गृह मंत्रालय
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साइबर फोरेंसिक प्रयोगशालाएं

प्रविष्टि तिथि: 03 FEB 2026 4:11PM by PIB Delhi

भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के अंतर्गत “पुलिस” और “लोक व्यवस्था” राज्य विषय हैं। अतः कानून-व्यवस्था बनाए रखने, नागरिकों के जीवन एवं संपत्ति की सुरक्षा, अपराध एवं अपराधियों की जांच, अभियोजन तथा उनसे संबंधित फॉरेंसिक विज्ञान सुविधाओं की जिम्मेदारी संबंधित राज्य की होती है।

हालांकि, केंद्र सरकार राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों की राज्य फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं(एफएसएल) को अपग्रेड करने के लिए निरंतर सहयोग प्रदान करती है। निर्भया निधि से वित्तपोषित “राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के एफएसएल में डीएनए विश्लेषण एवं साइबर फॉरेंसिक क्षमताओं के सुदृढ़ीकरण” योजना के तहत 30 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए ₹244.89 करोड़ की परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, राज्य/केंद्र शासित प्रदेशवार उपलब्ध/स्थापनााधीन साइबर फॉरेंसिक प्रभागों की सूची अनुलग्नक में दी गई है।

भारत सरकार ने केन्द्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला(सीएफएसएल), हैदराबाद में राष्ट्रीय साइबर फोरेंसिक प्रयोगशाला (साक्ष्यात्मक) [एनसीएफएल(ई)] की स्थापना ₹37.34 करोड़ के कुल वित्तीय व्यय से की है। इसके अलावा, “महिलाओं की सुरक्षा” नामक योजना के अंतर्गत दिल्ली, चंडीगढ़, कोलकाता (पश्चिम बंगाल), कामरूप (असम), भोपाल (मध्य प्रदेश) तथा पुणे (महाराष्ट्र) स्थित केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं में 06 एनसीएफएल(ई) की स्थापना हेतु ₹126.84 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की गई है। जिसमें से, अब तक ₹22.51 करोड़ की राशि का उपयोग किया जा चुका है।

राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों की मौजूदा साइबर फोरेंसिक प्रयोगशालाओं में जांच हेतु लंबित मामलों की कुल संख्या, स्वीकृत पदों एवं रिक्तियों का विवरण केंद्र स्तर पर नहीं रखा जाता है। वर्तमान में एनसीएफएल(ई), हैदराबाद में 181 मामले परीक्षण हेतु लंबित हैं। एनसीएफएल(ई), हैदराबाद में 04-इन-हाउस विशेषज्ञ कार्यरत हैं, जिनके साथ 05-संविदा कर्मी भी कार्य कर रहे हैं।

साइबर पेशेवरों का री-स्किलिंग और अप-स्किलिंग एक अंतर्निहित और सतत प्रक्रिया है तथा यह उनकी कार्यात्मक जिम्मेदारियों का हिस्सा है, जिसे मुख्यतः कार्य-स्थल पर सीखने(ऑन-द-जॉब लर्निंग) के माध्यम से किया जाता है। राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय(एनएफएसयू) भी साइबर फोरेंसिक्स के क्षेत्र में कई प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करता है। पिछले 05 वर्षों में, एनएफएसयू द्वारा विभिन्न सरकारी विभागों/कानून प्रवर्तन एजेंसियों के अधिकारियों के लिए 66 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं, जिनमें 1852 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

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                                                                   अनुलग्नक

राज्य/केंद्र शासित प्रदेशवार सूची: राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं (FSLs) में उपलब्ध अथवा स्थापनााधीन साइबर फॉरेंसिक प्रभाग

 

क्रम संख्या

राज्य/केंद्र शासित प्रदेश

साइबर फोरेंसिक सुविधा की स्थिति

1.

हिमाचल प्रदेश

उपलब्ध

2.

मिजोरम

उपलब्ध

3.

राजस्थान

उपलब्ध

4.

झारखंड

उपलब्ध

5.

केरल

उपलब्ध

6.

त्रिपुरा

उपलब्ध

7.

उत्तर प्रदेश

उपलब्ध

8.

कर्नाटक

उपलब्ध

9.

छत्तीसगढ़

उपलब्ध

10.

गुजरात

उपलब्ध

11.

ओडिशा

उपलब्ध

12.

पुड्डुचेरी

उपलब्ध

13.

तेलंगाना

उपलब्ध

14.

उत्तराखंड

उपलब्ध

15.

असम

उपलब्ध

16.

मणिपुर

उपलब्ध

17.

दिल्ली

उपलब्ध

18.

महाराष्ट्र

उपलब्ध

19.

पश्चिम बंगाल

उपलब्ध

20.

हरियाणा

उपलब्ध

21.

आंध्र प्रदेश

उपलब्ध

22.

तमिलनाडु

उपलब्ध

23.

बिहार

उपलब्ध

24.

जम्मू-कश्मीर

उपलब्ध

25.

सिक्किम

उपलब्ध नहीं

26.

पंजाब

स्थापनााधीन है

27.

मेघालय

उपलब्ध

28.

मध्य प्रदेश

उपलब्ध नहीं

29.

गोवा

उपलब्ध

30.

नागालैंड

स्थापनााधीन है

31.

अंडमान और निकोबार द्वीप

स्थापनााधीन है

32.

अरूणाचल प्रदेश

उपलब्ध

*बाकी 04 केंद्र शासित प्रदेश — चंडीगढ़, दमन एवं दीव, दादरा एवं नगर हवेली, लक्षद्वीप तथा लद्दाख — अपने पड़ोसी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में उपलब्ध फॉरेंसिक विज्ञान सुविधाओं के साथ-साथ केंद्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं(सीएफएसएल) की सेवाओं का उपयोग कर रहे हैं। (स्रोत – फोरेंसिक विज्ञान सेवा निदेशालय)

यह जानकारी गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री बंदी संजय कुमार ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दिया।

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पीके/केसी/पीकेपी


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