पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय
संसद में प्रश्न: पृथ्वी विज्ञान योजना
प्रविष्टि तिथि:
11 FEB 2026 11:39AM by PIB Delhi
पृथ्वी विज्ञान (पृथ्वी) योजना के कार्यान्वयन से धरती के दीर्घकालिक अवलोकन नेटवर्क को उल्लेखनीय रूप से सुदृढ़ किया गया है। इसके अंतर्गत वायुमंडलीय, समुद्री, हिममंडलीय (क्रायोस्फेरिक) तथा भू-भौतिकीय प्रणालियों के साथ-साथ संख्यात्मक मॉडलिंग एवं डेटा समाकलन (डाटा असीमिलेशन) क्षमताओं में भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।
पृथ्वी विज्ञान (पृथ्वी) योजना के अंतर्गत विभिन्न भौगोलिक स्थलों और विषयगत क्षेत्रों में नए प्रेक्षण (ऑब्ज़र्वेशनल) संसाधनों की स्थापना तथा उन्नयन किया गया है। इन संसाधनों का विवरण नीचे दिया गया है:
- डॉप्लर वेदर रडार (डीडब्ल्यूआर) नेटवर्क का विस्तार करते हुए इसकी संख्या को 48 डीडब्ल्यूआर तक बढ़ाया गया है, जिसमें 10 एक्स-बैंड डॉप्लर वेदर रडार और 02 सी-बैंड डीडब्ल्यूआर का शुभारंभ किया गया। वैश्विक जलवायु प्रेक्षण प्रणाली (जी सी ओ एस) के अपर एयर नेटवर्क (जी यू ए एन) के अंतर्गत आर एस / आर डब्ल्यू स्टेशनों की संख्या 6 से बढ़ाकर 12 कर दी गई है। कुल 62 स्टेशनों में से 25 पायलट बैलून (पी बी) स्टेशनों को जीपीएस आधारित पायलट बैलून स्टेशनों में उन्नत किया गया है। मौजूदा नेटवर्क में 400 स्वचालित मौसम स्टेशन (ए डब्ल्यू एस) जोड़े गए हैं। इसके अतिरिक्त, देशभर में 200 कृषि-स्वचालित मौसम स्टेशन (कृषि – ए डब्ल्यू एस) स्थापित किए गए हैं। भारत के पूर्वी और पश्चिमी तटों पर उच्च पवन गति रिकॉर्डर नेटवर्क का विस्तार करते हुए इन स्टेशनों की संख्या को 37 तक बढ़ाया गया है।
- महाराष्ट्र में 18 विभागीय तथा 24 गैर-विभागीय मौसम वेधशालाएँ इस समय संचालित हैं। इसके अतिरिक्त, 85 स्वचालित मौसम स्टेशन (ए डब्ल्यू एस), 10 कृषि-स्वचालित मौसम स्टेशन (कृषि ए डब्ल्यू एस), 125 स्वचालित वर्षामापी (ए आर जी) स्टेशन तथा 350 जिला वर्षा निगरानी स्टेशन (डी आर एम एस) स्थापित हैं। साथ ही, महाराष्ट्र राज्य सरकार ने सर्कल स्तर पर 2321 स्वचालित मौसम स्टेशन (ए डब्ल्यू एस) स्थापित किए हैं, जिनमें से 86 जलगांव जिले में स्थित हैं। महाराष्ट्र में 9 डॉप्लर वेदर रडार (डी डब्ल्यू आर) संचालित हैं। यह रडार नेटवर्क जलगांव लोकसभा क्षेत्र के कुछ भागों को भी आच्छादित करता है। इनका विस्तृत विवरण परिशिष्ट–I में दिया गया है।
- इन-सीटू महासागर प्रेक्षण नेटवर्क को सुदृढ़ किया गया है। इसके अंतर्गत 31 अर्गो फ्लोट, 5 सतही ड्रिफ्टर तैनात किए गए हैं। 17 तटीय अकोस्टिक डॉप्लर करंट प्रोफाइलर (ADCP) मूरिंग्स का रखरखाव किया गया है, साथ ही 3 भूमध्यरेखीय करंट मीटर मूरिंग्स और 3 एक्सबीटी (विस्तारणीय बाथीथर्मोग्राफ) ट्रांसेक्ट संचालित किए गए हैं। ज्वारमापी (टाइड गेज) स्थलों पर 15 जीएनएसएस (वैश्विक नेविगेशन उपग्रह प्रणाली) रिसीवर स्थापित किए गए हैं तथा 14 नए ज्वार स्टेशन स्थापित किए गए हैं। वेव-राइडर नेटवर्क का विस्तार कर इसे 17 प्लेटफॉर्म तक बढ़ाया गया है, जिसमें मॉरीशस में स्थापित एक नया बॉय (Buoy) भी शामिल है। अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में जीएनएसएस–स्ट्रॉन्ग मोशन एक्सेलेरोमीटर (एस एम ए) नेटवर्क को पूर्वी द्वीप पर एक अतिरिक्त जीएनएसएस स्टेशन स्थापित कर और अधिक सुदृढ़ किया गया है।
- उन्नत वास्तविक-समय (रीयल-टाइम) मॉडलिंग को सक्षम बनाने के लिए आई एन सी ओ आई एस ने एचपीसी–तरंग नामक उच्च-प्रदर्शन कम्प्यूटिंग प्रणाली का संचालन प्रारंभ किया है, जो परिचालनात्मक समुद्री पूर्वानुमान के लिए समर्पित है।
- हिमालय क्षेत्र में, चंद्रा बेसिन में एडब्ल्यूएस (ए डब्ल्यू एस) एवं डब्ल्यूएलआर (जल स्तर रीकॉर्डर) के साथ एकीकृत हिमनदी-जलवैज्ञानिक (ग्लेसियो हाइड्रोलॉजिकल) निगरानी प्रणालियाँ स्थापित की गई हैं, जिन्हें अरुणाचल प्रदेश तक विस्तारित किया गया है। यह प्रणाली हिमनद द्रव्यमान संतुलन (ग्लेसियर मास बैलेन्स) के आकलन हेतु उन्नत रिमोट सेंसिंग तथा एक्स डी ई एम -आधारित उपकरणों से समर्थित है।
- देशभर में भूकंप मापी नेटवर्क का विस्तार कर 165 स्टेशनों तक बढ़ाया गया है, जो सेवा हैं, इनमें अकेले महाराष्ट्र में 15 स्टेशन स्थापित किए गए हैं। महाराष्ट्र स्थित भूकंपीय वेधशालाओं का विवरण परिशिष्ट–I में सारणीबद्ध रूप में दिया गया है।
राज्यों तथा संबंधित मंत्रालयों को प्रदान की जा रही मौसम, जलवायु, महासागर, भूकंपीय तथा आपदा पूर्वानुमान सेवाओं में महत्वपूर्ण सुधार प्राप्त हुए हैं। गंभीर मौसम घटनाओं के पूर्वानुमान की सटीकता में पिछले दशकों के दौरान लगभग 40% का सुधार हुआ है। वर्ष 2025 के मॉनसून के दौरान एक दिन पूर्व भारी वर्षा की चेतावनियों की सटीकता 85% रही, जबकि वर्ष 2020 में यह 77% थी। शीतलहर (कोल्ड वेव) के पूर्वानुमान की सटीकता में में 65% तक वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि आंधी-तूफान एवं बिजली गिरने (थंडरस्टॉर्म और लाइटनिंग) की भविष्यवाणियों में 53% का सुधार हुआ है। चक्रवात पूर्वानुमानों में मार्ग (ट्रैक), तीव्रता तथा लैंडफॉल की भविष्यवाणी की सटीकता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। हीटवेव (लू) के पूर्वानुमान में समान सटीकता बनाए रखते हुए पूर्व चेतावनी अवधि (लीड टाइम) में दो अतिरिक्त दिनों की वृद्धि की गई है।
महासागर सेवाओं को अनुकूलन महासागर प्रेक्षण नेटवर्क, परिचालनात्मक महासागर पूर्वानुमान हेतु एकीकृत महासागर मॉडलिंग ढांचा, समुद्र-स्तर प्रक्षेपण तथा महासागर पुनः-विश्लेषण के माध्यम से सुदृढ़ किया गया है। इन प्रयासों के आधार पर महासागर का डिजिटल ट्विन विकसित किया जा रहा है, जिसका प्रभावी उपयोग आपदा पूर्वानुमान में किया जा सकता है। जलवायु परिवर्तन परिदृश्यों से प्राप्त समुद्र के जल स्तर में वृद्धि, अत्यधिक समुद्री स्तर तथा ज्वारीय जलभराव के आंकड़ों का उपयोग तटीय क्षेत्रों पर संभावित प्रभाव के आकलन हेतु किया जा रहा है। भूकंप विज्ञान सेवाओं में भी प्रगति हुई है। सघन राष्ट्रीय भूकंपीय नेटवर्क के माध्यम से अब 3.0 या उससे अधिक तीव्रता के भूकंपों का पता लगाने की क्षमता विकसित हुई है। साथ ही, जोखिम न्यूनीकरण के उद्देश्य से 12 शहरों में भूकंपीय सूक्ष्म-क्षेत्रीयकरण का कार्य पूर्ण किया गया है।
अगस्त 2021 से अब तक कुल 9342 करोड़ एसएमएस भेजे जा चुके हैं। हाल ही में आए चक्रवात “मोनथा” के दौरान ही लोगों को 77.64 करोड़ एसएमएस प्रेषित किए गए। इन सभी सुधारों के परिणामस्वरूप गंभीर मौसम घटनाओं के पूर्वानुमान की सटीकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है तथा मृत्यु-दर में भी महत्वपूर्ण कमी आई है। उदाहरणस्वरूप, वर्ष 1999 के ओडिशा पर आए सुपर साइक्लोन के दौरान लगभग 7000 लोगों की मृत्यु हुई थी, जबकि हाल के वर्षों में उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के प्रभाव से संपूर्ण क्षेत्र में यह संख्या घटकर 100 से भी कम रह गई है। एक चक्रवात का सटीक पूर्वानुमान लगभग 1100 करोड़ रुपये की बचत सुनिश्चित करता है। यह बचत मृतकों के परिजनों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि, बचाव में होने वाले व्यय तथा विभिन्न क्षेत्रों — जैसे विद्युत, समुद्री, विमानन, रेल आदि — में संभावित हानि की रोकथाम के माध्यम से होती है। इसी प्रकार, हाल के वर्षों में हीटवेव (लू) से संबंधित जनहानि में भी उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।
पृथ्वी विज्ञान (पृथ्वी) योजना के अंतर्गत प्राप्त परिणाम पृथ्वी तंत्र के सभी पाँच घटकों — वायुमंडल, जलमंडल, स्थलमंडल/भू-मंडल, हिममंडल तथा जैवमंडल— को आच्छादित करने वाली सेवाओं के रूप में उपलब्ध हैं, जो पृथ्वी प्रणाली विज्ञान की समझ को और अधिक सुदृढ़ बनाती हैं। इन सेवाओं में शामिल हैं: स्थल तथा महासागर दोनों क्षेत्रों के लिए मौसम पूर्वानुमान। उष्णकटिबंधीय चक्रवात, तूफानी ज्वार (स्टॉर्म सर्ज), बाढ़, लू (हीट वेव), आंधी-तूफान एवं बिजली गिरने जैसी विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं के लिए पूर्व चेतावनी सेवाएँ। सुनामी चेतावनी जारी करना। भूकंप की निगरानी एवं संबंधित परामर्श सेवाएँ।
सरकार ने भारत की आपदा तैयारी और कृषि तथा जल संसाधन प्रबंधन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से, प्रेक्षण नेटवर्क को मजबूत बनाने तथा नवीन तकनीकों और प्रौद्योगिकियों को अपनाने हेतु एक पूर्णतः संगठित संस्थागत तंत्र स्थापित किया है, ताकि सभी प्रकार के आंकड़ों का एकीकरण और समाकलन समस्त कम्प्यूटिंग एवं मॉडलिंग सहायता के माध्यम से किया जा सके और क्षेत्र को प्रभावित करने वाली विभिन्न गंभीर मौसम घटनाओं के लिए अधिक सूक्ष्म स्तर पर पूर्वानुमान और चेतावनियाँ तैयार और जारी की जा सकें।
मंत्रालय, भारत मौसम विज्ञान विभाग (आई एम डी) के माध्यम से, चेतावनियों के प्रसार एवं संप्रेषण के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एन डी एम ए) तथा सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (सी –डॉट) के साथ समन्वय में आवश्यक कदम एवं कार्यवाही करता है। मानक संचालन प्रक्रिया (एस ओ पी) के अनुसार, आई एम डी भारी वर्षा, चक्रवात, बिजली गिरना, आंधी-तूफान, धूल भरी आंधी आदि जैसी गंभीर मौसम घटनाओं के लिए सचेत (सचेत) प्लेटफॉर्म के माध्यम से कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल (सी ए पी) आधारित चेतावनियाँ जारी करता है। इन चेतावनियों का प्रसार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एस डी एम ए) द्वारा भू-लक्षित उपयोगकर्ताओं को एसएमएस के माध्यम से किया जाता है। ये चेतावनियाँ सचेत वेबसाइट तथा सचेत मोबाइल ऐप के माध्यम से भी प्रसारित की जाती हैं। आई एम डी के सी ए पी फीड्स को ग्लोबल मल्टी-हैज़र्ड अलर्ट सिस्टम (जी एम ए एस), गूगल, एक्यूवेदर तथा एप्पल को भी प्रेषित किया जाता है।
भारत सरकार ने हाल ही में ग्राम पंचायत स्तर मौसम पूर्वानुमान (जी पी अल डब्ल्यू एफ) पहल प्रारंभ की है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आई एम डी) ने पंचायती राज मंत्रालय के सहयोग से 24 अक्टूबर 2024 को भारत की लगभग सभी ग्राम पंचायतों के लिए जी पी अल डब्ल्यू एफ का शुभारंभ किया। ये पूर्वानुमान डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे ई-ग्रामस्वराज (https://egramswaraj.gov.in/, मेरी पंचायत ऐप, पंचायती राज मंत्रालय के ई-मंचित्र तथा आई एम डी के मौसमग्राम (https://mausamgram.imd.gov.in/ पर उपलब्ध हैं।
राज्यों की एजेंसियाँ (केंद्रीय जल आयोग, राज्य सिंचाई विभाग, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, जल संसाधन विभाग, कृषि एवं जल बोर्ड, नहर एवं कमांड क्षेत्र प्राधिकरण तथा अंतर-राज्यीय जल बोर्ड) जल संसाधन प्रबंधन के लिए पृथ्वी के परिणामों का उपयोग करती हैं, जिसमें पूर्वानुमानों को जलाशय संचालन, बाढ़ एवं सूखा तैयारी तथा सिंचाई योजना में एकीकृत किया जाता है। जलाशय प्राधिकरण प्रवाह के पूर्वानुमानों के आधार पर जल छोड़ने का नियमन करते हैं, जबकि बाढ़-प्रवण क्षेत्रों को समय पर कार्रवाई हेतु पूर्व चेतावनियाँ प्रदान की जाती हैं। मौसमी परिदृश्य भूजल पुनर्भरण तथा जल राशनिंग का मार्गदर्शन करते हैं, और सिंचाई विभाग वितरण के अनुकूलन हेतु नहरों से जल छोड़ने का समय निर्धारित करते हैं। बेसिन-स्तरीय पूर्वानुमान अंतर-राज्यीय जल बंटवारे का भी समर्थन करते हैं, जिससे पृथ्वी कुशल एवं सुदृढ़ जल प्रबंधन के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण बन जाता है।
अनुलग्नक - I
महाराष्ट्र में डॉप्लर वेदर रडार (डी डब्ल्यू आर) का विवरण
|
क्रम संख्या
|
राज्य
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स्थान
|
-
|
महाराष्ट्र
|
मुंबई
|
-
|
महाराष्ट्र
|
नागपूर
|
-
|
महाराष्ट्र
|
आई आई टी एम शोलापुर
|
-
|
महाराष्ट्र
|
वेरावली
|
-
|
महाराष्ट्र
|
मुंबई, जुहू (आई आई टी एम*)
|
-
|
महाराष्ट्र
|
मुंबई, पनवेल (आई आई टी एम)
|
-
|
महाराष्ट्र
|
मुंबई, कल्याण, डोंबिवली (आई आई टी एम)
|
-
|
महाराष्ट्र
|
मुंबई, वसई, विरार (आई आई टी एम)
|
-
|
महाराष्ट्र
|
महाबलेश्वर (आई आई टी एम)
|
* भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आई आई टी एम), पुणे
महाराष्ट्र में भूकंप पूर्वानुमान प्रणाली का विवरण
|
क्रम संख्या
|
केंद्र
|
अक्षांश (oएन)
|
देशान्तर (oई)
|
स्थापित किए जाने की तिथि
|
उन्नयन या आधुनिकीकरण कि तिथि
|
|
1
|
अकोला
|
20.7017
|
77.0146
|
25.04.1983
|
19.11.2015
|
|
2
|
कराड़
|
17.3077
|
74.1835
|
01.01.1970
|
21.11.2015
|
|
3
|
लातूर
|
18.4104
|
76.5333
|
20.12.1993
|
24.11.2015
|
|
4
|
मुंबई
|
18.8975
|
72.8127
|
01.01.1899
|
20.10.2015
|
|
5
|
नागपूर
|
21.1699
|
79.0509
|
08.12.1988
|
14.06.2016
|
|
6
|
पुणे
|
18.5300
|
73.8490
|
01.01.1949
|
21.12.2007
|
|
7
|
सोलापूर
|
17.6703
|
75.9229
|
11.07.2021
|
11.07.2021
|
|
8
|
हिंगोली
|
19.6542
|
77.0943
|
14.07.2021
|
14.07.2021
|
|
9
|
नाशिक
|
20.0299
|
73.7983
|
18.07.2021
|
18.07.2021
|
|
10
|
पालघर
|
20.0348
|
72.9133
|
22.07.2021
|
22.07.2021
|
|
11
|
तलिए
|
17.3419
|
73.7829
|
04.01.2022
|
04.01.2022
|
|
12
|
गोवारे
|
17.3468
|
73.7379
|
21.12.2021
|
21.12.2021
|
|
13
|
पांडरपानी
|
17.2692
|
73.7623
|
06-02-2024
|
06-02-2024
|
|
14
|
पाथुरपुंज
|
17.3011
|
73.6991
|
06-02-2024
|
06-02-2024
|
|
15
|
अटोली
|
17.2898
|
73.7686
|
06-02-2024
|
06-02-2024
|
यह जानकारी केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा 11 फरवरी 2026 को लोकसभा में प्रस्तुत की गई।
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पीके/केसी/डीटी
(रिलीज़ आईडी: 2226798)
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