इलेक्ट्रानिक्स एवं आईटी मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav AI Impact Summit 2026

बाधाएं मिटाते हुए: सबकी समान पहुंच के लिए बहुभाषी एआई


निजी, स्थानीय और बहुभाषी: नई दिल्ली में जन-सुलभ एआई के लिए एक नया दृष्टिकोण

एआई एट द एज: इंडिया एआई समिट 2026 में बिना इंटरनेट के अपनी भाषा में चलने वाले गैजेट का प्रदर्शन

ग्लोबल लीडर्स की मांग, अपनी भाषा, अपनी संस्कृति और जनता के लिए हो एआई

भाषिणी की तरह, हर भाषा जानने वाला एआई बनाएगा सबका डिजिटल भविष्य

प्रविष्टि तिथि: 20 FEB 2026 7:57PM by PIB Delhi

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के एक सत्र "सबके लिए एआई: निजी, स्थानीय और बहुभाषी तकनीक" में दिखाया गया कि कैसे भाषा की तकनीक और दुनिया भर की साझेदारी से हर नागरिक तक एआई पहुँचाया जा सकता है। अब इंटरनेट, शिक्षा या भाषा की कमी किसी के लिए बाधा नहीं बनेगी।

सत्र की शुरुआत करंट एआई और भाषिणी के एक लाइव डेमोंस्ट्रेशन के साथ हुई। जिसमें हाथ में पकड़ा जाने वाला एक ऐसा एआई डिवाइस दिखाया जो बिना इंटरनेट या बहुत कम सिग्नल के भी आपकी निजी जानकारी को सुरक्षित रखते हुए काम करता है। इस डेमो में दिखाया गया कि कैसे आवाज पहचानना, अनुवाद करना और चीज़ों को देखकर समझना एक ही छोटे डिवाइस पर संभव है। इससे लोग अपनी मातृभाषा में एआई से बात कर सकते हैं। यह तकनीक साबित करती है कि अब इंटरनेट की कमी वाले दूर-दराज के गाँवों तक भी एआई आसानी से पहुँच सकता है।

सत्र के दौरान एक खास चर्चा हुई, जिसका मुख्य विषय था—हमारी संस्कृति और नागरिकों की जरूरतों से जुड़ा एआई। इस बातचीत में भारत के इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अपर सचिव, श्री अभिषेक सिंह और फ्रांस सरकार की एआई के लिए विशेष दूत, ऐनी बौवेरोट शामिल हुई।

श्री अभिषेक सिंह ने नतीजों पर आधारित नवाचार पर जोर देते हुए कहा, "जब हम तकनीक को देखते हैं... तो हमारा आखिरी लक्ष्य सिर्फ मॉडल, हार्डवेयर या डेटा प्लेटफॉर्म बनाना नहीं है, असली मकसद तो यह है कि इससे नागरिकों और व्यापारियों के जीवन में क्या बदलाव आता है।" उन्होंने आगे कहा कि एआई सही मायनों में तब असरदार है "जब एक व्यक्ति जिसके पास न इंटरनेट है और न ही डिजिटल जानकारी, वह भी अपनी भाषा में मशीन से बात कर सके और उसे सही जवाब मिल जाए।“ स्थानीय संदर्भ पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि हमारी पुरानी परंपराओं और समाज के साझा ज्ञान को भी एआई सीखने वाली जानकारी का हिस्सा बनाना चाहिए। इसके लिए ऐसे नियम होने चाहिए जो जनता के फायदे, लोगों की गोपनीयता और निष्पक्षता के बीच सही संतुलन बनाए रखें।

ऐनी बौवेरोट ने एआई में सांस्कृतिक पहचान के महत्व पर ज़ोर देते हुए कहा, "एआई को दुनिया को सिर्फ कुछ ही बड़ी संस्कृतियों तक सीमित नहीं करना चाहिए। जब हम एआई का इस्तेमाल करें, तो हमें उसमें अपने समाज और अपनी पहचान की झलक मिलनी चाहिए।" उन्होंने डेटा साझा करने के लिए ऐसे सुरक्षित अंतरराष्ट्रीय नियमों की मांग की, जो कलाकारों और क्रिएटर्स के अधिकारों की रक्षा करें और जनता का भरोसा बनाए रखें। उन्होंने यह भी कहा कि "कोई भी देश अकेला पूरा एआई स्टैक तैयार नहीं कर सकता।"

सत्र की अगली चर्चा कल्पा इम्पैक्ट के सुशांत कुमार के साथ हुई। इसमें करंट एआई की सीईओ आयाह बदेइर और भाषिणी के सीईओ श्री अमिताभ नाग शामिल थे। उन्होंने चर्चा की कि कैसे बहुभाषी आई सबके लिए इंटरनेट और सरकारी सेवाओं को आसान बनाने की बुनियाद बन सकता है।

आयाह बदेइर ने करेंट एआई का वर्णन करते हुए इसे “पेरिस में आयोजित एआई शिखर सम्मेलन से उपजी एक सार्वजनिक-निजी भागीदारी” बताया, जिसका उद्देश्य “जनहित के लिए एआई का निर्माण करना है।” उन्होंने आगे कहा कि इसका लक्ष्य “वैश्विक समुदाय को एकजुट करना है ताकि मिलकर एक ऐसी ओपन एआई इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार की जा सके जो वर्टिकली इंटीग्रेटेड हो और जिसे सार्वजनिक संपत्ति के रूप में जारी किया जाए।” अपने अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने रेखांकित किया, अगर तकनीक के निर्माण में हमारी भागीदारी नहीं है, तो वह हमारे हित में भी नहीं होगी।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एआई सिस्टम में भाषाई और सांस्कृतिक विविधता को शुरुआत से ही शामिल किया जाना चाहिए। इसके साथ ही, उन्होंने पारदर्शिता और ओपन हार्डवेयर के महत्व पर भी बल दिया ताकि तकनीकी निर्भरता से बचा जा सके और स्वतंत्र सामुदायिक नवाचार को बढ़ावा मिले।

अमिताभ नाग ने इस बात पर प्रकाश डाला कि किस प्रकार बहुभाषी वास्तविकताओं ने भाषिणी के मिशन को आकार दिया है। उन्होंने कहा, हम सभी पहले अपनी मातृभाषा के साथ बड़े होते हैं और फिर उन फॉर्मल सिस्टम में प्रवेश करते हैं जहाँ कई भाषाएँ आवश्यक हो जाती हैं।” भारतीय भाषाओं में सीमित डिजिटल डेटा की चुनौती का जिक्र करते हुए उन्होंने नोट किया कि उपयोगी मॉडल बनाने के लिए व्यापक डेटासेट संग्रह और डोमेन सहयोग महत्वपूर्ण थे। उन्होंने साझा किया, आज, डिप्लॉयमेंट और निरंतर सीखने के बाद, हम प्रतिदिन लगभग 15 मिलियन इंफरेंस चला रहे हैं।” उन्होंने अपनी बात जोड़ते हुए कहा, उद्देश्य सरल है—कोई भी भाषा पीछे नहीं छूटनी चाहिए और कोई भी नागरिक पीछे नहीं छूटना चाहिए।”

कुल मिलाकर, इस सत्र ने एक साझा दृष्टिकोण को रेखांकित किया: बहुभाषी और सांस्कृतिक रूप से सशक्त एआई, जो ओपन इंफ्रास्ट्रक्चर, गोपनीयता-संरक्षित डिज़ाइन और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग द्वारा संचालित हो, सबकी समान पहुँच एक सेतु का काम कर सकता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि तकनीकी प्रगति विविधता को मिटाने के बजाय उसे और अधिक मजबूती प्रदान करे।

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पीके/केसी/डीवी


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