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नीति आयोग द्वारा टीआईएफटी, त्रिपुरा के सहयोग से आयोजित राज्य समर्थन मिशन पर तीसरे क्षेत्रीय संवाद का अगरतला में सफल समापन

प्रविष्टि तिथि: 03 FEB 2026 5:26PM by PIB Delhi

नीति आयोग ने त्रिपुरा इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मेशन (टीआईएफटी), त्रिपुरा सरकार के सहयोग से 3 फरवरी 2026 को अगरतला, त्रिपुरा में 14 पूर्वी और उत्तर-पूर्वी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए राज्य समर्थन मिशन (एसएसएम) के तहत तीसरा क्षेत्रीय संवाद सफलतापूर्वक आयोजित किया। यह क्षेत्रीय संवाद केंद्रीय क्षेत्र योजना के तहत आयोजित श्रृंखला का तीसरा संवाद है, जिसका उद्देश्य नीति आयोग और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के बीच संरचित संवाद को राज्य परिवर्तन संस्थानों के (एसआईटी) माध्यम से बढ़ावा देना है। इस संवाद का उद्देश्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक-दूसरे के एसएसएम पहलों पर अनुभव साझा करने और एक-दूसरे से सीखने के लिए एक साथ लाना था। इसने राज्य परिवर्तन संस्थानों (एसआईटी की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया, जो राज्य के विज़न को मार्गदर्शन देने, सुधारों को आगे बढ़ाने और विकसित भारत @2047 की राष्ट्रीय आकांक्षा के साथ तालमेल करने में सहायक हैं।

एसएसएम पर पहला क्षेत्रीय संवाद 10 उत्तरी राज्यों/संघ शासित प्रदेशों के लिए 2 जून 2025 को उत्तराखंड के देहरादून में आयोजित किया गया था। इसके बाद दूसरा क्षेत्रीय संवाद 25 सितंबर 2025 को महाराष्ट्र के पुणे में आयोजित किया गया, जिसमें 11 राज्यों/संघ शासित प्रदेशों ने भाग लिया।

उद्घाटन सत्र में त्रिपुरा के मुख्यमंत्री प्रो. (डॉ.) माणिक साहा, त्रिपुरा सरकार के मुख्य सचिव श्री जितेंद्र कुमार सिन्हा, उत्तराखंड सरकार के सेतु आयोग के उपाध्यक्ष श्री राज शेखर जोशी, नीति आयोग के अपर सचिव (वर्चुअल) एवं कार्यक्रम निदेशक (राज्य) श्री रोहित कुमार, टीआईएफटी के सीईओ श्री किरण गिट्टे और नीति आयोग के संयुक्त सचिव एवं मिशन निदेशक (एसएसएम) श्री के.एस. रेजिमोन उपस्थित थे।

सत्रों के दौरान हुए विचार-विमर्श में राज्यों के बीच इस बात की साझा स्वीकृति दिखाई दी कि राज्य परिवर्तन संस्थान (एसआईटी) सुधार कार्यान्वयन और राज्य समर्थन मिशन के अंतर्गत अंतर-राज्य सीखने का समर्थन करने के लिए केंद्रीय मंच है। इसके साथ ही चर्चा में प्रारंभिक संस्थागत उपलब्धियों को मजबूत करने और उनकी संचालन क्षमता को आगे बढ़ाने की आवश्यकता को भी रेखांकित किया गया।

सत्र की शुरुआत एसएसएम, नीति आयोग द्वारा 'राज्यों के लिए नीति: सहयोगात्मक संघवाद की ओर' पर एक प्रस्तुति से हुई, जिसमें योजना के मुख्य घटकों, विभिन्न चल रही पहलों जैसे कि राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के बीच पारस्परिक सीख को बढ़ावा देने के लिए राज्य प्लेटफार्म के लिए नीति, डेटा-संचालित निर्णय लेने को बढ़ावा देने के लिए विकसित भारत रणनीति कक्ष और यह बताया गया कि इन उपकरणों का राज्य द्वारा कैसे लाभ उठाया जा सकता है।

राज्य और राष्ट्रीय लक्ष्यों की प्राप्ति में एसआईटी की भूमिका पर सत्र में चर्चा की गई कि कैसे एसआईटी पारंपरिक योजना कार्यों से आगे बढ़कर बहु-विषयक केंद्रों में विकसित हो रहे हैं, जो दीर्घकालिक दृष्टिकोण, साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण और परिणाम-केंद्रित शासन को शामिल करते हैं। विचार-विमर्श का केंद्र था - ठोस निगरानी ढांचे के माध्यम से दृष्टि-आधारित और डेटा-संचालित शासन के लिए संस्थागत तंत्र को मजबूत करना, रणनीतिक साझेदारी को प्रोत्साहित करना, विभागीय समन्वय बढ़ाना और क्षमता निर्माण करना। बहु-स्तरीय योजना, केपीआई-आधारित निगरानी, कार्यान्वयन में जवाबदेही और बेहतर विकास परिणामों के लिए सहयोगात्मक, नीचे से ऊपर की ओर और सन्दर्भ-विशिष्ट नीति निर्माण में राज्य संस्थागत थिंक टैंकों की भूमिका पर जोर दिया गया।

क्षेत्रीय परिवर्तन के लिए वैश्विक साझेदारी विषय के सत्र में विकास सहयोगियों की भूमिका पर विचार किया गया, ताकि रणनीतिक संस्थागत साझेदारियों, आपूर्ति मूल्यांकन और विकास कार्यक्रम जैसी लक्षित तकनीकी सहायता, नवाचारी वित्तपोषण और वैश्विक ज्ञान साझा करने के माध्यम से उत्तर-पूर्वी और पूर्वी क्षेत्रों में समावेशी विकास को बढ़ावा देने के लिए सरकार के प्रयासों में पूरक की भूमिका निभाई जा सके।

राज्य विज़न @2047: विकसित राज्य के लिए ब्लूप्रिंट तैयार करना सत्र में स्पष्ट लक्ष्यों के साथ गतिशील, डेटा-आधारित दृष्टिकोण बनाने का महत्व, क्षेत्रीय रोडमैप और बहु-स्तरीय परामर्श को रेखांकित किया गया। राज्यों ने प्रमुख उदाहरणों से सीखा कि हासिल करने योग्य उद्देश्यों और मजबूत फीडबैक से राष्ट्रीय दीर्घकालिक आकांक्षाओं की दिशा में प्रगति को तेज किया जा सकता है।

सत्र का समापन राज्य समर्थन मिशन के भविष्य के रोडमैप पर खुली चर्चा के साथ हुआ, जिसका उद्देश्य इन संस्थाओं को उनके राज्यों की विकास यात्रा का समर्थन करने के लिए सशक्त बनाना था।

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पीके / केसी / जेके / डीए

 


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