अणु ऊर्जा विभाग
संसदीय प्रश्न: परमाणु ऊर्जा क्षमता का विस्तार
प्रविष्टि तिथि:
05 FEB 2026 3:49PM by PIB Delhi
वर्तमान में देश में स्थापित परमाणु ऊर्जा क्षमता 8,780 मेगावाट है, जिसमें 24 परमाणु ऊर्जा संयंत्र शामिल हैं (आरएपीएस-1 को छोड़कर - 100 मेगावाट)। इसके अतिरिक्त, कुल 13,100 मेगावाट क्षमता वाले 17 परमाणु ऊर्जा रिएक्टर निर्माणाधीन हैं, जिनमें 7 निर्माणाधीन रिएक्टर और 10 परियोजना-पूर्व चरण में रिएक्टर शामिल हैं जिनके वर्ष 2031-32 तक क्रमिक रूप से पूरा होने की उम्मीद है।
इसके अलावा, भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (भाविनी) वर्तमान में तमिलनाडु के कलपक्कम में 500 मेगावाट क्षमता की प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पीएफबीआर) परियोजना शुरु करने जा रही हैं। सरकार ने तमिलनाडु के कलपक्कम में एफबीआर 1 और 2 परियोजना की 2 x 500 मेगावाट क्षमता वाली दोहरी इकाइयों के लिए पूर्व-परियोजना गतिविधियों को पूरा करने की मंजूरी दे दी है। पीएफबीआर के प्रथम चरण में पहुंचने पर, एफबीआर 1 और 2 परियोजनाओं के लिए सरकार से वित्तीय मंजूरी ली जाएगी।
रिएक्टरों की सुरक्षा और प्रदर्शन की समीक्षा करना और उन्हें अत्याधुनिक स्तर तक बढ़ाने के लिए आवश्यक उन्नयन उपायों को लागू करना एक सतत प्रक्रिया है।
वर्तमान में, चालू 24 रिएक्टरों में से 4 रिएक्टरों के लिए बड़े पैमाने पर नवीनीकरण और आधुनिकीकरण/मरम्मत का काम जारी है। निर्माणाधीन 17 रिएक्टरों का विवरण इस प्रकार है:
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स्थान
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परियोजना
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क्षमता (मेगावाट)
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प्रगति
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निर्माणाधीन/चालू की जा रही परियोजनाएं
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रावतभाटा राजस्थान
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आरएपीपी- 8
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1 X 700
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98.60
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कुडनकुलम, तमिलनाडु
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केकेएनपीपी-3 और 4
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2 x 1000
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80.51
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केकेएनपीपी-5 और 6
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2 x 1000
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41.56
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गोरखपुर, हरियाणा
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जीएचएवीपी-1 और 2
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2 x 700
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सिविल कार्य प्रगति पर है
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पूर्व-परियोजना गतिविधियों के अंतर्गत परियोजनाएं
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कैगा, कर्नाटक
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कैगा-5 और 6
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2 x 700
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परियोजना-पूर्व गतिविधियों के अंतर्गत विभिन्न चरणों में
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गोरखपुर, हरियाणा
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जीएचएवीपी – 3 और 4
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2 x 700
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चुटका, मध्य प्रदेश
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चुटका-1 और 2
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2 x 700
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माही बांसवाड़ा, राजस्थान
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माही बांसवाड़ा- 1 और 2*
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2 x 700
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माही बांसवाड़ा-
3 और 4*
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2 x 700
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माही बांसवाड़ा-1 और 2 तथा माही बांसवाड़ा-3 और 4 परियोजनाओं का कार्यान्वयन एनपीसीआईएल और एनटीपीसी के संयुक्त उद्यम अश्विनी द्वारा किया जा रहा है।
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के संबंध में अनुमोदित संदर्भ शर्तों के अनुरूप एक व्यापक पर्यावरण प्रभाव का आकलन करता है और परियोजना के लिए पर्यावरण मंजूरी प्राप्त करने हेतु निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाता है। पर्यावरण मंजूरी प्राप्त होने के बाद ही परियोजना का निर्माण कार्य शुरू किया जाता है।
कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन तथा प्रधानमंत्री कार्यालय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज राज्यसभा में लिखित उत्तर में यह जानकारी दी ।
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पीके/केसी/जेके/एनजे
(रिलीज़ आईडी: 2223932)
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