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सूर्य के संख्यात्मक सिमुलेशन से मिली 'चुंबकीय पिंजरे' जो सौर तूफानों को नियंत्रित कर रहा है

प्रविष्टि तिथि: 13 FEB 2026 3:08PM by PIB Delhi

वैज्ञानिकों ने विस्फोटक सौर उभारों के उत्पत्ति को समझने में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। यह भौगोलिक-चुंबकीय तूफानों को प्रेरित कर सकते हैं और उपग्रहों को खतरे में डाल सकते हैं, पावर ग्रिड को बाधित कर सकते हैं, और अंतरिक्ष यात्रियों के जीवन को जोखिम में डाल सकते हैं।

सौर मौसम की पूर्वानुमान में यह एक केंद्रीय चुनौती है कि कौन-सी चुंबकीय संरचनाएं सूर्य पर कैसे फटेंगी इसकी भविष्यवाणी करना।

एक नए अध्ययन में भारतीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत स्वतंत्र संस्थान आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑबजर्वेशनल साइंसेज़ -एआरआईईएसके शोधकर्ताओं और उनके सहयोगियों ने कंप्यूटेशनल मॉडल का उपयोग किया। यह विद्युत-संचालक तरल पदार्थों जैसे प्लाज्मा के व्यवहार को और उनके चुंबकीय क्षेत्रों के साथ अंतःक्रिया (मैग्नेटोहाइड्रोडायनामिक (एमएचडी) सिमुलेशन को दर्शाते हैं, ताकि उन दो महत्वपूर्ण कारकों का पता लगाया जा सके जो इन विस्फोटों को नियंत्रित करते हैं। इन्हें कोरोनल मास एजेक्शन सी एम कहा जाता है। निष्कर्ष बताते हैं कि सूर्य का वैश्विक चुंबकीय क्षेत्र एक 'चुंबकीय पिंजरे' की तरह कार्य करता है, जबकि चुंबकीय मोड़ का तेज़ निर्माण इसे खोलने की कुंजी प्रदान करता है।

नए शोध का नेतृत्व एआरआईईएस के पीएचडी छात्र नितिन वशिष्ठ और वैज्ञानिक डॉ. वैभव पंत ने किया। यह समस्या 'ब्रेकआउट मॉडल' का उपयोग करके एक सी एम का अनुकरण करके हल करता है। यह बताने वाली प्रमुख थ्योरी है कि ये प्रकोप कैसे शुरू होते हैं। संख्यात्मक अनुकरणों ने यह दिखाया कि एक मजबूत वैश्विक चुंबकीय क्षेत्र एक रोकने वाले पिंजरे की तरह कार्य करता है। इससे सी एम   के सूर्य के गुरुत्वाकर्षण से बाहर निकलना काफी कठिन हो जाता है। जब शोधकर्ताओं ने एक कमजोर पृष्ठभूमि क्षेत्र के अंतर्गत सी एम का अनुकरण किया, तो यह सफलतापूर्वक फटा।

हालाँकि इस पृष्ठभूमि चुंबकीय क्षेत्र की शक्ति को थोड़ी बढ़ाकर, विस्फोट को रोका गया और अंततः असफल हो गया। यह परिणाम हाल ही में सूर्य से जुड़े एक पहेली की व्याख्या करने वाले सिद्धांत का मजबूत समर्थन प्रदान करता है। सौर चक्र 24, सौर चक्र 23 की तुलना में चुंबकीय रूप से कमजोर था, लेकिन विरोधाभासी रूप से अत्यधिक संख्या में सी एम उत्पन्न किए। टीम के सिमुलेशन इस विचार का समर्थन करते हैं कि उस चक्र के दौरान कमजोर पृष्ठभूमि चुंबकीय क्षेत्र ने विस्फोट की सीमा को कम किया। इससे अपेक्षाकृत छोटे घटनाओं को भी अंतरिक्ष में निकलने की अनुमति मिली।

अध्ययन का दूसरा प्रमुख परिणाम भविष्यवाणी के लिए एक नए उपकरण की पेशकश करता है। टीम ने यह जांचा कि सूरज की कोरोना में ऊर्जा और वक्रता, जिसे हेलिसिटी कहा जाता है, प्रविष्ट करने से परिणाम पर क्या प्रभाव पड़ता है। उन्होंने पाया कि केवल हेलिसिटी की मात्रा ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण है कि यह कितनी तेजी से बढ़ती है।

ऐब्सलूट नेट करंट हाइलाइटिस ( एन सी एच) नामक एक पैरामीटर को ट्रैक करके, साथ ही अन्य चुंबकीय पैरामीटर जैसे कि चुंबकीय ऊर्जा और टोटल  अन्साइन्ड करंट हाइलाइटिस (टी यू सी एच), शोधकर्ताओं ने यह खोजा किए एन सी एच की वृद्धि दर एक संभावित विस्फोट का सबसे विश्वसनीय संकेतक है।

एन सी एच में धीरे-धीरे और क्रमिक वृद्धि एक "असफल विस्फोट" की ओर ले जाती है। इसमें एक चुंबकीय संरचना बनती है लेकिन सतह पर वापस गिर जाती है, जबकि एन सी एच में तेज़ और तीव्र वृद्धि हमेशा एक सफल सी एम   से पहले होती है। सबसे तेज़ एन सी एच इंजेक्शन वाले परिदृश्यों में, सिमुलेशन ने एक ही क्षेत्र से कई, लगातार सी एम   भी उत्पन्न किए।

चित्र: बाएँ: संख्यात्मक सिमुलेशन का एक स्नैपशॉट जो दिखा रहा है कि सौर विस्फोट कैसे प्रारंभ हो रहे हैं और सूर्य से निकल रहे हैं। दाएँ: तीन परिदृश्यों (नीला, पीला और लाल क्रमशः असफल, एकल और कई विस्फोटों के लिए) के लिए  टोटल अन्साइन्ड करंट हाइलाइटिस का समयानुसार विकास। असफल, एकल और कई विस्फोट मामलों के लिए फ्लक्स रोप निर्माण समय को नीली, पीली और लाल खड़ी रेखाएँ दर्शाती हैं। काली बिंदीदार खड़ी रेखा शियर के अंत को दर्शाती है। समय शियर की शुरुआत से मापा गया है

 

लेखकों ने कहा की "हमारे निष्कर्ष संकेत देते हैं कि इन मानकों में से, टोटल अन्साइन्ड करंट हाइलाइटिस की समय दर विभिन्न विस्फोट परिदृश्यों के बीच अंतर करने के लिए सबसे प्रभावी संकेतक के रूप में काम कर सकती है।" डॉ वैभव पंत ने भविष्य की दिशा पर विस्तार से बताया: “ये सिमुलेशन हमारे लिए सूर्य का आभासी प्रयोगशाला के रूप में काम करते हैं। इससे हम इन विशाल विस्फोटों के मूलभूत भौतिकी की जांच कर सकते हैं। अगली दिशा यह है कि इन निष्कर्षों को, विशेष रूप से ऊर्जा संचय दर के महत्व को, वास्तविक दुनिया के अंतरिक्ष मौसम की घटनाओं की भविष्यवाणी और हमारे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए एक विश्वसनीय उपकरण में बदलना।"

प्रकाशन लिंक: https://doi.org/10.3847/1538-4357/adff54

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पीके/ केसी/ एसके


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