गृह मंत्रालय
एफआरए के अंतर्गत सामुदायिक अधिकार
प्रविष्टि तिथि:
03 FEB 2026 4:12PM by PIB Delhi
भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार, पुलिस और सार्वजनिक व्यवस्था राज्य सरकारों के अधीन हैं। हालांकि, भारत सरकार वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित राज्यों के प्रयासों में सहयोग करती रही है। वामपंथी उग्रवाद के खतरे से समग्र रूप से छुटकारा पाने के लिए 2015 में "वामपंथी उग्रवाद से निपटने की राष्ट्रीय नीति और कार्य योजना" को स्वीकृति दी गई थी। इसमें सुरक्षा संबंधी उपायों, विकास संबंधी कदमों, स्थानीय समुदायों के अधिकारों और पात्रता को सुनिश्चित करने आदि को शामिल करते हुए एक बहुआयामी रणनीति की परिकल्पना की गई है।
भारत सरकार सुरक्षा के मोर्चे पर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की तैनाती और भारतीय रिजर्व बटालियनों के गठन, हेलीकॉप्टर सहायता, सुरक्षा शिविरों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, प्रशिक्षण, राज्य पुलिस बलों के आधुनिकीकरण के लिए धन, उपकरण और हथियार, खुफिया जानकारी साझा करने, किलेबंद पुलिस स्टेशनों के निर्माण आदि के माध्यम से वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित राज्य सरकारों की सहायता करती है।
- 2014-15 से राज्यों की क्षमता निर्माण के लिए, सुरक्षा संबंधी व्यय (एसआरई) योजना के अंतर्गत सुरक्षा बलों के परिचालन व्यय और प्रशिक्षण आवश्यकताओं, आत्मसमर्पण करने वाले वामपंथी उग्रवादी संगठनों के सदस्यों के पुनर्वास, उनकी हिंसा में सुरक्षा बलों के शहीद कर्मियों/मारे गए नागरिकों के परिवारों को अनुग्रह राशि आदि के लिए प्रभावित राज्यों को 3681.73 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।
- भारत सरकार और राज्य सरकारों ने व्यापक आत्मसमर्पण-सह-पुनर्वास नीतियां तैयार की हैं। भारत सरकार सुरक्षा संबंधी व्यय (एसआरई) योजना के भाग के रूप में 'आत्मसमर्पण-सह-पुनर्वास' नीति के माध्यम से भी इस प्रयास में राज्यों का सहयोग करती है। भारत सरकार इस योजना के अंतर्गत आत्मसमर्पण करने वालों के पुनर्वास पर प्रभावित राज्यों की ओर से किए गए व्यय की प्रतिपूर्ति करती है। पुनर्वास पैकेज में अन्य बातों के अलावा, उच्च श्रेणी के वामपंथी उग्रवादी संगठनों के सदस्यों के लिए तत्काल 5 लाख रुपये और अन्य कैडरों के लिए 2.5 लाख रुपये का अनुदान देना शामिल है। इसके अतिरिक्त, योजना के अंतर्गत हथियार/गोला-बारूद सौंपने पर प्रोत्साहन भी प्रदान किया जाता है। साथ ही, तीन वर्षों के लिए मासिक 10,000 रुपये की वृत्ति के साथ उनकी पसंद के व्यापार/व्यवसाय में प्रशिक्षण प्रदान करने का भी प्रावधान है। प्रभावित राज्यों ने अपनी आत्मसमर्पण सह पुनर्वास नीतियों को आकर्षक और सामयिक बनाने के लिए उनमें और संशोधन किये हैं।
- पुलिस बलों को हथियारों और उपकरणों से सुसज्जित और आधुनिक बनाने के लिए राज्यों की ओर से किए जा रहे प्रयासों को "पुलिस बलों का आधुनिकीकरण" योजना के अंतर्गत सहयोग दिया गया है। इस योजना के अंतर्गत, राज्य सरकारों को हथियारों, सूचना प्रौद्योगिकी, संचार, प्रशिक्षण, पुलिस स्टेशनों के निर्माण, आवागमन की सुविधाओं, पुलिस आवास और अन्य पुलिस अवसंरचना आदि के निर्माण के लिए केंद्रीय सहायता प्रदान की जाती है। इसकी उप-योजना, विशेष अवसंरचना योजना (एसआईएस) के अंतर्गत, राज्य के विशेष बलों, राज्य खुफिया शाखाओं (एसआईबी), जिला पुलिस को मजबूत करने और किलेबंद पुलिस स्टेशनों (एफपीएस) के निर्माण के लिए वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) से प्रभावित राज्यों को 1761 करोड़ रुपये की परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। सुरक्षा अवसंरचना पर भारत सरकार का ध्यान केंद्रित करना महत्वपूर्ण रहा है। अब तक 656 किलेबंद पुलिस स्टेशन बनाए जा चुके हैं।
- केंद्रीय एजेंसियों को वामपंथी उग्रवाद प्रबंधन सहायता (एसीएएलडब्ल्यूईएमएस) योजना के अंतर्गत शिविरों की बुनियादी संरचना और उग्रवाद विरोधी अभियानों के सिलसिले में हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराने के लिए सहायता प्रदान की जाती है। 2014-15 से इस योजना के माध्यम से केंद्रीय एजेंसियों को 1224.59 करोड़ रुपये प्रदान किए जा चुके हैं।
- वामपंथी उग्रवादियों की वित्तीय स्थिति को नियंत्रित करने और सीपीआई (माओवादी) तथा उसके वित्तीय समर्थकों के बीच सांठगांठ का पर्दाफाश करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। वामपंथी उग्रवादियों को मिलने वाले धन और अन्य संसाधनों को प्रभावी ढंग से रोकने के लिए, राज्य पुलिस केंद्रीय एजेंसियों के सहयोग से विभिन्न माध्यमों से समन्वित कार्रवाई कर रही है।
विकास के मोर्चे पर भारत सरकार की प्रमुख योजनाओं के अतिरिक्त वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों के लिए कई विशिष्ट पहलें की गई हैं जिनमें सड़क नेटवर्क के विस्तार, दूरसंचार संपर्क में सुधार, शिक्षा, कौशल विकास और वित्तीय समावेशन पर विशेष जोर दिया गया है। इनमें से कुछ का विवरण नीचे दिया गया है:
- सड़क नेटवर्क के विस्तार के लिए, सड़क आवश्यकता योजना (आरआरपी) और सड़क संपर्क परियोजना (आरसीपीएलडब्ल्यूईए) नाम की वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों के लिए 02 विशिष्ट योजनाओं के अंतर्गत 15,016 किमी सड़कों का निर्माण किया गया है।
- वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों में दूरसंचार संपर्क में सुधार के लिए 9,233 टावर चालू किए गए हैं।
- कौशल विकास के लिए 46 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) और 49 कौशल विकास केंद्र (एसडीसी) खोले गए हैं।
- जनजातीय क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए 179 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (ईएमआरएस) चलाए जा रहे हैं।
- डाक विभाग ने वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित जिलों में वित्तीय समावेशन के लिए बैंकिंग सेवाओं के साथ 6,025 डाकघर खोले हैं। वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित अधिकांश जिलों में 1804 बैंक शाखाएं और 1321 एटीएम खोले गए हैं।
- विकास को और गति देने के लिए विशेष केंद्रीय सहायता (एससीए) योजना के अंतर्गत वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) से सबसे अधिक प्रभावित जिलों में सार्वजनिक अवसंरचना में मौजूद महत्वपूर्ण खामियों को दूर करने के लिए धनराशि उपलब्ध कराई जाती है। 2017 में योजना की शुरूआत से अब तक 3,953.67 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं।
- स्थानीय समुदायों के अधिकारों और उनकी पात्रता को सुनिश्चित करने के लिए लाभार्थियों को 21,29,753 स्वामित्व पत्र वितरित किए गए हैं (20,24,975 व्यक्तिगत स्वामित्व पत्र और 1,04,778 सामुदायिक स्वामित्व पत्र)। वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय स्वशासन को और मजबूत करने के लिए गृह मंत्रालय की ओर से पंचायती राज मंत्रालय के साथ संयुक्त रूप से योजना बनाई जा रही है। ये उपाय प्रभावित क्षेत्रों में सामुदायिक अधिकारों को मजबूत करने और शासन में सहभागिता को बढ़ावा देने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
गृह मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ के वामपंथी उग्रवाद प्रभावित सात जिलों में विभिन्न सरकारी कल्याणकारी योजनाओं, विकास पहलों की पहुंच और आजीविका सृजन की संभावनाओं का आकलन करने के लिए स्वतंत्र एजेंसी के माध्यम से सर्वेक्षण कराया है। इस सर्वेक्षण में शिक्षा के स्तर, स्वास्थ्य संबंधी संकेतकों और प्राथमिक विद्यालय, आंगनवाड़ी केंद्र तथा अतिरिक्त स्वास्थ्य सुविधाएं जैसी बुनियादी सेवाओं की उपलब्धता से संबंधित जानकारी संकलित की गई है। इससे केंद्रीय गृह मंत्रालय और राज्य सरकार को विकास संबंधी खामियों को दूर करने और आजीविका सुनिश्चित करने के उद्देश्य को पूरा करने में सहायता मिल रही है।
'राष्ट्रीय नीति एवं कार्य योजना 2015' के दृढ़ कार्यान्वयन के परिणामस्वरूप हिंसा में लगातार कमी आई है और बड़े भौगोलिक क्षेत्र में इसका प्रसार सीमित हुआ है। देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती रही वामपंथी उग्रवाद जनित हिंसा पर हाल के समय में काफी हद तक अंकुश लगाया गया है और यह अब कुछ ही क्षेत्रों तक सीमित रह गई है। वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित जिलों की संख्या 2018 में 126 थी जो दिसंबर 2025 में घटकर केवल 8 रह गई है और अब केवल 3 जिले ही इससे सबसे अधिक प्रभावित हैं।
वामपंथी उग्रवादियों (एलडब्ल्यूई) की ओर से की गई हिंसा की घटनाएं 2010 में 1936 के उच्च स्तर पर थीं जो 2025 में घटकर 234 रह गईं, जो इनमें 88 प्रतिशत की गिरावट है। इसके परिणामस्वरूप नागरिकों और सुरक्षा बलों की मौतें भी 2010 में 1005 के उच्च स्तर से घटकर 90 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2025 में 100 रह गईं। 2025 में सुरक्षा बलों ने 364 नक्सलियों को मार गिराया, 1022 को गिरफ्तार किया और 2337 को आत्मसमर्पण करने में सहायता प्रदान की। वामपंथी उग्रवाद से संबंधित हिंसा की रिपोर्ट करने वाले पुलिस स्टेशनों की संख्या 2010 में 465 से घटकर 2025 में 119 रह गई है।
सुरक्षा की स्थिति में सुधार हो रहा है और अधिक से अधिक जिले वामपंथी उग्रवाद से मुक्त हो रहे हैं, ऐसे में सरकार ने इन क्षेत्रों में सतत सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन पर बल दिया है। इसी संदर्भ में, 2024 में जिलों की एक नई श्रेणी बनाई गई जिसे विरासत और विकास जिले नाम दिया गया है। हालांकि ये जिले अब वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित नहीं हैं फिर भी इन जिलों के लिए राज्य सरकारों को सहायता जारी रहेगी ताकि उपलब्धियों को सुदृढ़ किया जा सके और उग्रवाद की पुनरावृत्ति को रोका जा सके। अभी 30 जिले इस श्रेणी में आते हैं और दीर्घकालिक स्थिरता तथा समावेशी विकास सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इन क्षेत्रों में कदम उठाए जा रहे हैं।
भारत सरकार देश से वामपंथी उग्रवाद के पूर्ण उन्मूलन के साथ-साथ वामपंथी उग्रवाद से मुक्त हो रहे क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है।
गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
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(रिलीज़ आईडी: 2222700)
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