खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय
पीएमएफएमई के अंतर्गत लघु खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां
पीएमएफएमई के माध्यम से सूक्ष्म खाद्य उद्यमियों को सशक्त बनाना
पीएमएफएमई: सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करणकर्ताओं के लिए वित्तीय सहायता, क्षमता निर्माण और बाजार समर्थन
प्रविष्टि तिथि:
29 JAN 2026 3:16PM by PIB Delhi
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय देश में नए सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों की स्थापना/मौजूदा सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों के उन्नयन के लिए वित्तीय, तकनीकी और व्यावसायिक सहायता प्रदान करने के लिए केंद्र प्रायोजित "प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना" का कार्यान्वयन कर रहा है। इस योजना के अंतर्गत, ऋण से जुड़ी सब्सिडी के साथ दो लाख सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को सहायता प्रदान करने का लक्ष्य है। इस योजना के तहत सब्सिडी बैंकों द्वारा ऋण वितरण हेतु परियोजना की स्वीकृति से जुड़ी हुई है। हालांकि, इस योजना के अंतर्गत मंत्रालय समर्थित इकाइयों को कोई परिचालन लक्ष्य आवंटित नहीं करता है।
इस योजना के तहत, खाद्य सुरक्षा अनुपालनों का पालन करने वाले सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को उद्यम आधार पंजीकरण, भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) पंजीकरण और लागू नियमों के अनुसार वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) पंजीकरण की सुविधा प्रदान की जाती है। ग्रामीण सूक्ष्म उद्यमों सहित खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों का खाद्य सुरक्षा निरीक्षण और अनुपालन लेखापरीक्षा भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण द्वारा की जाती है।
यह योजना मांग आधारित है और देश भर के सभी इच्छुक आवेदकों, जिनमें पिछड़े जिले भी शामिल हैं, को पात्र परियोजना लागत का 35 प्रतिशत तक ऋण-आधारित अनुदान, पात्र लागत का 35 प्रतिशत तक (3 करोड़ रुपये तक) सामान्य अवसंरचना, 40,000 रुपये तक की प्रारंभिक पूंजी, लाभार्थियों के लिए क्षमता निर्माण, ब्रांडिंग और विपणन तथा इकाइयों के औपचारिकरण के लिए मार्गदर्शन प्रदान करती है। वर्ष 2020-21 से 2025-26 तक संचालित इस योजना का परिव्यय 10,000 करोड़ रुपये है।
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री श्री रवनीत सिंह ने आज लोकसभा में लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
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पीके/केसी/जेके/वाईबी
(रिलीज़ आईडी: 2220749)
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