वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्रालय
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भारत का कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों का निर्यात वित्त वर्ष 2021-22 के अप्रैल-फरवरी में 21.5 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया, यह चालू वित्त वर्ष के दौरान 23.71 बिलियन डॉलर के वार्षिक लक्ष्य को अर्जित करने के लिए पूरी तरह तैयार


एपीडा की भारत के वस्तु निर्यात में 5 प्रतिशत से अधिक की हिस्सेदारी है जिसने चालू वित्त वर्ष के दौरान 400 बिलियन डॉलर का रिकॉर्ड वस्तु निर्यात लक्ष्य अर्जित किया है

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 400 बिलियन डॉलर का लक्ष्य अर्जित करने पर किसानों, बुनकरों, एमएसएमई की सराहना की

एपीडा ने भौगोलिक संकेतक ( जीआई ) टैग किए गए उत्पादों पर ध्यान केंद्रित किया तथा विभिन्न क्षेत्रों से अनूठे उत्पादों के परीक्षण शिपमेंट की सुविधा प्रदान की

एपीडा कृषि निर्यात नीति के कार्यान्वयन के लिए राज्य सरकारों के साथ घनिष्ठतापूर्वक काम कर रहा है

Posted On: 25 MAR 2022 4:04PM by PIB Delhi

कोविड-19 महामारी की चुनौतियों के बावजूद कृषि तथा प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण ( एपीडा ) ने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए निर्धारित निर्यात लक्ष्य का 90 प्रतिशत अर्जित करने के जरिये सफलता की एक नई कहानी लिखी है।

एपीडा ने चालू वित्त वर्ष के पहले 11 महीनों के दौरान 21.5 बिलियन डॉलर के बराबर के कृषि तथा प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों का सफलतापूर्वक निर्यात किया तथा यह चालू वित्त वर्ष के दौरान 23.71 बिलियन डॉलर के वार्षिक लक्ष्य को अर्जित करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

यह सफलता ऐसे समय अर्जित की गई है जब चालू वित्त वर्ष के दौरान निर्धारित समय से 9 दिन पहले ही 400 बिलियन डॉलर के महत्वाकांक्षी वस्तु निर्यात लक्ष्य को अर्जित कर लेने के बाद प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने किसानों, बुनकरों, एमएसएमई, विनिर्माताओं तथा निर्यातकों की सराहना की।

एपीडा की भारत के वस्तु निर्यात में 5 प्रतिशत से अधिक की हिस्सेदारी है जिसने चालू वित्त वर्ष के दौरान 400 बिलियन डॉलर का रिकॉर्ड वस्तु निर्यात लक्ष्य अर्जित किया है।

प्रधानमंत्री ने एक ट्वीट में कहा, ‘‘ भारत ने 400 बिलियन डॉलर का महत्वाकांक्षी वस्तु निर्यात लक्ष्य निर्धारित किया तथा पहली बार इस प्रकार के लक्ष्य को अर्जित किया है। मैं इस सफलता के लिए किसानों, बुनकरों, एमएसएमई, विनिर्माताओं तथा निर्यातकों को बधाई देता हूं। यह हमारी आत्मनिर्भर भारत यात्रा में एक प्रमुख मील का पत्थर है। ‘‘

सबसे अधिक विदेशी मुद्रा अर्जित करने वाले के रूप में, एपीडा द्वारा अभी तक 8.67 बिलियन डॉलर के चावल निर्यात लक्ष्य का 91 प्रतिशत अर्जित किया जा चुका है। चावल निर्यात चालू वित्त वर्ष के अप्रैल-फरवरी से 8.67 बिलियन डॉलर से अधिक हो चुका है, भारत ने 8.62 बिलियन डॉलर के बराबर का चावल निर्यात किया है जबकि अन्य अनाजों के निर्यात ने 847 मिलियन डॉलर के निर्यात लक्ष्य की तुलना में 105 प्रतिशत की छलांग लगाई है।

फल तथा सब्जियों के वर्ग में, फरवरी तक 3048 मिलियन डॉलर के निर्यात लक्ष्य के मुकाबले, एपीडा ने 2506 मिलियन डॉलर के बराबर के फल तथा सब्जियों का निर्यात किया है जो कुल लक्ष्य का 75 प्रतिशत है।

अनाज तैयारी तथा विविध प्रसंस्कृत मदों का निर्यात 2036 मिलियन डॉलर के बराबर का हुआ है जो चालू वित्त वर्ष के फरवरी तक 2102 मिलियन डॉलर के निर्यात लक्ष्य का 89 प्रतिशत है, जबकि मांस, डेयरी तथा उत्पादों का निर्यात 3771 मिलियन डॉलर दर्ज किया गया है जो फरवरी 2022 तक 4205 मिलियन डॉलर के निर्यात लक्ष्य का 82 प्रतिशत है।

गेहूं के निर्यात में वित्त वर्ष 2021-22 के अप्रैल-जनवरी के दौरान 1742 मिलियन डॉलर की भारी बढोतरी देखी गई जो वित्त वर्ष 2020-21 की समान अवधि की तुलना में 387 प्रतिशत अधिक है जब इसने 358 मिलियन डॉलर के स्तर को छुआ था। अन्य अनाजों ने वित्त वर्ष 2021-22 के अप्रैल-जनवरी के दौरान 869 मिलियन डॉलर अर्जित करने के द्वारा पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के दौरान अर्जित 527 मिलियन डॉलर की तुलना में 66 प्रतिशत की वृद्धि प्रदर्शित की।

मांस, डेयरी तथा उत्पादों का निर्यात वित्त वर्ष 2021-22 के अप्रैल-जनवरी के दौरान 13 प्रतिशत बढ़कर 3408 मिलियन डॉलर हो गया। वित्त वर्ष 2020-21 के अप्रैल-जनवरी के दौरान यह आंकड़ा 3005 मिलियन डॉलर दर्ज किया गया था। फलों तथा सब्जियों का निर्यात वित्त वर्ष 2021-22 के अप्रैल-जनवरी के दौरान 16 प्रतिशत बढ़कर 1207 मिलियन डॉलर हो गया जबकि वित्त वर्ष 2020-21 के अप्रैल-जनवरी के दौरान यह आंकड़ा 1037 मिलियन डॉलर दर्ज किया गया था। प्रसंस्कृत फल तथा सब्जियों का निर्यात वित्त वर्ष 2021-22 के अप्रैल-जनवरी के दौरान 11 प्रतिशत बढ़कर 1269 मिलियन डॉलर हो गया। वित्त वर्ष 2020-21 के अप्रैल-जनवरी के दौरान यह आंकड़ा 1143 मिलियन डॉलर दर्ज किया गया था।

वर्ष के दौरान अनूठे उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए, एपीडा ने कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की जहां भौगोलिक पहचान ( जीआई ) प्रमाणित दहानु घोलवाड चीकू, जलगांव केला तथा मराठवाडा केसर को महाराष्ट्र के किसानों से प्राप्त किया गया तथा पहली बार इनका निर्यात किया गया। एपीडा ने गुवाहाटी हवाई अड्डे से दुबई तक विटामिन सी और आयरन से भरपूर फल लेटेकू ( बर्मा का अंगूर ) की पहली खेप की सुविधा प्रदान की, साथ ही गुवाहाटी के माध्यम से  ताजे कटहल का निर्यात त्रिपुरा से ब्रिटेन तथा जर्मनी के लिए किया।

ताजीराजा मिर्चाकी पहली खेप नागालैंड से लंदन के लिए निर्यात की गई तथा पहली बार असम से दुबई के लिए शहद का निर्यात किया गया। केरल के जीआई टैग किए गए नेंद्रन केले की पहली खेप केरल से सिंगापुर के लिए निर्यात की गई तथा कटहल और पैशन फ्रुट के मूल्य वर्धित उत्पादों को न्यूजीलैंड के लिए निर्यात किया गया। जीआई टैग किए गए वझाकुलम अन्नानास की पहली खेप दुबई तथा शारजाह को भेजी गई तथा केरल के मरायूर, इडुकी से जीआई टैग किए गए मरायूर गुड़ को दुबई के लिए निर्यात करने की सुविधा भी एपीडा द्वारा प्रदान की गई।

पहली बार, एपीडा ने उत्तर प्रदेश के लखीमपुर से ईरान को केले का निर्यात किया तथा गुजरात-गुजरात 17 चावल ( जीरासर/जीरा सांबा), सूरती कोलम चावल, अम्बेमोहर चावल, काली मूच चावल तथा इंद्रयानी चावल का निर्यात ब्रिटेन को किया गया।

एपीडा ने पहली बार उत्तराखंड से हिमालयी मोटे अनाज (र्गेनिक बार्नयार्ड, फिंगर मिलेट तथा ऐमारैंथस ) के वियतनाम को निर्यात में सहायता की तथा ओडिशा के कटक से प्राप्त फूले हुए चावल का निर्यात विशाखापट्टनम बंदरगाह के जरिये मलेशिया को किया गया है।

एपीडा के अध्यक्ष डॉ. एम अंगमुथु ने कहा, ‘‘ हम कृषि निर्यात नीति, 2018 के उद्वेश्य को ध्यान में रखते हुए, राज्य सरकारों के सहयोग से क्लस्टर दृष्टिकोण के आधार पर लगातार निर्यातकों को सहायता उपलब्ध करा रहे हैं।

पिछले दो वर्षों के दौरान, कृषि निर्यातों को बढ़ावा देने के लिए एपीडा की गई कुछ पहलें निम्नलिखित हैं:

राज्यों के सहयोग से कृषि निर्यात नीति कार्यान्वयन 

  • 28 राज्यों तथा 4 केंद्र शासित प्रदेशों ने नोडल एजेंसी की नियुक्ति की है तथा 26 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में नोडल अधिकारियों और राज्य स्तर निगरानी समितियों का गठन किया गया है।
  • 22 राज्यों अर्थात महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, केरल, नागालैंड, तमिलनाडु, असम, पंजाब, कर्नाटक, गुजरात, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, मणिपुर, सिक्किम, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, मिजोरम, मेघालय, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश तथा गोवा एवं 2 केंद्र शासित प्रदेशों ( लद्वाख एवं अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह ) ने राज्य विशिष्ट कृषि निर्यात कार्य योजना को अंतिम रूप दे दिया है। 

क्लस्टर विकास कार्यकलाप

  • वर्चुअल तरीके के माध्यम से क्लस्टर विकास के दूसरे दौर में 32 बैठकों का आयोजन किया जा चुका है। जिन प्रमुख युक्तियों की आवश्यकता है, उनकी पहचान की जा चुकी है और विद्यमान अवसंरचना का मानचित्रण कर दिया है।
  • सभी राज्यों में कई क्लस्टर जिलां में 38 क्लस्टर स्तर समितियों को अधिसूचित किया जा चुका है।
  • अनंतपुर ( केला ), थेनी ( केला ), नागपुर ( संतरा ), नासिक ( अंगूर ), चिकाबल्लापुरा ( गुलाब प्याज) के क्लस्टरों से बागवानी ऊपज का निर्यात किया गया है।
  • क्लस्टर विकास के लिए संबंधित मंत्रालयों के साथ तालमेल - कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ( सीडीपी -एनएचबी), खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ( पीएमएफएमई) तथा डीजीएफटी के चिन्हित क्लस्टरों के साथ तालमेल बनाने के प्रयास किए गए हैं।

निर्यात संवर्धन फोरमों का सृजन ( ईपीएफ )

  • संभावित उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए तथा आपूर्ति श्रृंखला की बाधाओं को दूर करने के लिए, एपीडा ने निर्यात संवर्धन फोरमों ( ईपीएफ ) का गठन एपीडा के चेयरमैन की अध्यक्षता में की जिसमें वाणिज्य विभाग, कृषि विभाग, राज्य सरकारों, राष्ट्रीय रेफरल प्रयोगशालाओं तथा अंगूर, प्याज, आम, केला, चावल, डेयरी उत्पादों, अनार, फूलों की खेती तथा पोषक अनाजों में से प्रत्येक के शीर्ष 10 अग्रणी निर्यातकों के प्रतिनिधि थे।

जैविक उत्पादन के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत प्रत्यायन/अनुपालन/प्रवर्तन

  • यूरोपीय संघ में प्रमाणन के लिए एक प्रमाणपत्र निकाय को विदेशी मान्यता प्रदान की गई है।
  • यूरोपीय संघ में एनपीओपी के अनुसार प्रमाणन के लिए एक प्रमाणन निकाय का प्रत्यायन
  • ताईवान के साथ परस्पर मान्यता संपन्न हो गई है। एनपीओपी के तहत यह पहली एमआरएस रही है।
  • मान्यता प्राप्त प्रमाणन निकायों की संख्या बढ़ कर 32 हो गई है।
  • अप्रैल-फरवरी 2022 के दौरान जैविक उत्पादों का निर्यात 700 मिलियन डॉलर रहा है। भारत मुख्य रूप से अमेरिका, ईयू, कनाडा, स्विट्जरलैंड तथा ग्रेट ब्रिटेन को निर्यात करता है।

जीआई उत्पादों का संवर्धन

  • जीआई उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए, जैसाकि प्रधानमंत्री द्वारा जोर दिया गया है, यूएई तथा अमेरिका के दूतावासों के साथ दो वी-बीएसएम का आयोजन किया गया है।
  • एपीडा के अधिकारियों ने जीआई पंजीकृत उत्पादों जैसेकि आंध्र प्रदेश में बंगान्पल्ली आम, पश्चिम बंगाल में गोविंदभोग चावल, मणिपुर में काला चावल, असम अदरक आदि पर विचार विमर्श करने तथा संवर्धन के लिए कई जिला स्तरीय बैठकों में भाग लिया है।
  • एपीडा पोर्टल में जीआई उत्पादों के लिए एक विशिष्ट नया खंड बनाया गया है तथा 112 जीआई पंजीकृत कृषि उत्पादों की पहचान की गई है।
  • जीआई उत्पादों के लिए पता लगाने की प्रणाली के विकास की शुरुआत की गई है।

 

समझौता ज्ञापन ( एमओयू)

  • एपीडा तथा आईसीएआर -सेंट्रल साइट्रस रिसर्च इंस्टीच्यूट ( आईसीएआर-सीसीआरआई ), नागपुर, महाराष्ट्र द्वारा एक एमओयू पर हस्ताक्षर किया गया है।
  • एपीडा ने किसानों की आय तथा मध्य प्रदेश से निर्यात को बढ़ावा देने के लिए 17 दिसंबर, 2021 को जबलपुर के जवाहर लाल नेहरु कृषि विश्वविद्यालय के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किया।
  • क्षेत्र से निर्यात बढ़ाने के लिए सहयोग के परस्पर क्षेत्रों पर श्रीनगर में 5 अक्तूबर, 2021 को शेर कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय तथ एपीडा के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।

कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात में बढोतरी बहुत हद तक एपीडा द्वारा की गई विभिन्न पहलों  के कारण भी हुई है जैसेकि विभिन्न देशों में बी2बी प्रदर्शनियों का आयोजन, भारतीय दूतावासों की सक्रिय भागीदारी द्वारा उत्पाद विशिष्ट तथा सामान्य विपणन अभियानों के माध्यम से नए संभावित बाजारों की खोज करना आदि।

एपीडा निर्यात परीक्षण तथा अवशिष्ट निगरानी योजनाओं के लिए मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं के उन्नयन तथा सुदृढ़ीकरण में भी सहायता करता है। एपीडा कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए बुनियादी ढांचा विकास, गुणवत्ता सुधार तथा बाजार विकास की योजनाओं को वित्तीय सहायता स्कीमों के तहत मदद भी प्रदान करता है।

एपीडा अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलो में निर्यातकों की भागीदारी का आयोजन करता है जो निर्यातकों को वैश्विक बाजारों में अपने खाद्य उत्पादों के विपणन के लिए एक मंच प्रदान करता है। एपीडा कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए आहार, र्गेनिक वल्र्ड कांग्रेस, बायोफैच इंडिया आदि जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों का भी आयोजन करता है।

निर्यात किए जाने वाले उत्पादों का निर्बाध गुणवत्ता प्रमाणन सुनिश्चित करने के लिए, एपीडा ने निर्यातकों को उत्पादों की एक विस्तृत श्रंखला के लिए परीक्षण की सेवाएं प्रदान करने के लिए भारत भर में 220 प्रयोगशालाओं को मान्यता दी है। 

 

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