उपभोक्ता कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय
खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग : वर्षांत समीक्षा – 2025
प्रविष्टि तिथि:
31 DEC 2025 5:12PM by PIB Delhi
वर्ष 2025 के दौरान खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग की प्रमुख उपलब्धियाँ इस प्रकार हैं:
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई)
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) देश में कोविड-19 महामारी के कारण उत्पन्न आर्थिक संकट से गरीब और जरूरतमंद वर्ग को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। कोविड संकट को देखते हुए, इस योजना के तहत मुफ्त खाद्यान्न का आवंटन नियमित आवंटन के अतिरिक्त किया गया। पीएमजीकेएवाई के चरण I से VII के अंतर्गत कुल 28 महीनों की अवधि में लगभग 1118 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) खाद्यान्न का आवंटन किया गया, जिस पर करीब 3.91 लाख करोड़ रुपये का कुल अनुमानित वित्तीय व्यय हुआ।
केंद्र सरकार ने गरीब लाभार्थियों पर वित्तीय बोझ को कम करने और देशभर में एकरूपता व प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया कि 1 जनवरी 2023 से एक वर्ष की अवधि के लिए राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के अंतर्गत आने वाले लाभार्थियों-अंत्योदय अन्न योजना (एएवाई) और प्राथमिकता प्राप्त परिवार (पीएचएच)-को मुफ्त खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाएगा, जो पीएमजीकेएवाई के तहत दिया गया। इससे पहले NFSA के अंतर्गत लाभार्थियों को चावल 3 रुपये प्रति किलो, गेहूं 2 रुपये प्रति किलो और मोटे अनाज 1 रुपये प्रति किलो की रियायती दर पर वितरित किए जाते थे। पीएमजीकेएवाई के तहत मुफ्त खाद्यान्न वितरण की अवधि को 1 जनवरी 2024 से अगले पाँच वर्षों के लिए बढ़ा दिया गया है, जिससे देश के करोड़ों गरीब परिवारों को निरंतर खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।
वर्तमान में, निर्धारित 81.35 करोड़ लोगों के कवरेज लक्ष्य के मुकाबले, इस समय लगभग 80 करोड़ लोगों को मुफ्त खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है।
2- टीपीडीएस, ओडब्ल्यूएस और अतिरिक्त आवंटन (बाढ़, त्योहार आदि) के तहत वर्ष 2025–26 के लिए खाद्यान्न का वार्षिक आवंटन
खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के अंतर्गत विभिन्न योजनाओं के लिए खाद्यान्न का आवंटन करता है। इनमें अंत्योदय अन्न योजना (एएवाई), प्राथमिकता प्राप्त परिवार (पीएचएच), टाइड ओवर, पीएम पोषण योजना, गेहूं आधारित पोषण कार्यक्रम (अंब्रेला आईसीडीएस का एक घटक) शामिल हैं। इसके अतिरिक्त विभाग अन्य कल्याणकारी योजनाओं के लिए भी खाद्यान्न आवंटित करता है, जैसे-किशोरी बालिका योजना, अन्नपूर्णा योजना,कल्याणकारी संस्थान एवं छात्रावास योजना (डब्ल्यूआईएच)। वर्ष 2025–26 के लिए योजना-वार खाद्यान्न का वार्षिक आवंटन इस प्रकार है:
वर्ष 2025–26 : खाद्यान्न का वार्षिक आवंटन (आगे विवरण)।
लाख टन में
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योजना का नाम
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चावल
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गेहूँ
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पोषक अनाज
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कुल
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ए
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टीपीडीएस (एनएफएसए आवंटन)
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अंत्योदय अन्न योजना (एएवाई)
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71.66
|
27.75
|
0.01
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99.42
|
|
|
प्राथमिकता वाले परिवार (पीएचएच)
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277.70
|
143.96
|
7.83
|
429.48
|
|
|
टीपीडीएस (टाइड ओवर)
|
21.18
|
4.91
|
0.00
|
26.09
|
|
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कुल
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370.53
|
176.62
|
7.83
|
554.99
|
|
|
|
|
|
|
|
|
बी
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अन्य कल्याणकारी योजनाएँ
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|
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पीएम पोषण
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18.14
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3.87
|
0.30
|
22.31
|
|
|
डब्ल्यूबीएनपी (आईसीडीएस)
|
11.86
|
10.97
|
0.22
|
23.05
|
|
|
कल्याणकारी संस्थान और छात्रावास
|
4.76
|
0.96
|
0.00
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5.72
|
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|
किशोरियों के लिए योजना (एसएजी)
|
0.27
|
0.28
|
0.02
|
0.58
|
|
|
अन्नपूर्णा
|
0.00
|
0.00
|
0.00
|
0.00
|
|
|
कुल
|
35.03
|
16.08
|
0.54
|
51.65
|
|
|
|
|
|
|
|
|
सी
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अतिरिक्त आवंटन (त्योहार, आपदा, अतिरिक्त टीपीडीएस आदि)
|
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प्राकृतिक आपदा आदि
(एमएसपी दरें)
|
0.00
|
0.01
|
0.00
|
0.01
|
|
|
त्योहार/अतिरिक्त आवश्यकता आदि
(आर्थिक लागत)
|
0.92
|
0.60
|
0.00
|
1.52
|
|
|
कुल
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0.92
|
0.61
|
0.00
|
1.52
|
|
|
|
|
|
|
|
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ए+बी+सी
|
कुल योग
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406.48
|
193.32
|
8.37
|
608.16
|
3-लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (टीपीडीएस) में सुधार
एनएफएसए के तहत सभी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में 100% राशन कार्ड/लाभार्थी डेटा का डिजिटलीकरण किया जा चुका है। लगभग 20.55 करोड़ राशन कार्ड, जिनमें करीब 79.8 करोड़ लाभार्थी शामिल हैं, राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के ट्रांसपेरेंसी पोर्टल पर उपलब्ध हैं।
राशन कार्डों की आधार सीडिंग 99.9% से अधिक (कम से कम एक सदस्य का आधार लिंक) पूरी हो चुकी है।
देशभर में कुल 5.51 लाख उचित मूल्य दुकानों (एफपीएस) में से लगभग 99.8% (5.50 लाख) दुकानों को इलेक्ट्रॉनिक पॉइंट ऑफ सेल (ePoS) मशीनों से स्वचालित किया गया है, जिससे सब्सिडी वाले खाद्यान्न का पारदर्शी और सुनिश्चित वितरण हो रहा है।
खाद्यान्न वितरण के दौरान 98% से अधिक लेन-देन राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा बायोमेट्रिक/आधार प्रमाणीकरण के जरिए दर्ज किए गए हैं।
4- शिकायत निवारण मंच
विभाग ने इंडिया एआई मिशन के तहत आशा (ASHA) नामक एक एआई-आधारित नागरिक सहभागिता एवं शिकायत निवारण प्लेटफॉर्म शुरू किया है। यह प्लेटफॉर्म भाषिणी की बहुभाषी क्षमता, व्हाट्सऐप और आईवीआरएस के माध्यम से राशन वितरण के बाद लाभार्थियों की प्रतिक्रिया एकत्र करता है। इसके जरिए सेंटिमेंट एनालिसिस किया जाता है और शिकायतों को स्वतः संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाया जाता है, जिससे सार्वजनिक वितरण प्रणाली में तेज़, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित शासन सुनिश्चित हो रहा है।
5. ‘वन नेशन वन राशन कार्ड’ (ओएनओआरसी) योजना की प्रगति
अगस्त 2019 में केवल 4 राज्यों में अंतर-राज्य पोर्टेबिलिटी से शुरू हुई ओएनओआरसी योजना अब देश के सभी 36 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में लागू हो चुकी है। इसके तहत लगभग 79.8 करोड़ एनएफएसए लाभार्थी, यानी देश की लगभग 100% एनएफएसए आबादी, कवर की जा चुकी है।
ओएनओआरसी योजना की शुरुआत से अब तक देशभर में 195.9 करोड़ से अधिक पोर्टेबिलिटी लेन-देन दर्ज किए गए हैं, जिनके जरिए 464.7 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) से अधिक खाद्यान्न वितरित किया गया है। इसमें अंतर-राज्य और राज्य के भीतर (इंट्रा-स्टेट) दोनों तरह के लेन-देन शामिल हैं।
वर्ष 2025 के दौरान (10 महीनों में) लगभग 32.6 करोड़ पोर्टेबिलिटी लेन-देन किए गए, जिनके माध्यम से करीब 64 लाख मिट्रीक टन खाद्यान्न वितरित हुआ। वर्तमान में पीएमजीकेएवाई के तहत हर महीने 3.2 करोड़ से अधिक पोर्टेबिलिटी लेन-देन दर्ज किए जा रहे हैं।
6. खाद्यान्न की आवाजाही
i. भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने एनएफएसए और विभिन्न अन्य योजनाओं की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कुल 9,527 रेक के माध्यम से लगभग 283.30 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) खाद्यान्न का भेजा गया।
ii. पड़ोसी उपभोग केंद्रों की जरूरतों को पूरा करने के लिए लगभग 63.69 एलएमटी खाद्यान्न का सड़क मार्ग से भेजा गया।
iii. कंटेनरीकृत परिवहन के तहत 206 रेक चलाए गए, जिससे लगभग ₹3.01 करोड़ की मालभाड़ा बचत हुई।
iv. एफसीआई द्वारा मल्टी-मोडल परिवहन भी किया जा रहा है, जिसमें चावल का परिवहन तटीय शिपिंग और सड़क मार्ग के संयोजन से किया गया। इसके तहत आंध्र प्रदेश के नामित डिपो से केरल और अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह, तथा कर्नाटक से लक्षद्वीप तक खाद्यान्न भेजा गया। इस माध्यम से लगभग 0.22 एलएमटी खाद्यान्न भंडार का परिवहन किया गया, जिससे पारंपरिक परिवहन व्यवस्था की तुलना में अधिक दक्षता सुनिश्चित हुई।
7. किसानों को समर्थन
खरीद संचालन: खाद्य प्रबंधन का मुख्य उद्देश्य किसानों से उचित मूल्य पर खाद्यान्न की खरीद, उपभोक्ताओं विशेषकर समाज के कमजोर वर्गों को सस्ती दरों पर खाद्यान्न का वितरण, तथा खाद्य सुरक्षा और मूल्य स्थिरता के लिए बफर स्टॉक का रखरखाव करना है। केंद्र सरकार, भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) और राज्य एजेंसियों के माध्यम से धान, मोटे अनाज और गेहूं की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद कर किसानों को मूल्य समर्थन प्रदान करती है। निर्धारित केंद्रों पर बिक्री के लिए लाए गए, तय मानकों के अनुरूप सभी गेहूं और धान को सार्वजनिक खरीद एजेंसियों द्वारा घोषित एमएसपी (यदि कोई बोनस हो तो सहित) पर खरीदा जाता है। किसानों को यह विकल्प भी दिया जाता है कि वे अपना उत्पाद एफसीआई/राज्य एजेंसियों को एमएसपी पर बेचें या खुले बाजार में, जो उनके लिए अधिक लाभकारी हो।
रबी विपणन मौसम 2025-26 के दौरान 300.35 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) गेहूं की खरीद की गई, जिससे 25,13,143 किसानों को लाभ हुआ।
खरीफ विपणन मौसम 2024-25 में 832.17 एलएमटी धान की खरीद की गई, जिससे 1,18,58,507 किसानों को लाभ मिला।
वर्तमान खरीफ विपणन मौसम 2025-26 में 17.11.2025 तक 243.48 एलएमटी धान की खरीद हो चुकी है, जिससे 21,22,273 किसानों को लाभ मिला है।
8. मोटे अनाज / मिलेट्स की खरीद
पिछले तीन वर्षों और वर्तमान वर्ष के दौरान मोटे अनाज/मिलेट्स की खरीद का विवरण इस प्रकार है:
मीट्रिक टन में आंकड़ा
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कि.मी.
|
माल
|
कुल
|
|
|
2022-23
|
ज्वार
|
85197
|
|
|
बाजरे
|
182005
|
|
|
मक्का
|
13122
|
|
|
रागी
|
456745
|
|
|
कुल
|
737069
|
|
|
2023-24
|
ज्वार
|
323163
|
|
|
बाजरे
|
696457
|
|
|
मक्का
|
4532
|
|
|
रागी
|
230920
|
|
|
कुल
|
1255073
|
|
|
2024-25
|
ज्वार
|
414855
|
|
|
बाजरे
|
343352
|
|
|
मक्का
|
19482
|
|
|
रागी
|
394613
|
|
|
कुल
|
1172302
|
|
|
2025-26*
|
ज्वार
|
3878
|
|
|
बाजरे
|
57225
|
|
|
मक्का
|
2823
|
|
|
रागी
|
438
|
|
|
छोटे बाजरा
|
-
|
|
|
कुल
|
64365
|
|
केएमएस 2025-26 (खरीफ) के दौरान खरीद प्रक्रिया अभी भी जारी है (आंकड़ों के अनुसार, दिनांक 16.11.2025 तक)।
9. खाद्यान्न पैकेजिंग सामग्री
जूट मिलों की उत्पादन क्षमता तथा राज्यों/एफसीआई की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, इस विभाग ने खरीफ विपणन मौसम (केएमएस) 2025-26 के लिए केंद्रीय पूल के तहत 20.95 लाख जूट की गांठें (बेल्स) आवंटित की हैं। इसके अलावा रबी विपणन मौसम (आरएमएस) 2026-27 / केएमएस 2025-26 (रबी फसल) के लिए दिसंबर 2025 तक 5.20 लाख जूट गांठें राज्य खरीद एजेंसियों और भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) को आवंटित की गई हैं। यह व्यवस्था खाद्यान्न के सुरक्षित भंडारण और परिवहन को सुनिश्चित करने के लिए की गई है।
10. गेहूं पर स्टॉक सीमा लागू
देश की कुल खाद्य सुरक्षा बनाए रखने, जमाखोरी रोकने और अनुचित सट्टेबाजी पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से भारत सरकार ने 27 मई 2025 को गेहूं पर स्टॉक सीमा लागू की थी, जिसे बाद में 26 अगस्त 2025 को संशोधित किया गया। यह आदेश व्यापारियों/थोक विक्रेताओं, खुदरा विक्रेताओं, बड़े चेन रिटेलर्स और प्रोसेसरों पर लागू है। यह स्टॉक सीमा सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 30 अप्रैल 2026 तक प्रभावी रहेगी। इसके तहत तय सीमा से अधिक गेहूं का भंडारण करने पर कार्रवाई का प्रावधान किया गया है, ताकि बाजार में उपलब्धता बनी रहे और कीमतों में अनावश्यक बढ़ोतरी न हो।, जैसा कि नीचे दिया गया है:
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इकाइयां,
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गेहूं स्टॉक सीमा
|
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व्यापारी / थोक विक्रेता
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2000 मीट्रिक टन
|
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रिटेलर्स
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प्रत्येक खुदरा दुकान के लिए 8 मीट्रिक टन।
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|
बड़े चेन रिटेलर्स
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प्रत्येक खुदरा आउटलेट के लिए अधिकतम 8 मीट्रिक टन (एमटी) की सीमा है, जो (8 को कुल आउटलेट की संख्या से गुणा करने पर प्राप्त) मीट्रिक टन के बराबर है। यह वह अधिकतम स्टॉक होगा जिसे उनके सभी खुदरा आउटलेट और डिपो में मिलाकर रखा जा सकता है।
|
|
प्रोसेसर
|
मासिक स्थापित क्षमता (एमआईसी) का 60%, वित्त वर्ष 2025-26 के शेष महीनों से गुणा किया गया।
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11. खाद्य सब्सिडी
खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग (डीफपीडी) उन राज्यों को खाद्य सब्सिडी की प्रतिपूर्ति करता है, जिन्होंने विकेंद्रीकृत खरीद (डीसीपी) प्रणाली को अपनाया है। इन राज्यों द्वारा केंद्र सरकार की योजनाओं के तहत लाभार्थियों को खाद्यान्न की खरीद और वितरण पर जो खर्च किया जाता है, उसकी भरपाई भारत सरकार द्वारा तय आवंटन के अनुसार की जाती है। इसके अलावा, भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) द्वारा भी राज्यों को उस खाद्यान्न की मात्रा के लिए धनराशि जारी की जाती है, जो राज्यों द्वारा केंद्रीय पूल के लिए एफसीआई को सौंपी जाती है। डीसीपी राज्यों और एफसीआई को जारी की जाने वाली यह खाद्य सब्सिडी वित्त मंत्रालय द्वारा किए गए बजटीय प्रावधानों के अनुसार दी जाती है।वित्त वर्ष 2024-25 और चालू वित्त वर्ष 2025-26 (26 नवंबर 2025 तक) के दौरान एफसीआई और डीसीपी राज्यों को जारी की गई खाद्य सब्सिडी का विवरण निम्नानुसार है।
(करोड़ रुपये में)
|
योजना
|
2024-25
|
2025-26*
|
|
एफसीआई
|
129089.4
|
86517
|
|
डीसीपी राज्य (डीबीटी सहित)
|
70410.6
|
50391.67
|
|
कुल
|
199500.00
|
136908.67
|
** वित्त वर्ष 2025-26 में खाद्य सब्सिडी जारी करने के लिए वित्त मंत्रालय द्वारा कुल ₹2,03,000 करोड़ का आवंटन किया गया है। इसमें से ₹1,29,080.90 करोड़ भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के लिए और ₹73,919.10 करोड़ विकेंद्रीकृत खरीद (डीसीपी) अपनाने वाले राज्यों के लिए निर्धारित किए गए हैं।
डीसीपी राज्यों को जारी की गई खाद्य सब्सिडी का विस्तृत विवरण परिशिष्ट–I में दिया गया है।
वित्त वर्ष 2025-26 की प्रमुख उपलब्धियां निम्नलिखित हैं:
(क) एससीएएन–एफसीएस मॉड्यूल का क्रियान्वयन
राज्यों द्वारा अंतिम आकस्मिक दरों के निर्धारण से जुड़े प्रस्तावों की प्रक्रिया को तेज करने और अंतिम खाद्य सब्सिडी दावों के निपटान को समयबद्ध बनाने के उद्देश्य से खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने वर्ष 2025-26 में एससीएएन–एफसीएस मॉड्यूल लागू किया।यह मॉड्यूल डिजिटल इंडिया की भावना को साकार करता है और दक्षता, पारदर्शिता एवं सशक्तिकरण को सुनिश्चित करते हुए एफसीएस के समयबद्ध प्रस्तुतीकरण और निर्गमन में सहायक होगा, जिससे अंतिम भुगतान शीघ्र हो सकेगा।
(ख) गेहूं खरीद में पंचायतों को अधिकृत करना
रबी विपणन सत्र 2025-26 (आरएमएस 2025-26) के दौरान गेहूं खरीद प्रक्रिया को तेज करने और निर्धारित लक्ष्यों को समय पर पूरा करने के उद्देश्य से, तथा कुछ राज्य सरकारों के अनुरोधों को ध्यान में रखते हुए यह स्पष्ट किया गया कि ₹27 प्रति क्विंटल की दर से दी जाने वाली कमीशन राशि, जो सहकारी समितियों को दी जाती है, वही कमीशन अब राज्य सरकारों की विभागीय व्यवस्थाओं, एफपीओ, एसएचजी और पंचायतों को भी देय होगी- दि इनके माध्यम से गेहूं की खरीद की जाती है और सहकारी समितियों से संबंधित गतिविधियों का निर्वहन किया जाता है।यह निर्णय ग्रामीण स्तर पर खरीद व्यवस्था को मजबूत करने और किसानों को अधिक सुलभ एवं प्रभावी समर्थन देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
12. खुला बाजार बिक्री योजना (घरेलू)– ओएमएसएस (डी)
आम उपभोक्ताओं को रियायती दरों पर आटा और चावल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से खुला बाजार बिक्री योजना (घरेलू) [ओएमएसएस (डी)] के तहत भारत आटा की शुरुआत 06 नवंबर 2023 को और भारत चावल की शुरुआत 06 फरवरी 2024 को की गई। भारत आटा और भारत चावल की बिक्री तीन केंद्रीय सहकारी संस्थाओं-नेफेड (NAFED), केंद्रीय भंडार और एनसीसीएफ (NCCF) के माध्यम से की जा रही है।
चरण-II (30 जून 2025 तक)
इस चरण में भारत आटा ₹30 प्रति किलोग्राम और भारत चावल ₹34 प्रति किलोग्राम के एमआरपी पर बेचा गया। फेज-II के दौरान 3.34 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) भारत आटा 2.15 एलएमटी भारत चावल की बिक्री की गई।
चरण-III (30 जून 2026 तक)
इस चरण के दौरान, भारत आटा के लिए एमआरपी 31.50 रुपये प्रति किलो तय किया गया है, जबकि भारत चावल के लिए एमआरपी 5 किलो और 10 किलो पैक के लिए 34 रुपये प्रति किलो और 30 किलो पैक के लिए 32 रुपये प्रति किलो 31.10.2025 तक तय किया गया है। 01.11.2025 से, भारत चावल का एमआरपी 5 किलो और 10 किलो पैक के लिए 35 रुपये प्रति किलो और 30 किलो पैक के लिए 33 रुपये प्रति किलो तय किया गया है। इस चरण के दौरान बिक्री के लिए वर्तमान में भारत आटा की बिक्री के लिए 5 एलएमटी गेहूं और भारत चावल की बिक्री के लिए 5 एलएमटी चावल आवंटित किया गया है।
इसके अलावा, ओएमएसएस (डी) के तहत 'निजी पार्टियों, ई-नीलामी के माध्यम से सहकारी/सहकारी संघ और एफसीआई डिपो से छोटे निजी व्यापारियों/उद्यमियों/व्यक्तियों' श्रेणियों में एफसीआई द्वारा 18.11.2025 तक 23.44 ला मीट्रिक टन (एलएमटी) चावल बेचा गया है। 18.11.2025 तक, इस साल 31.71 एलएमटी चावल राज्य सरकारों/राज्य सरकार के निगमों को बिना ई-ऑक्शन में हिस्सा लिए और कम्युनिटी किचन को बेचा गया है।
2025 में 18.11.2025 तक, 33.06 एलएमटी चावल इथेनॉल बनाने के लिए इथेनॉल डिस्टिलरी को बेचा गया है। 50 एलएमटी कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) जिसमें 10% टूटा चावल है और राइस मिलिंग ट्रांसफॉर्मेशन स्कीम के तहत बनाया गया 10 एलएमटी टूटा चावल ओएमएसएस (डी) 2025-26 के तहत ई-ऑक्शन के ज़रिए प्राइवेट पार्टियों को बेचने के लिए अलॉट किया गया है। 2025 में 18.11.2025 तक, 24.45 एलएमटी गेहूं प्राइवेट पार्टियों को ई-ऑक्शन के ज़रिए और केंद्रीय सहकारी संगठनों को भारत आटा के रूप में बेचने के लिए बेचा गया है। यह योजना बाजार में कीमतों को नियंत्रित रखने और आम लोगों को सस्ती दरों पर अनाज उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
3. ई-एनडब्ल्यूआर आधारित गिरवी वित्तपोषण हेतु क्रेडिट गारंटी योजना (सीजीएस-एनपीएफ)
ई-एनडब्ल्यूआर आधारित गिरवी ऋण के लिए क्रेडिट गारंटी योजना (सीजीएस-एनपीएफ) को ₹1000 करोड़ के कॉर्पस के साथ मंजूरी दी गई है। यह एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसे खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग (डीएफपीडी) द्वारा वर्ष 2024-25 से 16वें वित्त आयोग चक्र के अंत (2030-31) तक लागू किया जाएगा। यह योजना उन किसानों के लिए है जो मान्यता प्राप्त गोदामों में अपनी उपज जमा कर ई-एनडब्ल्यूआर के आधार पर गिरवी ऋण लेते हैं। इसका उद्देश्य कटाई-पश्चात वित्तपोषण को बढ़ावा देना और किसानों की आय में सुधार करना है।
क्रेडिट गारंटी स्कीम ई-एनडब्ल्यूआरएस के ज़रिए फसल कटाई के बाद लोन देने में मदद करेगी और इस तरह किसानों की इनकम बढ़ाने में भूमिका निभाएगी। क्रेडिट गारंटी स्कीम लोन देने वालों में भरोसा पैदा करेगी और वेयरहाउस वालों पर विश्वास बढ़ाएगी ताकि ई-एनडब्ल्यूआरएस के ज़रिए फसल कटाई के बाद फाइनेंस बढ़ाया जा सके।
यह योजना विशेष रूप से छोटे एवं सीमांत किसान, महिलाएं, एससी/एसटी और दिव्यांगजन (पीडब्ल्यूडी) किसानों पर केंद्रित है, जिनके लिए न्यूनतम गारंटी शुल्क रखा गया है। इसके अलावा छोटे व्यापारी (एमएसएमई) भी इस योजना के दायरे में आते हैं।
योजना के तहत बैंकों को होने वाले नुकसान की भरपाई की जाती है, जो क्रेडिट जोखिम और वेयरहाउस जोखिम के कारण उत्पन्न हो सकते हैं। अन्य व्यापक (मैक्रो-इकॉनॉमिक) लाभ
इसके अतिरिक्त, इस योजना के गैर-मापनीय व्यापक आर्थिक (मैक्रो-इकॉनॉमिक) लाभ भी हैं। इनमें वेयरहाउसिंग व्यवस्था का उन्नयन और मानकीकरण, कटाई के बाद होने वाले नुकसान में कमी, कृषि जिंसों का वैज्ञानिक भंडारण, ग्रामीण क्षेत्रों में तरलता (लिक्विडिटी) में सुधार, वेयरहाउसिंग सेक्टर का संतुलित और समावेशी विकास तथा जिंस व्यापार में मजबूती शामिल है।
यह स्कीम 13.02.2025 को गैजेट नोटिफिकेशन में पब्लिश हुई थी। एनसीजीटीसी के साथ बैंकों की ऑन-बोर्डिंग शुरू हो गई है और 30.11.2025 तक, 40 बैंक ऑन-बोर्ड हो चुके हैं।
ई-एनडब्ल्यूआर आधारित प्लेज फाइनेंसिंग (सीजीएस-एनपीएफ) के लिए क्रेडिट गारंटी स्कीम का 30.11.2025 तक का अपडेटेड स्टेटस इस प्रकार है:-
- ऑन-बोर्ड किए गए बैंक: 40
- जारी की गई गारंटियां: 95
- जारी गारंटी की कुल राशि: ₹22.88 करोड़
कुल मिलाकर, सीजीएस-एनपीएफ योजना किसानों को बेहतर वित्तीय सुरक्षा देने और कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है।
14. पीडीएस आपूर्ति श्रृंखला में ‘अन्न चक्र’ (रूट ऑप्टिमाइजेशन) का कार्यान्वयन
रूट ऑप्टिमाइजेशन भारत की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) की आपूर्ति श्रृंखला को अधिक कुशल और लागत-प्रभावी बनाने की एक रणनीतिक पहल है। पीडीएस के संदर्भ में इसका अर्थ है आईआईटी-दिल्ली और संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) द्वारा विकसित ऑप्टिमाइजेशन एल्गोरिदम का उपयोग कर गोदाम-से-गोदाम और वहां से उचित मूल्य दुकान (एफपीएस) तक सबसे बेहतर मार्गों का निर्धारण करना। इससे परिवहन लागत में कमी आती है और संचालन क्षमता बढ़ती है, जिससे लाभार्थियों तक खाद्यान्न की समयबद्ध और किफायती आपूर्ति सुनिश्चित होती है।
इस ऑप्टिमाइजेशन अभ्यास में ऑपरेशंस रिसर्च के माध्यम से खाद्यान्न परिवहन के लिए सबसे प्रभावी मार्गों का चयन किया गया, जिससे समय और लागत दोनों की बचत हुई। यह पहल एक अधिक सक्षम और कम लागत वाली खाद्य आपूर्ति श्रृंखला के निर्माण की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम है।
ऑप्टिमाइजेशन अभ्यास के एक वर्ष पूरे होने पर, लक्षित 31 राज्यों में रूट ऑप्टिमाइजेशन का आकलन पूरा कर लिया गया है। इसके परिणाम काफी उत्साहजनक रहे हैं। अनुमान है कि इससे हर साल करीब 250 करोड़ रुपये की परिवहन लागत में कमी आएगी, जिनमें से 238 करोड़ रुपये की बचत की सूचना राज्यों द्वारा दी जा चुकी है।
इसके साथ ही, अधिशेष राज्यों से घाटे वाले राज्यों में खाद्यान्न की आवाजाही के लिए अंतर-राज्यीय रूट ऑप्टिमाइजेशन भी रेलवे के फ्रेट ऑपरेटिंग इंफॉर्मेशन सिस्टम (एफओआईएस) के साथ एकीकरण के जरिए पूरा कर लिया गया है। गौरतलब है कि ऑप्टिमाइजेशन के लिए दूरी संबंधी आंकड़े स्वदेशी ‘गति शक्ति मास्टर प्लान प्लेटफॉर्म’ से उपलब्ध कराए गए।
उत्तम मार्गों को अपनाने से राज्यों ने औसत परिवहन दूरी में 50 प्रतिशत तक की कमी की है और कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन में 35 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई है।
यह पहल केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरणीय दृष्टि से भी अहम है। वैश्विक स्तर पर ‘फूड माइल्स’—यानी उत्पादन से उपभोग तक भोजन की यात्रा की दूरी-कुल खाद्य प्रणाली उत्सर्जन का लगभग एक-पांचवां हिस्सा होती है। भारत में खाद्यान्न वितरण मार्गों का अनुकूलन CO₂ उत्सर्जन घटाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है, जिससे पेरिस समझौते और कॉप (सीओपी) के तहत भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं को मजबूती मिलेगी। ईंधन की खपत घटने से विदेशी मुद्रा भंडार के संरक्षण में भी मदद मिलेगी।
पीडीएस वितरण आपूर्ति श्रृंखला के ऑप्टिमाइजेशन से मिले अनुभवों के आधार पर, आईआईटी-दिल्ली और विश्व खाद्य कार्यक्रम की टीम ने खरीफ विपणन सत्र 2025-26 के लिए 10 धान उत्पादक राज्यों हेतु भी ऑप्टिमाइजेशन योजनाएं तैयार की हैं। यह टीम आगे चलकर अधिकांश धान और गेहूं उत्पादक राज्यों में खरीद आपूर्ति श्रृंखला को अधिक दक्ष बनाने पर काम करेगी।
इस अभ्यास का उद्देश्य मानव हस्तक्षेप को सीमित करना है, जो अक्सर संचालन दक्षता, अतिरिक्त लॉजिस्टिक्स लागत और पीडीएस आपूर्ति श्रृंखला में लीकेज/चोरी को प्रभावित करता है। राज्य सरकारों को अन्न चक्र ऑप्टिमाइजेशन टूल्स उपलब्ध कराए गए हैं, जबकि एफसीआई को पूरे देश में अनाज आपूर्ति श्रृंखला को बेहतर बनाने के लिए रेक ऑप्टिमाइजेशन टूल दिया गया है। आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े निर्णयों का यह स्वचालन, माननीय प्रधानमंत्री की गति शक्ति पहल के अनुरूप एक बड़ा और निर्णायक कदम है।
15. स्टील साइलो पर संक्षिप्त विवरण
देश में खाद्यान्न भंडारण अवसंरचना को आधुनिक और सुदृढ़ बनाने तथा भंडारण क्षमता में तेजी से बढ़ोतरी के उद्देश्य से स्टील साइलो का निर्माण पीपीपी (पीपीपी) मॉडल के तहत किया जा रहा है। सर्किट मॉडल के अंतर्गत 5.50 लाख मीट्रिक टन (एमटी) क्षमता के साइलो पहले से ही परिचालन में हैं। वहीं रेलवे साइडिंग एवं रोड-फेड मॉडल के तहत 20.25 लाख एमटी क्षमता के साइलो कार्यशील हैं, जबकि 4.00 लाख एमटी क्षमता के साइलो निर्माणाधीन हैं।
अब खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग द्वारा हब एंड स्पोक मॉडल के तहत साइलो क्षमता का सृजन किया जा रहा है। इस मॉडल में ‘हब’ साइलो के पास समर्पित रेलवे साइडिंग और कंटेनर डिपो की सुविधा होती है। ‘स्पोक’ साइलो से हब साइलो तक माल ढुलाई सड़क मार्ग से, जबकि हब से हब तक परिवहन रेल मार्ग से किया जाता है।
हब एंड स्पोक फेज-I के तहत 80 स्थानों पर 34.875 लाख एमटी क्षमता के साइलो निर्माण के लिए टेंडर आवंटित किए गए हैं। इनमें से 5 स्थानों पर 3.75 लाख एमटी क्षमता का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि 75 स्थानों पर 31.125 लाख एमटी क्षमता के साइलो निर्माणाधीन हैं।
इसके अलावा, हब एंड स्पोक फेज-II के अंतर्गत 54 स्थानों पर 25.125 लाख एमटी क्षमता के साइलो निर्माण के लिए भी टेंडर जारी किए जा चुके हैं।
परंपरागत रूप से स्टील साइलो गेहूं भंडारण के लिए उपयुक्त माने जाते हैं। हालांकि, पायलट परियोजना के तौर पर बिहार के कैमूर और बक्सर में चावल भंडारण के लिए 12,500 एमटी-12,500 एमटी क्षमता के स्टील साइलो बनाए गए हैं। इनसे मिले अनुभव और परिणामों के आधार पर भविष्य में चावल के लिए भी और अधिक स्टील साइलो विकसित किए जाएंगे।
16. डिपो दर्पण पोर्टल
डिपो दर्पण पोर्टल खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग (डीएफपीडी) द्वारा शुरू किया गया एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसका उद्देश्य सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के अंतर्गत भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) और केंद्रीय भंडारण निगम (सीडब्ल्यूसी) के खाद्यान्न भंडारण डिपो की निगरानी, पारदर्शिता और परिचालन दक्षता को बेहतर बनाना है। इस पोर्टल के माध्यम से डिपो एवं वेयरहाउस प्रबंधक प्रत्येक डिपो से संबंधित भू-स्थानांकित (Geo-tagged) डेटा अपलोड करते हैं, जिसमें अवसंरचना, संचालन और वित्तीय प्रदर्शन से जुड़ी जानकारियाँ शामिल होती हैं।
पोर्टल में कम्पोजिट स्कोरिंग मैकेनिज्म अपनाया गया है, जिसके तहत डिपो का मूल्यांकन दो प्रमुख श्रेणियों में किया जाता है- अवसंरचना मानक (जैसे सुरक्षा, भंडारण की स्थिति, तकनीक का उपयोग और अनुपालन) परिचालन मानक (जैसे स्टॉक टर्नओवर, नुकसान, स्थान उपयोग, और मानव संसाधन लागत)। इन मानकों के आधार पर प्रत्येक डिपो को स्टार रेटिंग दी जाती है, जिससे उसके समग्र प्रदर्शन का त्वरित और स्पष्ट आकलन संभव हो पाता है।
डिपो दर्पण पोर्टल को IoT सेंसर, सीसीटीवी सिस्टम, रियल-टाइम डैशबोर्ड और एआई आधारित टूल्स से जोड़ा गया है। इससे तापमान, आर्द्रता, CO₂ एवं फॉस्फीन गैस स्तर, अनधिकृत प्रवेश, वाहनों की आवाजाही और बोरी गणना जैसे महत्वपूर्ण मानकों की सतत निगरानी सुनिश्चित होती है।
डेटा की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए पर्यवेक्षी अधिकारियों द्वारा 100% सत्यापन तथा रैंडम थर्ड पार्टी ऑडिट की व्यवस्था की गई है। इसके अतिरिक्त, एक मोबाइल एप्लिकेशन भी उपलब्ध है, जिसके माध्यम से वरिष्ठ अधिकारी कहीं से भी डिपो की रेटिंग, डैशबोर्ड और प्रदर्शन संकेतकों को आसानी से देख सकते हैं।
17. भंडारण 360
भंडारण 360 केंद्रीय भंडारण निगम (सीडब्ल्यूसी) में लॉन्च किया गया एक नया ईआरपी प्लेटफॉर्म है, जो मानव संसाधन, वित्त, विपणन, वेयरहाउस प्रबंधन और परियोजना निगरानी से जुड़े 41 फंक्शनल मॉड्यूल्स को एकीकृत करता है। यह प्लेटफॉर्म कस्टम्स और पोर्ट गेटवे, एफसीआई, नेफेड सहित 35 बाहरी प्रणालियों से भी जुड़ा हुआ है।इस पहल से देशभर में वेयरहाउस संचालन का मानकीकरण सुनिश्चित हुआ है, जिससे प्रक्रियाएँ पारदर्शी, सुगम और त्रुटिरहित बनती हैं तथा भंडारण व्यवस्था की कार्यकुशलता में उल्लेखनीय सुधार होता है।
18. चीनी क्षेत्र
भारतीय चीनी उद्योग एक महत्वपूर्ण कृषि-आधारित उद्योग है, जो देश के लगभग 5 करोड़ गन्ना किसानों और उनके परिवारों तथा करीब 5 लाख श्रमिकों की आजीविका से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा है। इसके अतिरिक्त परिवहन, व्यापार, मशीनरी सर्विसिंग और कृषि इनपुट्स की आपूर्ति जैसी गतिविधियों के माध्यम से भी बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन होता है।
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक और सबसे बड़ा उपभोक्ता देश है। वर्तमान में भारतीय चीनी उद्योग का वार्षिक उत्पादन ₹1 लाख करोड़ से अधिक का है।
चीनी सत्र 2024-25 के दौरान देश में 534 चीनी मिलें संचालित रहीं। गन्ने का औसत वार्षिक उत्पादन बढ़कर लगभग 4500–5000 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) हो गया है, जिससे 260–300 एलएमटी चीनी का उत्पादन होता है। इसमें से लगभग 30–40एलएमटी चीनी का उपयोग इथेनॉल उत्पादन के लिए किया जाता है।
किसान-हितैषी नीतियों के परिणामस्वरूप, सरकार ने गन्ना किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित किया है। पूर्ववर्ती चीनी सत्रों के 99.9% गन्ना बकाया का भुगतान किया जा चुका है। चीनी सत्र 2024-25 (अक्टूबर–सितंबर) में देय ₹1,02,687 करोड़ में से लगभग ₹1,00,501 करोड़ का भुगतान हो चुका है और केवल ₹2,186 करोड़ शेष हैं। इस प्रकार, किसानों को लगभग 98% गन्ना भुगतान प्राप्त हो चुका है।
19. एथनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल कार्यक्रम (ईबीपी)
एथनॉल एक कृषि-आधारित उत्पाद है, जिसका उपयोग पेट्रोल में मिश्रण (ब्लेंडिंग) के साथ-साथ कई औद्योगिक कार्यों में किया जाता है, जिनमें हैंड सैनिटाइज़र निर्माण भी शामिल है। एथनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से चीनी उद्योग के उप-उत्पाद शीरा (Molasses) तथा स्टार्च युक्त खाद्यान्नों से किया जाता है। अधिशेष गन्ना उत्पादन के वर्षों में, जब चीनी के दाम गिर जाते हैं, तब चीनी मिलों को किसानों को समय पर गन्ना मूल्य भुगतान में कठिनाई होती है। इस समस्या के स्थायी समाधान, अतिरिक्त चीनी की खपत तथा चीनी मिलों की तरलता बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार ने अधिशेष गन्ने को एथनॉल में परिवर्तित करने को प्रोत्साहन दिया है। भारत सरकार पूरे देश में एथनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम लागू कर रही है, जिसके तहत तेल विपणन कंपनियाँ (ओएमसी) एथनॉल मिश्रित पेट्रोल की बिक्री करती हैं। सरकार ने एथनॉल आपूर्ति वर्ष (ईएसवाई ) 2025-26 तक पेट्रोल में 20% एथनॉल मिश्रण का लक्ष्य निर्धारित किया है।
वर्ष 2014 तक देश में शीरा आधारित डिस्टिलरी की एथनॉल उत्पादन क्षमता 200 करोड़ लीटर से भी कम थी और तेल कंपनियों को एथनॉल की आपूर्ति मात्र 38 करोड़ लीटर थी, जिससे ईएसवाई 2013-14 में ब्लेंडिंग स्तर केवल 1.53% रहा। हालांकि, पिछले 10 वर्षों में सरकार की सकारात्मक नीतियों के कारण देश की कुल एथनॉल उत्पादन क्षमता 31.10.2025 तक बढ़कर 1953 करोड़ लीटर हो गई है, जिसमें 980 करोड़ लीटर अनाज आधारित और 973 करोड़ लीटर शीरा/डुअल-फीड आधारित डिस्टिलरी शामिल हैं। एथनॉल आपूर्ति वर्ष 2024-25 (नवंबर–अक्टूबर) के दौरान देश ने 19.24% एथनॉल ब्लेंडिंग का महत्वपूर्ण लक्ष्य हासिल किया है। ईबीपी कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन से कई बहुआयामी लाभ प्राप्त हुए हैं-
- पिछले 10 वर्षों (2014-15 से 2024-25) में एथनॉल बिक्री से चीनी मिलों को ₹1.29 लाख करोड़ से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति मजबूत हुई और किसानों को समय पर गन्ना भुगतान संभव हुआ।
- इस नीति के परिणामस्वरूप ₹42,000 करोड़ से अधिक के निवेश अवसर सृजित हुए, ग्रामीण क्षेत्रों में नई डिस्टिलरी स्थापित हुईं और प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बढ़े।
20. चीनी क्षेत्र में डिजिटलीकरण
चीनी और एथनॉल उद्योग में ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस, पारदर्शिता और एकीकृत डेटा व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम (एनएसडब्ल्यूएस) पर एक समर्पित मॉड्यूल विकसित किया गया है। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग (डीएफपीडी) ने इन्वेस्ट इंडिया के सहयोग से चीनी मिलों से जुड़ी विभिन्न अनुपालनों को एनएसडब्ल्यूएस पोर्टल पर स्वचालित किया है। वर्तमान में लगभग 535 चीनी मिलें अपनी मासिक जानकारी डिजिटल रूप से प्रस्तुत कर रही हैं। इसके अलावा, रीयल-टाइम डेटा उपलब्धता, सटीकता बढ़ाने और मैनुअल हस्तक्षेप को कम करने के लिए एपीआई आधारित डिजिटल डेटा शेयरिंग प्रक्रिया शुरू की गई है। इसी क्रम में, मासिक चीनी बिक्री कोटा जारी करने हेतु एक एमआईएस डैशबोर्ड – ‘चिनी दर्पण पोर्टल’ भी विकसित किया गया है, जिससे चीनी बिक्री से संबंधित डेटा में पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित होगी।
अनुलग्नक I
खाद्य सहायता आयोग (डीसीपी) राज्यों को जारी की गई खाद्य सब्सिडी का राज्यवार विवरण इस प्रकार है:
(करोड़ रुपये में)
|
वर्ष
|
2024-25
|
2025-26 (दिनांक 31.10.2025 तक)
|
|
असम#
|
|
9.36
|
|
बिहार
|
9725.40
|
7393.98
|
|
पंजाब
|
2572.72
|
1816.19
|
|
मध्य प्रदेश
|
10189.04
|
7079.00
|
|
आंध्र प्रदेश
|
8398.98
|
4702.22
|
|
तेलंगाना
|
4178.27
|
2822.66
|
|
उत्तर प्रदेश
|
9.09
|
119.92
|
|
पश्चिम बंगाल
|
8899.88
|
9352.14
|
|
छत्तीसगढ
|
5695.55
|
1958.15
|
|
उत्तराखंड
|
1159.26
|
80.75
|
|
तमिलनाडु
|
6033.90
|
5620.42
|
|
ओडिशा
|
9948.83
|
6140.07
|
|
कर्नाटक
|
1281.18
|
935.79
|
|
गुजरात
|
138.87
|
|
|
केरल
|
1062.36
|
471.23
|
|
महाराष्ट्र
|
327.74
|
1458.49
|
|
झारखंड @
|
502.99
|
233.76
|
|
त्रिपुरा
|
64.26
|
|
|
डीबीटी*
|
221.95
|
197.54
|
|
कुल (डीसीपी, डीबीटी)
|
70410.60
|
50391.67
|
नोट:-
झारखंड केएमएस 2016-17 में डीसीपी राज्य था (केवल 1 ज़िले के लिए), 2017-18में (केवल 5 ज़िलों के लिए) और 2018-19 में (केवल 6 ज़िलों के लिए)। इसके बाद KMS 2019-20में राज्य ने गैर-डीसीपी प्रणाली अपना ली। वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान फिर से डीसीपी अपनाई गई।
डीबीसी योजना के तहत वर्ष 2015-16 से चंडीगढ़, पुदुचेरी और दादरा एवं नगर हवेली के केंद्र शासित प्रदेशों को सब्सिडी जारी की जा रही है।
#असम 2 ज़िलों के लिए डीसीपी राज्य है
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पीके/ केसी/ केजे
(रिलीज़ आईडी: 2210499)
आगंतुक पटल : 46
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