ग्रामीण विकास मंत्रालय
वर्तमान दशक में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना का प्रभावी क्रियान्वयन
Posted On:
19 MAR 2025 1:29PM by PIB Delhi
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम 2005 (महात्मा गांधी नरेगा) का उद्देश्य देश के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों की आजीविका सुरक्षा को बढ़ाना है। इसके तहत प्रत्येक परिवार को एक वित्तीय वर्ष में कम से कम सौ दिन का गारंटीकृत मजदूरी रोजगार उपलब्ध कराया जाता है, जिसके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम करने के लिए स्वेच्छा से आगे आते हैं।
गौरतलब है कि वित्तीय वर्ष 2006-07 के लिए बजट आवंटन 11,300 करोड़ रुपये था, जो 2013-14 में बढ़कर 33,000 करोड़ हो गया। पिछले 10 वर्षों में इसमें लगातार वृद्धि हुई है। चालू वित्त वर्ष का 86,000 करोड़ रुपये का आवंटन बजट अनुमान चरण में अब तक का सबसे अधिक बजटीय आवंटन है। सरकार ने कोविड-19 महामारी के दौरान परेशान लोगों की आजीविका सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वर्ष 2020-21 में इस योजना के तहत रिकॉर्ड 1,11,000 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। यह योजना के प्रभावी कार्यान्वयन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
इसी प्रकार, वित्त वर्ष 2006-07 से वित्त वर्ष 2013-14 के बीच सृजित कुल व्यक्ति दिवस 1660 करोड़ थे, जबकि वित्त वर्ष 2014-15 से वित्त वर्ष 2024-25 के बीच सृजित कुल व्यक्ति दिवस 3029 करोड़ रहे हैं, जो कि 2014 से पहले के दशक की तुलना में 82% अधिक है। इस प्रक्रिया में, 2014-15 से 2024-25 तक के पिछले वर्षों में, केंद्र सरकार ने 7,81,302 करोड़ रुपये जारी किए हैं, जिसके परिणामस्वरूप 8.07 करोड़ ग्रामीण परिसंपत्तियों का निर्माण हुआ है। जबकि 2006-07 से 2013-14 तक के पिछले दशक में केवल 2,13,220 करोड़ रुपये जारी किए गए थे, जिसके परिणामस्वरूप 1.53 करोड़ ग्रामीण परिसंपत्तियों का निर्माण हुआ था। पिछले 10 वर्षों में, सरकार के बढ़ते प्रयासों से ग्रामीण परिसंपत्तियों के निर्माण में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो कि जियोटैग की गई और बेहतर गुणवत्ता वाली ग्रामीण परिसंपत्तियों में 526% से अधिक की वृद्धि से स्पष्ट है। इसके अलावा, महिला सशक्तीकरण पर निरंतर ध्यान देने के कारण, महिलाओं की भागीदारी वित्त वर्ष 2013-14 में 48% से बढ़कर चालू वित्त वर्ष 2024-25 में 58% से अधिक हो गई है।
महात्मा गांधी नरेगा के तहत 266 कार्य अनुमत हैं, जिनमें से 150 कार्य कृषि से संबंधित हैं, 58 प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन (एनआरएम) से संबंधित हैं और 58 कार्य ग्रामीण इन्फ़्रास्ट्रक्चर के हैं। योजना के तहत विभिन्न जल संबंधी कार्य जैसे चेक डैम, खेत तालाब, सामुदायिक तालाब, सिंचाई के खुले कुएं आदि शुरू किए गए हैं। जल संरक्षण पर सरकार के निरंतर जोर ने उल्लेखनीय परिणाम दिए हैं | एक और बड़ी सफलता मिशन अमृत सरोवर के रूप में मिली है, जिसके कारण पहले चरण में देश में 68,000 से अधिक अमृत सरोवर बनाए गए हैं। वर्तमान में, मिशन अमृत सरोवर के दूसरे चरण को सामुदायिक भागीदारी, जनभागीदारी, के साथ जल उपलब्धता पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित करते हुए शुरू किया गया है।
समाज के सबसे कमजोर वर्गों के लिए आजीविका के अवसरों में सुधार लाने पर सरकार का ध्यान व्यक्तिगत परिसंपत्तियों के निर्माण में वित्त वर्ष 2013-14 में 17.6% से वित्त वर्ष 2024-25 में 56.99% तक की पर्याप्त वृद्धि में देखा जा सकता है।
यह कहना गलत है कि एबीपीएस (आधार आधारित भुगतान प्रणाली) या एनएमएमएस (राष्ट्रीय मोबाइल निगरानी प्रणाली) चुनौतीपूर्ण है| वास्तव में, इस योजना के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए ये प्रमुख सुधार प्रक्रियाएं रही हैं। उदाहरण के लिए, एबीपीएस बेहतर लक्ष्यीकरण, प्रणाली की दक्षता बढ़ाने और बैंक खाते में बार-बार बदलाव के कारण होने वाले भुगतान में देरी को कम करने में मदद करता है आज की तारीख तक, मनरेगा के तहत 13.45 करोड़ (99.49%) सक्रिय श्रमिकों के लिए आधार सीडिंग का काम पूरा हो चुका है, जबकि 2014 में केवल 76 लाख श्रमिकों के लिए आधार सीडिंग की गई थी। इसी तरह, एनएमएमएस ने मनरेगा के कार्यान्वयन में पारदर्शिता बढ़ाई है। एनएमएमएस के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक रियल-टाइम उपस्थिति कैप्चरिंग ने मस्टर रोल के समय पर निर्माण के साथ-साथ फर्जी उपस्थिति को खत्म करने को सुव्यवस्थित किया है। इसके अलावा, असाधारण परिस्थितियों में, क्षेत्र स्तर पर मैनुअल उपस्थिति को मंजूरी देने का प्रावधान है।
सरकार महात्मा गांधी नरेगा में पारदर्शिता और जवाबदेही में सुधार के लिए लगातार काम कर रही है। चालू दशक में राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक फंड प्रबंधन प्रणाली (NeFMS) और आधार आधारित भुगतान प्रणाली (ABPS) को अपनाने से MGNREGA देश की सबसे बड़ी DBT योजना बन गई है | इससे पहले ऐसे तंत्रों की अनुपस्थिति में, लीकेज की संभावना थी क्योंकि 2013 में ई-एफएमएस के माध्यम से मजदूरी का भुगतान केवल 37% था। इसी तरह, जीआईएस आधारित योजना, परिसंपत्तियों की जियो-टैगिंग, अनुमान गणना के लिए सिक्योर आदि जैसी अन्य अग्रणी डिजिटल पहलों ने इस योजना को देश में सबसे पारदर्शी तरीके से संचालित योजनाओं में से एक बना दिया है। यह एक व्यापक एमआईएस सिस्टम नरेगासॉफ्ट से स्पष्ट है जिसमें व्यक्ति दिवस सृजन और परिसंपत्तियों के बारे में सभी डेटा सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध हैं। जनमनरेगा मोबाइल ऐप के साथ-साथ इस कार्यक्रम की नागरिक निगरानी में काफी वृद्धि हुई है जो 2014 से पहले अनुपस्थित था।
इसके अलावा, सामाजिक लेखा परीक्षा, क्षेत्र अधिकारी ऐप के माध्यम से निरीक्षण और अन्य हस्तक्षेपों पर अधिक ध्यान देने के परिणामस्वरूप एक मजबूत निगरानी ढांचा तैयार हुआ है जो 2014 से पहले अनुपस्थित था।
“नरेगा के 10 वर्षों के प्रभावी कार्यान्वयन” का विवरण अनुलग्नक में है।
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एम.जी./रा.ना./के.एस.आर.
(Release ID: 2112685)
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