विधि एवं न्‍याय मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

विधि एवं न्याय मंत्रालय की 2025 की वर्षांत रिपोर्ट

प्रविष्टि तिथि: 01 JAN 2026 3:18PM by PIB Delhi

भारत सरकार द्वारा कानूनी वाद (मुकदमेबाजी) के कुशल और प्रभावी प्रबंधन हेतु निर्देश:

 

भारत संघ से संबंधित मुकदमों को रोकने, विनियमित करने और इनमें कमी लाने की नीति के अनुसरण में, विधि एवं न्याय मंत्रालय के विधि मामले विभाग (डीएलए) ने 4 अप्रैल, 2025 को "भारत सरकार द्वारा मुकदमों के कुशल और प्रभावी प्रबंधन हेतु निर्देश" जारी किया। यह निर्देश कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली सचिवों की समिति की अनुशंसाओं के अनुसार तैयार किया गया है। यह निर्देश मध्यस्थता से संबंधित मामलों में केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों और विभागों, उनके संबद्ध एवं अधीनस्थ कार्यालयों, स्वायत्त निकायों और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों पर लागू होगा।

सुशासन के लक्ष्य को सुदृढ़ बनाने, जन कल्याण सुनिश्चित करने और समय पर न्याय दिलाने के व्यापक दृष्टिकोण के तहत यह निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य कानूनी प्रक्रियाओं को सरल बनाना, अनावश्यक मुकदमेबाजी रोकना, अधिसूचनाओं और आदेशों में विसंगतियां दूर करना, अनुचित अपीलों में कमी लाना, मुकदमों में अंतर-विभागीय समन्वय सुव्यवस्थित करना, मध्यस्थता मामलों में सार्वजनिक उत्‍तरदायित्‍व बढ़ाना और कानूनी प्रक्रिया में सुधार और दक्षता के लिए सुदृढ़ प्रबंधन प्रणाली स्थापित करने हेतु उपाय लागू करना है।

2.      वर्ष 2025 में विधि अधिकारियों की नियुक्ति/पैनल:

§  श्री आर. वेंकटरमनी, अटॉर्नी जनरल (महान्यायवादी) की नियुक्ति दो वर्ष की अतिरिक्त अवधि के लिए दोबारा की गई है।

§  भारत के सर्वोच्च न्यायालय में अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के तीन नए पद सृजित, अधिसूचित और भरे गए हैं।

§  विभिन्न उच्च न्यायालयों/उच्च न्यायालयों की पीठों में नौ उप सॉलिसिटर जनरलों की नियुक्ति नए सिरे से की गई है और पांच उप सॉलिसिटर जनरलों का कार्यकाल बढ़ाया गया है।

§  देश भर के विभिन्न न्यायालयों/न्यायालयों में कुल 3 हजार 877 अधिवक्ताओं को पैनल में शामिल किया गया है या पैनल वकील के रूप में उनका कार्यकाल बढ़ाया गया है। 

§  पैनल के 25 वकीलों के त्‍यागपत्र प्रक्रियाधीन हैं। 

3).      घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय वाणिज्यिक विवादों में मध्यस्थता पैनल के वकीलों का नामांकन, जिसमें सरकार/सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम (पीएसई) और दूसरी ओर पीएसई/निजी पक्ष शामिल हों:

विभिन्न मंत्रालयों/विभागों की ओर से मध्यस्थता मामलों में प्रतिनिधित्व के लिए मध्यस्थता पैनल के अधिवक्ताओं की नियुक्ति से संबंधित अनुरोध प्राप्त हुए हैं। उक्त अवधि के दौरान, ऐसे अनुरोधों के उत्‍तर में, लगभग 100 मध्यस्थता मामलों में मध्यस्थता पैनल के वकील नियुक्त किये गये हैं।

4).      नागरिक कानून के मामलों में बाहर के देशों के साथ संधि और समझौते:  

विधि एवं न्याय मंत्रालय, विधि विभाग, बाहर के देशों के साथ पारस्परिक समझौतों के लिए केन्द्रित मंत्रालय है। इसके अतिरिक्त यह विभाग अन्य देशों के साथ नागरिक कानून के अंतर्गत कानूनी सहयोग के विभिन्न समझौते करता है। इसी प्रतिबद्धता के तहत, वर्ष 2025 के दौरान वियतनाम के साथ नागरिक एवं वाणिज्यिक मामलों में पारस्परिक कानूनी सहायता संधि पर हस्ताक्षर किए गए। इस सिलसिले में, 23 दिसंबर, 2025 को एक प्रतिनिधिमंडल का दौरा आयोजित किया गया (फोटो संलग्न)।  

 

 

5).     समन आदि की तामील के संबंध में द्विपक्षीय संधियों (पारस्परिक कानूनी सहायता संधियां/पारस्परिक व्यवस्थाएं) और बहुपक्षीय संधियों (1965/1971 का हेग सम्मेलन) से उत्पन्न अनुरोधों की जांच और प्रक्रियागत कदम :

विधि एवं न्याय मंत्रालय का विधिक कार्य विभाग, हेग कन्वेंशन, 1965 और 1971 के अंतर्गत नागरिक एवं वाणिज्यिक मामलों में समन/सूचना जारी करने और साक्ष्य ग्रहण करने तथा न्यायिक एवं गैर-न्यायिक दस्तावेजों की विदेश में तामील कराने का केंद्रीय प्राधिकरण है। इस दायित्व के अंतर्गत, उक्त अवधि के दौरान लगभग 3 हजार 200 अनुरोधों पर कार्रवाई की गई है।

6).     वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर):

भारत अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र अधिनियम, 2019 के तहत भारत अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र की स्थापना की गई है जिसका उद्देश्य संस्थागत मध्यस्थता सुगम बनाने के लिए स्वतंत्र, स्वायत्त और विश्व स्तरीय संस्था स्थापित करना और इस केंद्र को राष्ट्रीय महत्व का संस्थान बनाना है। यह केंद्र मध्यस्थता द्वारा वाणिज्यिक विवादों के समाधान का मंच है। इसे देश में आदर्श मध्यस्थता संस्थान के रूप में विकसित किया गया है, जिससे मध्यस्थता के संस्थागत ढांचे की गुणवत्ता में सुधार होगा। केंद्र सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता के लिए 97 और घरेलू मध्यस्थता के लिए दो सौ 71 मध्यस्थों को पैनल में शामिल किया है।

केंद्र सरकार ने 2025 के दौरान निम्नलिखित सम्मेलन आयोजित किए हैं;

i.     भारत मंडपम, नई दिल्ली में 1 मार्च, 2025 को "अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता: भारतीय परिप्रेक्ष्य" विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई।

ii.     14 जून 2025 को भारत मंडपम, नई दिल्ली में "संस्थागत मध्यस्थता: विवाद समाधान के लिए एक प्रभावी ढांचा" विषय पर केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के वरिष्ठ अधिकारियों का सम्मेलन आयोजित किया गया।

iii.     सिंगापुर कन्वेंशन वीक 2025 के दौरान 28 अगस्त 2025 को सिंगापुर में "भारत से संबंधित विवादों में मध्यस्थों का चयन" विषय पर एक सहयोगी कार्यक्रम आयोजित किया गया।

iv.     24 सितंबर, 2025 को फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन के सहयोग से संस्थागत मध्यस्थता: एक उपयुक्त विवाद समाधान तंत्र विषय पर वेबिनार आयोजित किया गया।

केंद्र सरकार ने वर्ष 2025 के दौरान निम्नलिखित समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर भी हस्ताक्षर किए;

i.     भारत अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता केन्द्र- आईआईएसी और एशियाई अफ्रीकी कानूनी सलाहकार संगठन के बीच सहयोग हेतु समझौता ज्ञापन

ii.     आईआईएसी और परयाय एडीआर सोसाइटी, विधि केंद्र-I, दिल्ली विश्वविद्यालय के बीच सहयोग हेतु समझौता ज्ञापन।

भारत अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता केन्द्र ने 9 दिसंबर 2025 को आईआईएसी वार्षिक पत्रिका का अपना पहला संस्करण जारी किया, जिसका उद्देश्य घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैकल्पिक विवाद समाधान और संबंधित मामलों पर कानून और प्रक्रियाओं की जानकारी का प्रसार करना है।

केंद्र सरकार ने भारत अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र (समिति के कामकाज के संचालन) विनियम, 2025 और भारत अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र (मध्यस्थों के पैनल में प्रवेश मानदंड) विनियम, 2023 में संशोधन भी अधिसूचित किए हैं।

विधिक मामले विभाग प्रशासनिक रूप से मध्यस्थता अधिनियम 2023, मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम, 1996 और वाणिज्यिक अधिनियम, 2015 से संबंधित है, जिसके तहत विभाग वाणिज्यिक विवाद समाधान तंत्र विकसित करने के लिए विधायी और नीतिगत हस्तक्षेप करता है। 

7).      कानूनी सूचना और प्रबंधन ब्रीफिंग प्रणाली - एलआईएमबीएस:

कानूनी सूचना प्रबंधन एवं ब्रीफिंग प्रणाली वेब-आधारित एप्लिकेशन है जिसका उपयोग उन सभी अदालती मामलों की निगरानी के लिए किया जाता है जिनमें भारत संघ एक पक्ष है। एलआईएमबीएस फरवरी 2016 में आरंभ किया गया और तब से ही इस एप्लिकेशन की देखरेख विधि एवं न्याय मंत्रालय का विधि विभाग करता है। यह एक अभिनव और सुगमता से उपयोग वाला ऑनलाइन उपकरण है जो वरिष्ठ अधिकारियों/कर्मचारियों, नोडल अधिकारियों और मंत्रालयों/विभागों के उपयोगकर्ताओं सहित सभी हितधारकों के लिए हर दिन चौबीसो घंटे उपलब्ध है।

एलआईएमबीएस में मंत्रालय/विभाग स्तर पर मध्यस्थता, मध्यस्थों की नियुक्ति और कार्यवाही का विवरण भी दर्ज किया जाता है। विधि मामले विभाग, कैबिनेट सचिवालय, नीति आयोग और प्रधानमंत्री कार्यालय कानूनी सूचना प्रबंधन एवं ब्रीफिंग प्रणाली पर अदालती मामलों का विवरण देख सकते हैं। विधि मामले विभाग का केंद्रीय अनुभाग (सीएएस) भारत सरकार द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में दायर सभी महत्वपूर्ण मामलों का विवरण भी दर्ज करता है। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद को भी एलआईएमबीएस पोर्टल तक पहुंच सुलभ कराई गई है।

मानवीय रूप से डेटा एंट्री प्रक्रिया में कमी लाने के लिए स्वचालित प्रणाली की ओर अग्रसर होते हुए, निर्बाध डेटा हस्तांतरण और सामग्री अद्यतन के लिए एपीआई द्वारा एलआईएमबीएस को विभिन्न न्यायालयों और न्यायाधिकरणों के डेटाबेस के साथ एकीकृत करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इस हेतु सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय, जिला न्यायालयों और 17 न्यायाधिकरणों से संपर्क किया गया है। विधि मामले विभाग ने राष्‍ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र और संबंधित न्यायालय/न्यायाधीश प्राधिकरणों के सहयोग से निम्नलिखित न्यायालयों और न्यायाधिकरणों के साथ एलआईएमबीएस को सफलतापूर्वक एकीकृत किया है:

एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस माध्यम से एलआईएमबीएस के साथ एकीकृत न्यायालय/ट्रिब्यूनल,

  • उच्चतम न्यायालय
  • उच्च न्यायालय
  • जिला एवं सत्र न्यायालय

 न्यायाधिकरण (9):

·         केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (सीएटी)

·         दूरसंचार विवाद निपटान और अपीलीय न्यायाधिकरण (टीडीसैट)

·         विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण (एपीटीईएल)

·         सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क और सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण (CESTAT)

·         आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (आईटीएटी)

·         राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी)

·         राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी)

·         राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी)

·         रेलवे दावा न्यायाधिकरण (आरसीटी )

 शेष चार न्यायाधिकरणों (सशस्त्र बल न्यायाधिकरण, राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, केंद्रीय सरकार औद्योगिक न्यायाधिकरण और तस्कर और विदेशी मुद्रा हेरफेरकर्ता (संपत्ति जब्ती) अधिनियम संबंधी अपीलीय न्यायाधिकरण) के साथ एलआईएमबीएस को एकीकृत करने पर काम  चल रहा है।

भारत सरकार के सभी मंत्रालयों, विभागों और संबद्ध कार्यालयों में एलआईएमबीएस को लागू कर दिया गया है और इसने उपयोगकर्ताओं, विभिन्न मंत्रालयों/विभागों के नोडल अधिकारियों, अधिवक्ताओं आदि को एक मंच पर ला दिया है। मंत्रालयों/विभागों के संयुक्त प्रयासों से, इस एप्लिकेशन द्वारा 13310 पंजीकृत उपयोगकर्ताओं के माध्यम से 13.05 लाख अदालती मामलों (निपटान किए गए मामलों सहित) संकलित किया गया है, जिससे भारत संघ से संबंधित मुकदमों का एक एकीकृत डेटाबेस तैयार हुआ है। इस एप्लिकेशन में सभी अदालतों और 18 हजार 687 पैनल और अन्य अधिवक्ताओं का विवरण शामिल है।

) एलआईएमबीएस का प्रभाव

i.     यह उपयुक्त समय पर आरंभ की गई पहल है, जो भारत सरकार के मंत्रालयों/विभागों के दृष्टिकोण से अदालती मामलों की निगरानी में सुधार के उत्प्रेरक का काम करती है। इसका उद्देश्य ई-कोर्ट एप्लिकेशन के साथ इसे एकीकृत करना है, जिससे भारत सरकार के मुकदमों की प्रभावी निगरानी के लिए एक व्यापक समाधान उपलब्ध हो। एलआईएमबीएस अदालती मामलों के प्रबंधन में भ्रम और अस्पष्टता दूर करने के लिए एकीकृत डेटाबेस, मानक टेम्पलेट्स और समान शब्दावली का उपयोग करता है। अधिवक्ताओं, उपयोगकर्ताओं और संबंधित अधिकारियों को एसएमएस अलर्ट द्वारा सतर्क केस प्रबंधन सुनिश्चित होता है। इसके अतिरिक्त, मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम रिपोर्टों से विभिन्न मंत्रालयों/विभागों में कानूनी प्रकोष्ठों के कामकाज बेहतर हुआ है।

ii.     इस प्रकार, एलआईएमबीएस ने इस वेब एप्लिकेशन पर आवश्यक जानकारी दर्ज कर मंत्रालयों में उपयोगकर्ताओं के बीच उत्तरदायित्व, स्वत्व, एकरूपता और पारदर्शिता बढ़ाकर भारत संघ की मुकदमेबाजी निगरानी प्रणाली में व्‍यापक बदलाव ला दिया है।

iii.     एलआईएमबीएस अदालती मामले में शामिल भारत संघ के सभी हितधारकों को किफायती वेब प्रौद्योगिकी पहुंच प्रदान करता है, जिससे लगातार चौबीस घंटे निर्बाध रूप से उपलब्ध इनपुट का समन्वय होता है। इससे उपयोगकर्ता के लिए अनुकूल रिपोर्टों के व्यापक संग्रह से  मामले के विभिन्न चरणों की निरंतर निगरानी संभव हो पाती है।

iv.     एलआईएमबीएस का उद्देश्य वित्तीय बोझ कम करना, समय बचाना और मंत्रालय के विभिन्न विभागों के कामकाज में दक्षता लाना है। यह अदालती मुकदमे की पूरी अवधि में पारदर्शिता को बढ़ावा देता है और सभी हितधारकों में दायित्व बोध उत्पन्न करता है।

v.     इससे अधिकारियों को आंकड़ों पर आधारित निर्णय लेने, विभिन्न हितधारकों के प्रदर्शन के मूल्यांकन और कानूनी लेखापरीक्षा में सहायता मिलेगी।

सरकार के अधिक समन्वित ढंग से कार्य करने और इच्छित परिणाम के लिए आवश्यक है कि विभिन्न विभाग निर्दिष्ट समय सीमा के भीतर और एकीकृत तरीके से अपना डेटा शीघ्रता से प्रस्तुत करें।

बी)     एलआईएमबीएस टीम द्वारा आयोजित प्रशिक्षण/बैठक:

उपयोगकर्ताओं की विशाल संख्या को ध्यान में रखते हुए, एलआईएमबीएस ने सभी संबंधित मंत्रालयों/विभागों द्वारा एप्लिकेशन को सुचारू रूप से अपनाने के लिए सहयोग  दिया है। इसकी टीम ने 200 से अधिक प्रशिक्षण/बैठक सत्र (ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से) आयोजित किए जिनमें वित्त मंत्रालय (राजस्व केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड), गृह मंत्रालय (स्वापक नियंत्रण ब्यूरो), रक्षा मंत्रालय (पूर्व सैनिक कल्याण और रक्षा संपदा), अंतरिक्ष विभाग, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय, संचार मंत्रालय (राष्ट्रीय संचार वित्त संस्थान), महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक कार्यालय आदि के अधिकारियों/कर्मचारियों को शामिल किया गया ताकि इसकी विशेषताओं का प्रभावी प्रसार सुनिश्चित किया जा सके।

 

8).     भारत का विधि आयोग:   भारत के 23वें विधि आयोग के माननीय अध्यक्ष और सदस्यों ने 16.04.2025 से अपना कार्यभार संभाला।

 

दंड नीति:   न्याय विभाग ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय के दिनांक 17.05.2024 के आपराधिक अपील संख्या 3924/2023, सुनीता देवी बनाम बिहार राज्य एवं अन्य के संबंध में दिए गए निर्देशों के अनुरूप भारत में एक व्यापक दंड नीति लागू करने की व्यवहार्यता की जांच के लिए भारत के विधि आयोग के अध्यक्ष की अध्यक्षता में एक समिति गठित की। समिति ने नवंबर 2025 में उच्‍चतम न्यायालय में अपनी अंतरिम रिपोर्ट प्रस्तुत की।

 

9).     आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (आईटीएटी) पीठ: न्यायाधिकरण के जयपुर, बेंगलुरु, कटक, दिल्ली और लखनऊ में अपने परिसर हैं। जबकि, कई अन्य स्थानों पर न्यायाधिकरण सरकारी या अर्ध-सरकारी परिसरों में सं‍चालित होता है। कुछ स्थानों पर पीठ मासिक किराए पर निजी परिसरों में कार्य कर रहा है। अवसंरचनात्मक ढांचे मजबूत करने के निरंतर प्रयास जारी  हैं, जिसके तहत अहमदाबाद और कोलकाता में नए कार्यालय भवनों का निर्माण उन्नत चरण में हैं। नए भवनों का उद्घाटन मार्च 2026 में संभावित है। भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण के सहयोग से गुवाहाटी में नए कार्यालय भवन का निर्माण किया जा रहा है, जो स्थिर बुनियादी ढांचे, गरिमापूर्ण कार्य परिस्थितियों और न्याय के कुशल वितरण के प्रति संस्था की प्रतिबद्धता दर्शाता है। निम्नलिखित स्‍थानों पर भूमि/सरकारी भवनों को चिन्हित करने के प्रयास किए जा रहे हैं, जहां निम्नलिखित बेंच निजी स्वामित्व वाले किराए के परिसरों से संचालित हो सकें।

i) राजकोट (अहमदाबाद जोन)

ii) सूरत (अहमदाबाद जोन)

iii) जोधपुर (चंडीगढ़ जोन)

iv) रांची (कोलकाता जोन)

v) जबलपुर (लखनऊ जोन)

 मुंबई स्थित मुख्यालय का कामकाज सीजीओ कॉम्प्लेक्स से चलता है, जो बहुत पुराना है।  भूमि चिन्हित करने/भवन स्वामित्व के प्रयास चल रहे हैं।

आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण में अपीलों का निपटारा:

आईटीएटी में अखिल भारतीय स्तर पर लंबित अपीलों की संख्या 1.12.2025 तक 44776 है। कैलेंडर वर्ष 2024 में कुल 38370 अपीलों का निपटारा हुआ और कैलेंडर वर्ष 2025 में (अर्थात 01.12.2025 तक) कुल 52088 अपीलों का निपटारा हुआ है, जो कैलेंडर वर्ष 2024 की तुलना में 35.75 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि है। आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण की सभी नियमित बेंचों में आभासी/हाइब्रिड सुनवाई की सुविधा उपलब्ध है और वे आवश्यक बुनियादी ढांचे के उपयोग से हाइब्रिड सुनवाई कर रही हैं। वर्ष 2025 के दौरान अपीलों की ई-फाइलिंग में भी उल्लेखनीय बढ़ोत्तरी हुई है। 

10).   विभाग द्वारा आयोजित प्रशिक्षण सत्र:

विधि मामले विभाग ने वर्ष 2025 के दौरान निम्नलिखित महत्वपूर्ण सम्मेलन/कार्यशालाएं आयोजित कीं:

I.     विधि मामले विभाग के सभी कर्मचारियों के लिए ब्रह्मा कुमारिस के सहयोग से 08.01.2025 को "मन को नियंत्रित करना" विषय पर एक व्यवहार कार्यशाला आयोजित किया गया।

II.     विभाग ने 24.01.2025 से 01.03.2025 की अवधि में राष्ट्रीय कर्मयोगी व्यापक जन सेवा प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत कुल 12 बैच में लगभग 411 अधिकारियों को सेवा भाव के लिए प्रशिक्षण दिया।

III.     विधि मामले विभाग सचिव के दूरदर्शी नेतृत्व में शाखा सचिवालयों में जन सेवा कार्यक्रम -द्वितीय चरण का आयोजन किया गया। इनमें शाखा सचिवालयों के कुल 105 अधिकारियों/कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया।

शाखा सचिवालय, मुंबई – 08.06.2025

      शाखा सचिवालय, चेन्नई – 14.06.2025

शाखा सचिवालय, बेंगलुरु – 21.06.2025

शाखा सचिवालय, कोलकाता – 28.06.2025

·         IV. विधि मामले विभाग के सभी एएलए, अधीक्षक (एल), सहायक (कानूनी) के लिए 09.04.2025 को "कानूनी अनुसंधान उपकरणों के उपयोग" विषय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

V.     विधि मामले विभाग के वरिष्ठ आईएलएस कैडर अधिकारियों के लिए भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (आईआईपीए) मे30.06.2025 से 04.07.2025 तक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित  किया गया।

11).   नोटरी सेल:

नोटरी पोर्टल के माध्यम से डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित प्रैक्टिस सर्टिफिकेट जारी किया जाना: पेपरलेस, फेसलेस और कुशल प्रणाली प्रदान करने और माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के डिजिटल इंडिया दृष्टिकोण के लक्ष्य प्राप्त करने के लिए, नोटरी पोर्टल https://notary.gov.in को 03.09.2024 को एक समर्पित प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित और जारी किया गया है। यह पोर्टल नोटरी के रूप में नियुक्ति के लिए आवेदन जमा करने, प्रैक्टिस सर्टिफिकेट जारी करने और नवीनीकरण, प्रैक्टिस क्षेत्र में परिवर्तन, वार्षिक रिटर्न जमा करने आदि जैसी ऑनलाइन सेवाएं प्रदान करता है। नोटरी पोर्टल में विभिन्न मॉड्यूल हैं, जिन्हें चरणबद्ध तरीके से आरंभ किया जाएगा। अभी इसमें दस्तावेजों के सत्यापन और पात्रता से संबंधित मॉड्यूल और नव नियुक्त नोटरियों को डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित प्रैक्टिस सर्टिफिकेट जारी करने संबंधित मॉड्यूल सक्रिय हैं। नोटरियों द्वारा वार्षिक रिटर्न जमा करने और प्रैक्टिस क्षेत्र में परिवर्तन के लिए आवेदन संबंधी मॉड्यूल विकसित होने के अंतिम चरण में हैं। पोर्टल द्वारा पैंतीस हजार सात सौ से अधिक डिजिटल तौर पर हस्ताक्षरित प्रैक्टिस सर्टिफिकेट जारी किए गए हैं। पोर्टल वास्तविक समय में डाक्‍यूमेंट एक्सेस के लिए डिजी-लॉकर से जुड़ा हुआ है।

12).   केंद्रीय एजेंसी अनुभाग:

केंद्रीय एजेंसी अनुभाग (सीएएस) भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों/विभागों और साथ ही दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, केंद्र शासित प्रदेशों (पुडुचेरी और जम्मू-कश्मीर को छोड़कर), भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक कार्यालय और सीएजी के अधीन सभी क्षेत्रीय कार्यालयों की ओर से वाद में शामिल होता है। भारत संघ की ओर से कुछ मामलों में विशेष अनुमति याचिकाएं/अपीलें और अन्य याचिकाएं केंद्रीय एजेंसी अनुभाग के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय में विशेष अनुमति याचिकाएं/अपीलें दायर करने की व्यवहार्यता पर माननीय विधि अधिकारियों की राय प्राप्त करने के बाद ही दायर की जाती हैं।

वर्ष 2025 के दौरान, केंद्रीय एजेंसी अनुभाग (सीएएस) ने सर्वोच्च न्यायालय में 8685 नए मामले दायर किए, जबकि कुल 2586 मामलों का निपटारा किया गया।

13).   राजभाषा एकक:

बिंदु सं. 1 :- विधि कार्य विभाग का राजभाषा एकक मुख्य रूप से राजभाषा हिंदी के कार्यान्‍वयन व अनुवाद संबंधी कार्यों को निष्‍पादित करता है।

इस क्रम में राजभाषा एकक की बड़ी उपलब्धियां निम्नलिखित रही हैं:-

  1. विधि कार्य विभाग की वेबसाइट को द्विभाषी बनाने के प्रयास तेज हुए।

  2. गत वर्षों की भांति इस वर्ष भी ''हिन्दी दिवस'' के अवसर पर दिनांक 14 सितम्बर, 2025 से 29 सितम्बर, 2025 तक ''हिन्दी पखवाड़ा'' मनाया गया और इस दौरान 05 प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया जिसमें विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों ने बढ़ चढ़ कर भाग लिया एवं विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार राशि प्रदान की गई।

हिंदी पखवाड़ा-2025

  1. सतर्कता जागरूकता सप्ताह 2025’ के दौरान राजभाषा एकक द्वारा विधि कार्य विभाग में सतर्कता हमारी साझा जिम्मेदारी विषय पर हिंदी निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।

 IV.     वर्ष 2025 के दौरान आयकर अपीलीय अधिकरण के विशाखापट्टनम पीठ, और अहमदाबाद पीठ का राजभाषायी निरीक्षण किया गया और इसके साथ ही हिंदी कार्यशाला का भी आयोजन किया गया।

   V.     विधि कार्य विभाग में दिनांक 19 दिसंबर, 2025 को सम्मेलन कक्ष शास्त्री भवन में हिंदी कार्यशाला का भी आयोजन किया गया।

 VI.      वार्षिक कार्यक्रम:- राजभाषा विभागगृह मंत्रालय द्वारा जारी वर्ष 2025-26 का वार्षिक कार्यक्रम प्राप्त किया गया और उसे विभाग के सभी अनुभागों और विभाग के नियंत्रणाधीन कार्यालयों में परिचालित किया गया।

 

VII.     हिंदी में मूल टिप्पण/प्रारूप लेखन के लिए प्रोत्‍साहन योजना : इस विभाग में हिंदी में टिप्पण/प्रारूप लेखन के लिए राजभाषा विभाग द्वारा निदेशित प्रोत्साहन योजना कार्यान्‍वित की जा रही है। इस योजना के अंतर्गत वर्ष 2024-25 में प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान किए गए और कार्मिकों को हिंदी में सरकारी कामकाज करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

बिंदु सं. 2:- विधि कार्य विभाग के राजभाषा एकक द्वारा हाल के कुछ वर्षों से विधिक दस्तावेजों/सामग्रियों के हिंदी अनुवाद में कठिन शब्दों के बजाय सरल, बोधगम्

य शब्दों का अधिक से अधिक प्रयोग किया जा रहा है ताकि सामान्य जन भी कानून की भाषा व शब्‍दावली से यथासंभव अधिक से अधिक परिचित हो सके। प्रत्येक तिमाही पर होने वाली राजभाषा कार्यान्‍वयन समिति की बैठक में भी इस बिंदु पर बार-बार जोर दिया जाता है। इससे विभाग में भी मूलरूप से हिंदी में कामकाज में अधिक सरलीकरण का अनुभव हुआ है व हिंदी के प्रचार-प्रसार में यह सहायक सिद्ध हुआ है। मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट, प्रेस विज्ञप्‍तियां, अधिसूचनाएं, परिपत्र, कार्यालय ज्ञापन व अन्‍य सभी कार्यों में भी यह साफ तौर पर परिलक्षित होता है।

14).   परामर्श कार्य:

          वर्ष 2025 के दौरान (जनवरी से नवंबर 2025 तक), इस विभाग ने भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों/विभागों को 3221 परामर्श दीं और 108 कैबिनेट नोटों की जांच की।

15).  लंबित मामलों के निपटान के लिए पांचवे विशेष अभियान

       लंबित मामलों के निपटान के लिए पांचवे विशेष अभियान के दौरान, इस विभाग ने 50 अभियान चलाए और 4,91,758 रुपये का राजस्व अर्जित किया, 60,527 फाइलों की समीक्षा/निपटान किया गया और अनावश्‍यक सामान हटाकर 11,831 वर्ग फुट स्‍थान खाली किया गया।

16).   75 वें संविधान दिवस का उत्सव:

विधि एवं न्याय मंत्रालय के विधि मामले विभाग ने भारतीय विधि संस्थान (आईएलआई) के सहयोग से 26 नवंबर 2025 को नई दिल्ली स्थित आईएलआई के प्लीनरी हॉल में 75वां संविधान दिवस आयोजित किया। कार्यक्रम का शुभारंभ निदेशक और विशिष्ट अतिथियों के दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद प्रो. (डॉ.) वी.के. आहूजा ने अपने संबोधन में संविधान दिवस के ऐतिहासिक महत्व और संवैधानिक मूल्यों की समकालीन प्रासंगिकता का उल्‍लेख किया। इसके उपरांत "आज संविधान का क्या अर्थ है" विषय पर आशु भाषण प्रतियोगिता का फाइनल राउंड आयोजित किया गया, जिसमें भारतीय विधि संस्थान के एल एल.एम. विद्यार्थियों और विधि एवं न्याय मंत्रालय के प्रशिक्षुओं ने भाग लिया। समारोह में निदेशक और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की सहभागिता के साथ सामूहिक रूप से "वंदे मातरम" का भावपूर्ण गायन और संविधान की प्रस्तावना का पाठ किया गया। इसके बाद भारतीय विधि संस्थान के विद्यार्थियों की चार-चार सदस्यों की टीम के बीच तीन चरणों की संवैधानिक प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित की गई। विशिष्ट अतिथियों द्वारा आशु भाषण प्रतियोगिता और प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के विजेताओं को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।

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पीके/केसी/एकेवी/एमपी 


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