गृह मंत्रालय
स्मार्ट पुलिसिंग पहल
Posted On:
26 MAR 2025 1:41PM by PIB Delhi
भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार 'पुलिस' और 'लोक व्यवस्था' राज्य के विषय हैं और राज्यों द्वारा अपने पुलिस बलों को सुसज्जित और आधुनिक बनाने के प्रयासों को "पुलिस के आधुनिकीकरण के लिए राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को सहायता" (एएसयूएमपी) [राज्य पुलिस बलों के आधुनिकीकरण की पूर्व योजना राज्य पुलिस बलों के आधुनिकीकरण की योजना (एमपीएफ)] के अंतर्गत सहायता दी जा रही है। इस योजना का उद्देश्य प्रासंगिक बुनियादी ढांचे के विकास के माध्यम से राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस बलों को पर्याप्त रूप से सुसज्जित करने के अतिरिक्त पुलिस बुनियादी ढांचे जैसे पुलिस स्टेशनों के निर्माण के साथ-साथ नवीनतम तकनीक, हथियार, संचार उपकरण आदि से लैस करके अत्याधुनिक स्तर पर पुलिस बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है। एएसयूएमपी योजना के अंतर्गत, राज्य/केंद्र शासित प्रदेश प्रत्येक वर्ष आधुनिकीकरण के लिए एक घटक (यानी 'साइबर पुलिसिंग' के लिए उपकरण, संचार उपकरण, उन्नत हथियार आदि) की थीम रख सकते हैं
एएसयूएमपी दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि राज्य/संघ राज्य क्षेत्र की कार्ययोजना का 10 प्रतिशत अनिवार्य रूप से पुलिस कर्मियों के क्षमता निर्माण और पुलिस-पब्लिक इंटरफेस में सुधार के लिए नियोजित किया जाएगा। इसमें योग, ध्यान, तनाव प्रबंधन में मनोवैज्ञानिक परामर्श, सामुदायिक सेवा पर प्रशिक्षण देना शामिल हो सकता है।
साइबर अपराध जांच, फोरेंसिक, अभियोजन आदि के महत्वपूर्ण पहलुओं पर ऑनलाइन पाठ्यक्रम के माध्यम से पुलिस अधिकारियों/न्यायिक अधिकारियों की क्षमता निर्माण के लिए 'साइट्रेन' पोर्टल नामक विशाल मुक्त ऑनलाइन पाठ्यक्रम (एमओओसी) प्लेटफॉर्म विकसित किया गया है। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 1,02,321 से अधिक पुलिस अधिकारी पंजीकृत हैं और पोर्टल के माध्यम से 79,909 से अधिक प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं।
महिलाओं और बच्चों के प्रति साइबर अपराध रोकथाम (सीसीपीडब्ल्यूसी) योजना के अंतर्गत राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को उनकी क्षमता निर्माण, साइबर फोरेंसिक-सह-प्रशिक्षण प्रयोगशालाओं की स्थापना, जूनियर साइबर सलाहकारों की भर्ती और कानून प्रवर्तन एजेंसियों (एलईए) के कर्मियों, सरकारी अभियोजकों और न्यायिक अधिकारियों के प्रशिक्षण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की गई है । 33 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में साइबर फोरेंसिक-सह-प्रशिक्षण प्रयोगशालाएं आरंभ की गई हैं और 24,600 से अधिक एलईए कर्मियों, न्यायिक अधिकारियों और अभियोजकों को साइबर अपराध जागरूकता, जांच, फोरेंसिक आदि विषयों पर प्रशिक्षण प्रदान किया गया है।
उभरते साइबर खतरों से निपटने के लिए, कानून प्रवर्तन एजेंसियों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के लिए हर शुक्रवार को साप्ताहिक ऑनलाइन सहकर्मी-शिक्षण सत्र आयोजित किए जाते हैं, जिसमें साइबर अपराध के रुझान, जांच तकनीकों और जवाबी उपायों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। अब तक 98 सहकर्मी-शिक्षण सत्र आयोजित किए जा चुके हैं।
महिलाओं और बच्चों के प्रति साइबर अपराध सहित साइबर अपराध के बारे में आम जनता द्वारा रिपोर्ट वर्ष 2019 में लॉन्च किए गए राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर दर्ज की जाती है और एफआईआर में परिवर्तित होने के बाद, राज्य सरकारों द्वारा कानून के प्रावधान के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाती है। नागरिकों को ऑनलाइन साइबर शिकायत दर्ज करने में सहायता प्रदान करने के लिए 1930 कॉल सेंटरों को मजबूत करने के लिए राज्य सरकारों को वित्तीय सहायता दी गई है।
राज्य सरकारों के साथ तालमेल बढ़ाने के लिए साइबर अपराध की घटनाओं के आधार पर हॉटस्पॉट के लिए 7 संयुक्त साइबर अपराध समन्वय दल (जेसीसीटी) गठित किए गए हैं। समन्वय पोर्टल साइबर अपराध डेटा और विश्लेषण साझा करने के लिए एक संयुक्त साइबर अपराध जांच सुविधा मंच है। यह क्षेत्राधिकार अधिकारियों को दृश्यता प्रदान करने के लिए अपराधियों और अपराध के बुनियादी ढांचे का मानचित्र स्थान भी प्रदान करता है।
दिल्ली में स्थापित राष्ट्रीय साइबर फोरेंसिक प्रयोगशाला (जांच) राज्यों/संघ शासित प्रदेशों के जांच अधिकारियों को प्रारंभिक चरण की साइबर फोरेंसिक सहायता प्रदान करती है। राज्यों/संघ शासित प्रदेशों आदि से साइबर कमांडो की भर्ती के लिए साइबर कमांडो विंग बनाया गया है। 3,785 से अधिक कानूनी प्रवर्तन एजेंसी (एलईए) के कर्मियों, न्यायिक अधिकारियों, सरकारी अभियोजकों और फोरेंसिक वैज्ञानिकों को आवासीय प्रशिक्षण दिया गया है।
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2014 में पुलिसिंग के विशेष संदर्भ में एक संक्षिप्त नाम के रूप में स्मार्ट शब्द को डीजीएसपी/आईजीएसपी सम्मेलन के दौरान गढ़ा था। उभरती चुनौतियों का सामना करने और प्रभावी और समय पर प्रतिक्रिया देने के लिए, देश में पुलिस ने स्मार्ट पुलिसिंग की अवधारणा को अपनाया है। इसमें साइबर अपराध की रोकथाम, नशा मुक्ति, नवीनतम उपकरणों के साथ क्षमता निर्माण, वामपंथी उग्रवादियों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई और समाज के कमजोर वर्गों की सुरक्षा जैसी पुलिसिंग गतिविधियों की पूरी श्रृंखला शामिल है।
पिछले वर्ष के दौरान, पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (बीपीआरएंडडी) की बाह्य इकाई ने साइबर अपराध, डार्क वेब और क्रिप्टो करेंसी, मोबाइल फोरेंसिक, डिजिटल साक्ष्य का संग्रह और संरक्षण, बैंक धोखाधड़ी, प्लास्टिक कार्ड और वर्तमान युग में फिनटेक अपराध, ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी आदि जैसे प्रासंगिक विषयों पर 323 पाठ्यक्रम/वेबिनार/सम्मेलन/कार्यशालाएं आयोजित कीं, जिनमें 26,591 अधिकारियों को प्रशिक्षित किया गया।
गृह मंत्रालय ने 13-14 जुलाई 2023 को गुरुग्राम में विदेश मंत्रालय (एमईए), इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई), राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (एनएससीएस), केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और दूरसंचार विभाग (डीओटी) के सहयोग से नॉन-फंजिबल टोकन (एनएफटी), एआई और मेटावर्स के युग में अपराध और सुरक्षा पर जी20 सम्मेलन आयोजन किया था। सम्मेलन में विचार-विमर्श से साइबर सुरक्षा और साइबर अपराध के खतरों से निपटने, साझा साइबर मानकों के विकास संबंधी कौशल को बढ़ाने के लिए अधिक समन्वय और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग होगा। आपराधिक जांच में डिजिटल फोरेंसिक और साइबर खतरा खुफिया का उपयोग करने में सहयोग और प्रशिक्षण के लिए यूएस डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। दिसंबर 2024 में फ्रांस के विशेषज्ञों के साथ क्रिप्टोकरेंसी पर साइबर जांच का संयुक्त सेमिनार आयोजित किया गया।
गृह राज्य मंत्री श्री नित्यानंद राय ने राज्य सभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
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