गृह मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4सी)

प्रविष्टि तिथि: 04 FEB 2026 3:58PM by PIB Delhi

भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार, 'पुलिस' और 'सार्वजनिक व्यवस्था' राज्य के विषय हैं। साइबर अपराध सहित अन्‍य अपराधों की रोकथाम, पता लगाने, जांच और अभियोजन के लिए राज्य/केंद्र शासित प्रदेश अपनी कानून प्रवर्तन एजेंसियों (एलईए) के माध्‍यम से मुख्‍य रूप से जिम्‍मेदार होते है। केंद्र सरकार कानून प्रवर्तन एजेंसियों की क्षमता निर्माण के विभिन्न योजनाओं के तहत परामर्श और वित्तीय सहायता प्रदान करके राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की पहलों में सहयोग करती है।

गृह मंत्रालय ने देश में साइबर अपराध की रोकथाम, पता लगाने, जांच और अभियोजन के लिए एक रूपरेखा और इकोसिस्‍टम विकसित करने के उद्देश्‍य से वर्ष 2018 में एक योजना के रूप में भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4सी) की स्थापना की थी। एक छोटी अवधि के भीतर I4सी ने साइबर अपराधों से निपटने और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय विकसित करने की राष्ट्र की सामूहिक क्षमता को बढ़ाने की दिशा में काम किया है। 1 जुलाई, 2024 से I4सी को गृह मंत्रालय के एक संबद्ध कार्यालय के रूप में स्थापित किया गया है। I4सी नागरिकों के लिए साइबर अपराध से संबंधित सभी मुद्दों से निपटने पर ध्यान केंद्रित करता है, जिसमें विभिन्न कानून प्रवर्तन एजेंसियों और हितधारकों के बीच समन्वय में सुधार, क्षमता निर्माण, जागरूकता आदि शामिल हैं।

वित्तीय धोखाधड़ी की तत्काल रिपोर्टिंग करने और जालसाजों द्वारा धन की हेराफेरी को रोकने के लिए I4सी के अंतर्गत वर्ष 2021 में 'नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग और प्रबंधन प्रणाली' (सीएफसीएफआरएमएस) को शुरू किया गया था। 31.12.2025 तक 23.61 लाख से अधिक शिकायतों में 8,189 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय राशि बचाई जा चुकी है। ऑनलाइन साइबर शिकायतें दर्ज करने में सहायता के लिए एक टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर '1930' चालू किया गया है। 31.12.2025 तक पुलिस अधिकारियों द्वारा रिपोर्ट किए गए आंकड़ों के अनुसार, भारत सरकार द्वारा 12.21 लाख से अधिक सिम कार्ड और 3.03 लाख आईएमईआई ब्लॉक किए जा चुके हैं।

14सी द्वारा बैंकों/वित्तीय संस्थानों के सहयोग से 10.09.2024 को साइबर अपराधियों की पहचान के लिए एक ‘सस्‍पेक्‍ट रजिस्ट्री’ शुरू की गई थी। 31.12.2025 तक बैंकों से प्राप्त 21.65 लाख से अधिक संदिग्ध पहचानकर्ताओं का डेटा और 26.48 लाख ‘लेयर 1’ म्‍यूल खातों की जानकारी रजिस्ट्री की प्रतिभागी संस्थाओं के साथ साझा की गई है, जिसके कारण 9055.27 करोड़ रुपये के संदिग्‍ध लेन-देन को रोका गया है।

साइबर अपराध डेटा साझाकरण और विश्लेषण के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों हेतु ‘समन्वय प्लेटफॉर्म’ को एक प्रबंधन सूचना प्रणाली (एमआईएस), डेटा भंडार और समन्‍वय मंच के रूप में चालू किया गया है। यह विभिन्न राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में साइबर अपराध शिकायतों में शामिल अपराधों और अपराधियों के अंतर-राज्यीय संबंधों का विश्लेषण-आधारित विश्लेषण प्रदान करता है। 'प्रतिबिंब' मॉड्यूल अपराधियों और अपराध अवसंरचना के स्थानों को मानचित्र पर प्रदर्शित करता है, जिससे क्षेत्राधिकार अधिकारियों को जानकारी मिलती है। यह मॉड्यूल कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा 14सी और अन्य एसएमई से तकनीकी-कानूनी सहायता मांगने और प्राप्‍त करने की सुविधा भी प्रदान करता है। इसके परिणामस्वरूप, 20,853 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है और 1,35,074 साइबर जांच सहायता अनुरोध प्राप्त हुए हैं।

केंद्र सरकार ने साइबर धोखाधड़ी के मामलों में ई-एफआईआर दर्ज करने की एक नई पहल शुरू की है। साइबर अपराध के मामलों में एफआईआर दर्ज करने के लिए दिल्ली, राजस्थान, चंडीगढ़, मध्य प्रदेश और गोवा में 'ई-एफआईआर' प्रणाली लागू की गई है।

केन्‍द्रीय गृह राज्‍य मंत्री श्री बंदी संजय कुमार ने यह जानकारी राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

*.**

पीके/केसी/आईएम/एसएस


(रिलीज़ आईडी: 2223316) आगंतुक पटल : 93
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें: English , Urdu , Tamil