सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय
पोंडुरु खादी को जीआई टैग मिला, केवीआईसी पोंडुरु खादी से जुड़े कारीगरों को सम्मानित करेगा और वैश्विक पहुंच बढ़ाएगा
जीआई टैग से पोंडुरु खादी की अंतरराष्ट्रीय साख बढ़ेगी और वैश्विक बाजार तक आसान पहुंच होगी
प्रविष्टि तिथि:
16 JAN 2026 8:32PM by PIB Delhi
शुक्रवार को मीडिया के लिए जारी एक बयान में, भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) के अंतर्गत खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) के अध्यक्ष श्री मनोज कुमार ने पोंडुरु खादी को जीआई टैग प्रदान किए जाने पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि केवीआईसी भारत के पारंपरिक खादी उत्पादों को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयासरत है और इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर उन्होंने गहरा संतोष व्यक्त किया।

आंध्र प्रदेश की सुप्रसिद्ध पोंडुरु खादी को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग प्रदान किया गया है। भौगोलिक संकेतक रजिस्ट्री द्वारा इसका पंजीकरण खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) के पक्ष में किया गया है। यह जीआई मान्यता इस दुर्लभ हस्तकारी वस्त्र को कानूनी संरक्षण प्रदान करती है और इसकी विशिष्ट प्रामाणिकता को सुरक्षित रखती है।"
अध्यक्ष केवीआईसी श्री मनोज कुमार ने बताया कि पोंडुरु खादी को GI-टैग प्रदान किया जाना संपूर्ण खादी क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। यह न केवल इस दुर्लभ हस्तकारी वस्त्र की प्रामाणिकता की रक्षा करता है, बल्कि पीढ़ियों से इस परंपरा को संजोए कारीगरों के योगदान को भी सम्मान देता है। उन्होंने आगे कहा कि यह उपलब्धि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और खादी को वैश्विक पहचान दिलाने के सतत प्रयासों का प्रत्यक्ष परिणाम है। उन्होंने आगे कहा कि वोकल फॉर लोकल और आत्मनिर्भर भारत जैसी पहलों ने देश भर के पारंपरिक कारीगरों में एक नई ऊर्जा, सम्मान और पहचान का संचार किया है।

अध्यक्ष केवीआईसी ने बताया कि पोंडुरु खादी आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले के पोंडुरु गाँव में तैयार किया जाने वाला एक पारंपरिक हस्तनिर्मित सूती कपड़ा है, जिसे स्थानीय लोग पटनुलु कहते हैं। यह कपड़ा पहाड़ी कपास, पुनासा कपास और लाल कपास से बनाया जाता है, जो इसी क्षेत्र में उगाई जाती हैं। कपास की सफाई, कताई और बुनाई की पूरी प्रक्रिया हाथों से की जाती है, जिससे सदियों पुराना पारंपरिक कौशल सुरक्षित रहता है। इसकी सबसे अनोखी विशेषता यह है कि कपास की सफाई के लिए वालुगा मछली के जबड़े की हड्डी का उपयोग किया जाता है, जो विश्व में केवल यहीं देखने को मिलता है। उन्होंने आगे बताया कि पोंडुरु खादी अपनी अत्यधिक उच्च धागा संख्या (यार्न काउंट), लगभग 100-120, के लिये जाना जाता है, जो इसकी बेहद बारीक गुणवत्ता को दर्शाती है।
इस अवसर पर केवीआईसी अध्यक्ष श्री मनोज कुमार ने कहा की, जीआई टैग मिलने से पोंडुरु खादी को न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी, जिससे कारीगरों की आय में वृद्धि होगी और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। पोंडुरु खादी महात्मा गांधी के स्वदेशी विचारों से गहराई से जुड़ी हुई है और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में आज खादी एक फैशन स्टेटमेंट और आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक बन चुकी है- जो गाँधी से मोदी युग तक की वैचारिक निरंतरता को दिखाता है। उन्होंने कहा कि जीआई टैग प्राप्त होने के बाद अब पोंडुरु खादी को नकली उत्पादों से कानूनी संरक्षण मिलेगा, जिससे उपभोक्ताओं को शुद्ध एवं प्रामाणिक उत्पाद की गारंटी मिलेगी और कारीगरों को उनके श्रम का उचित मूल्य सुनिश्चित होगा।
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पीके/केसी/डीवी
(रिलीज़ आईडी: 2215600)
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