अंतरिक्ष विभाग
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संसद प्रश्न: पुन: उपयोग योग्य प्रक्षेपण यान तकनीक का विकास

Posted On: 27 MAR 2025 6:59PM by PIB Delhi

भारत की पुनः उपयोग योग्य प्रक्षेपण यान तकनीक के विकास की दिशा में, इसरो एक पंखयुक्त ऑर्बिटल री-एंट्री वाहन (ओआरवी) विकसित कर रहा है। इसे एक आरोही वाहन की सहायता से कक्षा में प्रक्षेपित किया जाएगा और बाद में यह स्वायत्त रूप से पृथ्वी के वायुमंडल में पुनः प्रवेश करके रनवे पर लैंडिंग करेगा। पुनः उपयोग योग्य प्रक्षेपण यान - प्रौद्योगिकी प्रदर्शक (आरएलवी-टीडी) पर तीन स्वायत्त रनवे लैंडिंग प्रयोग सफलतापूर्वक पूरे किए जा चुके हैं। इन परीक्षणों के माध्यम से ऑनबोर्ड स्वायत्त नेविगेशन, मार्गदर्शन और नियंत्रण प्रणाली की मजबूती को प्रमाणित किया गया है।

इसरो वर्टिकल टेक-ऑफ और वर्टिकल लैंडिंग (वीटीवीएल) मोड में बूस्टर स्टेज रिकवरी के प्रदर्शन के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण तकनीकों का डिजाइन और विकास भी कर रहा है, जो कई बार खर्च हो चुके बूस्टर स्टेज की रिकवरी और पुनः उपयोग में सक्षम बनाएगा।

भारत सरकार (जीओआई) ने आंशिक रूप से पुन: उपयोग योग्य अगली पीढ़ी के प्रक्षेपण यान (एनजीएलवी) के विकास को मंजूरी दे दी है। एनजीएलवी वाहन को एक तीन-चरणीय प्रक्षेपण यान के रूप में कॉन्फ़िगर किया गया है जिसमें पहला चरण पुनर्प्राप्त करने योग्य और पुन: उपयोग योग्य होगा।

भारत सरकार ने जून, 2020 में अंतरिक्ष क्षेत्र में सुधारों की घोषणा की है, जिससे निजी खिलाड़ियों को एंड-टू-एंड सेवाएं प्रदान करने में सक्षम बनाया जा सके और भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (इन-स्पेस), निजी क्षेत्र के लिए अंतरिक्ष गतिविधियों को सक्षम और विनियमित करेगा। इसके अलावा, विभाग 2040 तक चंद्रमा पर भारतीय लैंडिंग को प्राप्त करने की दिशा में मिशन को अंतिम रूप दे रहा है। यह परिकल्पना की गई है कि चंद्र खनन अन्वेषण सहित विभिन्न गतिविधियों में निजी क्षेत्र और शैक्षणिक भागीदारी के लिए पर्याप्त अवसर मौजूद होंगे।

एआई तेजी से एक महत्वपूर्ण उपकरण बनता जा रहा है जिसका उपयोग उपग्रहों और मिशन संचालन में किया जा सकता है। यह ध्यान देने योग्य है कि विभाग के भीतर एआई आधारित पहलों पर जोर दिया जा रहा है। इसका एक हालिया उदाहरण कैप्चर, रिजिडाइजेशन और रिट्रैक्शन के लिए स्वायत्त सेंसर-आधारित एक्चुएटर प्रणाली है जो अनुक्रम-आधारित डॉकिंग को सक्षम बनाता है। इस प्रयोजन के लिए, पैटर्न मिलान का उपयोग करते हुए दृष्टिकोण प्रोफाइल और सापेक्ष स्थिति आकलन को अपनाया जाता है। स्वायत्त मिशन प्रबंधन, उच्च मात्रा में ऑन-बोर्ड/ग्राउंड डेटा प्रसंस्करण और विश्लेषण तथा उन्नत अंतरिक्ष अन्वेषण को प्राप्त करने की दिशा में केंद्र में अन्य अनुप्रयोग कार्यान्वयन के उन्नत चरणों में हैं।

बाह्य अंतरिक्ष के जिम्मेदार उपयोग के लिए आधारभूत सिद्धांत बाह्य अंतरिक्ष संधियों में निहित हैं। अंतर-एजेंसी अंतरिक्ष मलबा समन्वय समिति (आईडीएसी) और बाह्य अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग पर संयुक्त राष्ट्र समिति (यूएन-सीओपीयूओएस) द्वारा अंतरिक्ष मलबे के शमन के लिए कई दिशानिर्देशों की सिफारिश की गई है। अंतरिक्ष विभाग, बाह्य अंतरिक्ष गतिविधियों की सुरक्षा और स्थिरता से संबंधित विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों के एक सक्रिय सदस्य के रूप में अंतरिक्ष के सतत उपयोग के लिए प्रासंगिक दिशा-निर्देशों और सिफारिशों को आकार देने में महत्वपूर्ण योगदान देता है। भारतीय अंतरिक्ष नीति में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत अंतरिक्ष मलबे के शमन की आवश्यकताओं का पालन करना भी अनिवार्य किया गया है तथा अंतरिक्ष स्थिति जागरूकता क्षमता निर्माण पर जोर दिया गया है।

यह जानकारी आज राज्य सभा में एक लिखित उत्तर में केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान, प्रधानमंत्री कार्यालय और अंतरिक्ष विभाग राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने दी।

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