कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय
जन शिक्षण संस्थान (जेएसएस) क्षेत्रीय सम्मेलन एवं हितधारक परामर्श पुणे में संपन्न हुआ
आजीविका-केंद्रित कौशल विकास और क्षमता निर्माण पर बल
प्रविष्टि तिथि:
20 JAN 2026 8:40PM by PIB Delhi
कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय ने आज सिम्बायोसिस स्किल एंड प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, पुणे में आयोजित दो दिवसीय जन शिक्षण संस्थान क्षेत्रीय सम्मेलन-सह-हितधारक परामर्श एवं प्रगति समीक्षा कार्यशाला सम्पन्न की। इसमें हाशिए पर रह रही आबादी के लिए समावेशी, समुदाय-आधारित कौशल विकास और सतत् आजीविका सृजन को सुदृढ़ करने के प्रति भारत सरकार की प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि की गई।
कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में 11 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करने वाले 152 जन शिक्षण संस्थानों की सहभागिता रही। इस कार्यक्रम में जन शिक्षण संस्थान के कार्यकर्ताओं, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, जन शिक्षण संस्थान निदेशालय, राष्ट्रीय उद्यमिता एवं लघु व्यवसाय विकास संस्थान तथा अकादमिक भागीदारों ने भाग लिया, जिसमें प्रगति की समीक्षा, प्रणालीगत सुधारों पर विचार-विमर्श तथा जन शिक्षण संस्थान पारितंत्र के भीतर संस्थागत क्षमता निर्माण पर चर्चा की गई।
सम्मेलन की अध्यक्षता कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय की सचिव सुश्री देबाश्री मुखर्जी, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के अपर सचिव श्री निराजन कुमार सुधांशु तथा मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की गई, जिसमें रोजगार-योग्यता, उद्यमिता और आजीविका परिणामों को सुदृढ़ करने पर विशेष बल दिया गया।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए सुश्री देबाश्री मुखर्जी ने कहा, “जन शिक्षण संस्थान भारत में समावेशी कौशल विकास के केंद्र में हैं। हमारा उद्धेश्य, पूर्व छात्रों से सम्पर्क सुदृढ़ करके, कौशलों को बाज़ार की मांग के अनुरूप संरेखित करके और वित्त तथा बाज़ार संपर्कों के माध्यम से उद्यमिता को समर्थन देकर, प्रशिक्षण से आगे बढ़कर वास्तविक परिणामों पर ध्यान केंद्रित करना है। पारंपरिक कौशलों के आधुनिकीकरण और सफल उदाहरणों के विस्तार के माध्यम से हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जमीनी स्तर पर कौशल विकास से सतत् आजीविका, गरिमा और महिलाओं एवं वंचित समुदायों का सशक्तिकरण सुनिश्चित हो।”
राष्ट्रीय उद्यमिता एवं लघु व्यवसाय विकास संस्थान के विशेषज्ञों तथा सिम्बायोसिस स्किल एंड प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के संकाय द्वारा रोज़गार-योग्यता कौशल और उद्यमिता विकास पर केंद्रित विशेष सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों का नेतृत्व राष्ट्रीय उद्यमिता एवं लघु व्यवसाय विकास संस्थान की महानिदेशक डॉ. पूनम सिन्हा तथा सिम्बायोसिस स्किल्स एंड प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी की प्रो चांसलर डॉ. स्वाति मजूमदार ने किया, जिन्होंने जमीनी स्तर पर शिक्षार्थी-केंद्रित कौशल विकास, काम करने की योग्यता में वृद्धि और उद्यमोन्मुख सोच के महत्व पर बल दिया।
आजीविका की निरन्तरता में वित्तीय समावेशन की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार करते हुए, सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया तथा राष्ट्रीय उद्यमिता एवं लघु व्यवसाय विकास संस्थान के विशेषज्ञों के साथ वित्तीय एवं ऋण संपर्कों पर एक केंद्रित सत्र आयोजित किया गया। इस सत्र में सशक्त बैंक संपर्कों, वित्तीय साक्षरता तथा संरचित सहायता प्रणालियों की आवश्यकता पर बल दिया गया, जिससे जन शिक्षण संस्थान के लाभार्थी अपने कौशलों को सतत् आय के अवसरों में परिवर्तित कर सकें।
विषयगत विचार-विमर्श के अतिरिक्त, सम्मेलन में कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल उपकरणों के उपयोग, शासन सुधारों, एसआईडीएच (SIDH) पोर्टल अनुपालन, आजीविका प्रकोष्ठों को सुदृढ़ करने तथा जन शिक्षण संस्थान उत्पादों के लिए ब्रांडिंग और बाज़ार पहुँच में सुधार से संबंधित सत्र भी आयोजित किए गए।
सम्मेलन के अंतर्गत एक जन शिक्षण संस्थान प्रदर्शनी का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों से जन शिक्षण संस्थान के लाभार्थियों द्वारा विकसित चुनिन्दा श्रेष्ठ उत्पादों का प्रदर्शन किया गया। इस प्रदर्शनी में योजना के अंतर्गत पोषित जमीनी स्तर के विविध कौशलों और स्थानीय शिल्पों को रेखांकित किया गया तथा सर्वोत्तम पद्धतियों के आदान-प्रदान और बाज़ार दृश्यता को बढ़ाने हेतु एक मंच प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय की सचिव ने सिम्बायोसिस स्किल एंड प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी की स्किल लैब्स का भी दौरा किया, जहाँ उन्होंने आधुनिक प्रशिक्षण अवसंरचना और व्यावसायिक शिक्षा के नवोन्मेषी दृष्टिकोणों का अवलोकन किया।
कार्यशाला के दौरान हुए हितधारक परामर्श और समूहगत विचार-विमर्श चालू वित्त वर्ष के दौरान जन शिक्षण संस्थानों की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति की समीक्षा, प्रशिक्षण गुणवत्ता में सुधार, रोजगार-योग्यता और उद्यमिता परिणामों को सुदृढ़ करने, ऋण एवं बाज़ार संपर्कों को मजबूत करने और शासन तथा संचालन संबंधी चुनौतियों के समाधान पर केंद्रित रहे।
शिक्षण संस्थान योजना, एक केंद्रीय क्षेत्रीय योजना है, जिसे कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय द्वारा गैर-सरकारी संगठनों के माध्यम से कार्यान्वित किया जाता है और यह असाक्षर, नव-साक्षर, बीच में ही स्कूल छोड़ चुके लोगों और समाज के वंचित वर्गों को गैर-औपचारिक रूप में व्यावसायिक कौशल प्रदान करने पर केंद्रित है, जिसमें विशेष ध्यान महिलाओं, अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, अल्पसंख्यकों और अन्य हाशिए पर रहने वाले समूहों पर दिया गया है। यह योजना ग्रामीण, आदिवासी, आकांक्षी और कठिन क्षेत्रों में बिल्कुल द्वार पर कौशल विकास और आजीविका समर्थन प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, और दिसंबर 2025 तक 34 लाख से अधिक लाभार्थियों को प्रशिक्षित कर चुकी है, जिसमें महिलाओं की कुल भागीदारी 83 प्रतिशत से अधिक की है।
सम्मेलन का समापन जन शिक्षण संस्थानों को भारत सरकार की बिल्कुल हाशिए पर रह रही आबादी तक पहुँचने वाली कौशल संस्थाओं के रूप में और सुदृढ़ करने के नए संकल्प के साथ हुआ, यह सुनिश्चित करते हुए कि कौशल केवल रोजगार और आय ही नहीं, बल्कि गरिमा, लचीलापन और समावेशी विकास भी सुनिश्चित करें।




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पीके/केसी/पीके
(रिलीज़ आईडी: 2216667)
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