, फील्ड प्रशिक्षण और डिजिटल मॉड्यूल शामिल होंगे। इस पहल से पेशेवर गाइड की सेवाओं में सुधार, पर्यटकों के बेहतर अनुभव और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।6
ये कदम पर्यटन मंत्रालय की वर्तमान पहलों, जैसे 'सेवा प्रदाताओं के लिए क्षमता निर्माण' (सीबीएसपी) और 'अतुल्य भारत पर्यटक सुविधा' (आईआईटीएफ) कार्यक्रमों के पूरक हैं, जिनका उद्देश्य पर्यटन सेवाओं में कौशल, प्रमाणन मानकों और व्यावसायिकता को बढ़ाना है। सामूहिक रूप से, इन उपायों का लक्ष्य दक्ष प्रतिभाओं को तैयार करना और स्वदेशी पर्यटन स्थलों पर सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करना है।
डिजिटल और विरासत अवसंरचना

योजना, अनुसंधान, प्रचार और पर्यटकों की भागीदारी को बढ़ाने के लिए, बजट में 'नेशनल डेस्टिनेशन डिजिटल नॉलेज ग्रिड' बनाने की घोषणा की गई है। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म पूरे भारत में सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और विरासत स्थलों का दस्तावेजीकरण करेगा, जो शोधकर्ताओं, कंटेंट क्रिएटरों, इतिहासकारों और पर्यटन क्षेत्र के लिए संसाधन उपलब्ध कराएगा। यह ग्रिड डेटा-संचालित निर्णय लेने में सहायता करेगा, पर्यटक स्थलों के प्रचार में और विरासत प्रबंधन में मदद करेगा।
बजट में लोथल, धोलावीरा, राखीगढ़ी, सारनाथ, हस्तिनापुर और लेह पैलेस सहित 15 पुरातात्विक स्थलों को जीवंत अनुभवजन्य सांस्कृतिक पर्यटक स्थलों के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव भी किया गया है। इसके तहत पर्यटकों को गहन और तल्लीन कर देने वाला अनुभव प्रदान करने के लिए क्यूरेटेड वॉकवे (विशेष रूप से तैयार पैदल मार्ग), व्याख्या केंद्र (इंटरप्रिटेशन सेंटर), पर्यटक सुविधाएं और विरासत संरक्षण अवसंरचना का निर्माण किया जाएगा।
ये पहलें 'स्वदेश दर्शन 2.0' और एसएएससीआई (राज्यों को पूंजी निवेश हेतु विशेष सहायता) जैसी चलाई जा रही योजनाओं पर आधारित हैं, जो पर्यटन के बुनियादी ढांचे और विरासत विकास के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती हैं। 'प्रसाद' योजना के पूरक के रूप में, इन उपायों का उद्देश्य भारत की सांस्कृतिक संपदाओं को संरक्षित करना और साथ ही संवहनीय पर्यटन और स्थानीय सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देना है।
चिकित्सा पर्यटन और आरोग्य एकीकरण 7
केंद्रीय बजट 2026-27 में पाँच क्षेत्रीय चिकित्सा हब स्थापित करने के लिए राज्यों को सहायता प्रदान करने की एक योजना शुरू की गई है, जिसका उद्देश्य भारत को चिकित्सा और आरोग्य पर्यटन के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करना है। ये हब सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं, आयुष केंद्रों, चिकित्सा मूल्य पर्यटन सुविधा केंद्रों और निदान, इलाज के पश्चात देखभाल एवं पुनर्वास के बुनियादी ढांचे को शामिल करेंगे। इससे वैश्विक स्वास्थ्य यात्रा के क्षेत्र में भारत की प्रतिस्पर्धिता में वृद्धि होगी।
ये पहलें आरोग्य और पारंपरिक चिकित्सा को पर्यटन के साथ एकीकृत करने के सरकार के व्यापक प्रयासों पर आधारित हैं। इनमें जामनगर में 'डब्ल्यूएचओ ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर' (विश्व स्वास्थ्य संगठन का वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र) का उन्नयन शामिल है, साथ ही सेवा की गुणवत्ता और पर्यटकों की संतुष्टि में सुधार के लिए स्थानीय स्वास्थ्य एवं आतिथ्य अवसंरचना को बेहतर बनाना भी शामिल है।

क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा: पूर्वोदय राज्य
केंद्रीय बजट 2026-27 में क्षेत्रीय विकास को गति देने और पर्यटन अवसंरचना का विस्तार करने के सरकार के दृष्टिकोण के तहत पूर्वोदय राज्यों—बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और आंध्र प्रदेश पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है। बजट में एक एकीकृत विकास ढांचे के अंतर्गत प्रत्येक पूर्वोदय राज्य में एक पर्यटन स्थल (कुल पाँच) विकसित करने का प्रस्ताव है जिसमें ईस्ट कोस्ट इंडस्ट्रियल कॉरिडोर' भी शामिल है। इसका केंद्र दुर्गापुर होगा और सभी जगह से सुव्यवस्थित तरीके से जुड़ा होगा। इसके साथ ही, इन क्षेत्रों में यात्रियों के लिए बेहतर कनेक्टिविटी, स्वच्छ परिवहन और सुगम पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 4,000 इलेक्ट्रिक बसों का प्रावधान किया गया है। 8 9

पूर्वोदय पर यह जोर पर्यटन-आधारित विकास के हिस्से के रूप में स्थानीय सांस्कृतिक, प्राकृतिक और विरासत संपत्तियों का लाभ उठाने की एक व्यापक रणनीति को दर्शाता है, जो बुनियादी ढांचे के विस्तार और रोजगार सृजन का पूरक है। पर्यटन विकास को बेहतर परिवहन कनेक्टिविटी और सार्वजनिक सेवाओं के साथ जोड़कर, इस पहल का उद्देश्य पूर्वी क्षेत्र को स्वदेशी और अंतरराष्ट्रीय दोनों पर्यटकों के लिए एक प्रतिस्पर्धी और आकर्षक स्थल के रूप में स्थापित करना है।
निष्कर्ष
केंद्रीय बजट 2026-27 की पर्यटन के क्षेत्र में उठाई गई ये पहलकदमियां आर्थिक विकास, रोजगार और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने के लिए एक रणनीतिक योजना प्रस्तुत करती हैं। यह अवसंरचना, विरासत संरक्षण, कौशल विकास, डिजिटल प्रणालियों और आध्यात्मिक, पर्यावरण, साहसिक एवं चिकित्सा पर्यटन जैसे विशिष्ट पर्यटन क्षेत्रों में सुधार के लिए नई योजनाओं को मौजूदा कार्यक्रमों के साथ जोड़ती हैं।
प्रमुख क्षेत्रों में उत्तर-पूर्व में 'बुद्ध सर्किट' विकसित करना, आतिथ्य सत्कार, डिजिटल ज्ञान और विरासत स्थलों को अपग्रेड करना शामिल है, जो संवहनीय और गंतव्य-केंद्रित पर्यटन के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। ये उपाय 'स्वदेश दर्शन 2.0', 'प्रसाद' और क्षमता-निर्माण जैसी योजनाओं के साथ एकीकृत हैं, जो नीतिगत निरंतरता और संसाधनों की दक्षता सुनिश्चित करते हैं।
अवसंरचना, समुदाय और संस्कृति को जोड़ना भारत को एक प्रतिस्पर्धी और समावेशी पर्यटन केंद्र बनाने के लिए एक ठोस आधार स्थापित करता है। इसके सफल कार्यान्वयन से पर्यटकों के अनुभव में सुधार होने, रोजगार के अवसर पैदा होने और वैश्विक स्तर पर भारत की सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक विरासत को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जिससे पर्यटन सामाजिक-आर्थिक विकास का एक प्रमुख साधन बन जाएगा।
फुटनोट
1 Press Release: Press Information Bureau
2 https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2212575®=3&lang=1
3 https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2221781®=3&lang=2
4 https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2107821®=3&lang=2
5 https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2107821®=3&lang=2
6 https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2221403&lang=1®=3&utm_source
7 https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2221403&lang=1®=3&utm_source
8 https://www.pib.gov.in/PressNoteDetails.aspx?NoteId=153202&ModuleId=3®=3&lang=2
9 https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2221403®=3&lang=2
संदर्भ
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2221781®=3&lang=1
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2221455®=3&lang=1
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2221458®=3&lang=1
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2221403&lang=1®=3&utm_source
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2221403&lang=1®=3&utm_source
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2221403&utm_source=chatgpt.com®=3& lang=2
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2221403&lang=1®=3&utm_source
https://www.pib.gov.in/PressNoteDetails.aspx?NoteId=153202&ModuleId=3®=3&lang=2
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2221403®=3&lang=2
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