नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय
भारत ने वित्त वर्ष 2024-25 में अक्षय ऊर्जा क्षमता वृद्धि में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की
वित्त वर्ष 2024-25 में 25 गीगावाट अक्षय ऊर्जा जोड़ी गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 35 प्रतिशत अधिक है
Posted On:
01 APR 2025 8:20PM by PIB Delhi
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कि है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में अभूतपूर्व 25 गीगावाट की वृद्धि की है, जो पिछले वर्ष की 18.57 गीगावाट की तुलना में लगभग 35 प्रतिशत अधिक है।
सौर क्षेत्र अक्षय वृद्धि को चलाता है
भारत के सौर ऊर्जा क्षेत्र ने अक्षय ऊर्जा विकास का नेतृत्व किया, जिसमें वित्तीय वर्ष 24 में 15 गीगावाट से बढ़कर वित्तीय वर्ष 25 में लगभग 21 गीगावाट हो गया, जो उल्लेखनीय 38 प्रतिशत की वृद्धि है। देश ने इस वर्ष 100 गीगावाट स्थापित सौर क्षमता को पार करने की महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल कि।
घरेलू सौर विनिर्माण ने नई ऊंचाइयों को हासिल किया
आत्मनिर्भर भारत की ओर एक मजबूत कदम में भारत की सौर मॉड्यूल निर्माण क्षमता मार्च 2024 में 38 गीगावाट से लगभग दोगुनी होकर मार्च 2025 में 74 गीगावाट हो गई, जबकि सौर पीवी सेल निर्माण क्षमता 9 गीगावाट से तीन गुना बढ़कर 25 गीगावाट हो गई। इसके अतिरिक्त देश की पहली पिंड-वेफर विनिर्माण सुविधा (2 गीगावाट) ने वित्तीय वर्ष 25 में उत्पादन शुरू किया। उच्च दक्षता वाले सौर पीवी मॉड्यूल के लिये उत्पादन लिंक्ड प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत 41,000 करोड़ रुपए का निवेश किया गया है, जिससे लगभग 11,650 लोगों के लिये प्रत्यक्ष रोज़गार सृजित हुए है।
पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का व्यापक असर
पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना ने प्रभावशाली प्रगति देखी है। इससे 31 मार्च 2025 तक 11.01 लाख से अधिक परिवारों को लाभ हुआ। इस योजना के अंतर्गत 6.98 लाख लाभार्थियों को केंद्रीय वित्तीय सहायता के रूप में 5,437.20 करोड़ रुपये वितरित किए गए हैं। यह रूफटॉप सोलर को अपनाने को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ावा देते हैं।
ग्रीन हाइड्रोजन सेक्टर ने गति प्राप्त की
भारत के हरित हाइड्रोजन क्षेत्र में भी महत्त्वपूर्ण विकास देखा गया। इलेक्ट्रोलाइज़र निर्माण के प्रति वर्ष 1,500 मेगावाट के लिए ₹2,220 करोड़ के प्रोत्साहन दिए गए, जबकि ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन के 4,50,000 टन-प्रति वर्ष (टीपीए) के लिए अतिरिक्त ₹2,239 करोड़ आवंटित किए गए। राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के अंतर्गत इस्पात क्षेत्र को डीकार्बोनाइज करने के लिए सात पायलट परियोजनाओं को 454 करोड़ रुपये के साथ वित्त पोषित किया गया था। इसके अतिरिक्त परिवहन क्षेत्र में पांच पायलट परियोजनाएं वित्त पोषण में ₹ 208 करोड़ के साथ 37 हाइड्रोजन-ईंधन वाले वाहन और नौ हाइड्रोजन ईंधन भरने वाले स्टेशन पेश करेंगे।
पीएम-कुसुम योजना के अंतर्गत रिकॉर्ड प्रगति
पीएम कुसुम योजना में रिकॉर्ड प्रगति देखी गई। घटक बी में वित्तीय वर्ष 25 में 4.4 लाख पंप स्थापित किए गए थे, जो पिछले वर्ष की तुलना में 4.2 गुना अधिक है।
कंपोनेंट सी में, 2.6 लाख पंपों को सोलराइज्ड किया गया, जो वित्तीय वर्ष 24 की तुलना में 25 गुना अधिक है. इस योजना के अंतर्गत स्थापित/सौर ऊर्जा पंपों की कुल संख्या अब 10 लाख से अधिक हो गई है। पीएम-कुसुम के लिए वित्तीय व्यय पिछले वर्ष की तुलना में 268 प्रतिशत बढ़कर 2,680 करोड़ रुपये हो गया।
भारतीय अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी (इरेडा) स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं के वित्तपोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। वित्तीय वर्ष 25 में इरेडा ने ऋण मंज़ूरियों में 27 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जो ₹47,453 करोड़ तक पहुंच गया, जबकि ऋण भुगतान 20 प्रतिशत बढ़कर ₹30,168 करोड़ हो गया।
केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रह्लाद जोशी ने कहा, "भारत पहले ही दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता धारक बन चुका है या जल्द ही बन जाएगा। यह उपलब्धि सतत और आत्मनिर्भर ऊर्जा भविष्य के लिए प्रधानमंत्री मोदी के दृष्टिकोण का प्रमाण है।
ये उल्लेखनीय उपलब्धियां अपने स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण और वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में इसके नेतृत्व के लिए भारत की प्रतिबद्धता की पुष्टि करती हैं।
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