विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय

एएनआरएफ अधिनियम के प्रावधान लागू किए गए

Posted On: 06 FEB 2024 4:28PM by PIB Delhi

देश की प्रगति और विकास के आधार के रूप में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के संबंध में सरकार की प्रतिबद्धता के अनुरूप अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) अधिनियम के प्रावधानों को 5 फरवरी, 2024 को लागू किया गया है।

यह अधिनियम एएनआरएफ की स्थापना का प्रावधान करता है, जो अनुसंधान और विकास (आरएंडडी) को बढ़ावा देगा और विकसित करेगा। इसके अलावा यह भारत के विश्वविद्यालयों, कॉलेजों, अनुसंधान संस्थानों और अनुसंधान व विकास प्रयोगशालाओं में इसकी संस्कृति को संवर्द्धित करेगा।

केंद्र सरकार ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के सचिव प्रोफेसर अभय करंदीकर को एएनआरएफ का अंतरिम मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया है।

एएनआरएफ प्राकृतिक विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता को लेकर उच्च स्तरीय रणनीतिक दिशा प्रदान करने के लिए सरकार का एक ठोस कदम है। इनमें गणितीय विज्ञान, इंजीनियरिंग व प्रौद्योगिकी, पर्यावरण व पृथ्वी विज्ञान, स्वास्थ्य व कृषि के साथ हर एक नागरिक के लिए दीर्घकालिक प्रभाव व परिणाम हैं। 

केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज अपने ट्वीट में कहा, “एएनआरएफ अधिनियम का लागू होना वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, नवप्रवर्तकों और स्टार्टअप्स के लिए एक सुखद खबर है। भारत में आजादी के बाद पहली बार माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में अब अनुसंधान नामक एक राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन है।”

वहीं, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के सचिव प्रोफेसर अभय करंदीकर ने कहा, “डीएसटी की ओर से संचालित एएनआरएफ का उद्देश्य निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करते हुए उद्योग सहित विभिन्न स्रोतों से अनुसंधान व विकास के वित्तीय पोषण को बढ़ावा देना है। इसके अलावा यह भारत को विकसित देशों की श्रेणी में आगे बढ़ाने और अमृतकाल के दौरान देश को वैश्विक विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में प्रमुख राष्ट्र बनाने के लक्ष्य के साथ अंतःविषयक अनुसंधान को भी बढ़ावा देगा।

एएनआरएफ, राज्य विश्वविद्यालयों और संस्थानों को कुशलता के साथ अनुसंधान व विकास के क्षेत्र से जोड़ेगा और माननीय प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण के अनुरूप भारत को नवीन क्षेत्रों में नए शोध का नेतृत्व करने वाले विकसित देशों के समूह में शामिल करेगा।

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