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नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के बीच 40 मीटर बॉक्स गर्डर ढाल रहा है

लगभग 970 मीट्रिक टन वजन वाले, ये गर्डर भारत में मजबूती से तैयार किये गए सबसे भारी कंक्रीट बॉक्स गर्डर होंगे

शुरूआत के लिए कास्टिंग यार्ड और भारी मशीनरी की योजना इस तरह बनाई जा रही है ताकि एक महीने में लगभग 300 बॉक्स गर्डर की अधिकतम आवश्यकता को पूरा किया जा सके

Posted On: 29 OCT 2021 6:30PM by PIB Delhi

मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर (एमएएचएसआर) के लिए पुल के निर्माण में तेजी लाने के लिए एनएचएसआरसीएल ने 28 अक्‍तूबर 2021 को गुजरात के आणंद जिले में एक कास्टिंग यार्ड में 40 मीटर चौड़े मजबूती से तैयार किए जाने वाले पहले सबसे भारी कंक्रीट (पीएससी) बॉक्स गर्डर की कास्टिंग शुरू की।

चालीस मीटर चौड़ाई वाले पीएससी बॉक्‍स गर्डर का वजन लगभग 970 मीट्रिक टन है, ये गर्डर भारत के निर्माण उद्योग में मजबूती से तैयार किये गए सबसे भारी कंक्रीट बॉक्स गर्डर होंगे। 40 मीटर स्‍पैन गर्डर को बिना किसी जोड़ के 390 घन मीटर कंक्रीट और 42 मीट्रिक टन स्‍टील को मिलाकर एक टुकड़े में तैयार किया जा रहा है। 

मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना 508 किमी लंबी है और 508 किमी में से 352 किमी गुजरात (348 किमी) और दादरा और नगर हवेली (4 किमी) में स्थित है, और शेष 156 किमी महाराष्ट्र राज्य में स्थित है। 352 किलोमीटर में से, 325 किलोमीटर लंबाई पर कार्य करने वाली एजेंसी मैसर्स एलएंडटी है।

पुल के निर्माण में तेजी लाने के लिए, आधारभूत संरचना और उसके ऊपर का निर्माण कार्य साथ-साथ किया जा रहा है। हांलाकि आधारभूत संरचना यानी पुल का आधार (पाइल), पुल के आसपास बीम कास्‍ट को जोड़ने वाला ठोस कंक्रीट (पाइल कैप), खंभे (पियर) और पुल के ऊपरी हिस्‍से (पियर कैप) का काम प्रगति पर है, ऊपर के निर्माण (सुपरस्ट्रक्चर) के लिए, चौड़े गर्डर्स और सेगमेंटल गर्डर्स को ढालने के लिए एलाइनमेंट के साथ कास्टिंग यार्ड विकसित किए गए हैं ताकि पुल के ऊपरी हिस्‍से पर भारी मशीनरी का उपयोग करके इसकी शुरूआत की जा सके।

गर्डरों की ढलाई के लिए एलाइनमेंट के साथ-साथ तेईस कास्टिंग यार्ड विकसित किए जा रहे हैं। प्रत्येक कास्टिंग यार्ड आवश्यकता के अनुसार 16-93 एकड़ के क्षेत्र में फैला हुआ है और एलाइनमेंट के निकट स्थित है। गुणवत्ता के साथ गर्डरों की शीघ्र ढलाई के लिए प्रत्येक कास्टिंग यार्ड में रेबार केज बनाने के लिए सांचे, हाइड्रोलिक रूप से संचालित तैयार मोल्ड के साथ कास्टिंग बेड, कंक्रीट मिलाने वाले संयंत्र, एग्रीगेट स्टैकिंग क्षेत्र, सीमेंट साइलो और श्रमिकों के रहने के स्‍थान जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं।

अधिकांश गर्डर पूरे 30, 35 और 40 मीटर के होंगे, हालांकि, जगह की कमी वाले स्थानों के लिए, छोटे प्रीकास्ट सेगमेंट के सेगमेंटल लॉन्चिंग का उपयोग किया जाएगा। सेगमेंटल गर्डर की तुलना में फुल स्पैन गर्डर को प्राथमिकता दी जाती है क्योंकि उनके शुरूआत की प्रगति सात गुना तेज है।

इन प्रीकास्ट गर्डरों का प्रारंभ स्ट्रैडल कैरियर, ब्रिज गैन्ट्री, ट्रांसपोर्टर और लॉन्चिंग गैन्ट्री जैसी भारी मशीनरी का उपयोग करके किया जाएगा। प्रारंभ के लिए गर्डरों की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए, इन कास्टिंग यार्डों में पहले से ही गर्डरों को डाला जाएगा और व्यवस्थित तरीके से ढेर लगाया जाएगा। स्ट्रैडल कैरियर ढेर लगे यार्ड से बॉक्स गर्डर को उठाएगा और ब्रिज गैन्ट्री को फीड करेगा, जो बदले में बॉक्स गर्डर को उठाएगा और पियर कैप पर रखेगा। ब्रिज गैन्ट्री पहले 3-4 बॉक्स गर्डर को लॉन्च करेगी, जिस पर गर्डर ट्रांसपोर्टर रखा जाएगा और आगे ट्रांसपोर्टर और लॉन्चिंग गैन्ट्री का उपयोग करके क्रमिक तरीके से गर्डर्स को ढालना जारी रहेगा।

शुरूआत के लिए कास्टिंग यार्ड और भारी मशीनरी की योजना इस तरह बनाई जा रही है ताकि एक महीने में लगभग 300 बॉक्स गर्डर की अधिकतम आवश्यकता को पूरा किया जा सके, जो एक महीने में लगभग 12 किलोमीटर सुपरस्ट्रक्चर कास्टिंग और भवन निर्माण के बराबर है।

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