मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय
मत्स्य पालन विभाग सभी तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में तटवर्ती मत्स्य पालन संबंधित जलीय कृषि को बढ़ावा दे रहा है
प्रविष्टि तिथि:
31 JUL 2024 4:40PM by PIB Delhi
भारत सरकार का मत्स्य पालन विभाग (डीओएफ) प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना (पीएमएमएसवाई) के अंतर्गत सभी तटीय राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) में तटवर्ती जलीय संपदा के उत्पादन को बढ़ावा दे रहा है। प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के अंतर्गत 179.50 करोड़ रुपये की विभिन्न परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई है, जिनमें पी मोनोडोन के ब्रूडस्टॉक गुणन केंद्र (बीएमसी), पेनेयुसिंडिकस के आनुवंशिक सुधार कार्यक्रम, 1381 हेक्टेयर भूमि में खारे पानी के तालाबों को तैयार करना और 20 झींगा हैचरी सहित अन्य तमाम गतिविधियों के लिए हैचरी का निर्माण कार्य शामिल है। इसके अलावा, भारत सरकार ने तटीय मत्स्य पालन संभावनाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से झींगा पालन और भंडारण सुविधाओं के विकास कार्य हेतु 5 ब्रूडस्टॉक गुणन केंद्र की स्थापना के लिए कई परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है।
तटीय जलकृषि प्राधिकरण (सीएए) द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, पिछले तीन वर्षों के दौरान तटवर्ती राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों में 5544 तटीय मत्स्य पालन संबंधी के फार्म स्थापित किए गए हैं। पिछले तीन साल के दौरान विकसित तटीय जलकृषि फार्मों का राज्य/केंद्र शासित प्रदेशवार विवरण उनके स्थानों के साथ अनुलग्नक में दिया गया है।
साल 2020-21 के दौरान खारे पानी की जलीय कृषि से झींगा उत्पादन 8.42 लाख टन से बढ़कर वर्ष 2022-23 के दौरान 11.84 लाख टन तक पहुंच चुका है।
आंकड़ों के अनुसार खारे पानी की जलीय कृषि ने समुद्री खाद्य उद्योग पर सकारात्मक प्रभाव डाला है, जिससे समुद्री खाद्य निर्यात 2020-21 के दौरान 43,721 करोड़ रुपये से बढ़कर 2022-2023 में 63,969 करोड़ रुपये तक हो गया है। जानकारी के आधार पर 63,969 करोड़ रुपये के समुद्री खाद्य निर्यात में से अकेले झींगा का योगदान 40,013 करोड़ रुपये का रहा है।
पिछले तीन वर्षों में स्थापित तटीय जलकृषि फार्मों की राज्यवार संख्या।
यह जानकारी केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने आज राज्य सभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
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एमजी/एआर/एनके /डीके
(रिलीज़ आईडी: 2039761)
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