ग्रामीण विकास मंत्रालय
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डीएवाई-एनआरएलएम और पीसीआई इंडिया ने सार्वजनिक खरीद के माध्यम से महिला नेतृत्व वाले उद्यमों को बढ़ावा देने पर राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया


स्वयं सहायता समूहों को सरकारी खरीद प्रणालियों में एकीकृत करने के लिए माइक्रोसाइट और क्षेत्रीय प्लेबुक जारी की गईं

ग्रामीण विकास मंत्रालय सचिव ने कहा कि महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण केवल कल्याणकारी योजना नहीं है, बल्कि भारत के विकास, अनुकूलता और सामाजिक स्थिरता में एक रणनीतिक निवेश है

प्रविष्टि तिथि: 18 FEB 2026 11:03AM by PIB Delhi

दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम), ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार ने पीसीआई इंडिया के सहयोग से 17 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में "सार्वजनिक खरीद के माध्यम से महिला उद्यमों को बढ़ावा देना" विषय पर एक राष्ट्रीय शिक्षण प्रसार कार्यशाला का आयोजन किया।

इस कार्यशाला में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एसआरएलएम), प्रमुख मंत्रालयों, विकास भागीदारों, सीएसआर प्रमुखों और उद्योग जगत के हितधारकों को एक साथ एक मंच पर लाते हुए सार्वजनिक खरीद प्रणालियों में स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) उद्यमों की सफल गतिविधियों को प्रदर्शित किया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिला नेतृत्व वाले उद्यमों (डब्ल्यूएलई) को सरकारी आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्‍यापक स्‍तर पर भागीदारी के लिए संस्थागत मार्ग को मजबूत करना था।

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ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव श्री शैलेश कुमार सिंह ने अपने विशेष संबोधन में कहा कि महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण केवल कल्याणकारी योजना नहीं है, बल्कि यह भारत की वृद्धि, मजबूती और सामाजिक स्थिरता में एक रणनीतिक निवेश है। "विकसित भारत के अंतर्गत महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देना: महिला नेतृत्व वाले उद्यमों और स्वयं सहायता समूहों के लिए नीतिगत दिशा-निर्देश" विषय पर अपने विचार व्‍यक्‍त करते हुए उन्होंने इस बात पर बल दिया कि विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में भारत का विकास महिलाओं द्वारा संचालित गहरे सामाजिक परिवर्तन को दर्शाता है। उन्होंने सार्वजनिक खरीद को एक शक्तिशाली साधन बताया जो राज्य को अपनी क्रय शक्ति का पारदर्शी और समावेशी तरीके से उपयोग करने में सक्षम बनाता है, साथ ही महिला नेतृत्व वाले उद्यमों के माध्यम से गुणवत्ता और जवाबदेही को मजबूत करता है।

रक्षा मंत्रालय के डीएवाई-एनआरएलएम के अपर सचिव श्री टी.के. अनिल कुमार ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों और सेवाओं को सार्वजनिक खरीद प्रणालियों से जोड़ना अब एक रणनीतिक प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के उद्यमों को खरीद प्रक्रियाओं में व्यवस्थित रूप से एकीकृत करने के लिए मंत्रालयों, राज्यों और साझेदारों के बीच समन्वित प्रयास किए जाएंगे।

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इस अवसर पर, ग्रामीण विकास सचिव ने सम्‍पूर्ण भारत में महिला एवं लघु उद्यम (डब्लूएलई) को उद्यम स्थापित करने और उन्हें संचालित करने में मार्गदर्शन देने के लिए एक विशेष माइक्रोसाइट का शुभारंभ किया। इसके साथ ही, हाउसकीपिंग और लॉन्ड्री, खाद्य प्रसंस्करण और परिधान उद्यमों पर केंद्रित तीन क्षेत्र-विशिष्ट प्लेबुक जारी की गईं, साथ ही उद्यमों की यात्रा और संस्थागत शिक्षणों को प्रलेखित करने वाली एक कॉफी टेबल बुक भी जारी की गई।

इस कार्यक्रम में श्रीमती स्वाति शर्मा, संयुक्त सचिव, डे-एनआरएलएम; श्रीमती राजेश्वरी एसएम, निदेशक, डे-एनआरएलएम; श्री चरणजीत सिंह, पूर्व अतिरिक्त सचिव, डे-एनआरएलएम और श्रीमती नेहा गिरी (आईएएस), राज्य मिशन निदेशक, राजस्थान एसआरएलएम सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। विश्व बैंक और गेट्स फाउंडेशन जैसे विकास साझेदारों के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

राजस्थान, कर्नाटक और बिहार के स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) उद्यमियों ने सार्वजनिक खरीद प्रणालियों के साथ जुड़ने के अपने अनुभवों को साझा किया, जिसमें विस्तार, गुणवत्ता आश्वासन और स्थिरता के लिए के साधनों की जानकारी दी गई।

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इस कार्यशाला का उद्देश्य सहयोगात्मक कार्रवाई को उत्प्रेरित करना, महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण में तेजी लाना और स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) उद्यमों को सरकारी खरीद प्रणाली के भीतर विश्वसनीय आपूर्तिकर्ताओं के रूप में स्थापित करना था-जो कि विकसित भारत की परिकल्पना के अंतर्गत समावेशी और लिंग-संवेदनशील ग्रामीण विकास में योगदान देगा।

पृष्ठभूमि

वर्ष 2011 में शुभारंभ की गई डे-एनआरएलएम ने 10.05 करोड़ से अधिक ग्रामीण महिलाओं को 90.90 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों में संगठित किया है, जिससे विश्व के सबसे बड़े महिला नेतृत्व वाले सामुदायिक संस्था नेटवर्क में से एक का निर्माण हुआ है। स्थापना के बाद से, बैंकों ने महिला एसएचजी को 11,10,945 करोड़ रुपये से अधिक का संचयी ऋण प्रदान किया है, जिससे ग्रामीण सम्‍पूर्ण भारत में आजीविका, आय सुरक्षा और सामाजिक सशक्तिकरण में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

सार्वजनिक खरीद की परिवर्तनकारी क्षमता को पहचानते हुए, कार्यशाला में महिला नेतृत्व वाले उद्यमों (डब्ल्यूएलई) को बढ़ावा देने के लिए सरकारी खरीद प्रणालियों का लाभ उठाने पर विचार-विमर्श किया जाएगा। वैश्विक स्तर पर, सार्वजनिक खरीद सकल घरेलू उत्पाद का 13-20 प्रतिशत हिस्सा है, जो समावेशी आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है। भारत में, सरकारी नीतियों के अनुसार वार्षिक खरीद का 25 प्रतिशत सूक्ष्म और लघु उद्यमों से प्राप्त किया जाना अनिवार्य है, जिसमें से 3 प्रतिशत महिला नेतृत्व वाले उद्यमों के लिए आरक्षित है, जिससे स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) उद्यमों को सतत रूप से विस्तार करने के लिए एक संरचित मार्ग प्रशस्त होता है।

गेट्स फाउंडेशन द्वारा समर्थित पीसीआई इंडिया, महिला नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूह उद्यमों की योजना, बजट निर्माण, क्षमता निर्माण और प्रतिस्पर्धात्मक तत्परता को मजबूत करने के लिए डे-एनआरएलएम को तकनीकी सहायता प्रदान करता है, जिससे दीर्घकालिक स्थिरता और सार्वजनिक खरीद प्रणालियों में संस्थागत एकीकरण सुनिश्चित होता है। पीसीआई इंडिया 1998 से भारत में सरकारों, निजी क्षेत्रों और विकास संगठनों के साथ साझेदारी करते हुए जटिल सामाजिक मुद्दों को हल करके बड़े पैमाने पर समुदायों के जीवन को बदलने की दिशा में कार्य कर रहा है।

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पीके/केसी/एसएस/केक


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