कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय
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राष्‍ट्रीय अप्रेंटिसशिप संवर्धन योजना के अंतर्गत एमएसएमई

प्रविष्टि तिथि: 08 DEC 2025 3:50PM by PIB Delhi

भारत सरकार ने अप्रेंटिसशिप के प्रशिक्षण को बढ़ावा देने और प्रशिक्षुओं की नियुक्तियों में बढ़ोत्‍तरी के उद्देश्य से अगस्त, 2016 में 'राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप संवर्धन योजना' (एनएपीएस) शुरू की थी। वर्ष 2022-23 से, यह योजना एनएपीएस-2 के रूप में जारी है। यह योजना उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में लागू की गई है। योजना प्रशिक्षु अधिनियम, 1961 के अंतर्गत नियोजित प्रशिक्षुओं को आंशिक छात्रवृत्ति सहायता प्रदान करके, अप्रेंटिसशिप इकोसिस्‍टम के क्षमता निर्माण का कार्य करके और हितधारकों को सहायता प्रदान करके देश में शिक्षुता प्रशिक्षण को बढ़ावा देती है। प्रशिक्षण अवधि के दौरान प्रति प्रशिक्षु, भुगतान किए गए, छात्रवृत्ति के 25 प्रतिशत तक सीमित आंशिक वजीफा सहायता, अधिकतम 1,500 रुपये प्रति माह तक, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से प्रशिक्षु के बैंक खाते में भुगतान की जाती है। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण जुलाई 2023 से प्रभावी रूप से शुरू किया गया था।

यह योजना सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) में प्रशिक्षुओं के नामांकन को प्रोत्साहित करती है। पिछले पांच वर्षों और चालू वर्ष के दौरान देश में प्रशिक्षुओं को नियुक्त करने वाले एमएसएमई की संख्या 32,364 है, जिनमें से 4,102 उत्तर प्रदेश में हैं। उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में प्रशिक्षुओं को नियुक्त करने वाले एमएसएमई का राज्यवार और वर्षवार आंकड़ा अनुलग्नक में दिया गया है। इस योजना के अंतर्गत, सभी श्रेणियों के प्रतिष्ठानों के प्रशिक्षुओं को 1,500 रुपये प्रति माह का सरकारी अंशदान प्रदान किया जाता है।

अप्रेंटिसशिप के दौरान प्रदान किया जाने वाला ऑन-द-जॉब प्रशिक्षण (ओजेटी) प्रशिक्षुओं को उद्योग के लिए तैयार होने में मदद करता है, जिससे नियोक्ताओं को संगठनात्मक आवश्यकताओं के अनुसार प्रशिक्षित उम्मीदवारों का एक समूह चुनने का अवसर मिलता है। इसके अलावा, वर्ष 2016-2020 की अवधि के लिए इस योजना के प्रभाव मूल्यांकन अध्ययन से पता चलता है कि युवा इसे रोजगार की संभावनाओं को बढ़ाने के लिए एक अत्यंत उपयोगी कार्यक्रम मानते हैं। 91 प्रतिशत ने महसूस किया कि इस कार्यक्रम ने रोजगार के लिए उनकी आत्म-योग्यता में सुधार किया है। उत्तीर्ण होने वाले युवाओं में रोजगार दर पहले तीन महीनों में 41 प्रतिशत, छह महीनों के भीतर 64 प्रतिशत और पूरा होने के बाद 12 महीनों के अंदर 74 प्रतिशत है। 89 प्रतिशत ने महसूस किया कि अप्रेंटिसशिप प्रशिक्षण स्व-रोजगार के लिए उपयुक्त है।

प्रथम वर्ष के छात्रवृत्ति को ध्यान में रखते हुए, चालू वर्ष के दौरान उत्तर प्रदेश में प्रशिक्षु के लिए औसत छात्रवृत्ति दर 11,393/- रुपये प्रति माह है।

अप्रेंटिसशिप पोर्टल का एक उन्नत संस्करण पेश किया गया है जिससे यह अधिक आसान और उपयोगकर्ता-अनुकूल बन गया है। इस नए संस्करण में बेहतर यूज़र इंटरफ़ेस/यूज़र एक्सपीरियंस (यूआई/यूएक्‍स) सुविधाएं, प्रतिष्ठानों (एमएसएमई सहित) के लिए एकीकृत डिजिटल प्रक्रिया शामिल है, जिससे पंजीकरण, पाठ्यक्रम चयन, उम्मीदवारों की नियुक्ति, अनुबंध जारी करना, प्रशिक्षण निगरानी, छात्रवृत्ति प्रबंधन और मूल्यांकन अपलोड जैसी गतिविधियों का बेहतर प्रबंधन संभव हो सकेगा। प्रतिष्ठान जिला-स्तरीय सहायक अप्रेंटिसशिप सलाहकारों और सूचीबद्ध तृतीय पक्ष एग्रीगेटर्स (टीपीए) से भी सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

अनुलग्नक

उत्तर प्रदेश सहित पूरे भारत में प्रशिक्षुओं को नियुक्त करने वाले एमएसएमई का राज्यवार और वर्षवार आंकड़ा

क्रम संख्‍या

राज्य/केंद्र शासित प्रदेश

वित्त वर्ष 20-21

वित्त वर्ष 21-22

वित्त वर्ष 22-23

वित्त वर्ष 23-24

वित्त वर्ष 24-25

वित्त वर्ष 25-26

कुल योग

  1.  

अंडमान व नोकोबार द्वीप समूह

 

1

2

3

4

6

8

  1.  

आंध्र प्रदेश

103

259

341

282

300

260

772

  1.  

अरुणाचल प्रदेश

 

1

1

5

4

5

9

  1.  

असम

23

165

80

95

96

88

383

  1.  

बिहार

38

162

106

101

133

169

453

  1.  

चंडीगढ़

14

21

27

37

48

43

99

  1.  

छत्तीसगढ

21

24

50

67

78

69

170

  1.  

दिल्ली

64

98

162

235

279

284

518

  1.  

गोवा

25

40

71

127

122

112

211

  1.  

गुजरात

2,978

3,270

3,294

3,524

3,578

2,891

7,936

  1.  

हरियाणा

970

1,263

1,765

1,640

1,579

1,199

3,349

  1.  

हिमाचल प्रदेश

49

119

200

213

219

189

412

  1.  

जम्मू और कश्मीर

9

113

181

124

125

126

438

  1.  

झारखंड

55

73

90

128

132

116

266

  1.  

कर्नाटक

161

406

529

631

848

859

1,811

  1.  

केरल

230

307

412

455

432

328

982

  1.  

लद्दाख

-

-

1

5

3

1

6

  1.  

लक्षद्वीप

-

-

-

-

-

1

1

  1.  

मध्य प्रदेश

130

213

275

311

340

347

758

  1.  

महाराष्ट्र

1,887

2,167

2,570

2,898

3,147

2,765

7,091

  1.  

मणिपुर

2

2

3

1

1

3

10

  1.  

मेघालय

1

4

4

9

7

8

17

  1.  

मिजोरम

 

1

2

1

8

8

12

  1.  

नागालैंड

1

1

3

 

3

5

10

  1.  

ओडिशा

52

89

179

149

154

130

407

  1.  

पुदुचेरी

8

22

26

38

41

38

79

  1.  

पंजाब

73

129

221

247

235

249

577

  1.  

राजस्थान

89

118

198

293

345

372

643

  1.  

सिक्किम

1

12

8

14

28

20

44

  1.  

तमिलनाडु

215

401

701

709

829

759

1,765

  1.  

तेलंगाना

122

327

326

311

347

358

882

  1.  

दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव

22

25

27

48

56

51

83

  1.  

त्रिपुरा

10

13

9

11

14

13

48

  1.  

उत्तर प्रदेश

654

1,239

2,040

1,263

1,766

1,399

4,102

  1.  

उत्तराखंड

84

134

200

263

334

332

520

  1.  

पश्चिम बंगाल

177

232

209

271

404

345

999

  1.  

कुल योग

7,943

10,938

13,399

13,172

14,342

12,163

32,364

स्रोत: https://www.apprenticeshipindia.gov.in/

कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री जयंत चौधरी ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

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पीके/केसी/एचएन/एमपी


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