सहकारिता मंत्रालय
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नई सहकारी समितियां

Posted On: 25 MAR 2025 1:36PM by PIB Delhi

सरकार ने पांच वर्षों की अवधि के दौरान देश भर की सभी पंचायतों और गांवों को आच्छादित करने के लिए दिनांक 15.02.2023 को 2 लाख बहुउद्देशीय पैक्स, डेयरी और मात्स्यिकी सहकारी समितियों की स्थापना और सुदृढ़ीकरण की योजना को मंजूरी दी है, जिसे राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड), राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी), राष्ट्रीय मात्स्यिकी विकास बोर्ड (एनएफडीबी) और राज्य सरकारों के सहयोग से कार्यान्वित किया जा रहा है।

सरकार ने छत्तीसगढ़ राज्य सहित देश भर में शहरी और ग्रामीण सहकारी बैंकों, दोनों को सशक्त करने के लिए अनेक उपाय कर उनका विस्तार और वित्तीय पहुंच में वृद्धि सुनिश्चित की है, जिसका ब्योरा संलग्नक में संलग्न है।

सहकारिता मंत्रालय ने सहकारिता आधारित "श्वेत क्रांति 2.0" पहल की शुरूआत की है, जिसका लक्ष्य संगठित डेयरी सेक्टर में डेयरी सहकारी समितियों की हिस्सेदारी को बढ़ाना, छोटे डेयरी किसानों को बाजार पहुंच प्रदान करना और रोजगार सृजन एवं महिला सशक्तीकरण में योगदान देना है । इस पहल का उद्देश्य अगले पांच वर्षों में डेयरी सहकारी समितियों की दूध खरीद को वर्तमान स्तर से 50% तक बढ़ाना है। इस संबंध में दिनांक 19.11.2024 को एक मानक प्रचालन प्रक्रिया (एसओपी) का भी विमोचन किया गया है। दिनांक 27.01.2025 तक, देश में 8,294 नई डेयरी सहकारी समितियों का पंजीकरण किया जा चुका है।

सहकारी समितियों के माध्यम से महिलाओं और युवाओं में स्वरोजगार और उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी), जो सहकारिता मंत्रालय का एक सांविधिक निगम है, निम्नलिखित योजनाओं का कार्यान्वयन कर रहा है:

स्वयं शक्ति सहकार योजनाः इस योजना का लक्ष्य कृषि क्रेडिट समितियों द्वारा महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को ऋण/अग्रिम प्रदान करने हेतु वित्तीय सहायता प्रदान करना है।

नंदिनी सहकारः इस योजना का लक्ष्य महिलाओं की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार लाना है और महिला सहकारी समितियों के माध्यम से महिलाओं की उद्यमी गतिशीलता का समर्थन करना है। यह महिला उद्यमों के महत्वपूर्ण इनपुट्स, व्यवसाय विकास तैयार करना, क्षमता विकास, क्रेडिट और सब्सिडी, और/या अन्य योजनाओं के ब्याज अनुदान का अभिसरण करता है।

युवा सहकार - सहकारी उद्यम समर्थन और नवाचार योजना: इस योजना का उद्देश्य नए और/या अभिनव विचारों वाली नवगठित सहकारी समितियों को प्रोत्साहित करना है।

उपर्युक्त के अतिरिक्त, एनसीडीसी- लक्ष्मणराव इनामदार राष्ट्रीय सहकारी अनुसंधान और विकास अकादमी (एलआईएनएसी) के साथ क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्रों ने विगत पांच वर्षों (अर्थात वर्ष 2020-21 से वर्ष 2024- 25 तक) में व्यवसाय विकास और आस्ति प्रबंधन, पैक्स में सामान्य प्रबंधन, सहकारी समितियों/स्वयं सहायता समूहों के शासन और व्यवसाय विकास में महिला निदेशकों की भूमिका, लेखा और बुक कीपिंग जैसे विषयों तथा विभिन्न कार्यक्रमों में कुल 1,370 प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संचालन किया है जिसके द्वारा 38,179 महिला प्रतिभागियों सहित लगभग 1,90,894 प्रतिभागी लाभान्वित हुए हैं।

एनसीडीसी भारत सरकार की विभिन्न केंद्रीय प्रायोजित/केंद्रीय क्षेत्रक योजनाओं की कार्यान्वयन एजेंसी भी है। इन योजनाओं के अधीन कृषि विपणन अवसंरचना (एएमआईएल) - एकीकृत कृषि विपणन योजना एजेंसी भी है। इन योजनाओं के अधीन कृषि विपणन अवसंरचना (एएमआई) - एकीकृत कृषि विपणन योजना (आईएसएएम) की एक उपयोजना, प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (पीएमएफएमई), कृषि अवसंरचना कोष (एआईएफ), राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन और शहद मिशन (एनबीएचएम) और किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) जैसे सहकारी मॉडल के माध्यम से कृषि आधारित उद्योगों (जैसे खाद्य प्रसंस्करण) को प्रोत्साहित करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में एनसीडीसी ने प्रसंस्करण सेक्टर सहित सहकारी समितियों के विकास के लिए 89,750 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की है।

संलग्नक

सहकारिता मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा शहरी और ग्रामीण सहकारी बैंकों को सशक्त करने के लिए किए गए उपाय

1. शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) को व्यापार विस्तारण हेतु नई शाखाएं खोलने की अनुमतिः शहरी सहकारी बैंक (यूसीबी) अब आरबीआई की पूर्वानुमति के बिना पिछले वित्तीय वर्ष में मौजूदा शाखाओं की संख्या का 10% (अधिकतम 5) तक नई शाखाएँ खोल सकेंगे ।

2. भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) को अपने ग्राहकों को डोर-स्टेप सेवाएं प्रदान करने की अनुमतिः शहरी सहकारी बैंकों द्वारा अब डोर-स्टेप बैंकिंग सुविधा प्रदान की जा सकती है। इन बैंकों के खाताधारक अब अपने घर पर ही विभिन्न बैंकिंग सुविधाएं जैसे नकद निकासी एवं नकद जमा, केवाईसी, डिमांड ड्राफ्ट और पेंशनभोगियों के लिए जीवन प्रमाण पत्र, आदि का लाभ प्राप्त कर सकेंगे ।

3. सहकारी बैंकों को वाणिज्यिक बैंकों की तरह बकाया ऋणों का वन टाइम सेटलमेंट करने की अनुमतिः सहकारी बैंक अब बोर्ड-अनुमोदित नीतियों के माध्यम से तकनीकी राइट-ऑफ करने के साथ-साथ उधारकर्ताओं के निपटान की कार्रवाई भी कर सकेंगे ।

4. शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) को प्राथमिक क्षेत्र उधार (PSL) लक्ष्य प्राप्त करने हेतु दी गई समय-सीमा में वृद्धिः भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा शहरी सहकारी बैंकों को PSL लक्ष्य की प्राप्ति हेतु दी गई समय-सीमा को दो वर्षों के लिए, अर्थात दिनांक 31 मार्च, 2026 तक बढ़ा दिया गया है।

5. शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) के साथ नियमित संवाद हेतु आरबीआई में एक नोडल अधिकारी नामितः सहकारिता क्षेत्र की गहन समन्वयऔर केंद्रित संवाद हेतु काफी समय से लंबित मांग को पूरा करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने एक नोडल अधिकारी अधिसूचित किया है।

6. भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा ग्रामीण व शहरी सहकारी बैंकों के व्यक्तिगत आवासन ऋण की सीमा दोगुनी से अधिक की गई:

(क) शहरी सहकारी बैंकों के आवासन ऋण की सीमा को अब 30 लाख रुपये से दोगुना कर 60 लाख रुपये कर दिया गया है।

(ख) ग्रामीण सहकारी बैंकों के आवासन ऋण सीमा को ढाई गुना बढ़ाकर 75 लाख रुपये कर दिया गया है।

7. ग्रामीण सहकारी बैंक अब वाणिज्यिक रियल एस्टेट / रिहाइशी आवासन क्षेत्र को ऋण देने में सक्षम होंगे जिससे उनके व्यवसाय में विविधता आएगी: इससे न केवल ग्रामीण सहकारी बैंकों को अपने व्यवसाय में विविधता लाने में सहायता प्राप्त होगी, बल्कि आवासन सहकारी समितियां भी लाभान्वित होंगी ।

8. सहकारी बैंकों के लिए लाइसेंस शुल्क घटाया गयाः सहकारी बैंकों को 'आधार सक्षम भुगतान प्रणाली' (AePS) में ऑनबोर्ड करने के लाइसेंस शुल्क को लेनदेन की संख्या से लिंक करके घटा दिया गया है। सहकारी वित्तीय संस्थानों को भी उत्पादन-पूर्व चरण में यह सुविधा पहले तीन महीनों में निःशुल्क प्राप्त होगी। इससे अब किसानों को बायोमेट्रिक्स द्वारा घर बैठे ही बैंकिंग सुविधाएं प्राप्त हो सकेंगी ।

9. ऋण वितरण में सहकारी समितियों की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए गैर-अनुसूचित शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी), राज्य सहकारी बैंकों (एसटीसीबी) और जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (डीसीसीबी) को सीजीटीएमएसई योजना में सदस्य ऋण संस्थान (एमएलआई) के रूप में अधिसूचित किया गया: सहकारी बैंक अब दिए जाने वाले ऋणों पर 85 प्रतिशत तक जोखिम कवरेज का लाभ उठा सकेंगे। साथ ही, सहकारी क्षेत्र के उद्यमों को भी अब सहकारी बैंकों से कोलैटरल- मुक्त ऋण मिल सकेगा।

10. शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) को शामिल करने हेतु शेड्यूलिंग मानदंडों की अधिसूचनाः शहरी सहकारी बैंक जो 'वित्तीय सुदृढ़ और सुप्रबंधित' (एफएसडब्ल्यूएम) मानदंडों को पूरा करते हैं तथा पिछले दो वर्षों से टियर 3 के रूप में वर्गीकरण हेतु आवश्यक न्यूनतम जमा राशि बरकरार रखे हुए हैं, अब भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की अनुसूची ॥ में शामिल होने के लिए पात्र हैं तथा 'अनुसूचित' का दर्जा प्राप्त कर सकते हैं।

11. स्वर्ण ऋण हेतु रिजर्व बैक द्वारा मौद्रिक सीमा दोगुनी की गई: भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा PSL लक्ष्यों को पूरा करने वाले शहरी सहकारी बैंकों की मौद्रिक सीमा को 2 लाख रुपये से दोगुना कर 4 लाख रुपये कर दिया गया है।

12. शहरी सहकारी बैंकों के लिए अंब्रेला संगठन: भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा शहरी सहकारी बैंक क्षेत्र के लिए एक अम्ब्रेला संगठन (यूओ) की स्थापना हेतु नेशनल फेडरेशन ऑफ अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक्स एंड क्रेडिट सोसाइटीज लिमिटेड (एनएफसीयूबी) को मंजूरी दी गई है, जिससे लगभग 1,500 शहरी सहकारी बैंकों को आवश्यक सूचना प्रौद्योगिकी अवसंरचना और प्रचालन सहायता प्राप्त हो सकेगी।

यह जानकारी सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

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एमजी/आरपीएम/केसी/ केजे 


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