स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय
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चि‍कित्‍सकों और स्वास्थ्य संसाधनों की कमी को दूर करने के लिए उठाए गए कदम


केंद्र प्रायोजित योजना (सीएसएस) के अंतर्गत 'नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना' हेतु 157 सरकारी मेडिकल कॉलेजों को स्‍वीकृति दी गई,  137 पहले से ही कार्यरत

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों को मजबूत करने और कार्यबल की कमी को दूर करने के लिए वित्तीय, तकनीकी और मानव संसाधन प्रोत्साहन प्रदान करता है

प्रविष्टि तिथि: 03 FEB 2026 2:18PM by PIB Delhi

'जन स्वास्थ्य' और 'अस्पताल' राज्य के विषय हैं। तदनुसार, संबंधित राज्य सरकारें देशभर के सरकारी अस्पतालों में चिकित्‍सकों और स्वास्थ्य देखभाल संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रयास करती हैं। राज्य सरकार के अस्पतालों में चिकित्‍सकों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ के रिक्त पदों से संबंधित जानकारी केंद्रीय स्तर पर नहीं रखी जाती है।

केंद्र सरकार द्वारा स्थापित अस्पतालों, अर्थात् वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज और सफदरजंग अस्पताल (वीएमएमसी और एसजेएच), अटल बिहारी वाजपेयी आयुर्वेद संस्थान और डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल (एबीवीआईएमएस और डॉ. आरएमएलएच), लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज और संबद्ध अस्पताल (एलएचएमसी और संबद्ध अस्पताल), और ग्रामीण स्वास्थ्य प्रशिक्षण केंद्र (आरएचटीसी) के संबंध में, इन अस्पतालों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, चिकित्‍सकों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ के रिक्त पदों का विवरण निम्नलिखित है:

 

क्र.सं.

अस्पताल का नाम

चिकित्‍सक

नर्सिंग कर्मी

पैरामेडिकल स्टाफ

एस

एफ

वी

एस

एफ

वी

एस

एफ

वी

1.

वीएमएमसी और एसजेएच

632

513

119

2759

2342

417

162

122

40

2.

एबीवीआईएमएस और डॉ. आरएमएलएच

453

351

102

1559

1459

100

498

344

154

3.

एलएचएमसी और संबद्ध अस्पताल

386

 

298

 

88

 

1181

959

222

631

384

247

4.

आरएचटीसी

46

30

16

41

05

36

90

48

42

*एस- स्वीकृत, एफ- भरा हुआ, वी- रिक्त

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, मौजूदा जिला/रेफरल अस्पतालों से संबद्ध नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना के लिए केंद्र प्रायोजित योजना (सीएसएस) का संचालन करता है। इस योजना के अंतर्गत उन क्षेत्रों और आकांक्षी जिलों को प्राथमिकता दी जाती है जहां कोई सरकारी या निजी मेडिकल कॉलेज मौजूद नहीं है। केंद्र और राज्य सरकारों के बीच निधि बंटवारे का अनुपात पूर्वोत्तर और विशेष श्रेणी के राज्यों के लिए 90:10 और अन्य राज्यों के लिए 60:40 है। इस योजना के अंतर्गत 157 सरकारी मेडिकल कॉलेजों को स्‍वीकृति मिल चुकी है। इनमें से 137 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं।

इसके अलावा, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को उनके समग्र संसाधन बजट के भीतर प्रस्तुत कार्यक्रम कार्यान्वयन योजनाओं के आधार पर उनकी स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों को मजबूत करने के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान की जाती है। मानव संसाधनों की कमी को दूर करने के लिए, एनएचएम के तहत स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को प्रोत्साहित करने हेतु विभिन्न प्रकार के प्रोत्साहन और मानदेय प्रदान किए जाते हैं।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत मानव संसाधनों की कमी को दूर करने के लिए डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने हेतु प्रदान किए जाने वाले प्रोत्साहनों और मानदेय के प्रकार।

(i) ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में सेवा करने वाले विशेषज्ञ चिकित्‍सकों को कठिन क्षेत्र भत्ता।

(ii) ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में विशेषज्ञों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए स्त्री रोग विशेषज्ञों/आपातकालीन प्रसूति देखभाल (ईएमओसी) प्रशिक्षित, बाल रोग विशेषज्ञों और एनेस्थेटिस्ट/जीवन रक्षक एनेस्थीसिया कौशल (एलएसएएस) प्रशिक्षित चिकित्‍सकों को मानदेय भी प्रदान किया जाता है।

(iii) समय पर प्रसवपूर्व देखभाल जांच और रिकॉर्डिंग सुनिश्चित करने, किशोर प्रजनन और यौन स्वास्थ्य गतिविधियों का संचालन करने के लिए डॉक्टरों और सहायक नर्स मिडवाइफ (एएनएम) को प्रोत्साहन।

(iv) राज्यों को विशेषज्ञों को आकर्षित करने के लिए बातचीत योग्य वेतन की पेशकश करने की भी अनुमति है, जिसमें "आप कीमत बताएँ, हम भुगतान करेंगे" जैसी रणनीतियों में अनुकूलता शामिल है।

(v) कठिन क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों के लिए स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में वरीयता प्रवेश और ग्रामीण क्षेत्रों में आवास व्यवस्था में सुधार जैसे गैर-मौद्रिक प्रोत्साहन भी एनएचएम के अंतर्गत शुरू किए गए हैं।

(vi) विशेषज्ञों की कमी को दूर करने के लिए एनएचएम के अंतर्गत चिकित्‍सकों के बहु-कौशल विकास को समर्थन दिया जाता है। स्वास्थ्य परिणामों में सुधार प्राप्त करने के लिए एनएचएम के अंतर्गत वर्तमान मानव संसाधनों का कौशल उन्नयन एक अन्य प्रमुख रणनीति है।

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्री प्रतापराव जाधव ने आज राज्यसभा में लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

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पीके/केसी/एसएस/एसके

 


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