महिला एवं बाल विकास मंत्रालय
सुपोषित ग्राम पंचायत अभियान परिवर्तन का शक्तिशाली उत्प्रेरक बन गया है, समुदायों को कुपोषण के विरूद्ध स्थायी प्रथाओं और नवीन दृष्टिकोण अपनाने को प्रेरित करता है
प्रविष्टि तिथि:
04 FEB 2026 1:22PM by PIB Delhi
कुपोषण मुक्त भारत की दिशा में तेजी लाने के उद्देश्य से 26 दिसंबर, 2024 को सुपोषित ग्राम पंचायत अभियान आरंभ किया गया है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने पोषण ट्रैकर एप्लिकेशन पर उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित प्रत्येक राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में कुल ग्राम पंचायतों के 10 प्रतिशत की सीमा के भीतर शीर्ष प्रदर्शन करने वाली ग्राम पंचायतों को नामित किया है।
जिसमें निम्नलिखित नामांकन पात्रता शर्तें रहीं
- पिछली तिमाही में आंगनवाड़ी केंद्र हर महीने कम से कम 21 दिन कार्य कर रहे हों
- सभी श्रेणियों (गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और एक वर्ष से कम से लेकर 6 वर्ष की आयु के बच्चों) में प्रति ग्राम पंचायत न्यूनतम 50 पंजीकृत लाभार्थी हों
- कम से कम 80 प्रतिशत आंगनवाड़ी केंद्र पेयजल सुविधा युक्त हों
- कम से कम 70 प्रतिशत आंगनवाड़ी केंद्र शौचालय सुविधाओं से युक्त हों
- ग्राम पंचायतों में सभी आंगनवाड़ी केंद्रों में कम से कम 90 प्रतिशत विकास माप दक्षता हो
विस्तृत कार्यप्रणाली यहां उपलब्ध है:
https://wcd.gov.in/documents/uploaded/1735534720_aP3UWRtx9R.pdf
सुपोषित ग्राम पंचायत (जीपी) प्रोत्साहन के तौर पर इस राशि के उपयोग के लिए शीर्ष एक हजार योग्य ग्राम पंचायतों को प्रति ग्राम पंचायत एक लाख रुपये का अनुदान दिया गया है:
- आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को 25 प्रतिशत
- आंगनवाड़ी केंद्रों में सामुदायिक एकत्रिकरण और लाभार्थी नामांकन बढ़ाने के लिए ग्राम पंचायत को 25 प्रतिशत
- पोषण वाटिकाओं के विकास, पूरक पोषण कार्यक्रम के मूल्यवर्धन आदि सहित आंगनवाड़ी केंद्रों में पोषण संबंधी गतिविधियों के लिए 50 प्रतिशत
सुपोषित ग्राम पंचायत अभियान के दिशानिर्देशों के तहत मूल्यांकन ढांचा पोषण ट्रैकर एप्लिकेशन में संकेतकों के इस्तेमाल परिणामोन्मुखी और डेटा-संचालित है। निम्नलिखित मापन योग्य सुधारों का आकलन किया गया:
- गंभीर तीव्र कुपोषण (एसएएम), मध्यम तीव्र कुपोषण (एमएएम), गंभीर स्टंटिंग (उम्र के हिसाब से कम लंबाई/बौनापन) और बच्चों में गंभीर रूप से कम वजन
- गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं की पोषण स्थिति में सुधार
- गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और 6 महीने से 6 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए पूरक पोषण नियमितता में वृद्धि
- आंगनवाड़ी केंद्रों में क्रियाशील शौचालयों, पेयजल और बिजली सहित बुनियादी ढांचे की उपलब्धता में सुधार
- आंगनवाड़ी लाभार्थियों की ऊंचाई और वजन माप दक्षता उन्नयन
उपरोक्त संकेतकों में निरंतर सुधार प्रदर्शित करने वाली ग्राम पंचायतें प्रोत्साहन पुरस्कारों के लिए अर्हता प्राप्त करती हैं।
दिशानिर्देशों के अनुसार सुपोषित ग्राम पंचायत अभियान का महत्व उपलब्धियों की मान्यता से कहीं आगे विस्तृत है। यह परिवर्तन के शक्तिशाली उत्प्रेरक का कार्य करता है और समुदायों को सकारात्मक प्रतिस्पर्धा द्वारा कुपोषण से निपटने में स्थायी प्रथाओं और नवीन दृष्टिकोण अपनाने को प्रेरित करता है। यह गर्म पके भोजन और टेक होम राशन में मोटे अनाज के उपयोग, आंगनवाड़ी केंद्रों में पोषण वाटिका/पोषण-उद्यान विकसित करने लाभार्थियों के लिए गर्म पके भोजन तैयार करने के लिए इसकी उपज का उपयोग, आहार विविधता और स्थानीय भोजन के इस्तेमाल आदि प्रथाओं द्वारा पोषण परिणामों में सुधार करने पर केंद्रित है।
इसके अतिरिक्त, आंगनवाड़ी केन्द्रों की सर्वोत्तम पद्धतियों को व्यापक रूप से अपनाने के लिए नियमित रूप से प्रलेखित और प्रचारित किया जाता है।
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी।
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पीके/केसी/एकेवी/एमपी
(रिलीज़ आईडी: 2223129)
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