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राष्ट्रीय सीमा शुल्क, अप्रत्यक्ष कर और नारकोटिक्स अकादमी (एनएसीआईएन) और भारतीय समुद्री विश्वविद्यालय (आईएमयू) ने रणनीतिक जानकारी साझेदारी के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए


यह समझौता ज्ञापन समुद्री प्रवर्तन और परिचालन क्षमताओं में सीबीआईसी अधिकारियों के प्रशिक्षण के लिए एक सहयोगात्मक फ्रेमवर्क स्थापित करता है, जिसमें आईएमयू की शैक्षणिक और तकनीकी विशेषज्ञता और एनएसीआईएन के प्रवर्तन अनुभव का लाभ अर्जित किया जाता है

Posted On: 27 MAR 2025 9:11PM by PIB Delhi

आज चेन्नई में राष्ट्रीय सीमा शुल्क, अप्रत्यक्ष कर और नारकोटिक्स अकादमी (एनएसीआईएन) और भारतीय समुद्री विश्वविद्यालय (आईएमयू) के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस सहयोग का उद्देश्य सीबीआईसी अधिकारियों की समुद्री प्रवर्तन और परिचालन क्षमताओं को बेहतर कर समुद्री सीमा शुल्क प्रशिक्षण केंद्र को सुदृढ़ करना है, साथ ही एनएसीआईएन और आईएमयू के बीच आपस में सीखने और संस्थागत तालमेल के लिए एक मंच तैयार करना है।

 

 

समझौता ज्ञापन पर एनएसीआईएन के प्रधान महानिदेशक श्री गाइगोंगदीन पनमेई और आईएमयू के सम कुलपति डॉ. राजू बालाजी (कुलपति का प्रतिनिधित्व करते हुए) ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड की सदस्य श्रीमती अरुणा नारायण गुप्ता और अतिरिक्त महानिदेशक डॉ. एमजी तमीज वलवन और डॉ. एझिलमथी के., आईएमयू के रजिस्ट्रार श्री के. सरवनन, आईएमयू चेन्नई परिसर के निदेशक डॉ. पी.जे. रंगाचारी तथा दोनों संस्थानों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

 

 

उपस्थित गणमान्यों और अधिकारियों को संबोधित करते हुए श्रीमती गुप्ता ने कहा कि यह सहयोग समुद्री निवारक कार्य में लगे सीबीआईसी अधिकारियों की क्षमताओं को बेहतर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा में सामूहिक प्रयासों को मजबूती मिलेगी।

एनएसीआईएन और आईएमयू के बीच यह समझौता ज्ञापन समुद्री संचालन में शामिल सीबीआईसी अधिकारियों के प्रशिक्षण के लिए एक सहयोगी फ्रेमवर्क तैयार करता है। यह समुद्री प्रवर्तन और परिचालन प्रथाओं में मौजूदा जानकारी के अंतर को पाटने के उद्देश्य से एक व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम के विकास की रूपरेखा तैयार करता है। पाठ्यक्रम को घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय दोनों दृष्टिकोणों को शामिल करके समृद्ध किया जाएगा। सहयोग, आईएमयू की शैक्षणिक और तकनीकी विशेषज्ञता और एनएसीआईएन के प्रवर्तन अनुभव का लाभ उठाते हुए, दोनों संस्थानों को परस्पर लाभ पहुंचाने का प्रयास करता है।

सीबीआईसी के लिए, यह सहयोग अधिकारियों को वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के साथ संरेखित उन्नत समुद्री प्रौद्योगिकियों में विशेषीकृत, व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करके अपनी समुद्री प्रवर्तन क्षमताओं को महत्वपूर्ण रूप से मजबूत करता है। आईएमयू के लिए, यह साझेदारी समुद्री प्रवर्तन के क्षेत्र में अपनी अकादमिक पहुंच का विस्तार करने, अपने प्रशिक्षण मॉड्यूल के व्यावहारिक अनुप्रयोग को बेहतर करने और ड्रोन निगरानी व समुद्री क्षेत्र में हाल की प्रगति जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों पर सहयोगी अनुसंधान में संलग्न होने का एक मूल्यवान अवसर प्रदान करती है।

इसके अतिरिक्त, यह समझौता ज्ञापन अन्य विभागों और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिभागियों के कर्मियों को शामिल करने का मार्ग प्रशस्त करता है, जो इस पहल की वैश्विक प्रासंगिकता और रणनीतिक दायरे को रेखांकित करता है।

आईएमयू के साथ सहयोग अकादमिक उत्कृष्टता, अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को अपने प्रशिक्षण ढांचे में एकीकृत करके एनएसीआईएन की क्षमताओं को और बढ़ाएगा। यह साझेदारी न केवल एक मजबूत और भविष्य के लिए तैयार समुद्री प्रवर्तन प्रशिक्षण इकोसिस्टम के विकास को सुनिश्चित करती है, बल्कि अपने समुद्री हितों की रक्षा के लिए संस्थागत तालमेल को प्रोत्साहन देने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को भी सुदृढ़ करती है। इस सहयोग से सशक्त समुद्री सीमा शुल्क प्रशिक्षण केंद्र, इस क्षेत्र और उससे आगे समुद्री प्रवर्तन प्रशिक्षण के लिए उत्कृष्टता के केंद्र के रूप में उभरने के लिए तैयार है।

समुद्री सीमा शुल्क प्रशिक्षण केंद्र के बारे में

राष्ट्रीय सीमा शुल्क, अप्रत्यक्ष कर और नारकोटिक्स अकादमी (एनएसीआईएन) अप्रत्यक्ष कराधान के क्षेत्र में क्षमता निर्माण के लिए भारत सरकार की सर्वोच्च संस्था है। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्यरत, एनएसीआईएन भारत के अप्रत्यक्ष कर प्रशासन की मानव संसाधन क्षमताओं को प्रशिक्षित करने और विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। 16 जनवरी 2024 को माननीय प्रधानमंत्री की ओर से उद्घाटन किए गए आंध्र प्रदेश के पलासमुद्रम में नया एनएसीआईएन परिसर प्रशिक्षण में उत्कृष्टता के लिए सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। अपनी कई अत्याधुनिक सुविधाओं के बीच, परिसर में समुद्री सीमा शुल्क प्रशिक्षण केंद्र है, जिसे समुद्री प्रवर्तन में लगे सीमा शुल्क अधिकारियों के कौशल सेट और परिचालन तत्परता को बढ़ाने के लिए एनएसीआईएन के मिशन के हिस्से के तौर पर तैयार किया गया है।

यह अत्याधुनिक केंद्र पूर्ण मिशन शिप मैन्युवरिंग सिमुलेटर और इलेक्ट्रॉनिक चार्ट डिस्प्ले एंड इंफॉर्मेशन सिस्टम (ईसीडीआईएस) सिमुलेटर से सुसज्जित है, जो जहाज नेविगेशन, टकराने से बचाव और आपातकालीन प्रतिक्रिया में गहन, व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करता है। यह अग्निशमन अभ्यास, नाविक प्रशिक्षण और वैश्विक समुद्री संकट और सुरक्षा प्रणाली (जीएमडीएसएस) के संचालन के लिए व्यावहारिक सुविधाएं भी प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त, अधिकारियों को समुद्री खोज और बचाव कार्यों, बन्दूक दक्षता और जीवन रक्षक तकनीकों में प्रशिक्षित किया जाता है - जो उन्हें वास्तविक दुनिया के समुद्री परिदृश्यों की एक विस्तृत श्रृंखला के लिए तैयार करता है। यथार्थवादी परिचालन स्थितियों का अनुकरण करने के लिए तैयार किया गया, केंद्र में प्रशिक्षण वातावरण सुनिश्चित करता है कि अधिकारी समुद्री सुरक्षा खतरों, तस्करी अवरोधन और आपातकालीन प्रतिक्रिया जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए अच्छी तरह से तैयार हों। इस सुविधा को अन्य सरकारी समुद्री प्रवर्तन एजेंसियों के कर्मियों को प्रशिक्षित करने, अंतर-एजेंसी सहयोग को प्रोत्साहन देने और राष्ट्रीय समुद्री प्रवर्तन क्षमताओं को बढ़ाने के लिए एक साझा संसाधन के रूप में भी देखा जाता है।

आईएमयू के बारे में

बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय समुद्री विश्वविद्यालय (आईएमयू) समुद्री शिक्षा, प्रशिक्षण और अनुसंधान के लिए एक प्रमुख संस्थान है। यह समुद्री-संबंधित क्षेत्रों में विश्व स्तरीय प्रशिक्षण और शिक्षा प्रदान करता है और भारत के समुद्री क्षेत्र के विकास में अपने महत्वपूर्ण योगदान के लिए प्रसिद्ध है। देश भर में परिसरों के साथ, आईएमयू कार्यक्रमों की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदान करता है और अकादमिक उत्कृष्टता और विशेष प्रशिक्षण के माध्यम से समुद्री क्षमताओं को आगे बढ़ाने के लिए उद्योग और सरकारी निकायों के साथ सक्रिय रूप से सहयोग करता है।

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