प्रविष्टि तिथि:
01 FEB 2026 8:03PM by PIB Delhi
केन्द्रीय बजट 2026–27 भारत की विकास रणनीति के केन्द्र में अंतरराष्ट्रीय व्यापार और निर्यात को रखता है तथा एक प्रतिस्पर्धी, सुदृढ़ और वैश्विक रूप से एकीकृत अर्थव्यवस्था के निर्माण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है। व्यापक आर्थिक स्थिरता, वित्तीय अनुशासन और निरंतर सार्वजनिक निवेश पर आधारित यह बजट, भारत को एक विश्वसनीय वैश्विक व्यापार भागीदार के रूप में स्थापित करने और विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में प्रगति को तेज करने हेतु व्यापक सुधार एवं निवेश एजेंडा को आगे बढ़ाता है।
रोजगार सृजन, औद्योगिक उन्नयन, विदेशी मुद्रा अर्जन तथा वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में एकीकरण के प्रमुख चालक के रूप में निर्यात की भूमिका को स्वीकार करते हुए, बजट में सेवा क्षेत्र, विनिर्माण, विशेष आर्थिक क्षेत्र(SEZ), अवसंरचना, व्यापार सुगमता और विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित सुधारों सहित अनेक उपायों की घोषणा की गई है।
बजट का एक प्रमुख आकर्षण रणनीतिक और श्रम-प्रधान क्षेत्रों में घरेलू विनिर्माण को बड़े पैमाने पर बढ़ाने पर पर ज़ोर दिया गया है, जिससे निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत होगी और महत्वपूर्ण आयात निर्भरता कम होगी। प्रमुख पहलों में बायोफार्मा शक्ति, इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 की शुरुआत, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम का विस्तार, दुर्लभ खनिज कॉरिडोर का विकास, केमिकल पार्कों की स्थापना तथा पूंजीगत वस्तुओं और कंटेनर विनिर्माण के लिए लक्षित सहायता शामिल हैं।
वस्त्र, फुटवियर, खेल सामग्री, हस्तशिल्प और हथकरघा जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों पर एकीकृत पार्कों, आधुनिकीकरण योजनाओं, कौशल विकास पहलों, क्लस्टर पुनरुद्धार और सततता-केंद्रित कार्यक्रमों के माध्यम से फिर से ध्यान दिया जा रहा है। अवसंरचना और प्रौद्योगिकी उन्नयन के माध्यम से 200 पुराने औद्योगिक क्लस्टरों को फिर से शुरू करने के लिए लागत कम करने, उत्पादकता बढ़ाने और पारंपरिक निर्यात केंद्रों को ज़्यादा प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद मिलेगी।
भारत के प्रमुख विदेशी मुद्रा अर्जक क्षेत्रों में से एक रत्न एवं आभूषण उद्योग को व्यापार सुगमता और लॉजिस्टिक्स दक्षता से जुड़े अप्रत्यक्ष उपायों से विशेष लाभ मिलेगा। कूरियर निर्यात पर 10 लाख रूपए की मूल्य सीमा हटाने से छोटे निर्यातकों और ई-कॉमर्स आधारित शिपमेंट्स को सहयोग मिलेगा, जबकि लौटाए गए माल के प्रबंधन में सुधार से वैश्विक B2C व्यापार में बाधाएं कम होंगी। सोने और चांदी के डोरे बार तथा लैब में बने हीरे के इनपुट पर रियायती सीमा शुल्क व्यवस्था का विस्तार घरेलू रिफाइनिंग और मूल्य संवर्धन को प्रोत्साहित करेगा।
सेवा क्षेत्र को भी मजबूत नीतिगत समर्थन दिया गया है। शिक्षा से सशक्तिकरण और उद्यमिता के लिए एक उच्च-स्तरीय स्थायी समिति के गठन का प्रस्ताव है, जिसका उद्देश्य समन्वित सुधारों का मार्गदर्शन करना और भारत को सेवा निर्यात में वैश्विक अग्रणी बनाना है। वर्ष 2047 तक वैश्विक सेवा निर्यात में 10-प्रतिशत हिस्सेदारी का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। आईटी और आईटी-इनेबल्ड सेवाओं के लिए लक्षित कर और नियामकीय सुधार—जैसे आईटी सेवाओं का एकीकृत वर्गीकरण, उच्च सेफ-हार्बर सीमा, स्वचालित अनुमोदन, तेज़ अग्रिम मूल्य निर्धारण समझौते और दीर्घकालिक निश्चितता—ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स(GCCs) और अंतरराष्ट्रीय सेवा प्रदाताओं के लिए भारत की आकर्षण क्षमता को बढ़ाएंगे।
बजट में भारत-स्थित डेटा सेंटर्स के माध्यम से वैश्विक क्लाउड सेवाएं प्रदान करने वाली विदेशी कंपनियों को वर्ष 2047 तक कर-अवकाश देने तथा संबंधित-पक्ष सेवाओं के लिए सेफ-हार्बर मानदंड लागू करने का प्रस्ताव है। इन उपायों से विदेशी निवेश में वृद्धि, डिजिटल अवसंरचना का विस्तार और भारत को डिजिटल एवं डेटा-आधारित सेवाओं के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी।
विशेष आर्थिक क्षेत्रों(SEZ) में सुधारों का उद्देश्य निर्यात उन्मुखता बनाए रखते हुए क्षमता उपयोग, पैमाने की अर्थव्यवस्थाओं और SEZ इकोसिस्टम की कुल मज़बूती को बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। रियायती शुल्क पर सीमित घरेलू टैरिफ क्षेत्र(DTA) बिक्री के लिए एकमुश्त सुविधा तथा क्लाउड और डेटा सेंटर परिचालनों के लिए विस्तारित कर प्रोत्साहन वैश्विक विनिर्माताओं और प्रौद्योगिकी कंपनियों को आकर्षित करेंगे।
अवसंरचना विकास के लिए एक शक्तिशाली प्रोत्साहन निर्यात रणनीति का आधार है। सार्वजनिक पूंजीगत व्यय में वृद्धि, समर्पित मालवाहक कॉरिडोरों का विस्तार, नए राष्ट्रीय जलमार्ग, तटीय शिपिंग को बढ़ावा, कंटेनर विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स पार्क और हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर लॉजिस्टिक्स लागत को उल्लेखनीय रूप से कम करेंगे और विशेष रूप से टियर-2 व टियर-3 शहरों की कनेक्टिविटी में सुधार करेंगे। ये निवेश ठहराव समय को कम करके और आपूर्ति शृंखला की दक्षता को बेहतर बनाकर निर्यात प्रतिस्पर्धा को सीधे बढ़ाएंगे।
बजट व्यापार में विश्वास-आधारित और प्रौद्योगिकी-संचालित ‘ईज ऑफ डूइंग’ बिजनेस को आगे बढ़ाता है। प्रमुख उपायों में निर्यात कार्गो की इलेक्ट्रॉनिक सीलिंग, विश्वसनीय आपूर्ति शृंखला मान्यता, स्वचालित सीमा शुल्क प्रक्रियाएं, नॉन-इंट्रूसिव स्कैनिंग का विस्तार, अग्रिम निर्णयों की वैधता अवधि बढ़ाना, अधिकृत आर्थिक परिचालकों के लिए शुल्क स्थगन में वृद्धि तथा कूरियर निर्यात पर मूल्य सीमा हटाना शामिल है। ये सभी सुधार अनुमान लगाने की क्षमता बढ़ाएंगे, लेन-देन लागत घटाएंगे और वैश्विक व्यापार सुगमता सूचकांकों में भारत की स्थिति को मजबूत करेंगे।
एमएसएमई, जो भारत के निर्यात की रीढ़ हैं, को 10,000-करोड़ रूपए के एसएमई ग्रोथ फंड, उन्नत ऋण गारंटी तंत्र, सीपीएसई द्वारा TReDS के अनिवार्य उपयोग तथा समय पर और सस्ते वित्त उपलब्ध कराने के लिए GeM को TReDS से जोड़ने जैसे उपायों के माध्यम से लक्षित समर्थन दिया गया है। ये कदम कार्यशील पूंजी की बाधाओं को दूर करने और एमएसएमई को वैश्विक बाजारों में विस्तार करने में सक्षम बनाएंगे।
कृषि, समुद्री उत्पाद, दवा निर्मताओं, पर्यटन, एविजीसी और संबद्ध स्वास्थ्य सेवाओं जैसे क्षेत्रों में विशेष पहलें नए निर्यात अवसर खोलती हैं और भारत के विविधीकृत निर्यात आधार को और मजबूत करती हैं।
कुल मिलाकर, केन्द्रीय बजट 2026–27 एक सुसंगत और दूरदर्शी व्यापार एवं निर्यात रणनीति पेश करता है—जो प्रतिस्पर्धी विनिर्माण, सेवा उत्कृष्टता, लॉजिस्टिक्स आधुनिकीकरण, नियामकीय सरलीकरण और अवसंरचना निवेश को एक साथ जोड़ता है। यह भारत की एक विश्वसनीय वैश्विक भागीदार के रूप में भूमिका को मजबूती देता है और लगातार निर्यात वृद्धि, रोजगार सृजन तथा दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती के लिए ठोस आधार प्रदान करता है।
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