जल शक्ति मंत्रालय
संसद प्रश्न: जल जीवन मिशन के अंतर्गत जल स्रोत
प्रविष्टि तिथि:
24 MAR 2025 12:18PM by PIB Delhi
भारत सरकार राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों क्षेत्रों के साथ मिलकर अगस्त, 2019 से “जल जीवन मिशन (जेजेएम)” का कार्यान्वयन कर रही है, जिससे देश के प्रत्येक ग्रामीण परिवार को नियमित एवं दीर्घकालिक आधार पर पर्याप्त मात्रा में, निर्धारित गुणवत्ता के साथ पीने योग्य नल का जल उपलब्ध कराया जा सके।
जल राज्य का विषय है, इसलिए जल जीवन मिशन के अंतर्गत आने वाली पेयजल आपूर्ति योजनाएं/कार्यों की योजना, अनुमोदन, कार्यान्वयन, संचालन एवं रखरखाव की जिम्मेदारी राज्य/केंद्र शासित प्रदेश की सरकारों की है। भारत सरकार तकनीकी एवं वित्तीय सहायता प्रदान करके राज्यों का समर्थन करती है।
आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा प्रदान की गई सूचना के अनुसार, जल जीवन मिशन (जेजेएम) के अंतर्गत जलापूर्ति के लिए उपयोग किए जाने वाले जल स्रोतों का विवरण, स्रोतों के प्रकार, राज्य और जिलावार, जिसमें कोनासीमा जिला भी शामिल है, निम्नलिखित है।
कोनासीमा जिले में उपर्युक्त स्रोतों से जल आपूर्ति प्राप्त करने वाले नल कनेक्शनों की संख्या, जल स्रोत-वार, निम्नानुसार है:
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जिले का नाम
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जल आपूर्ति प्राप्त करने वाले नल कनेक्शनों की संख्या
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भूजल आधारित
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सतही जल आधारित
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भूजल एवं सतही जल आधारित दोनों
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कोनासीमा
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1,28,558
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84,856
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72,537
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कोनासेमा जिले में पिछले 5 वर्षों के दौरान भूजल स्तर का माप (भू-स्तर के नीचे) मीटर में का विवरण नीचे संलग्न है।
आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा प्रदान की गई रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में नहरों से प्राप्त 1524 ग्रीष्मकालीन भंडारण टैंकों और कोनासीमा जिले में नहरों से प्राप्त 42 ग्रीष्मकालीन भंडारण टैंकों के जल स्तर में भिन्नता का आकलन ग्रीष्मकालीन भंडारण टैंकों की फोटो लेने एवं जियोटैगिंग के लिए विकसित एक मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से किया जा रहा है और आपूर्ति योजना तदनुसार बनाई जा रही है।
इसके अलावा, भूजल स्तर में भिन्नता का मूल्यांकन जल विभाग से प्राप्त डेटा के अनुसार किया जा रहा है और आपूर्ति योजना तदनुसार योजना बनाई जा रही है।
जल शक्ति मंत्रालय जेजेएम स्रोतों के जल स्तर की निगरानी नहीं करता है। हालांकि, गांवों में जल आपूर्ति प्रणाली को दीर्घकालिक स्थिरता प्रदान करने के लिए विश्वसनीय पेयजल स्रोतों का विकास और/या मौजूदा स्रोतों का संवर्धन, जेजेएम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए, जेजेएम के कार्यान्वयन के लिए परिचालन दिशा-निर्देशों में निम्नलिखित प्रावधान किए गए हैं:
i) जेजेएम के अंतर्गत किसी भी जल आपूर्ति योजना को केवल राज्य सरकार की स्रोत खोज समिति की सिफारिश के बाद ही मंजूरी प्रदान की जाती है, कि जिस चिन्हित जल स्रोत के माध्यम से योजना बनाई गई है, उसमें योजना की डिज़ाइन अवधि के अनुसार आवश्यक मानक के लिए जल आपूर्ति को बनाए रखने के लिए पर्याप्त उत्पादन है।
ii) गांव में जलापूर्ति अवसंरचना निर्माण के अलावा, पानी की कमी वाले सूखाग्रस्त एवं रेगिस्तानी क्षेत्रों में भरोसेमंद भूजल स्रोतों के बिना पानी का बड़े पैमाने पर हस्तांतरण, उपचार और वितरण प्रणालियों के लिए पेयजल स्रोतों और अवसंरचना विकास/सुदृढ़ीकरण/संवर्धन।
iii) अन्य योजनाओं जैसे एमजीएनआरईजीएस, ग्रामीण स्थानीय निकायों/पीआरआई को वित्त आयोग अनुदान, सांसद और विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास निधि, जिला खनिज विकास निधि, सीएसआर निधि आदि के साथ अभिसरण में पेयजल स्रोतों को मजबूत करना।
इसके अलावा, राष्ट्रीय जल मिशन (एनडब्ल्यूएम) ने तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए एफएक्यू के रूप में “भूजल संवर्धन के कृत्रिम पुनर्भरण के सरल एवं व्यावहारिक तरीके” शीर्षक से एक मार्गदर्शन दस्तावेज़ विकसित किया है। पहल के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए सूचना, शिक्षा एवं संचार (आईईसी) गतिविधियां भी शुरू की गई हैं। जल संचय डैशबोर्ड के माध्यम से एक निगरानी एवं मूल्यांकन संरचना भी स्थापित की गई है, जो पुनर्भरण संरचनाओं के भू-टैग किए गए स्थानों के साथ प्रगति को भी ट्रैक करता है। सीडब्ल्यूसी और सीजीडब्ल्यूबी भूजल संवर्धन को बेहतर बनाने के लिए पुनर्भरण संरचनाओं के निर्माण एवं नवीनीकरण के लिए तकनीकी सहायता भी प्रदान करते हैं।
आंध्र प्रदेश सरकार के संबंध में, राज्य ने पेय जल स्रोतों की निगरानी के लिए कई कदम उठाए हैं जैसे कि जैसे स्रोतों एवं ग्रीष्मकालीन टैंकों की जियो-टैगिंग, ग्रीष्मकालीन भंडारण टैंकों के जल स्तर की निगरानी, फोटो खींचने के लिए मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से नहरों से पानी की आपूर्ति करना आदि।
इसके अलावा, आंध्र प्रदेश जल जीवन मिशन स्रोतों के समीप स्थित गांवों में भूजल स्तर को जीवंत/सुधार करने के लिए एमजीएनआरईजीएस कार्यक्रम के अंतर्गत भूजल पुनर्भरण संरचनाओं का निर्माण कर रहा है। गर्मियों के दौरान घरों में निर्बाध जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए नहर बंद होने से पहले सभी ग्रीष्मकालीन भंडारण टैंक भर दिए जाते हैं।
यह जानकारी जल शक्ति राज्य मंत्री श्री वी. सोमन्ना ने आज लोक सभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
एमजी/आरपीएम/केसी/एके
(रिलीज़ आईडी: 2114344)
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