अल्‍पसंख्‍यक कार्य मंत्रालय
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केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अन्‍य बातों के साथ-साथ पाली और प्राकृत भाषाओं को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिए जाने से अल्पसंख्यक समुदायों के सपने और आकांक्षाएं पूरी होंगी- एनसीएम

प्रविष्टि तिथि: 04 OCT 2024 6:25PM by PIB Delhi

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अन्‍य बातों के साथ-साथ पाली और प्राकृत भाषाओं को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने को मंजूरी प्रदान की है। बौद्ध और जैन समुदाय लंबे समय से दोनों भाषाओं को मान्यता देने की मांग कर रहे थे, क्योंकि दोनों भाषाओं की भारतीय सामाजिक और धार्मिक इतिहास में समृद्ध परंपराएं हैं। बुद्ध की शिक्षाएं पाली भाषा में हैं, जो भारत से आरंभ हुई और दुनिया भर में फैल गई। दोनों भाषाएं भारत के प्राचीन साहित्य और सांस्कृतिक विरासत का भी समृद्ध स्रोत हैं। जैन आगम और गाथा सप्तशती जैसे प्रमुख ग्रंथों के अलावा जैन अनुष्ठानों और धार्मिक प्रथाओं में प्राकृत का उपयोग महत्वपूर्ण है।

बौद्ध एवं जैन अल्पसंख्यकों तथा सभी संबंधित पक्षों के अनुरोध पर, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग पाली और प्राकृत भाषा को बढ़ावा देने का मुद्दा विभिन्न संबंधित अधिकारियों के समक्ष उठाता रहा है। वह प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सरकार द्वारा लिए गए इस निर्णय का स्वागत करता है, जो अल्पसंख्यक समुदायों के सपनों और आकांक्षाओं को पूरा करने के अलावा देश की भाषाई, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक परंपराओं को समृद्ध करेगा।

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एमजी/आरपीएम/केसी/आरके


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