जल शक्ति मंत्रालय
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सभी के लिए नल जल की उपलब्धता सुनिश्चित करना

प्रविष्टि तिथि: 02 FEB 2026 4:16PM by PIB Delhi

भारत सरकार राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के सहयोग से अगस्त 2019 से जल जीवन मिशन (जेजेएम) - हर घर जल का कार्यान्वयन कर रही है, जिसका उद्देश्य पूरे देश के प्रत्येक ग्रामीण घर में पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। पेयजल राज्य का विषय है और केंद्र सरकार तकनीकी एवं वित्तीय सहायता प्रदान करके राज्यों के प्रयासों में सहयोग करती है।

जल जीवन मिशन की शुरुआत अगस्त 2019 में हुई थी जिसके पश्चात ग्रामीण परिवारों तक नल जल की पहुंच बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। अगस्त 2019 में, पूरे देश में केवल 3.23 करोड़ (16.72%) ग्रामीण परिवारों को ही नल जल कनेक्शन उपलब्ध होने की सूचना थी लेकिन अब तक प्राप्त जानकारी के अनुसार, जेजेएम योजना के अंतर्गत 12.55 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों को नल जल कनेक्शन प्रदान किया जा चुका है। इस प्रकार, दिनांक 28.01.2026 तक देश के 19.36 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से 15.79 करोड़ (81.56%) से अधिक परिवारों को नल जल की आपूर्ति की जा रही है।

जेजेएम का कुल अनुमानित व्यय 3.60 लाख करोड़ रुपये था, जिसमें से केंद्र सरकार का हिस्सा 2.08 लाख करोड़ रुपये था। 2024-25 तक स्वीकृत केंद्रीय व्यय का लगभग पूरा उपयोग किया जा चुका है। इसके अलावा, अब तक हुई प्रगति एवं चल रहे कार्यों को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री ने 2025-26 के बजट घोषणाओं में कुल व्यय में वृद्धि करने के साथ-साथ जेजेएम को दिसंबर 2028 तक बढ़ाने की भी घोषणा की है। तदनुसार, जेजेएम को दिसंबर 2028 तक जारी रखने का प्रस्ताव विभाग के विचाराधीन है।

जेजेएम की शुरुआत के साथ ही इसे एक विकेंद्रीकृत, मांग-आधारित एवं समुदाय-प्रबंधित कार्यक्रम के रूप में लागू किया जा रहा है, जिसमें ग्राम पंचायत और/या इसकी उप-समिति/उपयोगकर्ता समूह यानी ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति/पानी समिति को ग्रामीण घरों में नियमित एवं सुनिश्चित नल जल आपूर्ति करने के लिए ग्रामीण स्तर पर जल आपूर्ति प्रणाली की योजना बनाने, उसे लागू करने, प्रबंधित करने, संचालित करने एवं उसका रखरखाव करने के लिए सशक्त बनाया जा रहा है।

जेजेएम के अंतर्गत, गैर सरकारी संगठनों/समुदाय आधारित संगठनों (सीबीओ)/स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी)/स्वैच्छिक संगठनों (वीओ) आदि को कार्यान्वयन सहायता एजेंसियों (आईएसए) के रूप में सूचीबद्ध किया जा रहा है ताकि जल आपूर्ति अवसंरचना के दीर्घकालिक रखरखाव को सुनिश्चित करने के लिए सामुदायिक सहायता संगठनों/ पानी समितियों को योजना बनाने, समुदायों को जुटाने एवं जोड़ने, जानकारी फैलाने और महिलाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करने में सहायता एवं प्रशिक्षण दे सकें, जिससे जल आपूर्ति संरचना का दीर्घकालिक रखरखाव सुनिश्चित हो सके।

इसके अलावा, स्थानीय ग्राम समुदाय को योजना बनाने, उसे लागू करने तथा संचालन एवं रखरखाव की जिम्मेदारी संभालने में सक्षम बनाने के लिए, कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के सहयोग से नल जल मित्र कार्यक्रम (एनजेएमपी) शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य उन्हें व्यापक कौशल प्रदान करना और "नल जल मित्र" बनाना है जिससे वे योजना संचालक के रूप में कार्य कर सकें और अपने गांव में नल जल आपूर्ति योजनाओं की छोटी-मोटी मरम्मत एवं रखरखाव, जिसमें निवारक रखरखाव भी शामिल है, कुशल राजमिस्त्री, प्लंबर, फिटर, इलेक्ट्रीशियन, मोटर मैकेनिक, पंप ऑपरेटर आदि के रूप में करने में सक्षम हों।

पारदर्शिता बढ़ाने तथा सतत एवं निरंतर सेवा वितरण करने हेतु जन भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए, जल अर्पण के अंतर्गत मानकीकृत "सामुदायिक प्रबंधित पाइपयुक्त जल प्रणालियों पर पुस्तिका" तैयार की गई है, जिसमें ग्राम पंचायतों और ग्राम एवं पशु तथा पशु सेवा समिति के सदस्यों को शामिल करते हुए 15 दिवसीय पूर्वाभ्यास अनिवार्य किया गया है ताकि सुचारू हस्तांतरण एवं सतत संचालन सुनिश्चित किया जा सके; जिला एवं ग्राम पंचायत डैशबोर्ड का लोकार्पण किया गया है और नागरिकों की प्रतिक्रिया एवं शिकायत निवारण के लिए मेरी पंचायत प्लेटफॉर्म के साथ एकीकृत किया गया है तथा ग्राम पंचायत के नेतृत्व में डिजिटल पेयजल सेवा कार्यक्षमता मूल्यांकन उपकरण के रूप में जल सेवा आकलन शुरू की गई है।

इसके अलावा, जेजेएम के अंतर्गत, राज्यों को अन्य योजनाओं जैसे वीबी-जी राम जी, एकीकृत जलसंभर प्रबंधन कार्यक्रम (आईडब्ल्यूएमपी), स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), ग्रामीण स्थानीय निकायों/पंचायती राज संस्थानों को वित्त आयोग द्वारा दिए जाने वाले अनुदान, राज्य योजनाओं आदि के साथ समन्वय स्थापित करते हुए जल स्रोत पुनर्भरण, स्थानीय पेयजल स्रोतों में वृद्धि, अस्वच्छ जल उपचार एवं पुन: उपयोग, जलभंडार पुनर्भरण, वर्षा जल संचयन आदि पर सलाह दी गई है।

जेजेएम के अंतर्गत, मौजूदा दिशा-निर्देशों के अनुसार, नल जल आपूर्ति योजनाओं के माध्यम से आपूर्ति किए जाने वाले पानी की गुणवत्ता के लिए भारतीय मानक ब्यूरो के बीआईएस:10500 मानकों को बेंचमार्क माना गया है। इसके अलावा, जेजेएम के अंतर्गत घरों में नल जल की आपूर्ति के लिए जल आपूर्ति योजनाओं की योजना बनाते समय, आर्सेनिक एवं फ्लोराइड सहित रासायनिक प्रदूषकों से प्रभावित बस्तियों को प्राथमिकता प्रदान की जाती है।

राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को सलाह दी गई है कि वे जल गुणवत्ता संबंधी समस्याओं से ग्रसित गांवों के लिए वैकल्पिक सुरक्षित जल स्रोतों पर आधारित नल जल आपूर्ति योजना बनाएं और उन्हें लागू करें। जल जीवन मिशन (जेजेएम) के अंतर्गत, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को सलाह दी गई है कि वे विशेष रूप से आर्सेनिक एवं फ्लोराइड से प्रभावित बस्तियों में सामुदायिक जल शोधन संयंत्र (सीडब्ल्यूपीपी) स्थापित करें जिससे जेजेएम मानकों के अनुरूप नल जल आपूर्ति योजनाओं के चालू होने तक प्रत्येक घर को पीने एवं खाना पकाने की आवश्यकताओं (प्रति व्यक्ति 8-10 लीटर तक प्रति दिन) को पूरा करने के लिए पीने योग्य पानी उपलब्ध कराया जा सके।  राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा जेजेएम-आईएमआईएस पर दी गई रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में देश के ग्रामीण क्षेत्रों में सभी बस्तियों को आर्सेनिक एवं फ्लोराइड संदूषण से मुक्त सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है।

इसके अलावा, राज्य/केंद्र शासित प्रदेश जल गुणवत्ता निगरानी एवं सर्वेक्षण (डब्ल्यूक्यूएमआईएस) गतिविधियों के लिए जेजेएम के अंतर्गत आवंटित वार्षिक निधि का 2 प्रतिशत तक उपयोग कर सकते हैं, जिसमें अन्य बातों के अलावा जल गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशालाओं की स्थापना एवं सुदृढ़ीकरण, उपकरण, यंत्र, रसायन, कांच के बर्तन, उपभोग्य सामग्रियों की खरीद, कुशल जनशक्ति की भर्ती, समुदाय द्वारा फील्ड टेस्ट किट का उपयोग करके निगरानी, ​​जागरूकता निर्माण, जल गुणवत्ता पर शैक्षिक कार्यक्रमों का आयोजन, प्रयोगशालाओं का प्रमाणन/मान्यता आदि शामिल हैं।

राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को जल गुणवत्ता परीक्षण के लिए जल के नमूनों की जांच करने तथा पेयजल का नमूना संग्रह, रिपोर्टिंग, निगरानी एवं सर्वेक्षण करने के लिए एक ऑनलाइन डब्ल्यूक्यूएमआईएस पोर्टल विकसित किया गया है। डब्ल्यूक्यूएमआईएस के माध्यम से रिपोर्ट किए गए राज्यवार जल गुणवत्ता परीक्षण का विवरण जेजेएम डैशबोर्ड पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं और इन्हें https://ejalshakti.gov.in/WQMIS/Main/report पर देखा जा सकता है।

जेजेएम डैशबोर्ड पर एक 'नागरिक कॉर्नर' भी विकसित किया गया है। इस कॉर्नर में ग्रामीण क्षेत्रों में पीडब्ल्यूएस के माध्यम से आपूर्ति की जाने वाली जल गुणवत्ता के बारे में लोगों में जागरूकता फैलाने एवं विश्वास उत्पन्न करने के लिए ग्रामीण स्तर पर जल गुणवत्ता परीक्षण के परिणामों को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जाता है।

विभाग ने मार्च 2023 में "पेयजल उपचार प्रौद्योगिकियों पर पुस्तिका" और दिसंबर 2024 में "ग्रामीण घरों में पाइपलाइन द्वारा पेयजल आपूर्ति की जल गुणवत्ता की निगरानी के लिए संक्षिप्त पुस्तिका" जारी की। इन दोनों का उद्देश्य क्षेत्र में काम करने वाले विशेषज्ञों को सुरक्षित जल आपूर्ति प्रणाली का प्रभावी प्रबंधन करने में मार्गदर्शन प्रदान करना है।

यह जानकारी केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री श्री वी. सोमन्ना ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

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