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राष्ट्रीय बालिका दिवस का उत्सव


बालिकाओं के सशक्तिकरण की दिशा में प्रगति, पहल और उपलब्धियाँ

प्रविष्टि तिथि: 23 JAN 2026 1:56PM by PIB Delhi

मुख्‍य बिंदु

  • वर्ष 2008 से प्रत्येक वर्ष 24 जनवरी को मनाया जाने वाला राष्ट्रीय बालिका दिवस भारत में बालिकाओं के अधिकारों, सशक्तिकरण और समान अवसरों के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देता है।
  • देशभर में 97.5 प्रतिशत विद्यालयों में बालिकाओं के लिए शौचालय की सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
  • यूडीआईएसई रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024–2025 की अवधि में माध्यमिक स्तर पर बालिकाओं का सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) 80.2 प्रतिशत तक पहुँच गया।
  • केंद्रीय बजट 2025–26 में मिशन शक्ति के लिए 3,150 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है।
  • जनवरी 2026 तक, देशभर में कुल 2,153 बाल विवाहों को रोका गया है और 60,262 बाल विवाह निषेध अधिकारियों की नियुक्ति की गई है।

परिचय

भारत में बालिकाओं के अधिकारों, शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण तथा उनके समग्र कल्याण पर जोर देने के लिए समर्पित राष्ट्रीय बालिका दिवस प्रतिवर्ष 24 जनवरी को मनाया जाता है।

वर्ष 2008 में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (एमडब्ल्यूसीडी) द्वारा प्रारंभ किया गया यह दिवस लड़के-लड़कियों में भेदभाव के बारे में जागरूकता बढ़ाने, समान अवसरों को प्रोत्साहित करने और ऐसा वातावरण बनाने का मंच प्रदान करता है, जहाँ बालिकाएँ सशक्त नागरिक के रूप में आगे बढ़ सकें। यह राष्ट्र के उज्ज्वल और अधिक न्यायसंगत भविष्य के निर्माण में बालिकाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है। यह पहल भारत के महिला-नेतृत्व वाले विकास और वर्ष 2047 तक विकसित भारत के विज़न के साथ प्रभावी रूप से मेल खाती है।

बालिकाओं को सशक्‍त बनाने की पैरवी

राष्ट्रीय बालिका दिवस बालिकाओं के सामने निरंतर मौजूद रहने वाली-लैंगिक भेदभाव, कन्या भ्रूण हत्या, बाल लिंगानुपात से जुड़ी चुनौतियों, बाल विवाह, तथा शिक्षा और स्वास्थ्य तक पहुँच में बाधाओं जैसी असमानताओं—को दूर करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। इसके अलावा यह दिवस समाज की सोच में परिवर्तन लाकर बालिकाओं को समान रूप से महत्व और सम्मान देने पर जोर देता है, जिससे उनके समग्र विकास को बढ़ावा मिले।

इसके प्रमुख फोकस क्षेत्रों में बालिकाओं की शिक्षा को आगे बढ़ाना, कौशल विकास, डिजिटल समावेशन, एसईटीएम क्षेत्रों में भागीदारी, मानसिक स्वास्थ्य सहयोग, हिंसा से सुरक्षा तथा नेतृत्वकारी भूमिकाओं के अवसर शामिल हैं। निरंतर प्रयासों के माध्यम से, विशेष रूप से बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (बीबीबीपी) योजना के अंतर्गत, उल्लेखनीय प्रगति हुई है। राष्ट्रीय स्तर पर जन्म के समय लिंगानुपात (एसआरबी) 2014–15 में लगभग 918 से बढ़कर 2023–24 में 930 हो गया।1

इसके अतिरिक्त, भारत में माध्यमिक स्तर (कक्षा 9–10) पर बालिकाओं का सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) 2014–15 में 75.51 प्रतिशत से बढ़कर 2023–24 में 78.0 प्रतिशत हो गया।2 इसके अलावा वर्ष 2024–25 में माध्यमिक स्तर पर बालिकाओं का सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) 80.2 प्रतिशत तक पहुँच गया।

 


यह बढ़ती हुई प्रवृत्ति बालिकाओं की उच्च भागीदारी और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ तथा समग्र शिक्षा जैसी पहलों के प्रभाव को दर्शाती है। यह रिटेंशन और संक्रमण में मौजूद व्‍यापक चुनौतियों के बीच, माध्यमिक शिक्षा तक बालिकाओं की पहुँच मजबूत करने के लिए किए जा रहे सतत प्रयासों को रेखांकित करती है।

प्रमुख सरकारी पहल और उपलब्धियाँ

भारत सरकार ने बालिकाओं की सुरक्षा, शिक्षा और सशक्तिकरण के लिए अनेक लक्षित योजनाएँ लागू की हैं, जिनमें से अनेक मिशन शक्ति के अंतर्गत एकीकृत है। यह मिशन सुरक्षा, संरक्षा और सशक्तिकरण से जुड़े विभिन्न हस्तक्षेपों को एक साथ जोड़ता है।

मिशन शक्ति

मिशन शक्ति महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा वर्ष 2022 में (1 अप्रैल 2022 से प्रभावी) 15वें वित्त आयोग अवधि (2021–26) के लिए एक एकीकृत छत्र योजना के रूप में शुरू किया गया। यह योजना महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षा और सशक्तिकरण से संबंधित हस्तक्षेपों को सुदृढ़ करती है तथा इसके अंतर्गत दो प्रमुख उप-योजनाएँ शामिल हैं:

• संबल– (वन स्टॉप सेंटर, महिला हेल्पलाइन, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ तथा नारी अदालतों को शामिल करते हुए सुरक्षा और संरक्षा पर केंद्रित)

• सामर्थ्य– (प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, पालना, शक्ति सदन, सखी निवास तथा संकल्प हब सहित सशक्तिकरण पर केंद्रित।

यह मिशन महिलाओं और बालिकाओं को राष्ट्र निर्माण में समान भागीदार के रूप में आगे बढ़ने में समर्थ बनाने के लिए सरकारी विभागों के बीच समन्वय, नागरिकों की भागीदारी तथा जीवन-चक्र पर आधारित सहयोग को बढ़ावा देता है। केंद्रीय बजट 2025–26 में मिशन शक्ति के लिए 3,150 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया।3

इन प्रयासों को पूर्णता प्रदान करते हुए, बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और लैंगिक हिंसा को रोकने के लिए सशक्त कानूनी ढाँचे भी लागू किए गए हैं।

शिक्षा और कौशल विकास के माध्यम से सशक्तिकरण को सुगम बनाना

शिक्षा को लैंगिक समानता और दीर्घकालिक सशक्तिकरण की नींव स्‍वीकार करते हुए बालिकाओं के नामांकन में अंतर को दूर करने, सीखने के परिणामों को संवर्धित करने, और एसटीईएम एवं पेशेवर क्षेत्रों में अवसर प्रदान करने के लिए कई प्रमुख योजनाएँ बनाई गई हैं।

बालिकाओं के लिए स्कूली शिक्षा में प्रगति4:

  • वर्ष 2024–25 में प्राथमिक से माध्यमिक स्तर तक कुल 11,93,34,162 बालिकाएँ स्कूलों में नामांकित थीं।
  • कुल 14,21,205 स्कूलों ने बालिकाओं के लिए शौचालय की उपलब्धता की जानकारी दी, जिनमें से 13,72,881 कार्यात्मक हैं।

समग्र शिक्षा

शिक्षा मंत्रालय द्वारा वर्ष 2018 में शुरू की गई स्कूली शिक्षा की इस एकीकृत योजना (प्रारंभिक शिक्षा से कक्षा XII तक), में सर्व शिक्षा अभियान और राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान जैसी पूर्ववर्ती योजनाएँ  समाहित हैं। यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुरूप है और बालिकाओं के लिए अलग शौचालय, विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों (सीडब्ल्यूएसएन) के लिए छात्रवृत्ति, लिंग-संवेदी शिक्षण सामग्री और शिक्षक संवेदनशीलता कार्यक्रम जैसे लक्षित हस्तक्षेपों के माध्यम से लैंगिक एवं सामाजिक श्रेणीगत अंतर को पाटने पर केंद्रित है। समग्र शिक्षा समावेशी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, मौलिक साक्षरता/सांख्यिकी कौशल, और व्यावसायिक अनुभव पर जोर देती है, जिससे वंचित वर्गों की बालिकाओं के लिए समान अवसर सुनिश्चित होते हैं।

कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (केजीबीवी)

केजीबीवी वंचित समुदायों (एससी/एसटी/ओबीसी/अल्पसंख्यक/बीपीएल परिवारों) की 10–18 वर्ष आयु की बालिकाओं को आवासीय शिक्षा सुविधा प्रदान करते हैं। ये विद्यालय कक्षा VI से XII तक शिक्षा प्रदान करते हैं और शैक्षिक रूप से पिछड़े ब्लॉकों में स्थित हैं। समग्र शिक्षा के तहत उन्नत किए गए


केजीबीवी बालिकाओं का प्राथमिक/माध्यमिक स्तर से उच्चतर माध्यमिक स्तर तक सहज और लगातार परिवर्तन  सुनिश्चित करते हैं।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (बीबीबीपी)

हरियाणा में वर्ष 2015 में शुरू की गई प्रमुख योजना बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (बीबीबीपी), (2025 में राष्ट्रीय स्तर की गतिविधियों के माध्यम से अपनी10वीं वर्षगांठ मना रही है)  एक दशक से अधिक के प्रभाव को चिन्हित कर चुकी है। अब यह योजना मिशन शक्ति की संबल उप-योजना में एकीकृत हो चुकी है और सभी जिलों में विस्तारित की जा चुकी है। बीबीबीपी का मुख्य उद्देश्य लैंगिक पूर्वाग्रह पर आधारित भ्रूण चयन को रोकना, बालिकाओं का जीवन और सुरक्षा सुनिश्चित करना, और शिक्षा को बढ़ावा देना है। इस योजना की बदौलत जन्म के समय लिंगानुपात (एसआरबी) में सुधार हुआ है, माध्यमिक शिक्षा में बालिकाओं का नामांकन बढ़ा है5, स्वास्थ्य सेवा तक सुलभता में सुधार हुआ है, बहु-क्षेत्रीय अभियानों और एनजीओ एवं मीडिया के सहयोग से सामुदायिक स्तर पर व्यवहार परिवर्तन को बढ़ावा दिया गया है।   

उड़ान

उड़ान एक नवाचारी पहल है, जिसे वर्ष 2014 में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा शिक्षा मंत्रालय के मार्गदर्शन में शुरू किया गया। यह परियोजना विशेष रूप से प्रमुख इंजीनियरिंग कॉलेजों में बालिकाओं के कम नामांकन की समस्‍या को लक्षित करती है। इसका उद्देश्य विद्यालय स्तर की शिक्षा और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं (जैसे जेईई) की आवश्यकताओं के बीच अंतर को पाटना है।

यह पहल अध्ययन सामग्री, वीडियो ट्यूटोरियल, वर्चुअल कक्षाएँ और सप्ताहांत संपर्क सत्रों सहित निशुल्‍क ऑनलाइन संसाधन प्रदान करती है। इस प्रमुख पहल का उद्देश्य कक्षा XI और XII की बालिकाओं, विशेषकर आर्थिक रूप से वंचित पृष्ठभूमि से आने वाली छात्राओं को प्रभावी ढंग से तैयारी करने में सशक्त बनाना और एसटीईएम उच्च शिक्षा में उनकी भागीदारी बढ़ाना है।

यह योजना तकनीकी शिक्षा में लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप है और

बालिकाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा तक समावेशी पहुँच के दृष्टिकोण का समर्थन करती है।

युवा किशोरियों के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण के माध्यम से आकांक्षाओं का पोषण (नव्‍या)

सोनभद्र, उत्तर प्रदेश में 24 जून 2025 को शुरू की गई नव्‍या महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (एमडब्ल्यूसीडी) और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) की संयुक्त पायलट पहल है। यह 19 राज्यों के 27 आकांक्षी और पूर्वोत्तर जिलों में 16–18 वर्ष की किशोरियों (कम से कम कक्षा 10 उत्तीर्ण) को लक्षित करती है। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 4.0 (पीएमकेवीवाई 4.0) के अंतर्गत 3,850 बालिकाओं के शुरुआती प्रशिक्षण का लक्ष्य रखा गया है।  यह कार्यक्रम प्रतिभागियों को गैर-परंपरागत और उभरते हुए क्षेत्रों में व्यावसायिक कौशलों से लैस करने पर केंद्रित है। विकसित भारत@2047 के विज़न के अनुरूप, नव्‍या सामाजिक और आर्थिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देती है, कार्यबल में लैंगिक रूढ़ियों को तोड़ती है और बालिकाओं को विशेषकर अल्पसंसाधित और जनजातीय क्षेत्रों में समावेशी विकास के एजेंट के रूप में सशक्त बनाती है। यह पहल 19 राज्यों के 27 जिलों को कवर करती है, और इसका लक्ष्‍य पीएमकेवीवाई  4.0 के तहत डिजिटल मार्केटिंग, साइबर सुरक्षा, एआई-सक्षम सेवाएँ, और ग्रीन जॉब्स जैसे गैर परम्‍परागत क्षेत्रों में 3,850 किशोरियों को उच्चतर माध्यमिक स्तर तक प्रशिक्षण देना है।6 

विज्ञान ज्‍योति योजना

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) द्वारा लागू की गई विज्ञान ज्योति योजना कक्षा IX–XII की मेधावी बालिकाओं (विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों) को एसटीईएम क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करती है। इसकी गतिविधियों में  परामर्श, लैब विजिट, कार्यशालाएँ, रोल मॉडल से संवाद, विज्ञान शिविर, शैक्षिक सहायता शामिल हैं। अपनी शुरुआत के बाद से, विज्ञान ज्योति कार्यक्रम ने 35 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 300 जिलों की 80,000 से अधिक मेधावी बालिकाओं को सहायता दी है।7

बालिकाओं के लिए छात्रवृत्ति

भारत सरकार ने लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने, ड्रॉपआउट दर को कम करने और माध्यमिक, उच्च और तकनीकी शिक्षा स्तरों पर मेधावी छात्राओं को सहायता देने के लिए कई लक्षित स्कॉलरशिप योजनाएं लागू की हैं।

STEM विषयों में महिलाओं का नामांकन

विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) में महिलाओं के नामांकन को बढ़ावा देने के लिए, IIT और NIT में महिलाओं के लिए अतिरिक्त सीटें शुरू की गई हैं। इस मॉडल ने देश भर के अन्य उच्च शिक्षा संस्थानों में लैंगिक विविधता में सुधार किया है।

UGC NET-जूनियर रिसर्च फेलोशिप

यह फेलोशिप STEM शिक्षा सहित सभी विषयों में Ph.D. करने के लिए प्रदान की जाती है। वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान, STEM विषयों में कुल 12323 स्कॉलर्स में से 6435 महिलाएं हैं, जो 50% से अधिक है।

2024-25 के दौरान, STEM विषयों में कुल 13727 स्कॉलर्स में से 7293 महिलाएं हैं, जो कुल फेलो का 53% से अधिक है।

स्नातकोत्तर अध्ययन के लिए राष्ट्रीय स्कॉलरशिप

कॉलेज और विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए स्कॉलरशिप की केंद्रीय क्षेत्र योजना 2023-24 में राष्ट्रीय स्कॉलरशिप पोर्टल (NSP) पर लागू की गई थी। यह चार मौजूदा योजनाओं को मिलाकर नियमित, पूर्णकालिक कार्यक्रमों में स्नातकोत्तर छात्रों को सहायता प्रदान करती है: विश्वविद्यालय रैंक धारकों के लिए P.G. स्कॉलरशिप; M.Tech/M.E./M.Pharm के लिए GATE/GPAT योग्य छात्रों के लिए P.G. स्कॉलरशिप; SC/ST उम्मीदवारों के लिए व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए P.G. स्कॉलरशिप; और एकल बालिका के लिए P.G. इंदिरा गांधी स्कॉलरशिप। 10,000 सीटों के लिए एक मेरिट सूची तैयार की जाती है, जिसमें 30% महिलाओं के लिए आरक्षित हैं (3,000 चयनित), जो भारत सरकार के आरक्षण मानदंडों का पालन करते हैं। सीटें STEM विषयों (50%) और मानविकी (50%) के बीच समान रूप से विभाजित हैं, और स्कॉलर्स को कार्यक्रम की अवधि के लिए सालाना 1,50,000 रुपये मिलते हैं। कार्यक्रम की अवधि के लिए छात्रों को प्रति वर्ष 1,50,000 रुपये दिए जाते हैं।

AISHE रिपोर्ट के अनुसार, 2014-15 से 2022-23 तक महिला स्नातकोत्तर नामांकन में काफी वृद्धि हुई है। यह 19,86,296 से बढ़कर 32,02,950 हो गया, जो 12,16,654 छात्रों की कुल वृद्धि और 61.3% की विकास दर को दर्शाता है।

पीएच.डी. डिग्री में महिलाओं का नामांकन

AISHE रिपोर्ट के अनुसार, 2014-15 से 2022-23 के बीच, महिलाओं के बीच पीएच.डी. नामांकन में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। महिला पीएच.डी. नामांकन 2014-15 में 47,717 से बढ़कर 2022-23 में 1,12,441 हो गया, जिसमें 64,724 उम्मीदवारों की कुल वृद्धि और लगभग 135.6% की वृद्धि दर्ज की गई।

AICTE प्रगति छात्रवृत्ति योजना

2014-15 में शुरू की गई AICTE प्रगति छात्रवृत्ति योजना का उद्देश्य मेधावी छात्राओं को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए सशक्त बनाना है, जो सालाना 10,000 छात्रवृत्तियाँ प्रदान करती है - जिसमे से डिप्लोमा और डिग्री पाठ्यक्रमों प्रत्येक के लिए 5,000 छात्रवृतियाँ शामिल हैं| इसमें 23 राज्य/केंद्र शासित प्रदेश और शेष 13 क्षेत्रों की सभी पात्र लड़कियाँ शामिल हैं, जिनमें पूर्वोत्तर और जम्मू-कश्मीर शामिल हैं। 2024-25 में, 35,998 छात्राओं को इस योजना से लाभ हुआ, जो इसकी व्यापक पहुँच और प्रभाव को उजागर करता है।

भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों में लैंगिक समानता में सुधार

2014-15 और 2022-23 (अनंतिम) के बीच, भारत में उच्च शिक्षण संस्थानों (HEIs) में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है। अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण (AISHE) में पंजीकृत HEIs की संख्या 2014-15 में 51,534 से बढ़कर 2022-23 में 60,380 हो गई। इसी अवधि के दौरान, उच्च शिक्षा में छात्र नामांकन में भी पर्याप्त वृद्धि देखी गई, जो 2014-15 में 3.42 करोड़ से बढ़कर 2022-23 में 4.46 करोड़ हो गया। खास बात यह है कि महिला एनरोलमेंट में ज़बरदस्त बढ़ोतरी हुई है, जो 2014-15 के 1.57 करोड़ से बढ़कर 2022-23 में 2.18 करोड़ हो गया है, जो 38% की बढ़ोतरी है। फीमेल ग्रॉस एनरोलमेंट रेश्यो (GER) में भी सुधार हुआ है, जो 2014-15 के 22.9 से बढ़कर 2022-23 (प्रोविजनल) में 30.2 हो गया है, जो उच्च शिक्षा में लैंगिक समानता की दिशा में लगातार प्रगति को दिखाता है। इसके अलावा, भारत ने STEM शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी की दुनिया में सबसे ज़्यादा दरों में से एक हासिल की है, जिसमें STEM विषयों में कुल एनरोलमेंट में महिलाओं की हिस्सेदारी 43% है।

उच्च शिक्षा विभाग द्वारा शुरू की गई विभिन्न पहलों और योजनाओं के परिणामस्वरूप, IIT और NIT में महिला एनरोलमेंट दोगुने से भी ज़्यादा हो गया है  सुपरन्यूमेरी सीटों की शुरुआत के कारण 10 प्रतिशत से बढ़कर 20 प्रतिशत से भी ज़्यादा हो चुकी है। उच्च शिक्षण संस्थानों (HEIs) की संख्या 2014-15 में 51,534 से बढ़कर 2022-23 (प्रोविजनल) में 60,380 हो गई, जिसमें कुल छात्र नामांकन बढ़कर 4.46 करोड़ हो गया, जिसमें महिला नामांकन में 38 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 2.18 करोड़ हो गया। फीमेल ग्रॉस एनरोलमेंट रेश्यो (FGER) 2014-15 के 22.9 से बढ़कर 2022-23 (प्रोविजनल) में 30.2 हो गया, जो लैंगिक समानता में प्रगति को दिखाता है। अब STEM एनरोलमेंट में महिलाओं की हिस्सेदारी 43 प्रतिशत है - जो दुनिया में सबसे ज़्यादा में से एक है। इंफ्रास्ट्रक्चर में भी सुधार हुआ है, स्कूलों में लड़कियों के शौचालयों की संख्या बढ़कर 97.5 प्रतिशत हो गई है। IIT-मद्रास की विद्या शक्ति योजना जैसी पहल STEM शिक्षा में ग्रामीण और महिला छात्रों को और सहायता देती हैं।

प्रत्येक बेटी की सुरक्षा और स्वास्थ्य सुनिश्चित करना

सरकार दुरुपयोग और बाल विवाह के खिलाफ व्यापक कानूनों के माध्‍यम से प्रत्येक बालिका के लिए सुरक्षित और पोषणयुक्त वातावरण को प्राथमिकता देती है। इस क्षेत्र में केंद्रीय हस्तक्षेपों में निम्‍नलिखित शामिल हैं:

किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पोक्सो) अधिनियम

किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पोक्सो) अधिनियम बच्चों के लिए व्यापक सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। पोक्सो एक लैंगिक-तटस्थ कानून है, जो 18 वर्ष से कम उम्र के किसी भी व्यक्ति को बालक मानता है और यौन उत्पीड़न, दुर्व्यवहार और बाल पोर्नोग्राफी को अपराध घोषित करता है। इसमें त्‍वरित न्यायिक प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए बाल अनुकूल प्रक्रियाएँ, अनिवार्य रिपोर्टिंग आवश्यकताएँ, विशेष अदालतों की स्थापना शामिल हैं।

बाल विवाह निषेध अधिनियम

बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 ने पुराने बाल विवाह प्रतिबंध अधिनियम, 1929 (शारदा अधिनियम) को प्रतिस्थापित किया। यह अधिनियम बाल विवाहों को केवल रोकने के बजाय उन्‍हें कानूनी रूप से निषेधित करने पर केंद्रित है, साथ ही प्रभावित को मजबूत सुरक्षा और राहत प्रदान करता है। यह अधिनियम बालिकाओं को सशक्त बनाने के लिए कानूनी आधार प्रदान करता है, उनके शिक्षा और स्वास्थ्य के अधिकार की रक्षा करता है और छोटी आयु में विवाह से जुड़े गंभीर जोखिमों—जैसे शिक्षा में व्यवधान, स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं और सीमित अवसरों—को कम करने में मदद करता है। इस अधिनियम के अंतर्गत, बाल विवाह उस पक्ष की इच्छा पर रद्द किया जा सकता है जो विवाह के समय बाल था। प्रभावित व्यक्ति (या उसके अभिभावक/निकट मित्र) जिला न्यायालय में विवाह को रद्द घोषित करने की याचिका दायर कर सकते हैं, आम तौर पर यह याचिका व्यक्ति के पूर्णवय  प्राप्त होने के दो वर्ष के भीतर दायर की जाती है।

बाल विवाह मुक्‍त भारत

भारत सरकार ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अंतर्गत नवंबर 2024 में बाल विवाह निषेध अधिनियम के आधार पर बाल विवाह मुक्त भारत अभियान शुरू किया। यह राष्ट्रीय पहल बाल विवाह को समाप्त करने के लिए व्‍यापक जागरूकता, कानून का पालन, सामुदायिक संलग्नता और बहु-क्षेत्रीय सहयोग पर केंद्रित है।  यह अभियान सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) 5.3 के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य 2030 तक बाल विवाह, अल्पवय विवाह और जबरन विवाह जैसी सभी हानिकारक प्रथाओं को समाप्त करना है। 2026 तक बाल विवाह की प्रचलन दर में 10% की कमी लाने और 2030 तक बाल विवाह-मुक्त भारत प्राप्त करने के प्रति लक्षित इस अभियान के तहत -रिपोर्टिंग और जागरूकता के लिए समर्पित पोर्टल ,जिला स्तर पर निगरानी, अच्‍छा प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों के लिए पुरस्कार, 100-दिन का गहन अभियान चरण (दिसंबर 2025 में शुरू) शामिल हैं । 

किशोरियों के लिए योजना (एसएजी)

किशोरियों के लिए योजना विशेष रूप से राष्ट्रीय स्तर के आकांक्षी जिलों और पूर्वोत्‍तर राज्यों के सभी जिलों में14–18 वर्ष की किशोरियों को लक्षित करती है। इस योजना का उद्देश्य किशोरियों के स्वास्थ्य और पोषण स्थिति में सुधार लाना है। योजना के अंतर्गत दो प्रमुख घटक हैं।

पोषण घटक साल में 300 दिन पूरक आहार और पोषण (600 कैलोरी, 18–20 ग्राम प्रोटीन और सूक्ष्म पोषक तत्व) प्रदान करता है। इसे गरम पके हुए भोजन और घर ले जाने के लिए राशन के रूप में वितरित किया जाता है, जिसमें स्थानीय उपज, फोर्टिफाइड चावल, मोटे अनाज, मेवे और ताजे फल /सब्जियाँ शामिल हैं।89 गैर-पोषण घटक के तहत अंतर-मंत्रालयीय समन्वय के जरिए आयरन-फोलिक एसिड (आईएफए) सप्लीमेंटेशन, स्वास्थ्य जांच,पोषण और स्वास्थ्य शिक्षा कौशल विकास और एनीमिया प्रबंधन शामिल है। यह घटक किशोरियों को औपचारिक स्‍कूली शिक्षा की ओर लौटने के लिए प्रेरित भी करता है, जीवन कौशल, साक्षरता और गणितीय कौशल प्रदान करता है और निर्णय लेने की क्षमता सुधारने में मदद करता है 31 दिसंबर 2024 तक 24,08,074 किशोरियाँ पोषण ट्रैकर ऐप पर पंजीकृत हैं।10

मासिक धर्म स्वच्छता योजना (एमएचएस)

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने ग्रामीण क्षेत्रों की 10–19 वर्ष की लड़कियों में मासिक धर्म से संबंधित स्वच्छता को बढ़ावा देने के उद्देश्‍य से इस योजना की शुरुआत की है।

इस योजना का मुख्य उद्देश्य किशोरियों में सुरक्षित और स्वच्छ मासिक धर्म प्रथाओं के बारे में जागरूकता पैदा करना है।

इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में किफायती और उच्च गुणवत्ता वाले सैनिटरी नैपकिन तक पहुँच सुनिश्चित करना है। सैनिटरी नैपकिन का पर्यावरण-अनुकूल और सुरक्षित निपटान भी इस योजना का प्रमुख केंद्र है। वर्ष 2011 में 107 चयनित जिलों में शुरू की गई योजना के अंतर्गत फ्रीडेज़ ब्रांड के तहत सब्सिडी वाले नैपकिन उपलब्ध कराए गए। वर्ष 2014 से राज्य राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत नैपकिन खरीदते हैं तथा वितरण और जागरूकता गतिविधियों का प्रबंधन आशा कार्यकर्ता करती हैं।11  नवंबर 2025 तक, सुविधा नैपकिन की कुल बिक्री 96.30 करोड़ इकाइयों तक पहुँच चुकी थी।12 आशा कार्यकर्ता सब्सिडी वाले सैनिटरी नैपकिन पैक वितरित करती हैं और मासिक स्वास्थ्य जागरूकता बैठकों का आयोजन करती हैं, जबकि  प्रधान मंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (पीएमबीजेपी) सुलभ और किफायती मासिक धर्म स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए जन औषधि सुविधा सैनिटरी पैड केवल 1 रुपये प्रति पैड पर उपलब्ध कराती है।13

पोषण अभियान

राजस्थान के झुंझुनू में 8 मार्च 2018 को शुरू हुए इस अभियान का उद्देश्‍य किशोरियों, गर्भवती महिलाओं, दूध पिलाने वाली माताओं और 0-6 साल के बच्चों के पोषण की स्थिति में सुधार लाना है। तकनीक-आधारित निगरानी, बहु-क्षेत्रीय समन्वय, और सामुदायिक सहभागिता के ज़रिए, इस कार्यक्रम का उद्देश्‍य बच्‍चों में बौनेपन, कुपोषण, और सामान्‍य से कम वज़न की समस्‍याओं में कमी लाना है। यह कुपोषण को दूर करने के लिए समग्र दृष्टिकोण अपनाता है।

मिशन वात्‍सल्‍य

मिशन वात्सल्य केंद्रीय सरकार द्वारा प्रायोजित योजना है, जिसका उद्देश्य कठिन परिस्थितियों में रहने वाले बच्चों के  लिए संवेदनशील, सहायक और समन्वित इकोसिस्‍टम तैयार करना है, ताकि वे अपने विकास की अलग-अलग आयु और अवस्‍थाओं से सुरक्षित रूप से गुजर सकें। यह योजना राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेशों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है, ताकि वे उन बच्चों को संस्थागत देखभाल और गैर-संस्थागत देखभाल सेवाएं उपलब्‍ध करा सकें, जिन्हें किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 (2021 में संशोधित) और इसके नियमों के तहत परिभाषित किया गया है।

इन प्रयासों को पूर्णता प्रदान करते हुए, इस योजना के अंतर्गत राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ समन्वय में किशोर न्‍याय (जेजे) अधिनियम, 2015 के तहत बच्चों के लिए एक आपातकालीन आउटरीच हेल्पलाइन चलायी जा रही है, जिसे गृह मंत्रालय की 112 हेल्पलाइन के साथ एकीकृत किया गया है। सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में राज्य महिला एवं बाल विकास नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं और 728 जिला बाल हेल्पलाइन इकाइयाँ जोड़ी गई हैं। (21.01.2026 तक)

इसके अलावा, मिशन वात्सल्य पोर्टल – एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म विकसित किया गया है, जो पहले की बाल संरक्षण प्रणालियों जैसे ‘ट्रैक चाइल्ड’ और ‘खोया-पाया’ को एकीकृत करता है। इससे लापता, अनाथ, त्‍याग दिए गए और समर्पित बच्चों के लिए सेवाएँ अधिक सुलभ और पारदर्शी हो जाती हैं। यह पोर्टल सीडब्ल्यूसी, जे जे बी, और सीसीआई जैसे हितधारकों के लिए एकल कार्यक्षेत्र प्रदान करता है, जिससे कार्य में दोहराव कम होता है और एमआईएस डैशबोर्ड के माध्यम से निगरानी मजबूत होती है।

वित्तीय समावेशन को प्रोत्साहित करना

बालिकाओं की दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, भारत सरकार ने विशेष बचत और निवेश योजनाएँ शुरू की हैं। ये योजनाएँ परिवारों को अपनी बेटियों की शिक्षा, विवाह और भविष्य की आवश्यकताओं के लिए योजना बनाने के लिए प्रोत्साहित करती हैं।

सुकन्या समृद्धि योजना (एसएसवाई)

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के तहत 2015 में इसे लॉन्च किया था। यह प्रमुख योजना लड़कियों की भविष्य की पढ़ाई और शादी के लिए वित्‍तीय सुरक्षा और बचत की पेशकश करती है। नवंबर 2024 तक, देश भर में 4.2 करोड़ से ज़्यादा खाते खोले जा चुके थे, जो इस योजना में लोगों की मज़बूत भागीदारी और भरोसे को दिखाता है।14 इस महीने अपने 11 साल पूरे करने जा रही सुकन्या समृद्धि योजना (एसएसवाई) वित्तीय समावेशन, लैंगिक समानता, और दीर्घकालिक सामाजिक प्रगति को बढ़ावा देते हुए  परिवारों को अपनी बेटियों के भविष्य में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करना जारी रखे हुए है।

 

निष्‍कर्ष

राष्ट्रीय बालिका दिवस 2026 बालिकाओं को सशक्त बनाने और उन्‍हें समान अधिकारों एवं अवसरों वाला वातावरण सुनिश्चित कराने के महत्व की याद दिलाता है। सामुदायिक सहभागिता, एनजीओ, स्कूलों और आंगनवाड़ियों द्वारा समर्थित विभिन्न पहलों के माध्यम से बालिकाओं के जीवन, शिक्षा और सशक्तिकरण में उल्‍लेखनीय प्रगति हासिल की गई है। बहु-क्षेत्रीय जागरूकता अभियान, नीतिगत कार्यान्वयन, और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से भारत लैंगिक समानता और समाजिक दृष्टिकोण में सुधार की दिशा में लगातार गति बनाए रख रहा है।

सरकार, सिविल सोसायटी और समुदायों की निरंतर प्रतिबद्धता के साथ, भारत एक ऐसे समान समाज की दिशा में अग्रसर है जहाँ प्रत्येक बालिका को सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण प्राप्त हो, और वह अपनी पूर्ण क्षमता को पहचान और विकसित कर सके।

संदर्भ

पत्र सूचना कार्यालय:

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2205104&reg=3&lang=2

https://www.pib.gov.in/PressNoteDetails.aspx?NoteId=154585&ModuleId=3&reg=3&lang=1

https://www.pib.gov.in/PressReleseDetailm.aspx?PRID=2100642&reg=3&lang=2

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1808683&reg=3&lang=2

https://archive.pib.gov.in/4yearsofnda/schemesSlide/Beti%20Bachao.htm?

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2204133&reg=3&lang=1

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय:

https://sansad.in/getFile/loksabhaquestions/annex/1715/AU1348.pdf?source=pqals#:~:text=The%20aim%20is%20to%20promote,health%20services%20at%20affordable%20prices

https://nhm.gov.in/index1.php?lang=1&level=3&sublinkid=1021&lid=391#:~:text=Background,for%20her%20own%20personal%20use

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय:

https://sansad.in/getFile/loksabhaquestions/annex/184/AU913_GfputK.pdf?source=pqals

https://www.indiabudget.gov.in/doc/eb/sbe101.pdf

शिक्षा मंत्रालय:

https://www.education.gov.in/sites/upload_files/mhrd/files/statistics-new/UDISE+Report%202024-25%20-%20Existing%20Structure.pdf

https://dashboard.udiseplus.gov.in/report2025/static/media/UDISE+2024_25_Booklet_nep.ea09e672a163f92d9cfe.pdf

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