मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय
केरल में मात्स्यिकी क्षेत्र हेतु निधि
Posted On:
19 MAR 2025 2:06PM by PIB Delhi
मत्स्यपालन विभाग, भारत सरकार अपनी योजनाओं, नीतियों और कार्यक्रमों के माध्यम से केरल सहित सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में मात्स्यिकी क्षेत्र के समग्र विकास की दिशा में कई पहल कर रहा है। प्रमुख पहलों में 2015-16 से 2019-20 के दौरान लागू की गई नीली क्रांति योजना, मात्स्यिकी क्षेत्र के लिए किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) का विस्तार (2018-19 से), मात्स्यिकी में रियायती वित्तपोषण को सक्षम करने के लिए फिशरीज़ एंड एक्वाकल्चर डेवलेपमेंट फंड (एफआईडीएफ) (2018-19 से 2025-26) का सृजन, प्रमुख योजना ‘प्रधान मंत्री मत्स्य संपदा योजना’ (पीएमएमएसवाई) (2020-21 से 2024-25) शामिल है । मत्स्य उत्पादन को बढ़ाना, वैल्यू चैन को मजबूत करना, रोजगार सृजन, मछुआरों की सेफ्टी और सेक्युर्टी सुनिश्चित करना और संसाधनों की सतता (सस्टेनेबिलिटी) सुनिश्चित करना इन पहलों का मूल रहा है।
विगत चार वर्षों (2020-21 से 2023-24) और वर्तमान वित्त वर्ष (2024-25) के दौरान प्रमुख योजना ‘प्रधान मंत्री मत्स्य संपदा योजना’ (पीएमएमएसवाई) के अंतर्गत मत्स्यपालन विभाग, भारत सरकार ने 574.90 करोड़ रुपए के केंद्रीय अंशदान के साथ केरल सरकार के 1358.10 करोड़ रुपए के मात्स्यिकी विकास प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इस अवधि के दौरान केरल को 344.15 करोड़ रुपए की केंद्रीय निधि भी जारी की गई है।
स्वीकृत गतिविधियों में सहायता प्रदत्त मत्स्य उत्पादन उन्मुख गतिविधियों में शामिल है, ब्रूड बैंक (01), हैचरी (09 सं), रियरिंग और ग्रो आउट पॉंन्डस (89 हेक्टेयर), खारे पानी की खेती (172 हेक्टेयर), ओरनामेन्टल रियरिंग यूनिट्स की स्थापना (798 सं), जलाशयों में केज कल्चर (750 सं), री-सर्क्युलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (आरएएस) (646 सं), बायोफ्लोक यूनिट्स (850 सं), जलाशयों का एकीकृत विकास (07 सं) और डीप सी फिशिंग वेसेल्स (20 सं)। अनुमोदन में इनफ्रास्ट्रक्चर और कोल्ड चेन गतिविधियां शामिल है जैसे फिशिंग हार्बर को अपग्रेड करना (11 सं), आइस प्लांट/कोल्ड स्टोरेज (16 सं), फिश ट्रांसपोर्टेशन वेहिकल्स (468 सं), लाइव फिश वेंडिंग सेंटर (77 सं), वैल्यू ऐडीड एंटरप्राइज़ (10 सं), फिश रिटेल मारकेट्स (05 सं), होलसेल फिश मारकेट्स (02 सं) और समय पर बीमारी का पता लगने के लिए रेफरल लैब और डीजीज डायग्नोस्टिक लैब्स (02 सं) । इसके अलावा, खुले जल निकायों (31 हेक्टेयर) में पेन कल्चर, फिश सीड का भंडारण (10 हेक्टेयर), बाइवाल्स कल्टिवेशन यूनिट्स (1140 सं), पारंपरिक मछुआरों को बोट्स और नेट्स (200 सं ) जैसी गतिविधियों को भी पीएमएमएसवाई के अंतर्गत मंजूरी दी गई है।
इसके अलावा, पीएमएमएसवाई के अंतर्गत, इंटीग्रेटिड मॉडर्न कोस्टल फिशिंग विलेज (09 सं), क्लाइमेट रेसीलिएंट कोस्टल विल्लेजस (06 सं), आर्टिफ़िश्यल रीफ़्स (42 यूनिट्स), विस्तार सहायता सेवाएं - मत्स्य सेवा केंद्र (10 सं), सागर मित्र (222 सं) भी केरल के लिए मंजूर किए गए हैं । मछली पकड़ने पर प्रतिबंध की अवधि के दौरान 1,79,316 मछुआरों को आजीविका और पोषण संबंधी सहायता की मंजूरी भी केरल को दी गई है। अंतर्देशीय मात्स्यिकी के विभिन्न क्षेत्रों में राष्ट्रीय मात्स्यिकी विकास बोर्ड (एनएफडीबी) के माध्यम से केरल में जागरूकता अभियान और क्षमता निर्माण कार्यक्रम भी शुरू किए गए हैं। केरल सरकार ने सूचित किया है कि राज्य योजना के अंतर्गत, राज्य ने जलीय कृषि, डाईवरसिफिकेशन, सीड उत्पादन में वृद्धि, संसाधनों का संरक्षण और प्रबंधन, नियमित गश्त, उच्च शिक्षा के लिए मछुआरा छात्रों के लिए कोचिंग कार्यक्रम, महिला मछुआरों को ब्याज मुक्त ऋण, पेंशन योजनाओं सहित ग्रुप इंश्योरेंस स्कीम की दिशा में पहल की है।
नदी में मात्स्यिकी (रिवरीन फिशरीज़ ) के लिए ऐसी कोई विशेष योजना घोषित नहीं की गई है। हालाँकि, मत्स्यपालन विभाग, भारत सरकार द्वारा कार्यान्वित की गई योजनाओं में पहले से ही रिवरीन फिशरीज़ के विकास के लिए गतिविधियाँ शामिल हैं जैसे कि पेन कल्चर, फिश सीड की स्टोकिंग, पारंपरिक मछुआरों के लिए बोट्स और नेट्स, रेंचिंग कार्यक्रम आदि। इसके अलावा, केरल सरकार ने सूचित किया है कि रिवरीन फिशरीज़ के भाग के रूप में, नदियों, नहरों और अन्य उपयुक्त जल निकायों में तटबंध और पेन कल्चर गतिविधियाँ की जाती हैं। वित्त वर्ष 2022 से लागू 'इंटीग्रेटेड फिशरी मेनेजमेंट इन इनलैंड एक्वाटिक इकोसिस्टेम' से संबंधित स्टेट प्लान प्रोजैक्ट के अंतर्गत फिश और श्रिम्प सीड की रेंचिंग, फिश/क्लैम संरक्षित क्षेत्रों की स्थापना भी कार्यान्वित की गई है। केरल सरकार ने सूचित किया है कि विगत पाँच वर्षों के दौरान, इसके लिए 20.07 करोड़ रुपए की धनराशि आवंटित की गई है, जिसमें से 8.54 करोड़ रुपए वितरित किए गए हैं और 7.24 करोड़ रुपए का उपयोग किया गया है।
यह जानकारी मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी राज्य मंत्री, श्री जॉर्ज कुरियन ने आज राज्य सभा में एक लिखित उत्तर में दी।
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